# प्रतियोगी परीक्षाओं और जीवन में कामयाबी दिलाएंगी ये 4 आदतें, रांची के अनुभवी शिक्षाविद ने साझा किए सूत्र

> रांची के प्रतिष्ठित स्कूल में 33 साल तक अध्यापन कार्य करने वाले प्राचार्य बीएन झा ने बताया कि कैसे समय प्रबंधन, धैर्य, अनुशासन और स्मार्टफोन का संतुलित उपयोग छात्रों को सिविल सेवा और इंजीनियरिंग जैसी कठिन परीक्षाओं में शीर्ष पर पहुंचा सकता है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/pratiyogi-parikshaon-aura-jivana-men-kamayabi-dilaengi-ye-4-adaten-ranchi-ke-anubhavi-shikshavida-ne-sajha-kie-sutra-48049 · **Language:** Hindi
**Tags:** शिक्षा, आईएएस तैयारी, आईआईटी प्रवेश परीक्षा, बीएन झा, जेवीएम शामली, रांची, छात्र मार्गदर्शन, सफलता के सूत्र

कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल किताबी ज्ञान से नहीं, बल्कि दिनचर्या और मानसिक मजबूती से तय होती है। रांची के प्रतिष्ठित विद्यालय जेवीएम शामली के प्राचार्य बीएन झा ने अपने तीन दशकों से अधिक के शैक्षणिक सफर के आधार पर छात्रों के लिए चार बुनियादी सिद्धांत रेखांकित किए हैं। उनके मार्गदर्शन में अनगिनत विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई है, जबकि कई मेधावियों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की कठिन प्रवेश परीक्षा में भी सफलता का परचम लहराया है। उनका मानना है कि अगर विद्यार्थी इन चार आदतों को अपने जीवन का हिस्सा बना लें, तो किसी भी परीक्षा में जीत हासिल की जा सकती है।

## साधारण शिक्षक से प्राचार्य बनने का लंबा सफर
शिक्षा के क्षेत्र में बीएन झा का अनुभव पूरे 33 वर्षों का है। जब उन्होंने जेवीएम शामली में कदम रखा था, तब वे ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले एक सामान्य पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक थे। अपनी निष्ठा और निरंतर परिश्रम के बल पर वे पहले शिक्षक प्रभारी बने, उसके बाद उप प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाली और आज वे उसी संस्थान के प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं। अध्यापन के इस लंबे दौर में उन्होंने हजारों बच्चों की मानसिक बनावट, उनके संघर्ष और उनकी कमजोरियों को बेहद करीब से परखा है। इस जमीनी अनुभव से उन्होंने पाया कि परीक्षा के परिणामों में अंतर केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के दैनिक आचरण और आत्मसंयम से पैदा होता है।

## खेल और पढ़ाई के बीच तय करें स्पष्ट विभाजन
प्राचार्य के अनुसार विद्यार्थियों की सबसे बड़ी चूक समय का घालमेल करना है। उनका स्पष्ट संदेश है कि जब खेलने का समय हो, तो बिना किसी अपराधबोध के पूरे उत्साह से खेलें और उस दौरान किताबों की चिंता दिमाग में न लाएं। इसके विपरीत, जब अध्ययन की बारी आए तो खेलकूद और बाहरी आकर्षणों से पूरी तरह ध्यान हटा लें। यदि कोई छात्र खेलने के समय पढ़ाई का तनाव पालेगा या अध्ययन के समय खेल के बारे में सोचेगा, तो दोनों ही काम बिगड़ जाएंगे। इसी तरह सोने और जागने का भी एक निश्चित समय होना चाहिए। जीवन में हर गतिविधि का वक्त पहले से तय होना चाहिए और उस समय सारिणी का कठोरता से पालन करना हर छात्र के लिए अनिवार्य है।

## धैर्य का विकास और बड़ों के प्रति सम्मान
मौजूदा पीढ़ी के भीतर सहनशीलता और सब्र की भारी कमी देखी जा रही है। बीएन झा जोर देकर कहते हैं कि जीवन और प्रतियोगी परीक्षाओं में निरंतर उतार चढ़ाव आते हैं, ऐसे में छोटी छोटी बातों पर विचलित हो जाने से प्रगति रुक जाती है। जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से शांत और सहनशील होना बुनियादी शर्त है। इसके साथ ही उन्होंने बड़ों, गुरुओं और शिक्षकों के सम्मान को चरित्र का जरूरी हिस्सा बताया। आज के दौर में मामूली टोकाटाकी पर भी युवा धैर्य खो बैठते हैं और बर्दाश्त नहीं कर पाते। अपने शिक्षकों और मार्गदर्शकों का आदर करना सीखने से विनम्रता आती है, जो किसी भी बड़े लक्ष्य को भेदने के लिए जरूरी है।

## दैनिक दिनचर्या में अटूट अनुशासन का पालन
सफलता का कोई छोटा रास्ता नहीं होता और इसका आधार केवल अनुशासन है। स्कूल जाने का समय, स्वाध्याय का घंटा और दैनिक अभ्यास, हर कार्य का एक तय चक्र होना चाहिए। जब कोई छात्र अपनी दिनचर्या को बिना किसी बहानेबाजी के अनुशासन के दायरे में बांध लेता है, तो उसकी जिंदगी खुद ब खुद व्यवस्थित हो जाती है। यह नियमितता परीक्षा के तनाव को खत्म करती है और विद्यार्थी को निरंतर उत्पादक बनाए रखती है। अनुशासित विद्यार्थी कभी भी परीक्षा से ठीक पहले घबराहट का शिकार नहीं होते।

