# रांची के पांचवीं कक्षा के छात्र ने ग्रेविटी स्टोरेज से बनाई बिजली, तौलने वाले बाट का किया अनोखा इस्तेमाल

> रांची के जेवीएम श्यामली स्कूल के पांचवीं कक्षा के छात्र मोहम्मद अंशुमन ने ग्रेविटी स्टोरेज का एक अनूठा मॉडल तैयार किया है। उन्होंने पोटेंशियल एनर्जी और ग्रेविटेशनल फोर्स के सिद्धांत पर आधारित इस प्रोजेक्ट को यूट्यूब से प्रेरणा लेकर बनाया है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/ranchi-ke-panchvi-kaksha-ke-chhatra-ne-gravity-storage-se-banai-bijli-57346 · **Language:** Hindi
**Tags:** रांची, ग्रेविटी स्टोरेज, मोहम्मद अंशुमन, विज्ञान प्रोजेक्ट, ऊर्जा संरक्षण, जेवीएम श्यामली स्कूल

झारखंड की राजधानी रांची में एक पांचवीं कक्षा के छात्र ने अपनी वैज्ञानिक सोच से सबको हैरान कर दिया है। जेवीएम श्यामली स्कूल में पढ़ने वाले मोहम्मद अंशुमन ने ग्रेविटी स्टोरेज का एक अनूठा मॉडल तैयार किया है, जिसकी मदद से भविष्य की जरूरतों के लिए ऊर्जा को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह पूरा मॉडल पोटेंशियल एनर्जी और ग्रेविटेशनल फोर्स के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है और बिजली संकट से निपटने का एक नया रास्ता दिखाता है।

## काम करने का तरीका और तकनीकी प्रक्रिया
इस प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली को समझाते हुए मोहम्मद अंशुमन ने बताया कि उन्होंने इसके लिए एक मजबूत रस्सी और बाजार में मिलने वाले भारी तौलने वाले बाट का इस्तेमाल किया है। इस पूरी व्यवस्था में ऊपर की तरफ एक मोटर से जुड़ा हुआ व्हील लगाया गया है। जब रस्सी के सहारे उस भारी बाट को ऊपर की तरफ खींचा जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण उसमें स्थितिज ऊर्जा यानी पोटेंशियल एनर्जी जमा हो जाती है।

ऊर्जा संरक्षण के मूल नियम के मुताबिक ऊर्जा को न तो पैदा किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, बल्कि इसका रूप बदला जाता है। इसी सिद्धांत के तहत जब उस भारी बाट को दोबारा नीचे की ओर लाया जाता है, तो स्टोर की गई ऊर्जा का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाता है। बाट का चयन उन्होंने इसलिए किया क्योंकि किसी भारी चीज को ऊपर उठाने के लिए यह एक सुलभ और सटीक विकल्प साबित हुआ।

## ग्लोबल प्रोजेक्ट से मिली प्रेरणा और यूट्यूब की भूमिका
छात्र ने बताया कि इस अनोखी तकनीक का इस्तेमाल दुनिया के बड़े स्तर पर भी हो रहा है। स्विट्जरलैंड की एक कंपनी ने इस तरह की परियोजना की शुरुआत की थी और अब उसी कंपनी ने चीन में भी इसे लागू किया है, जहां इसी विधि से बड़े पैमाने पर ऊर्जा को स्टोर करके रखा जा रहा है। मोहम्मद अंशुमन को इस प्रोजेक्ट को बनाने का विचार यूट्यूब पर वीडियो देखने के दौरान आया था।

वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो देख रहे थे तभी उनकी नजर इस तकनीक पर पड़ी। भारत में बिजली की समस्या को गहराई से महसूस करते हुए उन्होंने चार-पांच साधारण चीजों की मदद से इस मॉडल को अपने घर पर ही तैयार कर लिया। उनकी यह छोटी सी कोशिश बड़े स्तर पर ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा संदेश देती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मॉडल ऊर्जा की कमी और बिजली संकट के स्थायी समाधान की दिशा में एक छोटी सी वैज्ञानिक पहल है, जिसे वैश्विक स्तर पर अपनाए जा रहे बड़े एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया है।

- **अंतरराष्ट्रीय तकनीक:** स्विट्जरलैंड और चीन की कंपनियों द्वारा ग्रेविटी स्टोरेज के व्यावसायिक इस्तेमाल से छात्र को यह अनूठा आइडिया मिला।
- **ऊर्जा संरक्षण नियम:** यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से फिजिक्स के पोटेंशियल एनर्जी और कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी के सिद्धांतों पर काम करता है।
- **सीमित संसाधन:** छात्र ने इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी का उपयोग करके केवल चार-पांच साधारण चीजों से इस मॉडल को संभव बनाया।

## सवाल-जवाब

### 1. मोहम्मद अंशुमन किस स्कूल में पढ़ते हैं?
मोहम्मद अंशुमन रांची के जेवीएम श्यामली स्कूल में पांचवीं कक्षा के छात्र हैं।

### 2. उन्होंने कौन सा प्रोजेक्ट बनाया है?
उन्होंने पोटेंशियल एनर्जी और ग्रेविटेशनल फोर्स पर आधारित ग्रेविटी स्टोरेज का एक अनोखा मॉडल बनाया है।

### 3. इस प्रोजेक्ट में भारी वजन के रूप में किसका इस्तेमाल किया गया है?
इस प्रोजेक्ट में भारी वजन के रूप में तौलने वाले बाट का इस्तेमाल किया गया है।

### 4. मोहम्मद अंशुमन को यह आइडिया कहां से आया था?
उन्हें यह आइडिया यूट्यूब पर वीडियो स्क्रॉल करते समय एक वीडियो देखकर आया था।

### 5. इस तकनीक का व्यावसायिक इस्तेमाल कहां हो रहा है?
इस तरह की ऊर्जा भंडारण परियोजना की शुरुआत स्विट्जरलैंड की कंपनी ने की थी और अब इसे चीन में भी शुरू किया गया है।

## प्रेरणा और सबक
मोहित अंशुमन की यह सफलता दिखाती है कि जिज्ञासा और सही दिशा में किया गया प्रयास किसी भी उम्र में बड़ी सीख दे सकता है।

- **जिज्ञासा और सीख:** रोजमर्रा के वीडियो देखकर भी नई तकनीक सीखने की जिज्ञासा रखनी चाहिए।
- **समस्या का समाधान:** अपने आसपास की बड़ी समस्याओं जैसे बिजली संकट के लिए छोटे स्तर पर ही सही, रचनात्मक उपाय सोचने चाहिए।
- **संसाधनों का सही इस्तेमाल:** बिना महंगे उपकरणों के केवल चार-पांच सामान्य चीजों की मदद से भी बेहतरीन मॉडल तैयार किया जा सकता है।

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