सड़क दुर्घटना के बाद घायलों की तुरंत पहचान और मदद के लिए इमरजेंसी क्यूआर कोड की नई शुरुआत जमशेदपुर में सड़क हादसों के दौरान घायलों की शिनाख्त और परिजनों से त्वरित संपर्क के लिए वाहनों पर लगने वाले इमरजेंसी क्यूआर कोड की तकनीक पेश की गई है। सड़क दुर्घटनाओं के बाद राहत और बचाव के दौरान अक्सर सबसे जटिल चुनौती पीड़ित व्यक्ति की पहचान करने और उसके परिजनों तक सूचना पहुंचाने की आती है। कई मौकों पर घायल व्यक्ति बेसुध या अचेत अवस्था में होता है, जिससे घटनास्थल पर एकत्रित मददगारों के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि पीड़ित के पारिवारिक सदस्यों से किस प्रकार संपर्क साधा जाए। इसी जमीनी परेशानी का समाधान प्रस्तुत करने के उद्देश्य से ‘मदद साथी’ की ओर से इमरजेंसी क्यूआर कोड की व्यवस्था शुरू की गई है। वाहनों पर चस्पा होगा विशेष क्यूआर कोड इस नई प्रणाली के तहत तैयार किए गए इमरजेंसी क्यूआर कोड को दोपहिया, स्कूटी और चार पहिया वाहनों पर आसानी से लगाया जा सकता है। यात्रा के दौरान यदि कोई वाहन दुर्घटनाग्रस्त होता है और चालक अथवा सह-यात्री गंभीर रूप से जख्मी हो जाते हैं, तो मौके पर मौजूद कोई भी आम नागरिक अपने सामान्य स्मार्टफोन कैमरे से उस क्यूआर कोड को स्कैन कर सकता है। कोड स्कैन करते ही संबंधित घायल व्यक्ति से जुड़ी आवश्यक और आपातकालीन जानकारियां स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाती हैं, जिससे तत्काल राहत कार्य शुरू करने में मदद मिलती है। पहचान, ब्लड ग्रुप और परिजनों का नंबर होगा दर्ज ‘मदद साथी’ के निदेशक नितेश कुमार सिंह ने इस प्रणाली की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए बताया कि इस क्यूआर कोड में व्यक्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं पहले से दर्ज करके सुरक्षित रखी जा सकती हैं। इसमें वाहन चालक या मालिक का पूरा नाम, फोटो, परिजनों के संपर्क नंबर, स्थायी व वर्तमान पता और उसका ब्लड ग्रुप जैसी अत्यंत आवश्यक स्वास्थ्य जानकारियां शामिल की जा सकती हैं। किसी अप्रिय घटना की स्थिति में प्रत्यक्षदर्शी इन जानकारियों की मदद से बिना समय गंवाए परिवार के सदस्यों को कॉल कर सकते हैं और अस्पताल में भर्ती कराते समय सही ब्लड ग्रुप की सूचना देकर इलाज की प्रक्रिया को गति दे सकते हैं। नितेश कुमार सिंह ने आगे बताया कि अक्सर गंभीर सड़क हादसों के बाद पहचान स्थापित करने और परिजनों को खोजने में काफी बहुमूल्य समय बर्बाद हो जाता है, जिससे गोल्डन ऑवर में मिलने वाला उपचार प्रभावित होता है। ऐसी गंभीर परिस्थितियों में वाहनों पर चिपका यह छोटा सा क्यूआर कोड पीड़ित और उसके परिजनों के बीच संपर्क की एक मजबूत कड़ी साबित हो सकता है। उनके अनुसार, तकनीक का यह छोटा सा प्रयोग किसी भी संकटग्रस्त परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा बनकर सामने आ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और डिलीवरी कर्मचारियों के लिए भी उपयोगी इस तकनीकी व्यवस्था का दायरा सिर्फ वाहनों तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए भी उतना ही मुफीद बनाया गया है। इसे स्कूली बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिन-रात सड़कों पर काम करने वाले डिलीवरी कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी तैयार किया गया है। यदि कोई छोटा बच्चा या बुजुर्ग व्यक्ति भीड़भाड़ वाले इलाके अथवा रास्ते में भटक जाता है या किसी आकस्मिक परेशानी का शिकार होता है, तो कोई भी व्यक्ति उनके पास मौजूद क्यूआर को स्कैन कर उनकी पहचान और घर का पता तुरंत जान सकता है। इस पूरी परियोजना की प्राथमिक प्राथमिकता केवल पीड़ित की सामान्य पहचान उजागर करना भर नहीं है, बल्कि आपातकालीन घड़ी में सही व्यक्ति और सही विभाग तक त्वरित गति से सही सूचना पहुंचाना है। इसके लिए क्यूआर कोड के माध्यम से व्यक्तिगत आंकड़ों को पहले से व्यवस्थित और सुरक्षित रखने का ढांचा तैयार किया गया है। पंजीकरण और डेटा सुरक्षा का दिया गया लाइव डेमो इस इमरजेंसी क्यूआर कोड की कार्यप्रणाली और व्यावहारिक उपयोग को स्पष्ट करने के लिए एक सीधा लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया। इस प्रदर्शन में विस्तार से समझाया गया कि उपयोगकर्ता किस तरह इस क्यूआर कोड के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं, किसी आकस्मिक स्थिति में स्मार्टफोन से इसे कैसे स्कैन किया जाएगा और स्कैनिंग के उपरांत किस रूप में स्क्रीन पर जानकारी खुलेगी। इसके साथ ही, प्रणाली में दर्ज किए जाने वाले व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर भी आवश्यक तकनीकी स्पष्टीकरण दिए गए, ताकि आम लोग पूरी निश्चिंतता के साथ इसका उपयोग कर सकें। इसका आप पर असर सड़क दुर्घटना की स्थिति में यह तकनीक घायल व्यक्ति के परिजनों तक तुरंत खबर पहुंचाने और आपातकालीन उपचार शुरू कराने में मददगार बन सकती है। • भारत में: वाहन चालकों और उनके परिवारों के लिए यह आपातकालीन पहचान का एक आसान और डिजिटल विकल्प प्रस्तुत करता है। दुर्घटना के बाद अनजान जगहों पर भी लोगों की पहचान सुनिश्चित करने में आम नागरिक सीधे मददगार बन सकेंगे। • जमशेदपुर में: स्थानीय निवासियों और दैनिक वाहन चालकों को अपने वाहनों पर यह सुरक्षा कोड लगाने की सुविधा मिलेगी। शहर में बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के भटकने की स्थिति में भी स्थानीय लोग इस माध्यम से तुरंत उनके घर संपर्क कर सकेंगे। • स्वास्थ्य सहायता: दुर्घटनास्थल पर ही पीड़ित का ब्लड ग्रुप स्पष्ट होने से अस्पताल में त्वरित उपचार संभव हो सकेगा। इससे डॉक्टरों को बिना जांच में समय गंवाए रक्त चढ़ाने या प्राथमिक उपचार देने में सुगमता होगी। • डिलीवरी कर्मियों के लिए: लगातार सड़कों पर व्यस्त रहने वाले डिलीवरी कर्मियों के लिए यह एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगा। किसी दुर्घटना के समय उनके कार्यस्थल और परिजनों दोनों को अविलंब सूचना दी जा सकेगी। ऐसा क्यों हुआ सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों की पहचान न हो पाने और परिजनों को सूचना मिलने में देरी की वजह से होने वाले नुकसान को दूर करने के लिए इस व्यवस्था को पेश किया गया है। • पहचान की समस्या: हादसों के दौरान घायलों के अचेत होने पर राहगीरों के पास उनके घर संपर्क करने का कोई सीधा साधन नहीं रहता था। इसी संवादहीनता को दूर करने के लिए क्यूआर कोड पर आधारित संपर्क व्यवस्था तैयार की गई। • गोल्डन ऑवर का महत्व: दुर्घटना के तुरंत बाद के समय में सही उपचार और परिजनों की उपस्थिति बेहद अहम होती है। पारंपरिक तरीकों से पहचान करने में लगने वाले घंटों के समय को घटाकर सेकंडों में समेटने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया। • बहुआयामी उपयोग: बुजुर्गों की स्मृतिलोप की समस्या और छोटे बच्चों के भटक जाने की घटनाओं को देखते हुए इस व्यवस्था को केवल वाहनों तक सीमित न रखकर व्यक्तियों के लिए भी तैयार किया गया। सवाल-जवाब 1. इमरजेंसी क्यूआर कोड की शुरुआत किस संस्था ने की है? इस आपातकालीन तकनीक की शुरुआत ‘मदद साथी’ की ओर से की गई है। 2. इस क्यूआर कोड को किन-किन चीजों पर लगाया जा सकता है? इसे बाइक, स्कूटी, कार जैसे सभी वाहनों के साथ-साथ बुजुर्गों, स्कूली बच्चों और डिलीवरी कर्मियों के उपयोग के लिए लगाया जा सकता है। 3. क्यूआर कोड को स्कैन करने पर कौन-कौन सी जानकारियां मिलेंगी? स्कैन करने पर व्यक्ति का नाम, फोटो, परिजनों के मोबाइल नंबर, घर का पता और ब्लड ग्रुप जैसी जरूरी जानकारियां प्रदर्शित होंगी। 4. सड़क हादसे के वक्त यह तकनीक किस प्रकार मददगार साबित होगी? हादसे के बाद घायल के अचेत होने पर भी राहगीर मोबाइल से कोड स्कैन कर उसके परिवार को तुरंत सूचना दे सकेंगे। 5. क्या इस प्रणाली के पंजीकरण और उपयोग का कोई डेमो दिया गया? हां, कार्यक्रम के दौरान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, स्कैनिंग के तरीके और डेटा सुरक्षा को लेकर एक लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया। https://trendkia.com/jharkhand/saraka-durghatana-ke-bada-ghayalon-ki-turnta-pahachana-aura-madada-ke-lie-emergency-qr-code-ki-nai-shuruata-40893 TrendKia — Har trend, sabse pehle.