# यूट्यूब से ट्रेंड सीखकर सोशल मीडिया पर छाए बोकारो के करीम, ₹500 के हेयरकट के लिए तीन राज्यों से आ रहे लोग

> झारखंड के बोकारो जिले के सिवनडीह गांव में 50 वर्षीय करीम उर्फ लाला भाई अपने अनोखे और ट्रेंडिंग हेयर स्टाइल से तहलका मचा रहे हैं। हैदराबाद की फिल्म सिटी में कलाकारों से प्रेरित होकर और यूट्यूब से विदेशी कटिंग तकनीक सीखकर वे आज हर आम इंसान को फिल्म स्टार जैसा लुक दे रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** झारखंड · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/jharkhand/yutyuba-se-trenda-sikhakara-soshala-midiya-para-chhae-bokaro-ke-karim-500-ke-heyarakata-ke-lie-tina-rajyon-se-a-rahe-loga-29465 · **Language:** Hindi
**Tags:** बोकारो लाला भाई, करीम हेयर स्टाइलिस्ट, वायरल हेयरकट बोकारो, सिवनडीह बोकारो, झारखंड सोशल मीडिया स्टार, यूट्यूब हेयरस्टाइल

झारखंड के बोकारो जिला स्थित सिवनडीह के रहने वाले 50 पार उम्र के हेयर स्टाइलिस्ट करीम, जिन्हें लोग प्यार से ‘लाला भाई’ कहते हैं, अपने अनोखे हेयरकट और स्टाइलिंग अंदाज से इंटरनेट पर तहलका मचा रहे हैं। अपनी ढलती उम्र में भी नए जमाने के फैशन को मात देने वाले लाला भाई के हेयरकट वीडियो सोशल मीडिया पर करोड़ों बार देखे जा चुके हैं। उनके साधारण सैलून में अब आम कटिंग के बजाय ट्रेंडिंग और स्टाइलिश हेयर डिजाइन की भरमार है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर एक मशहूर हस्ती बन चुके हैं।

## हैदराबाद से मिली प्रेरणा और यूट्यूब से सीखी तकनीक
करीम का सैलून की दुनिया में कदम रखने का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। बोकारो में अपना खुद का काम शुरू करने से पहले उन्होंने करीब 5 साल तक हैदराबाद में अलग-अलग तरह की नौकरियां की थीं। हैदराबाद प्रवास के दौरान उन्हें वहां की मशहूर फिल्म सिटी में बड़े-बड़े अभिनेताओं और कलाकारों को बहुत करीब से देखने का अवसर मिला। फिल्मों के स्टार्स के अलग-अलग लुक्स, हेयरस्टाइल और उनके आकर्षक व्यक्तित्व को देखकर करीम के मन में भी इस कला में कुछ नया और अलग करने की इच्छा जागी।

फिल्म सितारों के स्टाइल से प्रभावित होकर उन्होंने हेयरकट सीखने की ठानी। बिना किसी महंगे संस्थान में दाखिला लिए, उन्होंने तकनीक सीखने के लिए डिजिटल माध्यम का सहारा लिया। करीम ने यूट्यूब पर विदेशी हेयर स्टाइलिस्ट्स और अंतरराष्ट्रीय कटिंग ट्रेंड्स के वीडियो देखने शुरू किए। वे लगातार इन वीडियो को देखकर नई-नई तकनीकों की प्रैक्टिस करते रहे और बारीकियों को समझते हुए अपने हुनर को निखारते गए। कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने आधुनिक स्टाइलिंग में महारत हासिल कर ली।

## सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तीन राज्यों से आते लोग
यूट्यूब से हुनर सीखने के बाद करीम बोकारो लौटे और सिवनडीह में अपना सैलून स्थापित किया। यहां उन्होंने पारंपरिक हेयरकट की जगह अपने ग्राहकों को नए, यूनिक और आधुनिक हेयर डिजाइन देने शुरू किए। जब लोगों ने उनका काम पसंद किया, तो करीम ने अपने काम के छोटे-छोटे वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उनके वीडियो वायरल होने लगे और देश भर के लोग उनके हेयरकट स्टाइल के दीवाने बन गए।

ऑनलाइन पहचान मिलने के बाद करीम की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। अब केवल बोकारो ही नहीं, बल्कि झारखंड के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ बिहार और पश्चिम बंगाल से भी लोग खास तौर पर ट्रेन पकड़कर उनसे बाल कटाने पहुंच रहे हैं। करीम अपने सैलून में एक प्रोफेशनल हेयरकट और स्टाइलिंग के लिए करीब 500 रुपये चार्ज करते हैं। इसके बावजूद उनके सैलून में हर वक्त ग्राहकों की लंबी कतार लगी रहती है।

## साधारण पृष्ठभूमि और हर ग्राहक को स्टार बनाने का सपना
सोशल मीडिया पर मिली इस बड़ी सफलता के बाद भी लाला भाई अपनी सादगी और जड़ों से जुड़े हुए हैं। करीम एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं, जहां उनके पिता एक ट्रक ड्राइवर का काम करते हैं और उनकी मां गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।

