रांची के किसान मुकेश ने आंगन में उगाई ग्वार फली, स्वाद और कमाई दोनों में निकली अव्वल रांची के मनातू निवासी किसान मुकेश अपने आंगन में ग्वार फली उगाकर रोजाना अच्छी कमाई कर रहे हैं। बाजार में ₹80 से ₹100 किलो बिकने वाली यह सब्जी स्वाद में बेहद खास मानी जाती है। झारखंड में रांची के मनातू इलाके के किसान मुकेश ने अपने घर के छोटे से हिस्से का बेहतरीन इस्तेमाल करके एक खास मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने घर के आंगन में महज 2 डिसमिल जमीन पर ग्वार फली की खेती की है। यह मौसमी सब्जी न केवल स्वाद के मामले में लोगों को खूब पसंद आ रही है, बल्कि बाजार में इसकी मजबूत मांग की वजह से यह कमाई का भी एक बढ़िया जरिया बनकर उभरी है। सितंबर से ठंड तक तैयार होती है भरपूर फसल ग्वार फली की पैदावार मुख्य रूप से सितंबर के महीने से शुरू होकर कड़ाके की ठंड के पूरे मौसम तक लगातार चलती है। इस सब्जी के पौधे काफी बड़े और घने आकार में विकसित होते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही पौधे से 4 से 5 किलो तक फली बहुत तेजी से निकल आती है। पैदावार का चक्र इतना तेज होता है कि किसानों को कम समय में ही भरपूर उत्पादन हासिल हो जाता है, जिससे सीमित जगह में भी बहुत अच्छा परिणाम देखने को मिलता है। बाजार में ₹80 से ₹100 किलो का भाव और रोजाना मुनाफा बाजार में इस सब्जी की मांग ठंड के दिनों में जबरदस्त बनी रहती है। मंडियों और खुदरा दुकानों पर ग्वार फली की कीमत ₹80 से लेकर ₹100 प्रति किलो तक पहुंच जाती है। लोग पूरे साल इंतजार करते हैं कि ठंड का मौसम कब शुरू हो और बाजार में यह सब्जी पहुंचे। किसान मुकेश के अनुसार, ठंड के दिनों में वे इस छोटी सी क्यारी की उपज से हर दिन ₹500 तक की सीधी कमाई आसानी से कर लेते हैं। इसका अनोखा हल्का खट्टा-मीठा स्वाद ग्राहकों को बार-बार खरीदारी के लिए आकर्षित करता है। मशरूम जैसा स्वाद और पकाने का आसान तरीका ग्वार फली को घर पर सूखी भुजिया या रसेदार सब्जी दोनों रूपों में बेहद आसानी से पकाया जा सकता है। आलू के साथ मिलाकर तैयार करने पर इसका स्वाद बिल्कुल मशरूम जैसा लगता है। जब भी घर पर कोई मेहमान आता है, तो मुकेश इसे खास तौर पर बनाकर परोसते हैं, जिसे खाकर अक्सर मेहमान इसके स्वाद की तारीफ करते हैं और इसका नाम पूछते हैं। इसे बनाने की विधि भी बहुत सीधी और सरल है। उबले हुए आलू के साथ ग्वार को हल्का फ्राई किया जाता है। इसके बाद अदरक, लहसुन और टमाटर का पेस्ट डाला जाता है। फिर हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, नमक और मिक्स मसाला डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह भून लिया जाता है। मसाले पक जाने पर थोड़ा सा पानी मिलाकर 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस तरह तैयार सब्जी को गरमा-गरम रोटी या चावल के साथ परोसने पर लाजवाब स्वाद मिलता है। इसका आप पर असर घर के खाली पड़े छोटे से हिस्से में ग्वार फली जैसी मौसमी सब्जी उगाकर दैनिक खर्च आसानी से निकाला जा सकता है। • भारत में: कम जमीन वाले परिवार अपने घर के आसपास ग्वार फली लगाकर ताजी सब्जी और अतिरिक्त आय दोनों हासिल कर सकते हैं। यह फसल सितंबर से ठंड तक कम देखरेख में लगातार पैदावार देती है। • रांची में: स्थानीय मंडियों में ग्वार फली ₹80 से ₹100 प्रति किलो के ऊंचे दाम पर बिकती है। मनातू के किसान की