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  "title": "शारदीय नवरात्रि से पहले घर से बाहर करें नकारात्मक चीजें, वास्तु नियमों से बढ़ेगी सुख-समृद्धि",
  "summary": "शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है। देवघर के ज्योतिषाचार्य के अनुसार कलश स्थापना से पहले घर से टूटी झाड़ू, खंडित मूर्तियां और सूखे पौधे हटाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।",
  "content": "मां दुर्गा की नौ दिनों की विशेष उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। इस दौरान श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव से देवी के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं। नवरात्रि के आगमन को लेकर हर घर में विशेष साफ-सफाई, व्यवस्था और कलश स्थापना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, घर के वातावरण और दिशाओं का परिवार की सुख-समृद्धि तथा मानसिक शांति पर सीधा असर पड़ता है। देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने बताया कि नवरात्रि की पूजा शुरू करने से पहले घर के भीतर से नकारात्मक ऊर्जा फैलाने वाली अनुपयोगी और टूटी-फूटी वस्तुओं को हटाना बेहद आवश्यक है, ताकि साल भर घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहे।\n\nटूटी झाड़ू को घर में रखने से बचें और सही जगह रखें\nघर की स्वच्छता व्यवस्था में झाड़ू का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है। झाड़ू घर की धूल और गंदगी को साफ करने का माध्यम है, वहीं ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है। यदि घर में रखी झाड़ू पूरी तरह टूट चुकी है, बिखरने लगी है या उपयोग के लायक नहीं बची है, तो उसे अधिक समय तक घर में संभालकर नहीं रखना चाहिए। नवरात्रि का पर्व शुरू होने से पूर्व ऐसी खराब झाड़ू को घर से हटा देना चाहिए। इसके साथ ही घर में लाई गई नई झाड़ू को किसी स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए, जिससे वह किसी के पैरों के संपर्क में न आए और उसका उचित सम्मान बना रहे।\n\nपूजा स्थल से खंडित प्रतिमाओं और तस्वीरों का सम्मानपूर्वक विसर्जन\nनवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन से पहले घर के मंदिर और पूजा स्थल का सूक्ष्मता से निरीक्षण करना जरूरी है। यदि पूजा घर या निवास के किसी भी हिस्से में देवी-देवताओं की कोई मूर्ति, प्रतिमा या तस्वीर खंडित हो चुकी है, तो उसकी नियमित पूजा-अर्चना नहीं करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खंडित प्रतिमाओं की पूजा करना वर्जित माना गया है। ऐसी खंडित मूर्तियों को सामान्य कचरे में फेंकना सर्वथा अनुचित है। श्रद्धा और पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए इन्हें किसी पवित्र स्थान, बहते जल या देवस्थल पर विधिवत विसर्जित अथवा स्थापित कर देना चाहिए। नवरात्रि में कलश स्थापना से पूर्व पूजा स्थल की पूरी तरह सफाई करके केवल पूर्ण और सुव्यवस्थित प्रतिमाएं ही स्थापित करनी चाहिए।\n\nकांटेदार पौधों, सूखे फूलों और पुरानी पूजा सामग्री का निस्तारण\nघर के आंतरिक हिस्सों और मुख्य द्वार के आसपास लगे पेड़-पौधों की स्थिति भी वास्तु पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि मुख्य द्वार या घर के आंगन में ऐसे कांटेदार पौधे रखे हैं जिनसे बार-बार चुभन या असुविधा होती है, तो नवरात्रि से पहले उनके स्थान और व्यवस्था में बदलाव करना चाहिए। इसी प्रकार लंबे समय से रखी हुई पुरानी मालाएं, सूखे हुए फूल और अनुपयोगी पूजा सामग्री को एकत्र करके नहीं रखना चाहिए। नवरात्रि मां भगवती की आराधना और घर में जीवंत, स्वच्छ वातावरण निर्मित करने का समय है। इस पावन अवसर पर सूखे पौधों की जगह ताजे और हरे-भरे पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे घर के वातावरण में ताजगी और सकारात्मकता का संचार होता है।