# ठंड के दिनों में दुधारू मवेशियों के खानपान में करें यह बदलाव, नहीं गिरेगा दूध का स्तर

> सर्दियों में मवेशियों के शरीर का तापमान बनाए रखने में अतिरिक्त ऊर्जा खर्च होती है, जिससे दूध उत्पादन घटने का जोखिम रहता है। संतुलित चारा प्रबंधन, मिनरल मिक्सचर और गुनगुने पानी के जरिए इस कमी को रोका जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/thnda-ke-dinon-men-dudharu-maveshiyon-ke-khanapana-men-karen-yaha-badalava-nahin-girega-dudha-ka-stara-56748 · **Language:** Hindi
**Tags:** गाय का दूध, पशुपालन, डेयरी फार्मिंग, सर्दियों में पशु आहार, हरा चारा, कृषि विज्ञान केंद्र

शीत ऋतु की दस्तक के साथ ही डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों और पशुपालकों के सामने दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में अचानक आने वाली गिरावट एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इस मौसमी बदलाव का सीधा असर डेयरी संचालकों के मुनाफे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कृषि विज्ञान केंद्र, बोकारो की पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. सुषमा के अनुसार, मौसम के बदलते मिजाज के बीच मवेशियों के भोजन और देखभाल की रणनीति में योजनाबद्ध बदलाव लाकर इस समस्या का सटीक समाधान निकाला जा सकता है।

## तापमान संतुलन और ऊर्जा का अतिरिक्त व्यय
कम तापमान के दौर में दुधारू गायों के शरीर की जैविक कार्यप्रणाली में कई अहम बदलाव आते हैं। कड़ाके की ठंड में अपने शरीर का आंतरिक तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए पशुओं को सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक शारीरिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इसके साथ ही नमी वाले या ठंडे फर्श पर बैठने से मवेशियों के शरीर की गर्माहट तेजी से कम होती है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव दूध बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया पर पड़ता है। जब पशु की अधिकांश ऊर्जा केवल ठंड से मुकाबला करने में खप जाती है, तो उत्पादकता गिरना स्वाभाविक है। इस मौसमी संकट से निपटने के लिए पशुपालकों को अपने मवेशियों के पोषण और बाड़े के तापमान पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए।

## संतुलित पोषण चक्र और आहार के जरूरी घटक
मवेशियों के दैनिक खानपान का उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता से सीधा संबंध होता है, इसलिए हर दुधारू पशु को एक सुव्यवस्थित और संतुलित आहार मिलना अनिवार्य है। शीतकाल में पशु के दाने में कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा की आपूर्ति के लिए अनाज का दर्रा अनिवार्य रूप से शामिल होना चाहिए। इसके अलावा प्रोटीन की पूर्ति के लिए दलहनी फसलों के अवशेष या चूरा और वसा यानी फैट के जरूरी स्तर को बनाए रखने के लिए सरसों की खली को चारे का हिस्सा बनाना जरूरी है। मवेशी के शारीरिक अंगों के सुचारू संचालन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कायम रखने के लिए आवश्यक विटामिन्स और खनिज लवणों का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

एक दिन में करीब 10 लीटर दूध देने वाली स्वस्थ और बड़ी गाय के आहार में प्रतिदिन 80 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर शामिल करने का सुझाव दिया जाता है। कड़ाके की ठंड में सरसों खली की खुराक सामान्य से कुछ बढ़ाई जा सकती है, जिससे पशु को भरपूर ऊर्जा और प्रोटीन एक साथ मिल सके। अनाज का दर्रा खिलाने से पहले उसे पानी में कुछ देर भिगोकर रखना चाहिए या फिर उसे अच्छी तरह पकाकर ठंडा करके परोसना चाहिए। ऐसा करने से पशु का पाचन तंत्र सुगम रहता है और वह दाने से अधिकतम पोषण ग्रहण कर पाता है।

