# रांची के किसान दिलीप ने ढूंढा बीन्स बचाने का नया तरीका, बांस और रस्सी से सुरक्षित रहेगी फसल

> रांची के किसान दिलीप ने 10 डिसमिल जमीन पर बांस और रस्सी की बहुस्तरीय तकनीक से बीन्स की सफल खेती की है। लताओं को ऊपर उठाकर और जड़ों में जल निकासी का सही प्रबंध कर वे बेदाग और कीटमुक्त फसल प्राप्त कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-08-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/ranchi-ke-kisana-dilip-ne-dhundha-binsa-bachane-ka-naya-tarika-bansa-aura-rassi-se-surakshita-rahegi-phasala-23949 · **Language:** Hindi
**Tags:** कृषि तकनीक, बीन्स की खेती, रांची किसान, जैविक खाद, फसल सुरक्षा, झारखंड

झारखंड की राजधानी रांची में बीन्स की खेती कर रहे किसान दिलीप ने अपनी फसल को कीड़ों और दाग-धब्बों से बचाने के लिए एक प्रभावी कृषि तकनीक अपनाई है। करीब 10 डिसमिल जमीन पर खेती कर रहे दिलीप ने बांस, लकड़ी और रस्सियों के सहारे बीन्स की लताओं को ऊपर चढ़ाने का विशेष ढांचा तैयार किया है। इस विधि के कारण बीन्स के फल न तो आपस में टकराते हैं और न ही मिट्टी के संपर्क में आते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और चमक बनी रहती है।

## बांस और रस्सी के बहुस्तरीय ढांचे से लताओं का प्रबंधन
इस तकनीक के तहत खेत में सबसे पहले बांस और लकड़ी के मजबूत खंभे गाड़े जाते हैं। इसके बाद इन खंभों के बीच कई परतों यानी लेयर में रस्सियां बांधी जाती हैं। जैसे-जैसे बीन्स की लताएं बड़ी होती हैं, वे आसानी से इन रस्सियों का सहारा लेकर ऊपर की ओर फैलने लगती हैं। दिलीप बताते हैं कि इस प्रक्रिया में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि एक पौधे की लता दूसरे पौधे से न उलझे। लताओं के अलग-अलग रहने से फल जमीन को नहीं छूते, जिससे उन पर काले दाग नहीं बनते और कीड़ों के आक्रमण का खतरा भी काफी कम हो जाता है।

## संतुलित खाद और नियमित निगरानी से कीट नियंत्रण
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और पौधों को पोषण देने के लिए दिलीप अपने खेत में गोबर और कछुआ खाद की पर्याप्त मात्रा का प्रयोग करते हैं। इसके साथ ही वे संतुलित मात्रा में दाप (DAP) और थोड़ा यूरिया भी मिलाते हैं। केवल पोषक तत्व देना ही काफी नहीं होता, बल्कि फसल की सतत देखभाल भी जरूरी है। दिलीप हर 10 दिन में पूरे खेत का मुआयना करते हैं ताकि अगर किसी पौधे में कीड़े या बीमारी के लक्षण दिखें, तो तुरंत उपयुक्त पेस्टिसाइड का छिड़काव किया जा सके। उनका मानना है कि दिनभर खेत में रहकर लताओं की देखभाल करने से ही बेहतर पैदावार हासिल होती है।

## वर्षा ऋतु में जल निकासी और क्यारियों की विशेष बनावट
बरसात के मौसम में बीन्स की फसल को अलग से सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती, लेकिन जड़ों के पास पानी ठहरना पौधों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए दिलीप ने खेत में ढलानयुक्त और ऊंची क्यारियां बनाई हैं। क्यारियों को ऊपर उठाकर तैयार करने से बारिश का अतिरिक्त पानी बिना रुके आसानी से बाहर निकल जाता है। जड़ों में जलभराव न होने से पौधे सड़न से बच जाते हैं और 10 डिसमिल के इस छोटे से प्लॉट में भी बीन्स की शानदार और बेदाग फसल तैयार होती है।

## इसका आप पर असर
यह तकनीक कम लागत में बीन्स जैसी सब्जियों की गुणवत्ता बढ़ाकर छोटे और सीमांत किसानों की आय में सीधा सुधार ला सकती है।

- **भारत में:** बांस और रस्सी से लताओं को ऊपर चढ़ाने का ढांचा अपनाने पर बीन्स में दाग लगने और सड़ने का खतरा नगण्य हो जाता है। इससे बाजार में बेदाग सब्जियों का बेहतर भाव मिलता है और पेस्टिसाइड का खर्च भी घटता है।
- **रांची और झारखंड में:** मानसून के दौरान स्थानीय किसानों की क्यारियां जलमग्न होने से फसलें बर्बाद होती थीं। ऊंची क्यारियां बनाकर खेती करने की यह विधि स्थानीय कृषि में जलभराव से होने वाले नुकसान को शून्य कर सकती है।
- **लागत प्रबंधन:** रासायनिक उर्वरकों के बजाय गोबर और कछुआ खाद के साथ थोड़ा दाप और यूरिया मिलाने से मिट्टी की सेहत सुधरती है। इससे किसानों का खाद पर होने वाला अतिरिक्त खर्च बचता है और पैदावार बढ़ती है।
- **नियमित निगरानी:** हर 10 दिन में फसल की जांच करने से कीटों का हमला शुरुआती चरण में ही पकड़ में आ जाता है। समय पर दवा के छिड़काव से पूरी फसल नष्ट होने से बच जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. बीन्स की फसल को दाग और कीड़ों से कैसे बचाया जा सकता है?
बांस और लकड़ी के खंभों पर बहुस्तरीय रस्सियां बांधकर लताओं को ऊपर चढ़ाया जाता है ताकि फल जमीन और दूसरे पौधों को न छुएं।

### 2. किसान दिलीप अपने खेत में किस प्रकार की खाद का प्रयोग करते हैं?
वे गोबर और कछुआ खाद की प्रचुर मात्रा के साथ थोड़ा दाप (DAP) और यूरिया मिलाते हैं।

### 3. कीड़ों से बचाव के लिए खेत की जांच कितने दिनों में की जाती है?
हर 10 दिन में पौधों की गहन जांच की जाती है और कीड़े दिखने पर तुरंत पेस्टिसाइड का छिड़काव किया जाता है।

### 4. बरसात के मौसम में पौधों की जड़ों को सड़ने से कैसे बचाया जाता है?
खेत में क्यारियां ऊपर उठाकर बनाई जाती हैं ताकि बारिश का पानी आसानी से निकल जाए और जड़ों में न ठहरे।

### 5. दिलीप कितने रकबे पर बीन्स की खेती कर रहे हैं?
वे 10 डिसमिल जमीन पर बीन्स की खेती कर रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
रांची के किसान दिलीप का यह प्रयोग दर्शाता है कि पारंपरिक साधनों और सूझबूझ से खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।

- **स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग:** महंगे ढांचों के बजाय बांस, लकड़ी और साधारण रस्सी का इस्तेमाल कर कम लागत में फसल का संरक्षण किया जा सकता है।
- **फसल प्रबंधन पर ध्यान:** पौधों को आपस में उलझने से बचाकर और बेदाग फल प्राप्त करके बाजार में उत्पाद की बेहतर कीमत पाई जा सकती है।
- **नियमित निगरानी की आदत:** हर 10 दिन में खेत की जांच करने से बीमारियों को शुरुआती दौर में ही रोका जा सकता है।
- **प्राकृतिक और रासायनिक संतुलन:** गोबर व कछुआ खाद के साथ सीमित यूरिया और दाप मिलाकर मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है।

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