# हेब्बाल में 2.3 किलोमीटर टनल के लिए 1128 पेड़ गिराने की तैयारी पर फूटा गुस्सा

> बेंगलुरु के हेब्बाल में बनने वाले 2.3 किलोमीटर भूमिगत मार्ग के लिए 1,128 वृक्षों को काटने का प्रस्ताव सामने आया है, जिसके विरोध में स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने 278 पक्षी प्रजातियों और भूजल संकट का हवाला देते हुए मोर्चा खोल दिया है.

**Type:** article · **Category:** कर्नाटक · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/karnataka/hebbal-men-2-3-kilomitara-tanala-ke-lie-1128-pera-girane-ki-taiyari-para-phuta-gussa-36199 · **Language:** Hindi
**Tags:** बेंगलुरु, हेब्बाल, पर्यावरण, पेड़ों की कटाई, टनल प्रोजेक्ट, भूजल संकट

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बुनियादी ढांचे के विस्तार के नाम पर विशाल हरित आवरण को हटाने की रूपरेखा तैयार की गई है. हेब्बाल क्षेत्र में बनने वाले 2.3 किलोमीटर लंबे भूमिगत टनल मार्ग के निर्माण हेतु कुल 1,128 घने पेड़ों को जमींदोज करने की योजना बनाई गई है. इस परियोजना के तहत प्रत्येक 1 किलोमीटर टनल निर्माण के बदले लगभग 490 पूर्ण विकसित वृक्षों की बलि चढ़ाई जाएगी. इस कदम से बेल्लारी रोड, वेटरनरी कॉलेज परिसर और हेब्बाल झील से सटे प्राकृतिक क्षेत्रों का अस्तित्व खतरे में आ गया है. बेंगलुरु विकास प्राधिकरण यानी बीडीए की इस योजना के मद्देनजर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के ट्री ऑफिसर ने जनता से पेड़ों की कटाई को लेकर आधिकारिक आपत्तियां दर्ज कराने का नोटिस जारी किया है.

## नागरिकों ने जुटाए तथ्य और उठाया पारदर्शिता का मुद्दा
प्रशासनिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराने का नोटिस जारी होने के तुरंत बाद स्थानीय रहवासियों और पर्यावरण समर्थकों में असंतोष की लहर दौड़ गई. नागरिकों का मुख्य आरोप है कि संबंधित नागरिक निकाय के ऑनलाइन पोर्टल पर काटे जाने वाले पेड़ों की विशिष्ट प्रजातियों अथवा उनकी सही भौगोलिक स्थिति का कोई ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया. ठोस विवरण उपलब्ध न होने के कारण लोगों के लिए यह समझना असंभव हो गया कि वे किस आधार पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं. आधिकारिक जानकारी में स्पष्टता की कमी को देखते हुए आम जनता ने स्वयं मैदानी स्तर पर उतरने का निर्णय लिया.

बीते दो महीनों के दौरान 21 स्वयंसेवकों की एक टीम ने इस पूरे मार्ग का गहन सर्वेक्षण पूरा किया. ‘आई-नेचुरलिस्ट’ प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर नागरिकों ने बरगद, पीपल, फाइकस तथा कैननबॉल जैसे विशालकाय वृक्षों की सटीक स्थिति को मोबाइल कैमरों से जियोटैग किया. इसके अतिरिक्त पेड़ों पर रहने वाले दुर्लभ स्पॉटेड ऑउलेट्स यानी चित्तीदार उल्लुओं के ठिकानों की तस्वीरें भी संकलित की गईं, ताकि विकास योजनाओं के कारण होने वाले वास्तविक नुकसान की तस्वीर प्रशासन के सामने रखी जा सके.

## 278 पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक बसेरा और कट-एंड-कवर का प्रभाव
पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार हेब्बाल झील और वेटरनरी कॉलेज परिसर का यह हरा-भरा भूभाग वन्यजीवों और स्थानीय परिंदों के लिए एक स्वाभाविक ग्रीन कॉरिडोर के रूप में काम करता है. वैश्विक पक्षी अवलोकन डेटाबेस ‘ई-बर्ड’ के आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि हेब्बाल झील के निकट 183 और वेटरनरी कॉलेज परिसर में 95 पक्षी प्रजातियां दर्ज हैं, जिनका कुल योग 278 बैठता है. इस विशाल जैव विविधता वाले गलियारे पर अब बुलडोजर और निर्माण मशीनों का साया मंडरा रहा है.

