सर्पदंश के बाद सांप के दोबारा काटने की सच्चाई और ज़हर का शरीर पर असर सांप के काटने और उसके विषदंत टूटने के बाद दोबारा डसने की क्षमता को लेकर फैले भ्रम पर विशेषज्ञ ने स्थिति स्पष्ट की है। बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं और अलग-अलग विषैले सांपों के प्रभाव की पूरी जानकारी। बरसात के दिनों में ग्रामीण इलाकों से लेकर रिहायशी बस्तियों तक सर्पदंश के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी जाती है। जब लगातार बारिश के कारण सांपों के प्राकृतिक बिल और रहने के ठिकाने पानी से भर जाते हैं, तो वे अपनी सुरक्षा और सूखी जमीन की तलाश में रिहायशी घरों, खेतों तथा इंसानी बसावट वाले स्थानों का रुख करते हैं। इसी आवाजाही के दौरान अक्सर इंसानों और सांपों का आमना-सामना होता है, जिसके चलते अनजाने में सर्पदंश की घटनाएं घटती हैं। जागरूकता की कमी की वजह से कई बार लोग घबराकर सांप को मारने में समय गंवा देते हैं, जबकि ऐसी आपात स्थिति में सबसे प्राथमिक कदम पीड़ित व्यक्ति को बिना किसी देरी के नजदीकी अस्पताल पहुंचाना होना चाहिए। सांप के काटने और दोबारा डसने से जुड़े भ्रम की पड़ताल आम जनमानस में यह धारणा काफी प्रचलित है कि यदि कोई सांप किसी को एक बार डस लेता है, तो वह अगले कई महीनों तक किसी अन्य पर हमला करने या जहर छोड़ने में सक्षम नहीं रहता। पलामू जिले के विशेषज्ञ डॉ डी एस श्रीवास्तव के अनुसार, सांपों के विषदंत और विषग्रंथि की वास्तविक कार्यप्रणाली को न समझने के कारण इस तरह के भ्रम पनपते हैं। विषदंत सांप के मुख के भीतर स्थित विशिष्ट खोखले दांत होते हैं, जिनकी मदद से वह अपने शिकार या खतरे की स्थिति में जहर को शरीर के भीतर पहुंचाता है। यदि डसते समय या किसी बाहरी आघात से सांप के ये विषदंत टूट जाएं अथवा क्षतिग्रस्त हो जाएं, तब उसके लिए तुरंत दोबारा प्रभावी ढंग से डसना कठिन हो जाता है। ऐसी विशिष्ट परिस्थिति में विषदंत के नष्ट होने पर सांप को दोबारा काटने में सक्षम होने में छह महीने तक का समय लग सकता है। शिकार और जीवन चक्र में विषदंत की भूमिका सांपों के अस्तित्व के लिए उनके विषदंत अत्यंत महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं। ये दांत न केवल खतरे से बचाव और जहर छोड़ने का काम करते हैं, बल्कि शिकार को मजबूती से पकड़ने में भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सांप के शरीर में मौजूद विषग्रंथियां जहर बनाने और उसे सुरक्षित रखने का काम संभालती हैं। यदि किसी हादसे में सांप के विषदंत खराब या नष्ट हो जाते हैं, तो उसे शिकार पकड़ने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में वह सामान्य रूप से भोजन भी ग्रहण नहीं कर पाता। हालांकि दांतों के दोबारा विकसित होने की यह पूरी प्रक्रिया सांप की प्रजाति और उसकी शारीरिक बनावट पर निर्भर करती है। आमतौर पर टूटे हुए विषदंत को पूरी तरह से दोबारा बनने और सक्रिय होने में 3 से 6 महीने का वक्त लग जाता है। कोबरा, करैत और रसेल वाइपर के जहर का जैविक प्रभाव विभिन्न प्रजातियों के सांपों का जहर मानव शरीर पर बिल्कुल अलग-अलग तरीकों से असर डालता है। कोबरा और करैत जैसी अत्यधिक विषैली प्रजातियों का जहर मुख्य रूप से न्यूरोटॉक्सिक श्रेणी का होता है। यह जहर सीधे तौर पर शरीर के तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों को निष्क्रिय करने लगता है। जैसे-जैसे जहर फैलता है, सांस लेने में मदद करने वाली मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है और अंततः मरीज को गंभीर श्वसन संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसके विपरीत, रसेल वाइपर का जहर हेमोटॉक्सिक असर छोड़ता है, जो सीधे मानव रक्त प्रवाह पर वार करता है। यह प्रभाव रक्त के सामान्य थक्के बनने की प्रक्रिया को बाधित कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर के अंदरूनी या बाहरी हिस्सों से अनियंत्रित रक्तस्राव शुरू हो सकता है। सर्पदंश के तुरंत बाद घाव