शरद ऋतु में घर के आंगन और गमलों में उगाएं ताजी हरी सब्जियां, देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ ने साझा किए आसान तरीके अक्टूबर के बदलते मौसम में घर के आंगन, खाली पड़ी जमीन या गमलों में मौसमी सब्जियां उगाने के लिए देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ ने मिट्टी की तैयारी और जल निकासी से जुड़े जरूरी तरीके साझा किए हैं। अक्टूबर का महीना शुरू होते ही उत्तर और पूर्वी भारत में मौसम का मिजाज बदलने लगता है। तेज धूप की तपिश कम होने लगती है और सुबह तथा शाम के समय गुलाबी ठंडक घुलने लगती है। यह सुखद मौसमी बदलाव केवल इंसान के रहन-सहन के लिए ही नहीं, बल्कि बागवानी के शौकीनों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर लेकर आता है। इस बदलते मौसम में घर के पीछे खाली पड़ी जमीन, आंगन की बाउंड्री या बारी की छोटी सी जगह को एक हरे-भरे किचन गार्डन में बदला जा सकता है। घर पर अपनी जरूरत की सब्जियां उगाने के लिए किसी बड़े खेत या एकड़ जमीन की अनिवार्यता नहीं होती। यदि किसी के पास सीमित जमीन है, तो वह छोटी-छोटी क्यारियों का निर्माण कर सकता है, और यदि कच्ची जमीन बिल्कुल न हो, तो छतों या बालकनी में बड़े गमलों और ग्रो बैग्स का सहारा लेकर भी हरी-भरी फसलें तैयार की जा सकती हैं। सर्दियों की प्रमुख फसलें और उनका सही चुनाव अक्टूबर के इस अनुकूल मौसम में कई तरह की मौसमी सब्जियां बोई जा सकती हैं। इनमें तेजी से बढ़ने वाली पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और हरा धनिया शामिल हैं, जिन्हें नियमित घरेलू इस्तेमाल के लिए आसानी से उगाया जा सकता है। इसके अलावा मूली, गाजर, हरी मटर और हरी मिर्च जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली सब्जियां भी इसी मौसम में लगाई जाती हैं। यदि घर में जगह थोड़ी अधिक उपलब्ध हो, तो पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकली जैसी पौष्टिक सब्जियों के पौधे भी लगाए जा सकते हैं। इस प्रकार थोड़ी सी जगह में विभिन्न प्रकार की सब्जियों का संयोजन करके रसोई के लिए ताजा और रसायन मुक्त उपज लगातार हासिल की जा सकती है। मिट्टी की तैयारी और जैविक खाद का सही इस्तेमाल देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक कश्यप ने घर पर सब्जी वाटिका शुरू करने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी पौधे को लगाने से पहले सबसे महत्वपूर्ण कदम जमीन और मिट्टी की समुचित तैयारी करना है। सबसे पहले निर्धारित जमीन की अच्छी तरह से गहरी खुदाई करनी चाहिए ताकि मिट्टी भुरभुरी और हवादार बन सके। इस भुरभुरी मिट्टी में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की पारंपरिक खाद या केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) को पर्याप्त मात्रा में मिलाना चाहिए। जैविक खादों के मिश्रण से मिट्टी में जरूरी जैविक पोषक तत्वों की मात्रा में भारी वृद्धि होती है, जो नए अंकुरित पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने और उनके तेजी से विकास में अहम भूमिका निभाती है। अलग-अलग सब्जियों की जड़ें और उनकी विशेष जरूरतें विभिन्न सब्जियों की जड़ों की बनावट और उनकी बढ़वार की प्रकृति अलग-अलग होती है, इसलिए उनकी बुवाई करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डॉ. विवेक कश्यप के अनुसार, पालक, मेथी और धनिए जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों की जड़ें उथली होती हैं, जिन्हें छोटी और समतल क्यारियों में बहुत कम गहराई पर भी आसानी से लगाया जा सकता है। इसके विपरीत, गाजर