# पर्यावरण अनुकूल कृषि की मिसाल: देवघर के वकील यादव ने तैयार किया जैविक खाद और कीटनाशक का सफल उपक्रम

> झारखंड के देवघर जिले के पदनबेडा गांव निवासी वकील यादव ने रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का उत्पादन शुरू किया है। कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने एक बीआरसी सेंटर स्थापित किया है, जहां जीवामृत, अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/paryavarana-anukula-krishi-ki-misala-deoghar-ke-vakeel-yadav-ne-taiyara-kiya-jaivika-khada-aura-kitanashaka-ka-saphala-upakrama-30118 · **Language:** Hindi
**Tags:** जैविक खेती, देवघर, वकील यादव, जीवामृत, प्राकृतिक कीटनाशक, कृषि विज्ञान केंद्र, झारखंड कृषि

रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उद्देश्य से झारखंड स्थित देवघर जिले के पदनबेडा गांव निवासी वकील यादव ने एक नवीन पहल की है। लंबे समय तक रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से कृषि योग्य भूमि की सेहत पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए उन्होंने प्राकृतिक विकल्पों को अपनाने का निर्णय लिया। वकील यादव ने स्वयं जैविक उर्वरक और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने का एक बीआरसी सेंटर शुरू किया है, जिसके माध्यम से वे न केवल अपने खेतों में इनका उपयोग कर रहे हैं बल्कि अन्य कृषकों को भी इस पद्धति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

## सरकारी प्रोत्साहन और कृषि विज्ञान केंद्र का सहयोग
केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जैविक तथा प्राकृतिक खेती को दिए जा रहे प्रोत्साहन से प्रेरित होकर वकील यादव ने इस दिशा में व्यावसायिक कदम बढ़ाया। उन्होंने देवघर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित जैविक कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जैविक खाद बनाने के वैज्ञानिक तरीकों, घटकों के सही अनुपात और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने की विविध तकनीकों की विस्तृत जानकारी मिली। प्रशिक्षण पूर्ण करने के उपरांत उन्होंने एक बीआरसी केंद्र की स्थापना की, जहां वे स्थानीय स्तर पर सुलभ संसाधनों की मदद से जैविक उत्पाद तैयार कर रहे हैं।

## जीवामृत: मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक टॉनिक
जैविक खेती की प्रक्रिया में मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए वकील यादव जीवामृत का निर्माण करते हैं। उनके अनुसार जीवामृत मिट्टी के लिए एक प्रभावी टॉनिक की भांति कार्य करता है। इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से देशी गाय का गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ तथा बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की प्राकृतिक रूप से उपजाऊ मिट्टी का मिश्रण उपयोग में लाया जाता है।

इन सभी सामग्रियों को निश्चित मात्रा में मिलाकर एक बर्तन में रखा जाता है। लगभग तीन दिनों की समयावधि में यह जैविक घोल पूरी तरह तैयार हो जाता है। जब इस मिश्रण को खेतों में डाला जाता है, तो यह मिट्टी में मौजूद मित्र सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों और उनकी संख्या में तेजी से वृद्धि करता है। इसके नियमित प्रयोग से भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पुनः जीवित होती है और फसलों को आवश्यक पोषक तत्व सहजता से प्राप्त होते हैं।

## अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र: कीट नियंत्रण के लिए अचूक घोल
फसलों को विभिन्न हानिकारक कीटों और बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए वकील यादव अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र नामक प्राकृतिक कीटनाशक घोल तैयार करते हैं। इन घोलों का निर्माण पूरी तरह से वनस्पतियों और गोमूत्र के संयोजन से किया जाता है।

- **अग्न्यस्त्र का निर्माण:** अग्न्यस्त्र तैयार करने के लिए गोमूत्र में नीम की हरी पत्तियां, कड़वी व तीखी तंबाकू, तीखी हरी मिर्च और कुचला हुआ लहसुन मिलाकर संसाधित किया जाता है। यह घोल फसलों पर कीटों के आक्रमण को रोकने में अत्यंत प्रभावशाली साबित होता है।
- **ब्रह्मास्त्र का निर्माण:** ब्रह्मास्त्र तैयार करने के लिए गोमूत्र के साथ नीम, करंज, सीताफल, अरंडी और धतूरे जैसी कड़वी तथा औषधीय पत्तियों का उपयोग किया जाता है। इन पत्तियों को गोमूत्र में मिलाकर शक्तिशाली कीटनाशक बनाया जाता है।

हालांकि वकील यादव यह स्पष्ट करते हैं कि ऐसे प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करते समय सही मात्रा, सुरक्षा मानकों और कृषि विशेषज्ञों की सलाह का अनुपालन करना अनिवार्य है, ताकि फसल को सही सुरक्षा मिल सके।

## किसानों में जागरूकता फैलाना और व्यावहारिक चुनौतियां
प्राकृतिक खेती की दिशा में कार्य करते हुए वकील यादव को कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। वर्षों से रासायनिक खाद और त्वरित कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे किसानों को जैविक विकल्पों के लिए सहमत करना एक कठिन कार्य है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई कृषकों के बीच यह भ्रांति फैली हुई है कि रासायनिक उर्वरक छोड़ने से फसल की पैदावार में गिरावट आएगी।

