रांची में 1 कमरे से शुरू हुआ नमकीन कारोबार बना 5 हजार ग्राहकों का भरोसा, 70 साल बाद तीसरी पीढ़ी संभाल रही 'अम्बर' ब्रांड रांची में 70 साल पहले एक कमरे से शुरू हुआ नमकीन का काम आज आधुनिक फैक्ट्री और 5,000 से अधिक ग्राहकों के साथ तीसरी पीढ़ी द्वारा सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है। झारखंड की राजधानी रांची में लगभग 70 साल पहले एक कमरे से शुरू हुआ पारंपरिक स्नैक्स का काम आज एक बड़े व्यापार में तब्दील हो चुका है। इस नमकीन व्यवसाय की शुरुआत एक महिला ने की थी, जो उस दौर में रांची में स्नैक्स बनाने वाली अकेली महिला उद्यमी थीं। आज इस उद्यम की कमान उनकी तीसरी पीढ़ी के सदस्य अभिषेक संभाल रहे हैं। सात दशकों के सफर के बाद यह ब्रांड 5000 से अधिक नियमित ग्राहकों का भरोसेमंद जरिया बन चुका है, जिसमें आसपास के कई जिलों के खरीदार शामिल हैं। एक कमरे से आधुनिक फैक्ट्री तक का सफर शुरुआती दिनों में घर के एक छोटे कमरे में हाथों से नमकीन तैयार की जाती थी। वक्त के साथ मांग बढ़ी तो काम का विस्तार किया गया। अब इस कारोबार के पास अपनी एक छोटी फैक्ट्री मौजूद है, जहाँ आधुनिक मशीनों की मदद से उत्पादों का निर्माण और पैकिंग की जाती है। मशीनरी आने के बाद भी उत्पाद की गुणवत्ता और बनाने के तरीके में पारंपरिक स्पर्श को बनाए रखा गया है। बाहरी जिलों से जुड़े हजारों ग्राहक हर महीने 5000 रुपये तक के उत्पाद मंगवाते हैं, जिससे व्यापार का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पारंपरिक स्वाद और शुद्ध मसालों का मेल कंपनी अपने 'अम्बर' ब्रांड के तहत कई तरह के खाद्य उत्पाद बाजार में पेश करती है। इनमें पारंपरिक झालमुरी, मिक्सचर, अचार और विशेष मसाले शामिल हैं। अचार तैयार करने के लिए मसाले खास व्यापारियों से खरीदे जाते हैं और उन्हें घर पर ही कूटा जाता है। स्थानीय बाजार की कई दुकानों और गलियों में इन्हीं मसालों और अचारों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ब्रांड ने रागी नूडल, आटा नूडल और सेंधा नमक पापड़ जैसे उत्पाद भी तैयार किए हैं। झालमुरी के बारे में दावा किया जाता है कि इसका प्रामाणिक स्वाद कोलकाता की मशहूर झालमुरी को भी पीछे छोड़ देता है। ईमानदारी को बनाया मुख्य व्यापारिक रणनीति इस व्यवसाय की सफलता का मुख्य आधार शुद्धता और पारदर्शिता को माना गया है। अभिषेक का कहना है, "इमानदारी से बड़ा कोई बिजनेस स्ट्रेटजी नहीं होता है।" उनका मानना है कि भले ही इस तरीके से सफलता थोड़ी धीमी गति से मिलती है, लेकिन वह बेहद मजबूत और टिकाऊ होती है। एक बार स्वाद और शुद्धता का अनुभव करने के बाद ग्राहक किसी अन्य ब्रांड की तरफ रुख नहीं करते। यही वजह है कि 70 वर्षों से यह पारिवारिक उद्यम ग्राहकों के विश्वास पर खरा उतर रहा है। इसका आप पर असर रांची के इस पारंपरिक ब्रांड के विस्तार का ग्राहकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों पर व्यावहारिक प्रभाव पड़ता है। • भारत में: उपभोक्ताओं को मिलावट मुक्त और घर में पिसे पारंपरिक मसालों से बने शुद्ध नमकीन उत्पाद मिलते हैं। रागी और आटा नूडल्स जैसे विकल्प बच्चों और परिवारों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर आहार विकल्प प्रदान करते हैं। • रांची में: स्थानीय बाजार के व्यापारियों और ठेले वालों को प्रामाणिक स्वाद वाले अचार और पिसे हुए मसाले आसानी से सुलभ होते हैं। छोटे पैमाने पर विनिर्माण से जिले में रोजगार और स्थानीय व्यापार चक्र को बढ़ावा मिलता है। सवाल-जवाब 1. अम्बर ब्रांड की शुरुआत किसने और कहाँ से की थी? इस नमकीन ब्रांड की शुरुआत लगभग 70 साल पहले रांची में अभिषेक की नानी ने अपने घर के एक कमरे से की थी। 2. वर्तमान में इस व्यवसाय का संचालन कौन कर रहा है? आज इस पारिवारिक व्यवसाय को तीसरी पीढ़ी के सदस्य अभिषेक संभाल रहे हैं। 3. अम्बर ब्रांड के पोर्टफोलियो में कौन-कौन से मुख्य उत्पाद शामिल हैं? इसके मुख्य उत्पादों में झालमुरी, मिक्सचर, अचार, कूटकर बनाए गए मसाले, सेंधा नमक पापड़, रागी नूडल और आटा नूडल शामिल हैं। 4. कंपनी अपने मसालों और अचारों की शुद्धता कैसे सुनिश्चित करती है? मसालों के लिए कच्चे माल विशेष व्यापारियों से खरीदे जाते हैं और उन्हें घर पर ही हाथों से कूटकर तैयार किया जाता है। 5. अम्बर ब्रांड के पास कितने ग्राहक हैं? ब्रांड के पास रांची और आसपास के जिलों को मिलाकर 5000 से अधिक नियमित ग्राहक हैं। प्रेरणा और सबक सात दशकों से चल रहे इस सफल पारिवारिक व्यवसाय से हर उद्यमी कई महत्वपूर्ण सीख ले सकता है। • छोटे स्तर से शुरुआत: एक कमरे से काम शुरू करके भी लगन और निरंतरता के साथ बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। • मूल पहचान बनाए रखना: तकनीक और आधुनिक मशीनरी अपनाने के बाद भी अपने उत्पाद के पारंपरिक स्वाद और शुद्धता से समझौता नहीं करना चाहिए। • ईमानदारी ही असली रणनीति: अल्पकालिक मुनाफे के बजाय ईमानदारी और गुणवत्ता पर ध्यान देने से ग्राहक हमेशा साथ बने रहते हैं। • समय के साथ बदलाव: पुरानी परंपराओं को कायम रखते हुए स्वास्थ्यवर्धक रागी और आटा नूडल्स जैसे नए उत्पाद बाजार में लाना। https://trendkia.com/jharkhand/ranchi-men-1-kamare-se-shuru-hua-namakina-karobara-bana-5-hajara-grahakon-ka-bharosa-70-sala-bada-tisari-pirhi-snbhala-rahi-amber--23663 TrendKia — Har trend, sabse pehle.