रांची में मानसून ने पार किया सामान्य बारिश का आंकड़ा, जलाशयों के भरने से गर्मी में नहीं होगी पानी की किल्लत झारखंड के कई हिस्सों में लगातार हो रही वर्षा के कारण रांची में मानसून का कोटा पार हो चुका है, जिससे आने वाली गर्मियों में जल संकट का खतरा टल गया है। झारखंड के विभिन्न हिस्सों में मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। राजधानी रांची समेत खूंटी और सरायकेला-खरसावां जैसे कई जिलों में शुक्रवार की सुबह आसमान में घने बादलों के साथ हुई और झमाझम बारिश दर्ज की गई। गुरुवार की देर रात से ही इन इलाकों में रुक-कुककर वर्षा हो रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के लोगों को अभी इस मानसूनी गतिविधि से पूरी तरह राहत नहीं मिलने वाली है। अगले छह दिनों तक झारखंड के विभिन्न जिलों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश का सिलसिला रुक-रुककर जारी रहने की संभावना है। इस लगातार हो रही वर्षा से जहां एक तरफ जनजीवन थोड़ा प्रभावित हुआ है, वहीं दूसरी तरफ जलाशयों के भरने से भविष्य के लिए बड़ी राहत मिली है। रांची में मानसूनी बारिश ने पार किया 1000 मिलीमीटर का आंकड़ा इस साल मानसून के दौरान राजधानी रांची में बारिश के आंकड़ों ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। चालू मानसून सीजन में रांची में कुल वर्षा का आंकड़ा 1000 मिलीमीटर की सीमा को पार कर गया है। मौसम केंद्र रांची द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से लेकर 11 सितंबर की अवधि में रांची में कुल 1043 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। सामान्य परिस्थितियों में इस अवधि के दौरान यहां 910.1 मिलीमीटर बारिश हुआ करती थी। इस लिहाज से देखा जाए तो रांची में इस बार सामान्य से लगभग 15% अधिक बारिश दर्ज की गई है। हाल ही में शुक्रवार की सुबह 8:30 बजे तक दर्ज आंकड़ों के अनुसार 6.2 मिलीमीटर पानी बरसा। झारखंड के कुल 24 जिलों में से रांची उन चुनिंदा जिलों में शामिल है जहां इस साल मानसून सामान्य से अधिक मेहरबान रहा है। सितंबर के शुरुआती दिनों में ही पूरा हुआ अधिकांश कोटा सितंबर के महीने में भी वर्षा का स्तर बहुत तेजी से ऊपर चढ़ा है। आमतौर पर पूरे सितंबर महीने के दौरान झारखंड में औसत सामान्य बारिश 212 मिलीमीटर होती है। लेकिन इस बार केवल शुरुआती 11 दिनों के भीतर ही यानी 11 सितंबर तक करीब 141 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि सितंबर महीने के लिए निर्धारित कुल कोटे का लगभग 66% हिस्सा शुरुआती 11 दिनों में ही पूरा हो चुका है। अब इस महीने के कोटे को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए केवल 71 मिलीमीटर अतिरिक्त वर्षा की आवश्यकता बची है। जिस तरह से 17 सितंबर तक राज्य में लगातार बारिश होने की संभावना जताई गई है, उसे देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कमी भी बहुत जल्द और आसानी से पूरी हो जाएगी। कम दबाव का क्षेत्र और मौसम में बदलाव का अनुमान मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम मध्य हिस्से और दक्षिण ओडिशा व उत्तर आंध्र प्रदेश के तटवर्ती इलाकों पर इस समय एक मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इस सिस्टम के साथ-साथ मानसून टर्फ का प्रभाव भी बना हुआ है, जिसके कारण झारखंड के वायुमंडल में प्रचुर मात्रा में नमी आ रही है। यही कारण है कि रांची और उसके आसपास के तमाम इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। हालांकि, यह साइक्लोनिक सर्कुलेशन अब धीरे-धीरे ओडिशा और आंध्र प्रदेश की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसकी वजह से 12 सितंबर की दोपहर के बाद से झारखंड में मौसम साफ होने की उम्मीद है। इसके बाद 13 सितंबर से राज्य में खिली हुई धूप देखने को मिल सकती है। अगले 24 घंटों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा, लेकिन इसके बाद दिन के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं 20 सितंबर तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और रुक-रुककर हल्की फुहारें पड़ने का दौर बना रहेगा। जलाशय हुए लबालब, गर्मियों में दूर होगी पानी की किल्लत राज्य में हो रही इस मूसलाधार बारिश का सबसे बड़ा सकारात्मक असर रांची और आसपास के प्रमुख जलाशयों पर देखने को मिल रहा है। लगातार पानी आने से स्थानीय डैम पूरी तरह भरने की कगार पर हैं। गोंदा डैम जिसकी कुल जल भंडारण क्षमता 28 फीट है, उसका जलस्तर वर्तमान में 27 फीट तक पहुंच चुका है। इसी प्रकार, गेतलसूद डैम का जलस्तर भी बढ़कर 32 फीट के आंकड़े को छू गया है। इन प्रमुख जलाशयों के इस तरह पानी से लबालब होने के कारण आगामी गर्मी के दिनों में रांची के निवासियों को पेयजल संकट या पानी की भारी किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। दशहरा और दुर्गापूजा पर मौसम का हाल और अलनीनो का प्रभाव मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल झारखंड से मानसून की आधिकारिक विदाई 10 से 12 अक्टूबर के आसपास होने की पूरी उम्मीद है। ऐसे में