वाले स्थान पर असहनीय दर्द, तेज सूजन और खून बहने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ऐसे नाजुक मौकों पर झाड़-फूंक या किसी भी तरह के घरेलू नुस्खों में वक्त बर्बाद करने के बजाय मरीज को तुरंत चिकित्सीय निगरानी में ले जाना चाहिए, जिससे समय पर एंटीवेनम और उचित इलाज देकर जान बचाई जा सके। इसका आप पर असर सर्पदंश की आपात स्थिति में सही जैविक जानकारी और तत्काल अस्पताल पहुंचना ही मरीज की जान बचा सकता है। • भारत में: बारिश के मौसम में खेतों और घरों के आसपास सतर्कता बरतें तथा बिलों में पानी भरने पर सूखे स्थानों पर ध्यान दें। सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक में वक्त गंवाए बिना तुरंत निकटतम सरकारी या निजी अस्पताल जाएं। • पलामू में: ग्रामीण और वन क्षेत्रों के निवासी खेतों में काम करते समय और रात में टॉर्च व जूतों का अनिवार्य उपयोग करें। सर्पदंश के किसी भी मामले में मरीज को तुरंत पलामू जिला अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। • अंधविश्वास से बचाव: इस भ्रम में बिल्कुल न रहें कि एक बार काटने के बाद सांप दोबारा नहीं काट सकता। यदि सांप के विषदंत सुरक्षित हैं तो वह तुरंत दोबारा हमला कर सकता है, इसलिए उससे सुरक्षित दूरी बनाएं। • उपचार की प्राथमिकता: घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे डॉक्टर से एंटीवेनम और उचित चिकित्सा सहायता लें। समय पर चिकित्सीय सहायता मिलने से न्यूरोटॉक्सिक और हेमोटॉक्सिक दोनों तरह के विष के असर को रोका जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ मानसून के दौरान प्राकृतिक आवास में जलभराव और भोजन की तलाश सांपों को इंसानी बस्तियों के नजदीक लाती है, जिससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ती हैं। • जलभराव और विस्थापन: मूसलाधार बारिश के चलते सांपों के बिल और भूमिगत रहने की जगहें पानी में डूब जाती हैं। इसके कारण वे सुरक्षित, सूखे और ऊंचे स्थानों की तलाश में इंसानी घरों और खेतों में शरण लेते हैं। • आकस्मिक सामना: खेतों में काम करने वाले किसानों या घरों में रहने वाले लोगों का अनजाने में सांपों से संपर्क हो जाता है। भयभीत होकर अपनी रक्षा के लिए सांप अचानक हमला कर देते हैं। • विषदंत टूटने की स्थिति: यदि हमले के दौरान कड़े आघात से सांप के विषदंत टूट जाएं, तो उसे नया दांत उगने में 3 से 6 महीने का समय लग जाता है। इसी जैविक तथ्य से यह गलत धारणा फैल गई कि हर सांप काटने के बाद छह महीने तक नहीं डस सकता। सवाल-जवाब 1. क्या एक बार काटने के बाद सांप छह महीने तक दोबारा नहीं काट सकता? यह तभी सच होता है जब काटने के दौरान सांप के विषदंत टूट जाएं या क्षतिग्रस्त हो जाएं। टूटे हुए विषदंत को दोबारा विकसित होने में 3 से 6 महीने का समय लगता है। 2. सांप के विषदंत का मुख्य कार्य क्या है? विषदंत शिकार को पकड़ने और उसके शरीर में विषग्रंथियों से जहर पहुंचाने का काम करते हैं। इनके बिना सांप के लिए शिकार करना और भोजन ग्रहण करना कठिन हो जाता है। 3. कोबरा और करैत का जहर शरीर पर क्या असर डालता है? इनका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है जो तंत्रिकाओं और मांसपेशियों को प्रभावित करता है। इससे सांस लेने वाली मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और दम घुटने की स्थिति बन सकती है। 4. रसेल वाइपर के काटने पर क्या लक्षण उभरते हैं? रसेल वाइपर का जहर हेमोटॉक्सिक होता है, जिससे रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया बाधित होती है और अत्यधिक रक्तस्राव, दर्द तथा सूजन हो सकती है। 5. सर्पदंश के बाद सबसे पहले क्या करना चाहिए? सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद किए बिना पीड़ित को तुरंत निकटतम अस्पताल ले जाना चाहिए। https://trendkia.com/jharkhand/sarpadnsha-ke-bada-sanpa-ke-dobara-katane-ki-sachchai-aura-zahara-ka-sharira-para-asara-35545 TrendKia — Har trend, sabse pehle.