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  "title": "विझिंजम पोर्ट से विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता घटी, केरल में एक लाख कंटेनर क्षमता का नया दौर",
  "summary": "केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट भारत के समुद्री व्यापार को नई रफ्तार दे रहा है। अत्याधुनिक तकनीक और गहरी गोलाई से लैस यह बंदरगाह देश की विदेशी पोर्ट्स पर निर्भरता को कम कर रहा है।",
  "content": "केरल के तिरुवनंतपुरम में समुद्र के तट पर विकसित विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट देश के समुद्री कारोबार और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। अत्याधुनिक ऑटोमेशन, प्राकृतिक रूप से गहरे पानी, आधुनिक क्रेन और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार यह बंदरगाह विशालकाय कंटेनर जहाजों को संभालने के लिए पूरी तरह मु मुस्तैद है। इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश को समर्पित किए जाने के बाद हुई थी, जिसके जरिए भारत ने वैश्विक ट्रांसशिपमेंट कारोबार में अपनी स्थिति को बेहद मजबूत कर लिया है। करीब 8600 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पोर्ट पर वर्तमान में 35 हजार कंटेनर स्टोर करने की क्षमता है, जो इसके पहले चरण का हिस्सा है। आने वाले समय में इसके विस्तार के साथ ही यह क्षमता बढ़कर 1 लाख कंटेनर तक पहुंच जाएगी, जिससे आयात और निर्यात के मोर्चे पर देश को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।\n\nऑटोमेशन और आधुनिक मशीनों से तेज हुआ कामकाज\nइस बंदरगाह की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से ऑटोमेटेड कंटेनर हैंडलिंग सिस्टम है। विशालकाय जहाजों से कंटेनर उतारने और उन्हें यार्ड में करीने से व्यवस्थित करने के लिए रिमोट ऑपरेशन और अत्याधुनिक मशीनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। इससे पोर्ट पर होने वाले तमाम ऑपरेशन बेहद तेज और व्यवस्थित तरीके से पूरे होते हैं। बंदरगाह परिसर में कुल 8 Ship-to-Shore क्रेन और 24 Automated CRMG क्रेन स्थापित किए गए हैं। ये तमाम उपकरण जहाज और कंटेनर यार्ड के बीच भारी भरकम सामान की आवाजाही को बेहद कम समय में और सुरक्षित रूप से पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।\n\n18 मीटर की प्राकृतिक गहराई से बड़े जहाजों की राह आसान\nविझिंजम की दूसरी सबसे बड़ी ताकत इसकी प्राकृतिक गहराई है, जो इसे वैश्विक स्तर पर खास बनाती है। आधिकारिक परियोजना विवरण के अनुसार यहां लगभग 18 मीटर का प्राकृतिक ड्राफ्ट मौजूद है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर 20 मीटर तक ले जाने की योजना है। इसी खासियत के दम पर दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज बिना किसी रुकावट के यहां आसानी से आ सकते हैं। इस बंदरगाह ने पहले ही दुनिया के विशालकाय जहाजों को सफलतापूर्व संभालकर अपनी क्षमता का लोहा मनवा दिया है। इसके जरिए भारत को अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का एक शानदार अवसर प्राप्त हुआ है, जिससे विदेशी बंदरगाहों पर हमारी पुरानी निर्भरता अब तेजी से कम हो रही है।\n\nलाखों TEU क्षमता और भविष्य का बड़ा विस्तार\nइस पूरी परियोजना पर लगभग 8,867 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आया है। शुरुआती दौर में इसकी वार्षिक क्षमता 1 मिलियन TEU निर्धारित की गई है। सरकारी योजनाओं के मुताबिक, इस पोर्ट के फेज II, III और IV को मिलाकर क्षमता विस्तार के सभी कार्यों को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद इसकी सालाना क्षमता बढ़कर 3 मिलियन TEU तक पहुंच सकती है, जबकि बेहतर ऑटोमेशन और उच्च परिचालन दक्षता के चलते यह आंकड़ा 5.7 मिलियन TEU तक भी पहुंच सकता है। मौजूदा समय में विझिंजम जिस रूप में नजर आ रहा है, वह इसकी कुल क्षमता और भविष्य की विशाल संभावनाओं की महज एक शुरुआत मात्र है।