# रांची में छाई फिल्म ‘द ववन’, दर्शकों ने कहा कि स्क्रीन पर छठ पूजा देखना एक अद्भुत अनुभव

> रांची में फिल्म ‘द ववन’ को देखने के बाद दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों का कहना है कि यह एक बेहतरीन पारिवारिक फिल्म है जिसमें संस्कृति और परंपराओं को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/ranchi-men-chhai-philma-the-vvan-darshakon-ne-kaha-ki-skrina-para-chhatha-puja-dekhana-eka-adbhuta-anubhava-38493 · **Language:** Hindi
**Tags:** द ववन, रांची, छठ पूजा, विशाल मिश्रा, बॉलीवुड, सांस्कृतिक फिल्म

रांची में पिछले कुछ दिनों से फिल्म ‘द ववन’ को लेकर जबरदस्त चर्चा बनी हुई थी और रिलीज के बाद सिनेमाघरों में भी इसका असर साफ देखने को मिल रहा है। इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच भारी उत्साह है क्योंकि इसमें पहली बार बड़े पर्दे पर छठ महापर्व की भव्यता और उसकी सांस्कृतिक गहराई को बहुत ही शानदार तरीके से उकेरा गया है। सिनेमाघरों से बाहर आ रहे दर्शक इस फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इसे एक अलग ही अनुभव बता रहे हैं।

## संस्कृति का अनूठा संगम और पारिवारिक सराहना
फिल्म देखकर बाहर आए संदीप ने बताया कि हर किसी को एक बार यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। यह सिनेमा हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति को बहुत ही करीने से बड़े पर्दे पर जीवंत करता है। फिल्म देखने का अनुभव बेहद सुखद रहा और इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें एक भी ऐसा दृश्य नहीं है जिसे परिवार के साथ बैठकर न देखा जा सके। लंबे अर्से बाद सिनेमा जगत में ऐसी मुकम्मल पारिवारिक फिल्म आई है जिसे घर के बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चे तक एक साथ बैठकर पूरी तल्लीनता के साथ आनंद ले सकते हैं।

## छठ गीतों और भावनाओं का अनूठा मेल
अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अदिति ने कहा कि फिल्म में कई ऐसे मार्मिक दृश्य आते हैं जिन्हें देखकर आंखें नम हो जाती हैं लेकिन दिल को एक अजीब सा सुकून मिलता है। खासकर जब सिनेमाघर में छठ का पारंपरिक गीत गूंजता है तो ऐसा महसूस होता है जैसे हम अपने घर और अपने त्योहार के बीच पहुंच गए हों। विशाल मिश्रा ने इस गाने को बेहद खूबसूरती से गाया है जो सीधे दिल को छू जाता है। दर्शकों की भावनाओं का इसमें पूरा ख्याल रखा गया है और इसके लिए वे इस फिल्म को पूरे 10 में से 10 अंक देंगी।

## पूरे परिवार के साथ सिनेमाघर पहुंचे लोग
सुनील ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे इस फिल्म को देखने के लिए काफी लंबे समय से उत्सुक थे और इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उनकी पत्नी ने मजाक में कहा था कि सिनेमाहॉल में पॉपकॉर्न की जगह इस बार ठेकुआ लेकर चलना चाहिए। वे अपने बच्चे, दादी, मामी और पूरे परिवार को साथ लेकर आए थे। उनके मुताबिक यह फिल्म किसी उत्सव से कम नहीं है और ऐसा बहुत कम होता है जब पूरा परिवार एकजुट होकर एक साथ कोई फिल्म देखने जाता है।