## दलहनी मिश्रण और हरे चारे का सटीक अनुपात
पशु के शरीर में प्रोटीन की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए आहार में अरहर का चूरा, चने का छिलका और विभिन्न दलहनी फसलों के डंठल व छिलके शामिल किए जा सकते हैं। चारे की गुणवत्ता को अधिकतम स्तर पर ले जाने के लिए दलहनी और गैर दलहनी चारे को लगभग 1:3 के सटीक अनुपात में आपस में मिलाकर खिलाना मवेशियों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होता है। यह संतुलन पशु के रूमेन में माइक्रोफ्लोरा की सक्रियता को बढ़ाता है, जिससे भोजन का पाचन सही ढंग से होता है।

दूध देने वाली एक वयस्क और बड़ी गाय को हर रोज लगभग 20 से 25 किलो ताजा हरा चारा जरूर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। हरा चारा न केवल पशु के शरीर में पानी की जरूरी नमी बनाए रखता है, बल्कि यह प्राकृतिक रूप से कई महत्वपूर्ण विटामिन्स और खनिजों की खुराक भी पूरी करता है। सर्दियों के दिनों में हरे चारे के लिए बरसीम सबसे बेहतरीन विकल्प मानी जाती है। इसके अलावा साल के बारहों महीने उपलब्ध रहने वाली हाइब्रिड नेपियर घास की बारीक कुट्टी काटकर भी मवेशियों को नियमित खिलाई जा सकती है।

## दैनिक दिनचर्या, सूखा चारा और पानी का प्रबंधन
पशुपालकों को मवेशियों के आहार वितरण का एक निश्चित समय चक्र तय करना चाहिए। सुबह के पहले पहर में गायों को हरा चारा परोसना सबसे अच्छा रहता है। इसके बाद दोपहर के समय धान का पुआल और अन्य उपलब्ध सूखे चारे को बारीक कुट्टी के रूप में काटकर खिलाया जाना चाहिए। शाम के वक्त जब मवेशी का दूध निकाल लिया जाए, तब उसे दाना, खली और संतुलित आहार का मिश्रण देना चाहिए ताकि रात भर पशु को भरपूर पोषण और आंतरिक ऊर्जा मिलती रहे।

सर्दियों के महीनों में कई पशुपालक अक्सर यह मान लेते हैं कि ठंड में मवेशी को प्यास नहीं लगती और वे पानी पिलाने में लापरवाही बरतते हैं। यह एक बेहद हानिकारक आदत है क्योंकि दूध का एक बहुत बड़ा हिस्सा पानी पर निर्भर होता है। मवेशियों को दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी मिलना अनिवार्य है। पशुपालकों को हमेशा अपने पशुओं को साफ, ताजा और हल्का गुनगुना पानी ही पिलाना चाहिए। ठंडे पानी के सेवन से पशु के बीमार पड़ने का अंदेशा रहता है। रहने के स्थान पर सूखा बिछावन, संतुलित आहार, गुनगुना पानी और हरे व सूखे चारे का 1:3 का सही अनुपात ही सर्दियों में दूध उत्पादन को बिना किसी रुकावट के सामान्य बनाए रखता है।

## इसका आप पर असर
सर्दियों में मवेशियों के खानपान और देखभाल में समय पर बदलाव करने से पशुपालक दूध उत्पादन में आने वाली भारी गिरावट और आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं।