परियोजना का निर्माण कट-एंड-कवर तकनीक की सहायता से किया जाना प्रस्तावित है. विशेषज्ञों ने चेताया है कि इस तकनीक में बड़े पैमाने पर गहरी खुदाई की जाती है, जिसके कारण दशकों पुरानी गहरी जड़ें पूरी तरह नष्ट हो जाएंगी. सतह पर कंक्रीट की परत बिछाने और गहरी जड़ों के उखड़ जाने से मिट्टी की प्राकृतिक अवशोषण क्षमता समाप्त हो जाएगी, जिससे इस पूरे इलाके का संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह असंतुलित हो जाएगा.

## शताब्दी पुराने वृक्ष और दुर्लभ वानस्पतिक धरोहर
नागरिकों द्वारा पूरे किए गए दो महीने के विस्तृत सर्वे से यह तथ्य उजागर हुआ है कि यह क्षेत्र केवल सामान्य झाड़ियों या छोटे पौधों का नहीं, बल्कि अत्यंत मूल्यवान पारिस्थितिक विरासत का केंद्र है. सर्वे के दौरान 40 स्वदेशी और 20 सजावटी वानस्पतिक प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई. इन पेड़ों में लगभग 100 वर्ष पुराना ऐतिहासिक बरगद का पेड़ भी शामिल है, जिस पर अब सीधे तौर पर कुल्हाड़ी चलने का खतरा बन गया है.

इस पूरे मार्ग पर जामुन, आंवला, करंज और रेन ट्री के साथ-साथ फाइकस परिवार के कई अहम वृक्ष मौजूद हैं. इनमें मैसूर अंजीर, क्लस्टर अंजीर और सफेद अंजीर प्रमुख हैं, जो स्थानीय स्तर पर कीड़ों, छोटे स्तनधारियों और अनगिनत पक्षियों के भोजन एवं सुरक्षित आश्रय का प्राथमिक स्रोत हैं. इन विशाल पेड़ों का हटना क्षेत्र की संपूर्ण खाद्य श्रृंखला को तहस-नहस कर देगा.

## भूजल पुनर्भरण प्रणाली पर मंडराता गंभीर संकट
पर्यावरण विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि सड़कों के चौड़ीकरण और सुरंग निर्माण के लिए हरित आवरण हटाने से शहर का जलस्तर पाताल में जा सकता है. वेटरनरी कॉलेज परिसर में मौजूद विशालकाय बरगद और पीपल के पेड़ों का गहरा रूट सिस्टम वर्षा जल को भूमि की गहराई तक उतारने यानी ग्राउंडवाटर रिचार्ज में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बेंगलुरु पहले से ही जल संकट की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में इस प्राकृतिक वाटर रिचार्ज तंत्र का टूटना संकट को और बढ़ा देगा.

स्थानीय निवासियों का कहना है कि आज के कंक्रीट से भरे घने शहर में ऐसे सदियों पुराने विशालकाय पेड़ों को दोबारा विकसित करने के लिए न तो जगह बची है और न ही समय. इसी कारण हेब्बाल जंक्शन से यूएएस स्टाफ क्वार्टर्स के बीच प्रस्तावित सड़क और टनल के वर्तमान अलाइनमेंट पर तुरंत पुनर्विचार किया जाना बेहद जरूरी है, ताकि शहर की हवा, पानी और अनमोल जैव विविधता दोनों की रक्षा हो सके.

## इसका आप पर असर
हेब्बाल टनल परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से शहर के पर्यावरण और दैनिक जीवन पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा.

- **भारत में:** तेजी से बढ़ते शहरी विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के दौरान हरित आवरण को बचाने की नीतिगत बहस तेज होगी. देश भर के नगर निकायों में विकास और पर्यावरण संतुलन को लेकर कड़े नागरिक नियम बनाने का दबाव बढ़ेगा.
- **बेंगलुरु में:** हेब्बाल क्षेत्र में 1,128 पेड़ कटने से गर्मियों में स्थानीय तापमान बढ़ेगा और प्रदूषण स्तर में इजाफा होगा. भूजल पुनर्भरण रुकने से आसपास के इलाकों में बोरवेल का जलस्तर और नीचे चला जाएगा, जिससे पानी की किल्लत बढ़ सकती है.
- **स्थानीय निवासियों के लिए:** नागरिक ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के ट्री ऑफिसर के समक्ष अपनी औपचारिक आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं. इसके जरिए परियोजना के रूट में बदलाव या पेड़ों को बचाने की मांग उठाई जा सकती है.
- **पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए:** 278 पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक बसेरा छिनने से इलाके में जैव विविधता का बड़ा नुकसान होगा. हेब्बाल झील और कॉलेज परिसर के बीच का नेचुरल ग्रीन कॉरिडोर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद बेंगलुरु विकास प्राधिकरण द्वारा हेब्बाल में 2.3 किलोमीटर लंबी टनल सड़क बनाने की योजना के कारण खड़ा हुआ है. परियोजना के लिए 1,128 पेड़ों को काटने का नोटिस जारी किया गया, लेकिन प्रभावित पेड़ों की प्रजातियों और सटीक स्थान की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई.