और मूली जैसी कंदमूल सब्जियों का विकास जमीन के भीतर गहराई में होता है। इसलिए इनके लिए तैयार की जाने वाली मिट्टी अत्यधिक भुरभुरी, ढीली और पर्याप्त गहराई वाली होनी चाहिए, ताकि उनकी जड़ें बिना किसी रुकावट के नीचे बढ़ सकें और फसल सीधी तथा मोटी बने। वहीं हरी मटर की बात करें तो उसकी बेलें फैलती हैं, जिन्हें ऊपर चढ़ाने और सहारा देने के लिए सूखी लकड़ी की टहनियों, रस्सियों या जालीदार ढांचे का सहारा देना जरूरी होता है। हरी मिर्च के पौधों को ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां दिन भर अच्छी धूप आती रहे, जिससे लंबे समय तक उनसे तीखी मिर्च की भरपूर तुड़ाई की जा सके। धूप का चुनाव और जल निकासी की सटीक व्यवस्था किचन गार्डन की सफलता इस बात पर बहुत हद तक निर्भर करती है कि क्यारियों का स्थान कैसा है और वहां जल प्रबंधन किस तरह किया गया है। डॉ. विवेक कश्यप ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सब्जियों के लिए हमेशा ऐसी जगह का चयन करना चाहिए जहां दिन के समय पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक धूप पहुंचती हो। इसके साथ ही क्यारियों में पानी की निकासी का प्रबंध सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। यदि सिंचाई के बाद क्यारियों में पानी लंबे समय तक जमा रह जाए, तो मिट्टी में हवा का संचार रुक जाता है और पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं। इसलिए क्यारियां बनाते समय अतिरिक्त पानी के सहज निकास का रास्ता अवश्य बनाना चाहिए। परिवार में जिन सब्जियों की दैनिक खपत सबसे अधिक होती है, योजना बनाते समय उन्हें प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखना चाहिए, ताकि सीमित क्षेत्रफल से भी रसोई का खर्च और जरूरत दोनों संतुलित रह सकें। नियमित देखभाल, गुड़ाई और ताजी तुड़ाई का आनंद पौधों के रोपण के बाद उनकी नियमित निगरानी और सही देखभाल ही अच्छी फसल की गारंटी बनती है। पौधों को उनकी जरूरत के अनुसार ही पानी देना चाहिए, न अत्यधिक और न ही बहुत कम। इसके साथ ही समय-समय पर खुरपी से क्यारियों की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करते रहना आवश्यक होता है, जिससे जड़ों तक ताजी हवा और ऑक्सीजन का आवागमन बना रहे। यदि पत्तियों या तनों पर किसी भी प्रकार के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई दे, तो तुरंत उसकी पहचान करके समय रहते उचित प्रबंधन करना चाहिए। घर की बारी या आंगन में उगाई गई सब्जियों का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि गृहिणी या परिवार के सदस्य भोजन पकाने से ठीक पहले सीधे पौधे से ताजी पत्तियां और सब्जियां तोड़कर इस्तेमाल कर सकते हैं। थोड़ी सी व्यवस्थित तैयारी और हल्की मेहनत से घर की बंजर या खाली पड़ी जमीन एक सुंदर, हरे-भरे सब्जी के बगीचे में तब्दील हो जाती है, जिससे न केवल घर की शोभा बढ़ती है बल्कि पूरे परिवार को मौसमी ताजी सब्जियां भी सुलभ हो जाती हैं। इसका आप पर असर अक्टूबर में घर पर मौसमी सब्जियां उगाने से हर परिवार को दैनिक रसोई खर्च घटाने और शुद्ध, ताजा भोजन प्राप्त करने का सीधा लाभ मिलता है। • भारत में: अक्टूबर के दौरान मौसमी सब्जियों की खुदरा कीमतें अक्सर उतार-चढ़ाव भरी रहती हैं। घर पर उगाई गई मेथी, धनिया और पालक जैसी आवश्यक हरी सब्जियां बाजार के महंगे दामों से राहत दिलाती हैं। • देवघर और झारखंड में: स्थानीय मौसम की हल्की ठंडक का उपयोग करके लोग अपनी खाली पड़ी बारी में पोषण युक्त आहार तैयार कर सकते हैं। इससे बाजार पर निर्भरता कम होती है और ताजी बिना कीटनाशक