# ठंड में गाभिन गायों की देखभाल के लिए अपनाएं ये जरूरी तरीके, बीमारी से रहेगा बचाव

> सर्दियों में तापमान घटने पर गाभिन गायों के खान-पान, आवास और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने से संक्रमण का खतरा टलता है और भ्रूण का विकास बेहतर होता है.

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/thnda-men-gabhina-gayon-ki-dekhabhala-ke-lie-apanaen-ye-jaruri-tarike-bimari-se-rahega-bachava-46182 · **Language:** Hindi
**Tags:** पशुपालन, गाभिन गाय, सर्दियों में देखभाल, बोकारो कृषि विज्ञान केंद्र, डॉ सुषमा, डेयरी फार्मिंग

सर्दियों के मौसम में पारे में गिरावट आते ही मवेशियों के रख-रखाव को लेकर सजगता जरूरी हो जाती है. खासकर गर्भधारण कर चुकी गायों के मामले में थोड़ी सी भी असावधानी उनके स्वास्थ्य और पेट में पल रहे बच्चे की सेहत को प्रभावित कर सकती है. इसी संदर्भ में बोकारो कृषि विज्ञान केंद्र की पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. सुषमा ने गर्भवती गायों की उचित देखभाल, उनके आहार प्रबंधन और मौसमी बीमारियों से बचाव के अहम तौर-तरीके साझा किए हैं.

## ठंडी हवा से सुरक्षा और गोशाला का सही प्रबंधन
सर्दियों की शुरुआत होते ही पशुपालकों को गाभिन गायों के रहने के स्थान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है. मवेशियों को सीधी सर्द हवा के संपर्क में आने से बचाना बेहद जरूरी है. गोशाला की बनावट ऐसी होनी चाहिए जहां दिन के समय पर्याप्त धूप पहुंच सके और हवा की उचित निकासी यानी वेंटिलेशन की व्यवस्था बनी रहे. सर्द हवा के झोंकों से बचाव के लिए गोशाला के खुले हिस्सों को अच्छी तरह ढक कर रखना चाहिए.

इसके अलावा गायों को कभी भी नम या गीले फर्श पर नहीं बैठाना चाहिए. उनके बैठने की जगह पूरी तरह सूखी और साफ-सुथरी होनी चाहिए. ठंड से बचाव के लिए फर्श पर पुआल बिछाकर सूखा बिछावन तैयार किया जा सकता है. गोशाला परिसर में नियमित सफाई जरूरी है और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, जिससे मच्छरों व अन्य परजीवियों का प्रकोप न फैले.

## संतुलित आहार और पानी की उचित व्यवस्था
गर्भावस्था के दौरान गाय के पोषण की जरूरतें बढ़ जाती हैं, इसलिए आहार में संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है. डॉ. सुषमा के अनुसार गाय को हरे और सूखे चारे के साथ निश्चित अनुपात में खली तथा मिनरल मिक्सचर दिया जाना चाहिए. यह पोषण भ्रूण के समुचित विकास और गाय की शारीरिक क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है.

हालांकि चारे और सप्लीमेंट की मात्रा पशु के कुल वजन, गर्भ के चरण, शारीरिक दशा और उसके दूध उत्पादन के आधार पर तय की जानी चाहिए. केवल सामान्य चारा देने से मवेशी की संपूर्ण पोषण जरूरतें पूरी नहीं होती हैं. साथ ही पशुपालकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गाय को रोजाना 75 से 80 लीटर साफ और ताजा पानी पीने के लिए मिले, क्योंकि ठंड में अक्सर पानी की कमी से पाचन संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं.

## बीमार पशुओं से दूरी और लक्षणों पर निगरानी
संक्रमण के खतरे को देखते हुए गाभिन गाय को अस्वस्थ या बीमार पशुओं के संपर्क में बिल्कुल नहीं लाना चाहिए. स्वस्थ पशुओं के रहने और खाने की व्यवस्था हमेशा अलग रखनी चाहिए. गर्भावस्था के पूरे समय गाय के खान-पान, व्यवहार और दैनिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी चाहिए. यदि गाय अचानक चारा खाना कम कर दे, सुस्त दिखने लगे या किसी अन्य तरह की परेशानी के लक्षण प्रकट हों, तो बिना देर किए पशु चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए.