करीम का मुख्य लक्ष्य हर आम इंसान को सुपरस्टार जैसा लुक और आत्मविश्वास देना है। उनका मानना है कि सिर्फ बड़े और अमीर लोग ही नहीं, बल्कि हर आम व्यक्ति को बेहतरीन दिखने का हक है। वे ऐसा हेयरस्टाइल तैयार करना चाहते हैं, जिससे उनका सैलून छोड़ने के बाद हर ग्राहक खुद में किसी बड़े अभिनेता जैसा आत्मविश्वास महसूस कर सके।

## इसका आप पर असर
बोकारो के इस हेयर स्टाइलिस्ट की सफलता से स्थानीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं।

- **ग्राहकों के लिए:** स्थानीय स्तर पर ही केवल ₹500 में मेट्रो शहरों जैसी प्रीमियम और सेलिब्रिटी हेयर स्टाइलिंग सुविधा उपलब्ध हो रही है।
- **स्थानीय व्यापार पर:** पड़ोसी राज्यों से आने वाले ग्राहकों के कारण सिवनडीह और बोकारो क्षेत्र में स्थानीय परिवहन और छोटे दुकानों को बढ़ावा मिल रहा है।
- **छोटे कारोबारियों के लिए प्रेरणा:** डिजिटल मीडिया का सही इस्तेमाल करके छोटे कस्बे के कारीगर भी बिना बड़े निवेश के देश भर में पहचान बना सकते हैं।
- **कौशल विकास:** यूट्यूब जैसे मुफ्त प्लेटफॉर्म से आधुनिक तकनीक सीखकर अपना स्वरोजगार शुरू करने का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
करीम उर्फ लाला भाई की इस असाधारण सफलता और वायरल होने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण और परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।

- **हैदराबाद फिल्म सिटी का अनुभव:** 5 साल तक हैदराबाद में काम करने के दौरान उन्होंने फिल्मी दुनिया के स्टाइल और ग्रूमिंग का बारकी से अध्ययन किया था।
- **यूट्यूब से निरंतर स्व-अध्ययन:** महंगे कोर्स के बजाय विदेशी हेयरकट वीडियो देखकर नई कटिंग तकनीकों का लगातार अभ्यास किया।
- **सोशल मीडिया रीच:** अपने अनोखे काम का वीडियो बनाकर इंटरनेट पर अपलोड करने से उन्हें बिना किसी खर्च के व्यापक पब्लिसिटी और मिलियन्स व्यूज मिले।
- **किफ़ायती दाम पर प्रीमियम सर्विस:** आम लोगों को सिर्फ ₹500 में सेलिब्रिटी जैसा लुक देना उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण बना।

## सवाल-जवाब

### 1. लाला भाई के नाम से प्रसिद्ध हेयर स्टाइलिस्ट कौन हैं?
लाला भाई का असली नाम करीम है, जो झारखंड के बोकारो जिले के सिवनडीह में सैलून चलाते हैं और अपने अनोखे हेयरकट के लिए सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध हैं।

### 2. वे हेयरकट और स्टाइलिंग के लिए कितना शुल्क लेते हैं?
वे अपने सैलून में प्रोफेशनल हेयरकट और स्टाइलिंग सर्विस के लिए करीब 500 रुपये चार्ज करते हैं।

### 3. करीम ने हेयर स्टाइलिंग की कला कहाँ से सीखी?
उन्होंने हैदराबाद में काम के दौरान फिल्म सितारों को देखकर प्रेरणा ली और बाद में यूट्यूब पर विदेशी हेयरस्टाइलिस्ट्स के वीडियो देखकर खुद प्रैक्टिस की।

### 4. लोग उनके सैलून में कहाँ-कहाँ से आ रहे हैं?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद झारखंड के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल से भी लोग ट्रेन पकड़कर बाल कटाने आ रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
करीम 'लाला भाई' का यह सफर उन सभी के लिए प्रेरणादायक है जो सीमित संसाधनों में बड़ा सपना देखते हैं।

- **उम्र सीमा नहीं होती:** 50 की उम्र पार करने के बाद भी नया हुनर सीखना और आधुनिक ट्रेंड्स को अपनाना संभव है।
- **डिजिटल संसाधनों का उपयोग:** महंगे संस्थानों के बिना भी इंटरनेट और यूट्यूब के माध्यम से कोई भी कला सीखी जा सकती है।
- **जड़ों को न भूलना:** ट्रक ड्राइवर के बेटे होने के बावजूद कड़ी मेहनत से अपनी कला में महारत हासिल की और जमीन से जुड़े रहे।
- **गुणवत्ता और जुनून:** अपने काम में नवीनता लाकर साधारण सेवा को भी खास अनुभव में बदला जा सकता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._