वकील यादव इस भ्रांति को दूर करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। वे किसानों को समझाते हैं कि जैविक तरीकों के निरंतर प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है, जिससे दीर्घावधि में स्थायी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है। कम लागत में तैयार होने वाले इन प्राकृतिक विकल्पों से खेती का लागत खर्च घटता है। उनका प्राथमिक ध्येय केवल अपना लाभ कमाना नहीं, बल्कि समूचे क्षेत्र के किसानों को कम खर्च वाली और टिकाऊ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उनकी इस अभिनव पहल की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है।

## इसका आप पर असर
देवघर में जैविक खाद और कीटनाशक के स्थानीय उत्पादन से किसानों को कम लागत में टिकाऊ खेती करने का नया विकल्प मिला है।

- **भारत में:** रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होने से किसानों की लागत घटती है और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनी रहती है। इससे जहरीले रसायनों से मुक्त स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
- **देवघर में:** स्थानीय स्तर पर बीआरसी सेंटर उपलब्ध होने से देवघर और आसपास के पदनबेडा क्षेत्र के किसानों को कम कीमत पर जीवामृत और प्राकृतिक कीटनाशक आसानी से मिल सकेंगे।
- **लागत में कमी:** बाजार से महंगे रासायनिक उर्वरक और पेस्टिसाइड खरीदने के बजाय गोबर और गोमूत्र आधारित जैविक घोलों के प्रयोग से खेती का बजट काफी हद तक कम हो जाता है।
- **मृदा स्वास्थ्य में सुधार:** जीवामृत जैसे प्राकृतिक टॉनिक के नियमित छिड़काव से मिट्टी में लाभदायक जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है, जिससे भूमि बंजर होने से बचती है।

## ऐसा क्यों हुआ
रासायनिक खादों के लंबे इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता घटने और खेती की लागत बढ़ने के कारण प्राकृतिक विकल्पों की आवश्यकता महसूस हुई।

- **रासायनिक खादों का प्रभाव:** लगातार सिंथेटिक उर्वरकों के इस्तेमाल से फसल की तत्काल पैदावार तो बढ़ी, लेकिन मिट्टी के सूक्ष्मजीव नष्ट होने लगे और जमीन की स्वाभाविक उर्वरता कम हो गई।
- **सरकारी प्रोत्साहन:** केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जैविक और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे किसानों का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ।
- **केवीके से तकनीकी मार्गदर्शन:** देवघर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा दिए गए प्रशिक्षण ने वकील यादव को वैज्ञानिक तरीके से जैविक उत्पाद बनाने और बीआरसी सेंटर स्थापित करने की प्रेरणा दी।

## सवाल-जवाब

### 1. वकील यादव का जैविक खाद स्टार्टअप किस स्थान पर संचालित हो रहा है?
यह उपक्रम झारखंड के देवघर जिले के अंतर्गत पदनबेडा गांव में स्थापित बीआरसी सेंटर के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।

### 2. जीवामृत बनाने के लिए किन मुख्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
जीवामृत तैयार करने के लिए गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ और बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है।

### 3. जीवामृत कितने दिनों में बनकर तैयार हो जाता है?
सभी आवश्यक घटकों को उचित अनुपात में मिलाने के पश्चात जीवामृत लगभग तीन दिनों में तैयार हो जाता है।

### 4. फसलों को कीटों से बचाने के लिए वकील यादव कौन से घोल तैयार करते हैं?
वे प्राकृतिक कीट नियंत्रण के लिए अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र नामक वनस्पति आधारित जैविक घोल तैयार करते हैं।

### 5. अग्न्यस्त्र बनाने के लिए किन चीजों का उपयोग किया जाता है?
अग्न्यस्त्र बनाने के लिए गोमूत्र में नीम की पत्तियां, तीखी तंबाकू, हरी मिर्च और लहसुन मिलाकर तैयार किया जाता है।

### 6. ब्रह्मास्त्र में कौन सी वनस्पतियों की पत्तियां डाली जाती हैं?
ब्रह्मास्त्र में गोमूत्र के साथ नीम, करंज, सीताफल, अरंडी और धतूरे की कड़वी पत्तियों का मिश्रण तैयार किया जाता है।

### 7. वकील यादव ने जैविक खेती का प्रशिक्षण कहां से प्राप्त किया?
उन्होंने देवघर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से जैविक खेती और खाद निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

## प्रेरणा और सबक
वकील यादव की सफलता यह दर्शाती है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण का समावेश कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

- **समस्या को अवसर में बदलना:** रासायनिक खेती से मिट्टी को हो रहे नुकसान और बढ़ती लागत को देखकर वकील यादव ने स्वयं विकल्प तैयार करने की ठानी।
- **प्रशिक्षण और सीखने की इच्छा:** कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से जीवामृत, अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र बनाने की कला सीखी।
- **कम लागत में बड़ा समाधान:** स्थानीय स्तर पर सुलभ गोबर और गोमूत्र जैसे संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग कर उन्होंने कृषि लागत को न्यूनतम करने का मार्ग दिखाया।
- **सामाजिक जागरूकता:** केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहकर उन्होंने अन्य किसानों की भ्रांतियों को दूर करने और उन्हें जैविक खेती की ओर मोड़ने का बीड़ा उठाया।

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