## भविष्य के लिए एक बेहतरीन सिनेमाई प्रयास
कृतिका का मानना है कि आज के समय में ऐसी ही सार्थक फिल्में बनने की जरूरत है जो हमारी संस्कृति को बड़े पर्दे पर और अधिक बारीकी से प्रस्तुत करें। देश की संस्कृति में ऐसी अनगिनत कहानियां मौजूद हैं जिन पर काम किए जाने की सख्त जरूरत है क्योंकि दर्शक इस तरह के आयोजनों और विषयवस्तु को खूब पसंद कर रहे हैं। फिल्म ने पूरी तरह से मनोरंजन किया और यह पूरी तरह से पैसा वसूल साबित हुई, जिसके चलते वे इसे 10 में से 10 नंबर देंगी।

## इसका आप पर असर
फिल्म देखने के बाद दर्शकों पर इसका गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक प्रभाव पड़ा है, जो पारंपरिक पारिवारिक आयोजनों को बढ़ावा दे रहा है।

- **रांची में:** स्थानीय सिनेमाघरों में दर्शकों की खासी भीड़ देखी जा रही है और लोग अपने पूरे परिवार के साथ इस फिल्म को देखने पहुंच रहे हैं।
- **भारत भर में:** क्षेत्रीय संस्कृति और त्योहारों पर आधारित ऐसी फिल्मों से पारिवारिक मनोरंजन के दायरे का विस्तार हो रहा है और पारंपरिक विषयों को मुख्यधारा में जगह मिल रही है।
- **पारिवारिक जुड़ाव:** सभी पीढ़ियों के एक साथ थिएटर आने से पारिवारिक मेलजोल और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति नई पीढ़ी में रुचि बढ़ रही है।
- **सांस्कृतिक पहचान:** बड़े पर्दे पर लोकपर्व के फिल्मांकन से क्षेत्रीय कला और संगीत को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिल रही है।
- **दर्शकों की प्रतिक्रिया:** फिल्म के गीतों और दृश्यों से लोगों में अपनी जड़ों के प्रति जुड़ाव और अपनेपन की भावनाएं मजबूत हो रही हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म ‘द ववन’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज इसलिए है क्योंकि इसमें पहली बार भारतीय संस्कृति और लोक आस्था के महापर्व छठ को बड़े पर्दे पर बहुत ही भव्य और मार्मिक ढंग से पेश किया गया है।

- **सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व:** मुख्यधारा के सिनेमा में छठ जैसे बड़े लोकपर्व का ऐसा विस्तृत और कलात्मक चित्रण पहले बहुत कम देखने को मिला है।
- **पारिवारिक विषयवस्तु:** फिल्म की कहानी और पटकथा को पूरी तरह से स्वच्छ और पारिवारिक रखा गया है जिससे सभी आयु वर्ग के दर्शक सहज रूप से जुड़ पा रहे हैं।
- **संगीत का प्रभाव:** विशाल मिश्रा द्वारा गाए गए गीतों ने त्योहार के पारंपरिक माहौल को जीवंत कर दिया है जिससे दर्शकों की भावनाएं सीधे तौर पर जुड़ती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म ‘द ववन’ में किस प्रमुख त्योहार को दिखाया गया है?
इस फिल्म में पहली बार बड़े पर्दे पर छठ महापर्व को बहुत खूबसूरती के साथ दर्शाया गया है।

### 2. रांची के दर्शकों ने फिल्म के बारे में क्या प्रतिक्रिया दी?
दर्शकों ने इसे एक शानदार और पूरी तरह से पारिवारिक फिल्म बताया है जिसे परिवार के साथ देखा जा सकता है।

### 3. फिल्म का कौन सा पहलू दर्शकों को सबसे ज्यादा भावनात्मक लगा?
सिनेमाघर में जब छठ का पारंपरिक गीत बजा तो दर्शकों की आंखें भर आईं और उन्हें अपने त्योहार की याद आ गई।

### 4. छठ का यह गीत किसने गाया है?
इस गीत को विशाल मिश्रा ने बहुत खूबसूरती के साथ गाया है।

### 5. दर्शकों ने फिल्म को कितने नंबर दिए हैं?
कई दर्शकों ने इस फिल्म को 10 में से 10 अंक दिए हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._