तरह रांची के अन्य निवासी भी स्थानीय मांग का लाभ उठाकर रोजाना ₹500 तक कमा सकते हैं। • रसोई और खानपान: आलू और मसालों के साथ पकाने पर यह सब्जी बिल्कुल मशरूम जैसा स्वाद देती है। इसे केवल 10 से 15 मिनट के समय में चावल या रोटी के साथ आसानी से तैयार किया जा सकता है। • दुकानदारों और ग्राहकों के लिए: ठंड के मौसम में इसका हल्का खट्टा-मीठा स्वाद ग्राहकों को खूब पसंद आता है। बाजार में आते ही इसकी तेज खपत शुरू हो जाती है। ऐसा क्यों हुआ सीमित जमीन पर भी ग्वार फली की तेज पैदावार और बाजार में मिलने वाली ऊंची कीमत की वजह से यह खेती संभव और फायदेमंद साबित हुई। अनुकूल मौसमी परिस्थितियों और पौधे की उच्च उत्पादकता ने इस छोटे से आंगन को कमाई के केंद्र में बदल दिया। • पौधे की उच्च उत्पादकता: ग्वार फली का प्रत्येक बड़ा पौधा बहुत तेजी से 4 से 5 किलो तक उपज देने की क्षमता रखता है। इस तेज विकास चक्र के कारण मात्र 2 डिसमिल जमीन में भी लगातार पर्याप्त मात्रा में फलियां मिल जाती हैं। • अनुकूल मौसमी चक्र: सितंबर से ठंड के महीनों तक का मौसम इस फसल के पनपने के लिए पूरी तरह मुफीद साबित होता है। इस अवधि में बाजार में हरी मौसमी सब्जियों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। • मजबूत बाजार मूल्य: खुदरा बाजार में ₹80 से ₹100 प्रति किलो का भाव मिलने की वजह से किसान को दैनिक आधार पर ₹500 तक का सीधा लाभ मिल पाता है। सवाल-जवाब 1. ग्वार फली की फसल किस मौसम में तैयार होती है? यह सब्जी सितंबर के महीने से शुरू होकर पूरी ठंड के मौसम तक फलती और उगती है। 2. एक पौधे से औसतन कितनी ग्वार फली निकलती है? इसके एक ही बड़े पौधे से लगभग 4 से 5 किलो तक फली तेजी से निकल आती है। 3. बाजार में ग्वार फली का क्या भाव मिलता है? बाजार में इसकी कीमत ₹80 से लेकर ₹100 प्रति किलो तक रहती है। 4. मुकेश अपने आंगन में कितनी जमीन पर यह सब्जी उगा रहे हैं? वे रांची के मनातू में अपने आंगन के केवल 2 डिसमिल हिस्से में इसे उगा रहे हैं। 5. ठंड के मौसम में इस सब्जी से रोजाना कितनी कमाई हो जाती है? ठंड के दिनों में किसान मुकेश इससे हर दिन ₹500 तक की कमाई कर लेते हैं। 6. पकाने पर इस सब्जी का स्वाद कैसा लगता है? आलू के साथ पकाने पर इसका स्वाद मशरूम जैसा लगता है और इसमें हल्का खट्टा-मीठा फ्लेवर आता है। प्रेरणा और सबक यह कहानी दिखाती है कि बिना बड़े खेत के भी सूझबूझ और सही फसल के चयन से घर के आंगन से नियमित आजीविका कमाई जा सकती है। • उपलब्ध जगह का अधिकतम उपयोग: मुकेश ने बड़े खेत का इंतजार करने के बजाय अपने आंगन की महज 2 डिसमिल जमीन को उत्पादक बना दिया। संसाधनों की कमी का रोना रोने के बजाय जो जमीन उपलब्ध है, उसी से शुरुआत करना सफलता की पहली सीढ़ी है। • मांग वाली फसल का चयन: उन्होंने ऐसी सब्जी चुनी जिसकी बाजार में ₹80 से ₹100 किलो की ऊंची कीमत और मजबूत मांग रहती है। हमेशा वही चीज तैयार करनी चाहिए जिसकी मांग बाजार में पहले से मौजूद हो। • दैनिक कमाई का मॉडल: तेजी से फलने वाली किस्म का चयन करके उन्होंने रोजाना ₹500 तक की कमाई सुनिश्चित की। कृषि में सही चक्र चुनने से पूरे मौसम भर नकदी का प्रवाह बना रहता है। https://trendkia.com/jharkhand/ranchi-ke-kisana-mukesh-ne-angana-men-ugai-gvara-phali-svada-aura-kamai-donon-men-nikali-avvala-41243 TrendKia — Har trend, sabse pehle.