## सर्दियों में नहलाने से परहेज और सफाई का तरीका
शीत ऋतु में गाभिन गायों को नियमित रूप से पानी से नहलाने की आवश्यकता नहीं होती है. अत्यधिक ठंड में पानी से नहलाने पर उन्हें ठंड लगने और बीमार पड़ने का जोखिम रहता है. पशु को स्वच्छ रखने के लिए पानी की जगह सूखे कपड़े अथवा ब्रश की सहायता से उसके शरीर की धूल और गंदगी साफ की जा सकती है.

## इसका आप पर असर
सर्दियों में सही प्रबंधन से पशुपालक अपनी गाभिन गायों को मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं और दुग्ध उत्पादन क्षमता को बनाए रख सकते हैं.

- **आवास सुरक्षा:** गोशाला को सर्द हवा से बचाकर और फर्श पर सूखा पुआल बिछाकर मवेशी को ठंड लगने से बचाया जा सकता है. इससे पशु की ऊर्जा सुरक्षित रहती है और तनाव कम होता है.
- **संतुलित पोषण:** चारे के साथ खली और मिनरल मिक्सचर देने से गर्भ में पल रहे बछड़े का विकास बेहतर होता है. पोषक तत्वों की पूर्ति से प्रसव के समय जटिलताएं कम होती हैं.
- **स्वच्छ पेयजल:** रोजाना 75 से 80 लीटर ताजा पानी देने से मवेशी में डिहाइड्रेशन और पाचन विकार नहीं होते. ठंड के दिनों में भी पर्याप्त पानी पिलाना अनिवार्य है.
- **संक्रमण नियंत्रण:** गाभिन गाय को अस्वस्थ मवेशियों से अलग रखने से गंभीर संक्रामक बीमारियां नहीं फैलतीं. इससे पशुपालकों का इलाज पर होने वाला अनावश्यक खर्च बचता है.

## ऐसा क्यों हुआ
सर्दियों के दौरान तापमान में भारी गिरावट और ठंडी हवाओं के कारण मवेशियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे गर्भवती गायों में संक्रमण और कमजोरी का खतरा बढ़ जाता है.

- **तापमान में गिरावट:** ठंड के मौसम में सीधे संपर्क में आने से मवेशियों का शारीरिक तापमान अनियंत्रित हो सकता है. इससे पशु सुस्त होकर बीमार पड़ सकते हैं.
- **असंतुलित आहार:** केवल सूखा या सामान्य चारा देने से गर्भस्थ शिशु और गाय की उच्च पोषण जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं. उचित पोषण न मिलने से शारीरिक कमजोरी आ सकती है.
- **संक्रमण का फैलाव:** बीमार मवेशियों के साथ रहने या गोशाला में नमी व गंदगी जमा होने से बैक्टीरिया और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है. यही कारण है कि अलग आवास और स्वच्छता पर बल दिया गया है.

## सवाल-जवाब

### 1. सर्दियों में गाभिन गाय को ठंडी हवा से कैसे बचाएं?
गोशाला के खुले हिस्सों को ठीक से ढक कर रखें और सुनिश्चित करें कि वहां धूप और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था हो.

### 2. गाभिन गाय के बैठने के स्थान पर क्या व्यवस्था करनी चाहिए?
फर्श को हमेशा सूखा और साफ रखना चाहिए तथा ठंड से बचाव के लिए पुआल का सूखा बिछावन डालना चाहिए.

### 3. सर्दियों में गाभिन गाय को प्रतिदिन कितना पानी पिलाना चाहिए?
गाभिन गाय को रोजाना 75 से 80 लीटर साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराना जरूरी है.

### 4. क्या सर्दियों में गाभिन गाय को रोजाना नहलाना चाहिए?
ठंड के मौसम में रोज नहलाने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सूखे कपड़े या ब्रश से सफाई करनी चाहिए.

### 5. गाभिन गाय के आहार में क्या शामिल करना चाहिए?
हरे और सूखे चारे के साथ पशु के वजन और गर्भ के चरण अनुसार उचित मात्रा में खली तथा मिनरल मिक्सचर देना चाहिए.

### 6. यदि गाभिन गाय सुस्त दिखे या खाना कम कर दे तो क्या करें?
असामान्य लक्षण या चारा कम खाने की स्थिति में तुरंत किसी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

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