\n\nआईआईटी मद्रास की स्वदेशी तकनीक से मिला रणनीतिक नियंत्रण\nइस बंदरगाह को तकनीकी रूप से अद्वितीय बनाने में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास की बहुत बड़ी भूमिका रही है। आईआईटी मद्रास के नेशनल टेक्नोलॉजी सेंटर फॉर पोर्ट्स, वाटरवेज एंड कोस्ट्स ने देश का पहला पूरी तरह स्वदेशी Vessel Traffic Management System विकसित किया है, जिसे इसी बंदरगाह पर सफलतापूर्वक लागू किया गया है। यह उन्नत सिस्टम जहाजों के आने-जाने और उनकी गतिविधियों पर पैनी निगरानी रखने के साथ उनके प्रबंधन में मदद करता है। इस स्वदेशी तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके पूरे सोर्स कोड और डेटा पर भारत का पूर्ण रणनीतिक नियंत्रण बना रहता है। इससे विदेशी सॉफ्टवेयर और बाहरी तकनीकी कंपनियों पर देश की निर्भरता हमेशा के लिए कम होने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।\n\nसड़क के बाद अब रेल नेटवर्क से बढ़ेगी रफ्तार\nसमुद्री मार्ग और सड़क मार्ग के बाद विझिंजम को सीधा रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी बेहद महत्वपूर्ण है। आधिकारिक विवरण के अनुसार, बलरामपुरम रेलवे स्टेशन से बंदरगाह तक लगभग 10.7 किलोमीटर लंबी रेल कनेक्टिविटी प्रदान करने का प्रावधान तय किया गया है। एक बार यह रेल कनेक्शन पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद बंदरगाह पर उतरने वाले कंटेनरों को देश के अन्य दूर-दराज के हिस्सों तक पहुंचाना और भी ज्यादा सुगम और तेज हो जाएगा, जिससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में भारी कमी आएगी।\n\nरोजगार और आर्थिक विकास के नए द्वार\nविझिंजम परियोजना का प्रभाव केवल जहाजों की आवाजाही और कंटेनरों तक सीमित नहीं रहने वाला है। इस बंदरगाह के लगातार विस्तार के साथ ही लॉजिस्टिक्स, परिवहन, वेयरहाउसिंग, सर्विस सेक्टर और अन्य संबंधित व्यवसायों में भारी पैमाने पर रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक इस परियोजना से लगभग 5,500 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान जताया गया है। यही मुख्य वजह है कि विझिंजम को केवल केरल राज्य के एक नए बंदरगाह के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे वैश्विक ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क में भारत के समुद्री व्यापार को सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचाने वाले एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट के तौर पर सराहा जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nविझिंजम पोर्ट के विस्तार से देश के आयात-निर्यात में तेजी आएगी और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम होने से व्यापारिक लागत घटेगी।\n\n• भारत में: देश के समुद्री व्यापार को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा और रसद लागत में कमी आने से समग्र अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।\n• केरल में: तिरुवनंतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और सर्विस सेक्टर में हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट कहाँ स्थित है?\nयह बंदरगाह केरल के तिरुवनंतपुरम में समुद्र के किनारे स्थित है।\n\n2. इस बंदरगाह को तैयार करने में कितनी लागत आई है?\nविझिंजम परियोजना पर लगभग 8,867 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।\n\n3. वर्तमान में इस पोर्ट की कंटेनर भंडारण क्षमता कितनी है?\nपहले चरण के तहत इस पोर्ट की वर्तमान क्षमता 35 हजार कंटेनर स्टोर करने की है।\n\n4. दूसरे चरण के पूरा होने के बाद इसकी क्षमता कितनी हो जाएगी?\nविस्तार कार्य पूरा होने के बाद इसकी क्षमता बढ़कर 1 लाख कंटेनर तक हो जाएगी।\n\n5. इस पोर्ट में कौन सा स्वदेशी सिस्टम इस्तेमाल किया गया है?\nयहाँ आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी Vessel Traffic Management System लागू किया गया है।\n\n6. इस प्रोजेक्ट से कितने प्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है?\nआधिकारिक विवरण के अनुसार इस परियोजना से लगभग 5,500 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलने का अनुमान है।",
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  "category": "झारखंड",
  "publishedAt": "2026-09-05",
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