- **भारत में:** देश भर के डेयरी किसान अपने मवेशियों के राशन में मिनरल मिक्सचर और तेल खली की मात्रा संतुलित करके सर्दियों में दूध की निरंतर आपूर्ति बनाए रख सकते हैं। इससे ठंड के महीनों में प्रति पशु दैनिक आय को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
- **बोकारो में:** बोकारो और आसपास के ग्रामीण अंचलों के पशुपालक कृषि विज्ञान केंद्र के परामर्श अनुसार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बरसीम और हाइब्रिड नेपियर घास की व्यवस्था करके चारे की लागत घटा सकते हैं। ठंडे फर्श से बचाव और गुनगुने पानी की व्यवस्था करने से स्थानीय दुधारू पशु गंभीर शीत तनाव से सुरक्षित रहेंगे।
- **पशु स्वास्थ्य पर:** संतुलित आहार और पका हुआ दर्रा मिलने से गायों का हाजमा दुरुस्त रहता है और उनका वजन नहीं घटता है। पर्याप्त ऊर्जा मिलने से पशु का आंतरिक तापमान स्थिर रहता है और वह बीमारियों से बचा रहता है।
- **दूध उत्पादन पर:** 1:3 के अनुपात में दलहनी व गैर-दलहनी चारे का इस्तेमाल करने से दुग्ध ग्रंथियों को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे 10 लीटर तक उत्पादन देने वाली गायों की उत्पादकता ठंड के मौसम में भी बिना रुकावट जारी रहती है।

## ऐसा क्यों हुआ
सर्दियों में गायों के दूध उत्पादन में कमी आने का मुख्य कारण शरीर के तापमान को बनाए रखने में होने वाला अत्यधिक ऊर्जा ह्रास और अनुचित खानपान प्रबंधन है।

- **अतिरिक्त ऊर्जा की खपत:** बाहरी वातावरण का पारा गिरते ही मवेशियों को अपनी सामान्य शारीरिक गर्मी बनाए रखने के लिए चारे से मिलने वाली ऊर्जा का एक बड़ा भाग खर्च करना पड़ता है। जब भोजन से पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती, तो शरीर दूध निर्माण की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
- **ठंडे फर्श पर बैठने का प्रभाव:** बाड़े में पक्के या गीले ठंडे फर्श पर बैठने से पशु के शरीर की गर्मी जमीन में चली जाती है। इस सीधे संपर्क से होने वाला शीत तनाव मवेशी के हार्मोनल संतुलन और दुग्ध स्राव को बुरी तरह बाधित करता है।
- **अपर्याप्त जल सेवन:** ठंड के दिनों में अत्यधिक ठंडा पानी होने के कारण गायें जरूरत से बहुत कम पानी पीती हैं। चूंकि दूध में पानी की मात्रा सबसे प्रमुख होती है, इसलिए निर्जलीकरण की स्थिति बनते ही दूध का स्तर तुरंत गिर जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. सर्दियों में 10 लीटर दूध देने वाली गाय को कितना मिनरल मिक्सचर देना चाहिए?
प्रतिदिन 10 लीटर दूध देने वाली बड़ी गाय को रोजाना 80 से 100 ग्राम मिनरल मिक्सचर दिया जाना चाहिए।

### 2. शीतकाल में मवेशियों को कितना हरा चारा खिलाना आवश्यक है?
एक बड़ी दुधारू गाय को प्रतिदिन लगभग 20 से 25 किलोग्राम ताजा हरा चारा खिलाना चाहिए।

### 3. सर्दियों में हरे चारे के तौर पर कौन सी घास सबसे बेहतर मानी जाती है?
सर्दियों के मौसम में बरसीम का उपयोग सबसे बेहतर होता है, इसके अलावा पूरे साल मिलने वाली हाइब्रिड नेपियर घास की कुट्टी भी खिलाई जा सकती है।

### 4. दलहनी और गैर-दलहनी चारे को किस अनुपात में मिलाना चाहिए?
पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए दलहनी और गैर-दलहनी चारे को लगभग 1:3 के अनुपात में मिलाकर खिलाना चाहिए।

### 5. सर्दियों में गायों को कैसा पानी पिलाना चाहिए?
ठंड के दिनों में गायों को साफ, ताजा और हल्का गुनगुना पानी पर्याप्त मात्रा में पिलाना चाहिए।

### 6. अनाज का दर्रा खिलाने से पहले क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
दर्रा खिलाने से पहले उसे कुछ देर पानी में भिगो लेना चाहिए या अच्छी तरह पकाकर देना चाहिए ताकि पाचन आसान रहे।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._