{
  "type": "article",
  "title": "कर्नाटक में मतदाता सूची से कट सकते हैं डेढ़ करोड़ नाम, डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग से की बड़ी मांग",
  "summary": "कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए अधिक समय मांगा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि समय न मिलने पर करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं।",
  "content": "बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान को लेकर घमासान छिड़ गया है। राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर मांग की है कि सत्यापन और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए निर्धारित समय सीमा को आगे बढ़ाया जाए। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हो सके और हर वास्तविक मतदाता का नाम अंतिम सूची में सुरक्षित बना रहे।\n\nइस पूरे मामले को जनता के सामने लाते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डीके शिवकुमार द्वारा लिखा गया पत्र सार्वजनिक किया। इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि किस प्रकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं के कारण लाखों लोग मतदान के अधिकार से दूर हो सकते हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।\n\nमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 25 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रेषित अपने विस्तृत पत्र में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। पत्र के अनुसार, राज्य के कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 1.08 करोड़ मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी के तहत रखा गया है। इसके अलावा, 24 अगस्त को जैसे ही प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन हुआ, उसके तुरंत बाद करीब 43.8 लाख मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों का सामना करना पड़ा। साथ ही, वर्ष 2002 की पुरानी मतदाता सूची के साथ लिंक न जुड़ पाने की वजह से इन्हें सत्यापन नोटिस मिलने की पूरी संभावना है।\n\nबेंगलुरु शहर को लेकर स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है, जहां अकेले 46.88 लाख मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी में डाल दिया गया है। मुख्यमंत्री ने अपनी आशंका खुलकर जाहिर की है कि यदि तय समय सीमा के भीतर दावे और आपत्तियां दाखिल करने का मौका नहीं मिला, तो कर्नाटकभर में लगभग 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने का बड़ा खतरा मंडराने लगेगा। इतनी बड़ी संख्या में नाम कटना चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान लगा सकता है।\n\nडीके शिवकुमार ने तर्क दिया है कि अनुपस्थित श्रेणी के अंतर्गत आने वाले बहुत से लोग वास्तव में वैध मतदाता हैं, जो आजीविका, खराब स्वास्थ्य या अन्य अपरिहार्य कारणों की वजह से अपना गणना प्रपत्र समय पर जमा नहीं करा पाए। इसके अतिरिक्त, जिन नागरिकों ने अपना निवास स्थान या फिर पोलिंग बूथ बदल लिया है और जो बूथ स्तर अधिकारियों यानी बीएलओ की घर-घर जाकर सत्यापन करने वाली प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रहे, उन्हें भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल पता बदल जाने या स्थान परिवर्तन हो जाने के कारण किसी भी नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।\n\nस्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के समक्ष चार प्रमुख और व्यावहारिक मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि आपत्तियां और दावे दर्ज कराने की समयसीमा को बढ़ाया जाए। दूसरी मांग है कि शहरी इलाकों में वार्ड समितियों की बैठकें और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसभाओं का आयोजन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। तीसरी मांग के तहत उन्होंने मतदाताओं को नोटिस का जवाब देने के लिए तीन से चार सप्ताह का पर्याप्त समय देने की बात कही है। चौथी और अंतिम मांग यह है कि जिन जिलों में एएसडीडीओ के मामले सबसे अधिक संख्या में दर्ज हैं, वहां विशेष रूप से अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की जाए।\n\nपत्र के अंत में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य प्रशासन चुनाव आयोग को हरसंभव सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे वह ग्रामसभाओं का आयोजन हो, वार्ड समितियों की बैठकें हों या फिर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना हो। उन्होंने कहा कि हम सबका साझा उद्देश्य ऐसी त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना होना चाहिए, जिस पर राज्य की जनता आंख मूंदकर भरोसा कर सके। इस पूरी कवायद का मकसद केवल इतना होना चाहिए कि एक भी पात्र नागरिक पीछे न छूटे, फर्जी या अयोग्य नाम बाहर हों और किसी भी व्यक्ति को केवल जानकारी या अवसर के अभाव में लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व से बाहर न होना पड़े।\n\nइसका आप पर असर\nमतदाता सूची के पुनरीक्षण और समय सीमा बढ़ने के इस पूरे मामले का सीधा असर राज्य के आम नागरिकों और मतदाताओं पर पड़ने वाला है।\n\n• भारत में: चुनाव आयोग द्वारा यदि पुनरीक्षण और सत्यापन नियमों में नरमी बरती जाती है, तो देश के अन्य राज्यों में चल रही ऐसी ही प्रक्रियाओं के दौरान भी मतदाताओं को राहत मिलने का एक स्पष्ट संदेश जाएगा। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ती है।\n• कर्नाटक में: राज्य के लगभग 1.5 करोड़ मतदाताओं पर अपना नाम कटने का तलवार लटक रही है, जिन्हें अब अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराने के लिए अतिरिक्त भागदौड़ करनी पड़ सकती है। यदि समय रहते नोटिस का जवाब नहीं दिया गया, तो स्थानीय नागरिकों को आगामी चुनावों में मतदान के अधिकार से वंचित होना पड़ सकता है।\n• शहरी क्षेत्रों में: बेंगलुरु और अन्य बड़े शहरों में रहने वाले उन नागरिकों को विशेष रूप से सतर्क रहना होगा जिन्होंने हाल ही में अपना घर या पता बदला है। वार्ड समितियों की बैठकों के जरिए उन्हें अपने दस्तावेज दुरुस्त कराने का एक नया अवसर मिल सकता है।\n• ग्रामीण क्षेत्रों में: गांवों के मतदाताओं को ग्रामसभाओं के माध्यम से अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और बीएलओ सत्यापन से छूटे नामों को पुन: जुड़वाने का मौका मिलने की संभावना मजबूत होगी।\n• समय सीमा: यदि चुनाव आयोग समय सीमा बढ़ाता है, तो मतदाताओं को अपने कागजात जुटाने और आपत्तियां दाखिल करने के लिए पर्याप्त वक्त मिल जाएगा, जिससे अनावश्यक प्रशासनिक अफरा-तफरी टल सकेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कर्नाटक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर किसने आवाज उठाई है?\nकर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।\n\n2. कितने मतदाताओं के नाम कटने का खतरा बताया गया है?\nप्रशासनिक प्रक्रियाओं और समय सीमा के अभाव के चलते लगभग 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा जताया गया है।\n\n3. बेंगलुरु में कितने मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया है?\nअकेले बेंगलुरु शहर में लगभग 46.88 लाख मतदाताओं को इस श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है।\n\n4. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र कब लिखा था?\nयह पत्र 25 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजा गया था।\n\n5. चुनाव आयोग के सामने मुख्य रूप से कितनी मांगें रखी गई हैं?\nमुख्यमंत्री ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं जिनमें समयसीमा बढ़ाना, वार्ड और ग्राम बैठकों का आयोजन, जवाब के लिए समय देना और अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती शामिल है।",
  "url": "https://trendkia.com/karnataka/dk-shivakumar-urges-election-commission-for-more-time-over-karnataka-voter-list-revision-risks-24441",
  "category": "कर्नाटक",
  "publishedAt": "2026-08-30",
  "tags": [
    "कर्नाटक",
    "डीके शिवकुमार",
    "चुनाव आयोग",
    "मतदाता सूची",
    "एसआईआर",
    "बेंगलुरु",
    "जयराम रमेश"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}