\n\nमुख्य प्रवेश द्वार को तोरण और चरण चिह्नों से सजाएं\nनवरात्रि में कलश स्थापना और घटस्थापना से पहले घर के मुख्य द्वार को विशेष रूप से सजाने की प्राचीन परंपरा रही है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार आम, केला या अशोक के ताजे पत्तों का पल्लव बनाकर मुख्य द्वार पर तोरण बांधना अत्यंत शुभ और मांगलिक माना जाता है। इसके अतिरिक्त मुख्य प्रवेश द्वार पर मां दुर्गा के पवित्र चरण चिह्न बनाने का भी विधान है, जो घर में देवी के स्वागत और सत्कार का प्रतीक माना जाता है। प्रवेश द्वार के समीप किसी स्वच्छ लोटे अथवा पात्र में शुद्ध जल भरकर उसमें ताजे पुष्प डालकर रखना भी उत्तम उपाय है। नवरात्रि के नौ दिनों तक इस जल और फूलों को प्रतिदिन बदलकर ताजा पानी रखने से प्रवेश द्वार सुंदर दिखता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह बना रहता है।\n\nइसका आप पर असर\nशारदीय नवरात्रि से पहले घर की साफ-सफाई और वास्तु संतुलन करने से परिवार में सकारात्मक वातावरण और धार्मिक अनुशासन बनता है।\n\n• दैनिक स्वच्छता और व्यवस्था: घर से टूटी झाड़ू और सूखे पौधे हटाने से गंदगी और अव्यवस्था दूर होती है। इससे घर का माहौल स्वच्छ और व्यवस्थित रहता है।\n• पूजा स्थल की शुद्धता: खंडित मूर्तियों को पवित्र स्थान पर विसर्जित करने से पूजा का उचित सम्मान बना रहता है। इससे नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना के लिए शुद्ध वातावरण तैयार होता है।\n• मुख्य द्वार की सजावट: आम, केला या अशोक के पत्तों के तोरण और स्वच्छ जल का पात्र रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। इसे नवरात्रि के नौ दिनों तक रोजाना ताजा रखना चाहिए।\n• पारिवारिक सुख-शांति: अनुपयोगी और नकारात्मक प्रभाव वाली वस्तुओं को हटाने से घर का वास्तु संतुलित रहता है। इससे पूरे वर्ष परिवार में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nशारदीय नवरात्रि मां दुर्गा की नौ दिवसीय आराधना का प्रमुख पर्व है, जिसमें शुद्धता और सकारात्मकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में मौजूद टूटी-फूटी वस्तुएं ऊर्जा प्रवाह में बाधा उत्पन्न करती हैं।\n\n• सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा: 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली नवरात्रि में देवी के स्वागत के लिए घरों को शुद्ध और व्यवस्थित रखने की परंपरा है। इसी कारण कलश स्थापना से पहले पूरी साफ-सफाई की जाती है।\n• वास्तु और ऊर्जा संतुलन: टूटी झाड़ू, खंडित प्रतिमाएं और कांटेदार या सूखे पौधे नकारात्मकता के कारक माने जाते हैं। इन्हें हटाने से घर की दिशाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बनता है।\n• पारंपरिक स्वागत भाव: मुख्य द्वार पर तोरण, चरण चिह्न और जल पात्र रखने का उद्देश्य देवी भगवती का आदरपूर्वक स्वागत करना है। इससे घर का प्रवेश स्थल सुंदर और मांगलिक प्रतीत होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शारदीय नवरात्रि की शुरुआत किस तारीख से हो रही है?\nशारदीय नवरात्रि का नौ दिवसीय पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है।\n\n2. नवरात्रि से पहले टूटी हुई झाड़ू को घर से क्यों हटाना चाहिए?\nझाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पूरी तरह टूटी या अनुपयोगी झाड़ू को घर में लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए।\n\n3. घर में रखी खंडित मूर्तियों का क्या करना चाहिए?\nखंडित मूर्तियों की पूजा नहीं की जाती है, इसलिए उन्हें कचरे में फेंकने के बजाय किसी पवित्र स्थान पर विधिपूर्वक विसर्जित कर देना चाहिए।\n\n4. नवरात्रि में मुख्य द्वार पर किस प्रकार का तोरण लगाना शुभ माना जाता है?\nमुख्य द्वार पर आम, केला या अशोक के ताजे पत्तों का पल्लव बनाकर तोरण लगाना शुभ माना जाता है।\n\n5. घर के प्रवेश द्वार पर जल का पात्र रखने का क्या नियम बताया गया है?\nसाफ लोटे में शुद्ध जल भरकर फूल डालना चाहिए और नवरात्रि के दौरान रोजाना इसे बदलकर ताजा जल रखना चाहिए।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-10-05",
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