- **परियोजना की रूपरेखा:** बेंगलुरु में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए हेब्बाल क्षेत्र में कट-एंड-कवर तकनीक से अंडरग्राउंड टनल सड़क प्रस्तावित की गई है. इसी निर्माण के चलते बेल्लारी रोड, कॉलेज परिसर और झील के पास 1 किलोमीटर टनल पर 490 पेड़ हटाने की जरूरत बताई गई.
- **पारदर्शिता का अभाव:** ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के ट्री ऑफिसर ने जनता से आपत्तियां मांगने का नोटिस जारी किया, लेकिन पोर्टल पर पेड़ों का ब्योरा नहीं दिया गया. इस अधूरी जानकारी के कारण नागरिकों में अविश्वास और असंतोष गहरा गया.
- **नागरिकों का स्वत: संज्ञान:** सरकारी आंकड़ों के अभाव में 21 स्थानीय स्वयंसेवकों ने ‘आई-नेचुरलिस्ट’ प्लेटफॉर्म पर खुद दो महीने का फील्ड सर्वे किया. इस सर्वे ने 100 साल पुराने बरगद और 60 दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी साबित कर मामले को बड़ा मुद्दा बना दिया.
- **भूजल और पारिस्थितिक संवेदनशीलता:** हेब्बाल झील और वेटरनरी कॉलेज परिसर शहर के प्रमुख प्राकृतिक रिचार्ज जोन हैं. कंक्रीट बिछाने से भूजल प्रणाली के हमेशा के लिए नष्ट होने के वैज्ञानिक आकलन ने इस आंदोलन को और मजबूती दी.

## सवाल-जवाब

### 1. हेब्बाल में टनल प्रोजेक्ट की कुल लंबाई कितनी है?
हेब्बाल में प्रस्तावित इस अंडरग्राउंड टनल सड़क की कुल लंबाई 2.3 किलोमीटर है.

### 2. इस परियोजना के लिए कितने पेड़ काटे जाने का प्रस्ताव है?
परियोजना के निर्माण के लिए कुल 1,128 हरे-भरे पेड़ों को काटने की योजना बनाई गई है.

### 3. प्रति किलोमीटर टनल निर्माण पर औसतन कितने पेड़ कटेंगे?
इस परियोजना के अनुसार प्रत्येक 1 किलोमीटर लंबी टनल के निर्माण के लिए 490 पेड़ काटे जाएंगे.

### 4. पेड़ों की कटाई पर आपत्तियां मांगने वाला नोटिस किस विभाग ने जारी किया है?
यह नोटिस ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के ट्री ऑफिसर द्वारा जारी किया गया है.

### 5. नागरिकों ने किस प्लेटफॉर्म का उपयोग करके पेड़ों और पक्षियों का सर्वे किया?
स्थानीय नागरिकों ने ‘आई-नेचुरलिस्ट’ प्लेटफॉर्म का उपयोग कर 21 स्वयंसेवकों के साथ मिलकर जियोटैग्ड सर्वे पूरा किया.

### 6. इस क्षेत्र में कितनी पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं?
ई-बर्ड डेटाबेस के अनुसार हेब्बाल झील के पास 183 और वेटरनरी कॉलेज परिसर में 95 को मिलाकर कुल 278 पक्षी प्रजातियां दर्ज हैं.

### 7. सर्वे में कौन सा ऐतिहासिक पेड़ खतरे में पाया गया है?
नागरिकों के सर्वे में करीब 100 साल पुराना ऐतिहासिक बरगद का पेड़ और दुर्लभ स्पॉटेड ऑउलेट्स उल्लू का बसेरा खतरे में पाया गया है.

### 8. पर्यावरणविदों की मुख्य चिंता क्या है?
विशेषज्ञों का कहना है कि कट-एंड-कवर टनल निर्माण से पेड़ों की जड़ें उखड़ जाएंगी और शहर का भूजल रिचार्ज सिस्टम पूरी तरह तबाह हो जाएगा.

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