## स्मार्टफोन को बनाएं अध्ययन का औजार
आजकल लगभग हर विद्यार्थी के हाथ में मोबाइल फोन मौजूद रहता है, लेकिन इसका उपयोग किस तरह किया जा रहा है, यही सफलता और विफलता का अंतर तय करता है। बीएन झा की सलाह है कि फोन का उपयोग केवल ज्ञान अर्जित करने और खुद को बेहतर बनाने के लिए करें। यदि गूगल का सहारा लेना है, तो उसका इस्तेमाल उपयोगी किताबों को खोजने, अध्ययन सामग्री मंगाने और गंभीर ज्ञान प्राप्त करने में किया जाना चाहिए। फोन की लत से पूरी तरह बचना होगा। जो छात्र तकनीक पर नियंत्रण पा लेते हैं और उसे अपनी पढ़ाई का माध्यम बना लेते हैं, वे न केवल शैक्षणिक और सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में बाजी मारते हैं, बल्कि जीवन की हर कसौटी पर खरे उतरते हैं।

## इसका आप पर असर
यह मार्गदर्शन विशेष रूप से उन विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए व्यावहारिक बदलाव सुझाता है जो कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

- **समय प्रबंधन में स्पष्टता:** पढ़ाई और खेलकूद के लिए अलग-अलग समय तय करने से मानसिक तनाव घटता है और एकाग्रता बढ़ती है। विद्यार्थी रोजाना अपनी समय सारिणी बनाकर उसका पालन करें।
- **तकनीक के उपयोग में सतर्कता:** स्मार्टफोन को सिर्फ अध्ययन सामग्री खोजने और पुस्तकें मंगाने के लिए उपयोग में लाएं। अनावश्यक सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग और गेमिंग से तुरंत दूरी बनाएं।
- **धैर्य और सहनशीलता:** परीक्षा की असफलता या कठिनाई में घबराने के बजाय अपनी कमजोरियों पर काम करें। शिक्षकों और गुरुओं की सलाह को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना शुरू करें।
- **रांची और झारखंड में:** स्थानीय विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों के छात्र जेवीएम शामली की इस कार्यप्रणाली को अपनाकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अपनी सफलता दर सुधार सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह व्यावहारिक मार्गदर्शन आधुनिक समय में छात्रों की बदलती आदतों, घटते धैर्य और डिजिटल भटकाव को देखते हुए सामने आया है।

- **तकनीकी भटकाव की बढ़ती समस्या:** लगभग हर युवा के हाथ में स्मार्टफोन आने से पढ़ाई का समय घट रहा है और ध्यान भटकने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए संतुलित उपयोग का नियम समझाना जरूरी हो गया था।
- **सहनशीलता और एकाग्रता में गिरावट:** मौजूदा दौर में छात्र असफलताओं या छोटी डांट पर तेजी से परेशान हो जाते हैं, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित होती है। मानसिक दृढ़ता और गुरुओं के सम्मान को फिर से स्थापित करने के लिए यह सलाह दी गई।
- **दीर्घकालिक अध्यापन का निष्कर्ष:** तैंतीस वर्षों के दौरान सफल और असफल विद्यार्थियों की जीवनशैली का अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि नियमित दिनचर्या ही अंतिम परिणाम तय करती है।

## सवाल-जवाब

### 1. जेवीएम शामली के प्राचार्य बीएन झा का कुल शैक्षणिक अनुभव कितने वर्ष का है?
बीएन झा के पास शिक्षा के क्षेत्र में कुल 33 वर्षों का लंबा अनुभव है।

### 2. प्राचार्य ने जेवीएम शामली में अपने करियर की शुरुआत किस पद से की थी?
उन्होंने इस विद्यालय में प्लस टू स्तर पर एक पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक के रूप में अपने सफर की शुरुआत की थी।

### 3. प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए प्राचार्य ने किन चार बातों पर जोर दिया?
उन्होंने खेल और पढ़ाई के समय का सही बंटवारा, सब्र व सम्मान, दैनिक दिनचर्या में अनुशासन और स्मार्टफोन का सही उपयोग करने पर जोर दिया।

### 4. मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर छात्रों को क्या सलाह दी गई है?
छात्रों को सलाह दी गई है कि वे फोन की लत से बचें और इसका उपयोग केवल जरूरी ज्ञान प्राप्त करने तथा गूगल से पुस्तकें खोजने व पढ़ने के लिए करें।

## प्रेरणा और सबक
एक साधारण शिक्षक के पद से शुरुआत करके एक प्रतिष्ठित संस्थान के शीर्ष तक पहुंचने और हजारों छात्रों को दिशा देने की यात्रा हर शिक्षक और छात्र के लिए प्रेरणादायी है।

- **निष्ठा से मिलता है मुकाम:** बीएन झा ने प्लस टू शिक्षक के रूप में शुरुआत कर शिक्षक प्रभारी, उप प्राचार्य और फिर प्राचार्य पद तक का सफर अपनी निरंतर मेहनत से तय किया।
- **सरलता और समर्पण की ताकत:** तीन दशकों से अधिक समय तक लगातार नई पीढ़ी को गढ़ा जा सकता है यदि अपने काम के प्रति ईमानदारी बनी रहे।
- **सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं:** चाहे विद्यार्थी हो या कामकाजी पेशेवर, जीवन में स्थिरता और सम्मान केवल दैनिक अनुशासन और धैर्य से ही हासिल होता है।

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