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  "type": "article",
  "title": "रांची के निजी अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर का इलाज कराने गए 18 वर्षीय युवक की मौत, परिवार को थमाया करीब 16 लाख रुपये का बिल",
  "summary": "रांची के एक निजी अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर का इलाज करा रहे 18 साल के राजू कुमार रंजन की मौत हो गई, परिवार का आरोप है कि इलाज के नाम पर करीब 16 से 18 लाख रुपये का बिल थमाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर चार सदस्यीय जांच टीम बना दी गई है।",
  "content": "झारखंड की राजधानी रांची से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राज्य के निजी अस्पतालों के इलाज और बिलिंग सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क हादसे में पैर टूटने के बाद इलाज के लिए भर्ती हुए 18 साल के राजू कुमार रंजन की एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई, और परिवार का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही की वजह से उनके बेटे की जान गई। मामले ने तूल तब पकड़ा जब पता चला कि अस्पताल ने परिवार को इलाज के एवज में करीब 16 लाख रुपये का बिल थमा दिया था।\n\nपैर के फ्रैक्चर से शुरू हुई कहानी, कैसे बिगड़ी बात\n18 साल का राजू कुमार रंजन सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था और 24 मई को उसे रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार के मुताबिक शुरुआत में उसे सिर्फ पैर में फ्रैक्चर था, लेकिन इलाज के दौरान घाव में संक्रमण फैलने लगा और उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। आखिरकार इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि सही समय पर उचित देखभाल नहीं मिलने की वजह से यह संक्रमण फैला और यही मौत की वजह बना। परिवार को यह बात सबसे ज्यादा कचोटती है कि जिस चोट का इलाज मुमकिन था, वह लापरवाही की वजह से जानलेवा साबित हुई।\n\n \n\n18 लाख का बिल, 10 लाख बीमा से, बाकी परिवार की जेब से\nपरिवार का कहना है कि इलाज पूरा होने के बाद अस्पताल ने करीब 18 लाख रुपये का बिल थमा दिया। इसमें से 10 लाख रुपये बीमा कंपनी की तरफ से सीधे अस्पताल को दिए गए, जबकि बाकी रकम परिजनों ने अपनी जेब से भरी। इसके बावजूद करीब ढाई लाख रुपये की राशि बकाया रह गई, जिसे लेकर अस्पताल प्रबंधन और परिवार के बीच विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद इतना बढ़ा कि अस्पताल परिसर में हंगामे की नौबत आ गई और मामला सार्वजनिक हो गया।\n\nमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर बनी चार सदस्यीय जांच टीम\nपूरे मामले पर सियासी हलचल के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जांच के आदेश दे दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उपायुक्त ने पूरे प्रकरण की जांच कराने का आदेश जारी किया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित की। सिविल सर्जन कार्यालय ने चिकित्सकीय पहलुओं की पड़ताल के लिए डॉ. एस. अली और डॉ. राजीव रंजन को इस टीम में शामिल किया, जबकि जिला प्रशासन की तरफ से दो अधिकारियों को भी टीम में रखा गया। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार के मुताबिक, टीम ने शनिवार से अस्पताल में इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार की पूरी प्रक्रिया, अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और परिजनों के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सीधे उपायुक्त को सौंपी जाएगी, और उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।\n\nसोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल\nयह मामला सोशल मीडिया पर भी छाया रहा। राजत पांडेय नाम के एक यूजर ने 4 जुलाई को अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि मरीज के पैर में फ्रैक्चर था और आरोप है कि अस्पताल वालों ने दो से तीन दिन तक उसकी ड्रेसिंग तक नहीं की, जिसके चलते संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया। उन्होंने इसे देश की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बताते हुए निजीकरण की नीति पर भी सवाल उठाए।\n\nअस्पताल का पलटवार, बताया चोटें कहीं ज्यादा गंभीर थीं\nहालांकि अस्पताल प्रबंधन ने परिवार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अस्पताल का कहना है कि मरीज सिर्फ पैर के फ्रैक्चर से पीड़ित नहीं था, बल्कि उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी, रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर था और दोनों फेफड़ों में भी गंभीर चोटें आई थीं। अस्पताल के मुताबिक, डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए चार दिन पहले ही पैर काटने यानी एम्प्यूटेशन की सलाह दी थी, लेकिन परिजनों ने इसकी इजाजत नहीं दी। अस्पताल प्रबंधन का यह भी दावा है कि सरकारी जांच टीम को इलाज से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज सौंप दिए गए हैं।\n\n \n\nबीजेपी विधायक सीता सोरेन ने अस्पताल को बताया लूट का अड्डा\nइस पूरे मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है। बीजेपी विधायक सीता सोरेन ने 4 जुलाई को सोशल मीडिया पर अस्पताल को लूट का अड्डा करार देते हुए आरोप लगाया कि एक मामूली फ्रैक्चर के इलाज के नाम पर परिवार से 16 लाख से लेकर 22 लाख रुपये तक की वसूली की गई, और आखिर में 18 साल के मासूम राजू की जान चली गई। उन्होंने इसे इलाज नहीं बल्कि सीधे तौर पर डकैती करार दिया और राज्य में निजी अस्पतालों की मनमानी पर तीखा हमला बोला। सीता सोरेन ने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।\n\nस्वास्थ्य मंत्री बोले, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे\nवहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों पक्षों, यानी परिवार और अस्पताल प्रबंधन के दावे एक दूसरे से बिल्कुल उलट हैं, ऐसे में इस पूरे मामले की असली तस्वीर जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ हो पाएगी।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: निजी अस्पतालों में इलाज के बीच में मोटी रकम के बिल थमाए जाने और बीमा दावों में कमी की ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए मरीजों के परिवारों को इलाज शुरू होने से पहले ही बिलिंग नियम, पैकेज दरें और बीमा कवरेज साफ तौर पर पूछ लेने चाहिए।\n• झारखंड और रांची में: जांच रिपोर्ट में अगर अस्पताल दोषी पाया गया तो राज्य में निजी अस्पतालों के लाइसेंस, इलाज दरों और बिलिंग पर सरकार की निगरानी बढ़ सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजू कुमार रंजन कौन था और उसकी मौत कैसे हुई?\nराजू 18 साल का था, सड़क हादसे में घायल हुआ था और रांची के एक निजी अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर के इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।\n\n2. अस्पताल ने परिवार को कितने रुपये का बिल दिया?\nपरिवार के मुताबिक इलाज के बाद अस्पताल ने करीब 18 लाख रुपये का बिल थमाया, जिसमें से 10 लाख रुपये बीमा कंपनी ने सीधे अस्पताल को दिए।\n\n3. इस मामले में जांच किसने और कैसे शुरू करवाई?\nमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर उपायुक्त के निर्देश से जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम बनाई, जिसमें डॉ. एस. अली और डॉ. राजीव रंजन सहित दो प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।\n\n4. अस्पताल प्रबंधन ने परिवार के आरोपों पर क्या सफाई दी?\nअस्पताल का दावा है कि मरीज को सिर, रीढ़ और दोनों फेफड़ों में भी गंभीर चोटें थीं और डॉक्टरों ने चार दिन पहले पैर काटने की सलाह दी थी, जिसे परिवार ने नहीं माना।\n\n5. मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या रही?\nबीजेपी विधायक सीता सोरेन ने अस्पताल को लूट का अड्डा बताते हुए लाइसेंस रद्द करने की मांग की, वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया।\n\n6. आगे इस मामले में क्या होगा?\nजांच टीम ने दस्तावेजों और मेडिकल रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है, रिपोर्ट सीधे उपायुक्त को सौंपी जाएगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-07-05",
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