वाली सब्जियां तुरंत मिल जाती हैं। • बजट और बचत: छोटी क्यारियों या गमलों में धनिया, हरी मिर्च और पालक जैसी रोजमर्रा की चीजें उगाने से हर महीने सब्जी के बजट में सीधी बचत होती है। केवल गोबर की खाद और थोड़े बीजों के न्यूनतम खर्च में महीनों तक उत्पादन मिलता है। • स्वास्थ्य और पोषण: सीधे पौधे से तोड़ी गई हरी सब्जियों में विटामिन और खनिज पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। रासायनिक दवाओं से मुक्त यह घरेलू उपज परिवार के पोषण स्तर को तुरंत सुधारने में मदद करती है। • शहरी और छोटे घरों के लिए: जिनके पास खुली जमीन नहीं है, वे बड़े प्लास्टिक गमलों या ग्रो बैग्स का प्रयोग करके अपनी छतों पर बगीचा बना सकते हैं। धूप वाली बालकनी में हरी मिर्च और पत्तेदार साग आसानी से तैयार हो जाते हैं। ऐसा क्यों हुआ अक्टूबर का महीना तापमान में गिरावट और अनुकूल आद्रता लेकर आता है, जिससे सर्दियों की हरी और कंदमूल सब्जियों के अंकुरण तथा विकास के लिए सबसे आदर्श परिस्थितियां पैदा होती हैं। • जलवायु परिवर्तन और अनुकूल तापमान: गर्मियों की तीव्र गर्मी समाप्त होने और दिन-रात के तापमान में संतुलन आने से पौधों की कोमल पत्तियों को झुलसने से मुक्ति मिलती है। यह शीतोष्ण वातावरण शीतकालीन सब्जियों की वानस्पतिक बढ़वार के लिए सबसे उपयुक्त प्राकृतिक माहौल प्रदान करता है। • मिट्टी में पोषक तत्वों और वायु संचार की जरूरत: बारिश के मौसम के बाद जमीन अक्सर सख्त हो जाती है, जिसे भुरभुरा बनाना आवश्यक होता है। केंचुआ खाद और सड़ी गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी के छिद्र खुलते हैं, जिससे जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण आसानी से मिल पाता है। • जलभराव से जड़ों का सड़ना: स्थिर पानी में कई फफूंद और रोगाणु तेजी से पनपते हैं जो पौधों की जड़ों को गला देते हैं। उचित जलनिकासी की क्यारियां बनाकर इस समस्या को रोका जाता है ताकि पौधे बिना अवरोध के फल-फूल सकें। सवाल-जवाब 1. अक्टूबर के महीने में घर पर कौन सी सब्जियां उगाई जा सकती हैं? इस महीने में पालक, मेथी, हरा धनिया, मूली, गाजर, हरी मटर और हरी मिर्च जैसी सब्जियां लगाई जा सकती हैं। अधिक जगह होने पर फूलगोभी, पत्तागोभी और ब्रोकली भी उगाई जा सकती हैं। 2. किचन गार्डन की मिट्टी तैयार करते समय क्या मिलाना चाहिए? जमीन की अच्छी तरह खुदाई कर मिट्टी को भुरभुरा कर लें और उसमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) मिलाएं। 3. मूली और गाजर के लिए मिट्टी कैसी होनी चाहिए? मूली और गाजर की जड़ें जमीन के अंदर बढ़ती हैं, इसलिए इनके लिए मिट्टी ज्यादा भुरभुरी, ढीली और पर्याप्त गहराई वाली होनी चाहिए। 4. क्या बिना जमीन वाले लोग भी सब्जियां उगा सकते हैं? हां, जिनके पास कच्ची जमीन या आंगन नहीं है, वे बड़े गमलों या ग्रो बैग्स में पौधे लगाकर धूप वाली जगह पर सब्जियां तैयार कर सकते हैं। 5. क्यारियों में जल निकासी का ध्यान रखना क्यों जरूरी है? यदि क्यारियों में पानी लंबे समय तक जमा रहता है, तो इससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचता है और वे सड़ सकती हैं। 6. मटर के पौधों की देखभाल के लिए क्या करना चाहिए? मटर की बेलें ऊपर की ओर फैलती हैं, इसलिए उन्हें सहारा देने के लिए सूखी लकड़ी, रस्सी या जालीदार ढांचे का प्रबंध करना चाहिए। https://trendkia.com/jharkhand/sharada-ritu-men-ghara-ke-angana-aura-gamalon-men-ugaen-taji-hari-sabjiyan-deoghar-krishi-vigyan-kendra-ke-visheshajna-ne-sajha-ki-38478 TrendKia — Har trend, sabse pehle.