इस साल अक्टूबर महीने में पड़ने वाले दशहरा और दुर्गापूजा के त्योहारों के दौरान बारिश की वजह से उत्सवों में खलल पड़ने की आशंका बेहद कम है। दूसरी तरफ, वैश्विक मौसम प्रणाली अलनीनो का असर नवंबर और दिसंबर के महीनों तक बने रहने की संभावना है। अलनीनो के इस प्रभाव के कारण इस वर्ष ठंड के मौसम में सामान्य से कुछ कम ठंड पड़ने का अनुमान है। हालांकि, इसके बाद आने वाले समय में भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि अलनीनो के प्रभाव के चलते इस साल देश भर में सामान्य से करीब 15% से 20% तक कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि झारखंड की बात करें तो यहां मानसून की बारिश में करीब 3% की मामूली कमी देखने को मिली है। इसका आप पर असर झारखंड में हाल ही में हुई भारी बारिश और दीर्घकालिक मौसम के पूर्वानुमान का सीधा असर स्थानीय लोगों की जल सुरक्षा और आगामी त्योहारों की योजनाओं पर पड़ेगा। • देश भर में: अलनीनो के प्रभाव के कारण इस साल देश भर में सामान्य से कम ठंड पड़ने और आगामी गर्मी के मौसम में भीषण गर्मी होने की संभावना है। इसका मतलब है कि देश भर के परिवारों को आने वाले समय में बिजली के अधिक बिल और कृषि संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। • रांची और झारखंड में: स्थानीय जलाशयों का जलस्तर लगभग अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच चुका है, जिससे शहर की पेयजल आपूर्ति सुरक्षित हो गई है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि अगले साल भीषण गर्मी के दौरान स्थानीय नागरिकों को पानी की भारी किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। • रांची और झारखंड में: चूंकि झारखंड से 10 से 12 अक्टूबर के बीच मानसून विदा हो जाएगा, इसलिए दुर्गापूजा के दौरान बारिश का खलल पड़ने की आशंका बेहद कम है। लोग बिना किसी चिंता के अपने परिवार के साथ पूजा पंडालों में जाने और त्योहार मनाने की योजना का खाका खींच सकते हैं। • रांची और झारखंड में: आगामी 12 सितंबर के बाद तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है। इसके चलते लगातार बारिश के बाद अब लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा। ऐसा क्यों हुआ रांची और इसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का मुख्य कारण पूर्वी भारत के ऊपर सक्रिय चक्रवाती प्रणालियां और मौसमी हवाएं हैं। • बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र: बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम मध्य हिस्से और दक्षिण ओडिशा व उत्तर आंध्र प्रदेश के तट पर एक मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह मौसमी सिस्टम समुद्र से भारी मात्रा में नमी खींच रहा है, जिससे झारखंड के आसमान में घने बादल बन रहे हैं और लगातार बारिश हो रही है। • मानसून टर्फ का प्रभाव: वर्तमान में सक्रिय मानसून टर्फ इस क्षेत्र के काफी करीब से गुजर रहा है, जिससे हवा में नमी का स्तर बढ़ गया है। इस अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थिति के कारण लगातार नमी से भरी हवाएं झारखंड में आ रही हैं, जो लगातार हो रही बारिश का बड़ा कारण हैं। • अलनीनो का वैश्विक प्रभाव: अलनीनो की स्थिति के चलते इस साल भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून कमजोर रहा है, जिससे देश भर में बारिश की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, स्थानीय दबाव प्रणालियों ने झारखंड को इस प्रभाव से बचाए रखा, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर 15% से 20% की कमी के मुकाबले झारखंड में केवल 3% की मामूली कमी दर्ज की गई। सवाल-जवाब 1. 1 जून से 11 सितंबर तक रांची में कितनी बारिश दर्ज की गई है? रांची में इस अवधि के दौरान कुल 1043 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो कि इस अवधि की सामान्य औसत बारिश 910.1 मिलीमीटर से लगभग 15% अधिक है। 2. झारखंड से मानसून की विदाई कब तक होने की संभावना है? मौसम वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार, झारखंड से मानसून की आधिकारिक विदाई 10 से 12 अक्टूबर के आसपास होने की संभावना है। 3. रांची के गोंदा और गेतलसूद डैम का वर्तमान जलस्तर क्या है? गोंदा डैम का जलस्तर वर्तमान में 27 फीट (कुल क्षमता 28 फीट) और गेतलसूद डैम का जलस्तर 32 फीट तक पहुंच चुका है। 4. क्या इस साल झारखंड में दुर्गापूजा के दौरान बारिश की बाधा पड़ेगी? दुर्गापूजा और दशहरा के मुख्य उत्सवों से ठीक पहले मानसून के विदा होने की उम्मीद है, इसलिए त्योहारों के दौरान बारिश की बाधा पड़ने की आशंका बेहद कम है। 5. आगामी सर्दियों पर अलनीनो का क्या प्रभाव पड़ सकता है? अलनीनो का प्रभाव नवंबर और दिसंबर तक बने रहने के कारण इस बार सर्दियों के दौरान सामान्य से थोड़ी कम ठंड पड़ने की संभावना है। https://trendkia.com/jharkhand/ranchi-men-manasuna-ne-para-kiya-samanya-barisha-ka-ankara-jalashayon-ke-bharane-se-garmi-men-nahin-hogi-pani-ki-killata-31313 TrendKia — Har trend, sabse pehle.