कर्नाटक के मंदिरों में रखे सोने का बनेगा पूरा हिसाब, गहनों के इस्तेमाल के लिए आएगी नई योजना कर्नाटक सरकार मंदिरों में रखे सोने और गहनों का पूरा रिकॉर्ड रखने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कहा कि इस सोने का उपयोग देवी-देवताओं के श्रृंगार के लिए किया जाएगा। कर्नाटक के मंदिरों में रखी सोने-चांदी की संपत्ति को लेकर राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। अब मंदिरों में जमा सोने को केवल तिजोरियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसके प्रबंधन और उपयोग के लिए एक नई योजना तैयार की जा रही है। इस व्यवस्था के तहत मंदिरों में मौजूद सभी सोने और आभूषणों का सटीक लेखा-जोखा रखा जाएगा, जिससे इनकी सुरक्षा पुख्ता हो सकेगी। सौंदत्ती मंदिर में विकास कार्यों का दौरा कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बेलगावी जिले के सौंदत्ती स्थित प्रसिद्ध रेणुका येल्लम्मा मंदिर के दौरे के दौरान यह अहम बात कही। इस मौके पर उन्होंने मंदिर परिसर में कई विकास कार्यों की आधारशिला रखी और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसी दौरान उन्होंने मंदिर के वित्तीय और भौतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट की। देवताओं के श्रृंगार में होगा सोने का उपयोग डी. के. शिवकुमार ने मुजराई मंत्री के. एस. बसवंतप्पा को निर्देश दिया है कि सौंदत्ती येल्लम्मा मंदिर में रखे करीब 42 किलोग्राम सोने का इस्तेमाल विधिवत रूप से देवी-देवताओं के श्रृंगार के लिए किया जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान एक बेहतर और दिव्य अनुभव प्राप्त हो सके। सुरक्षा और पारदर्शिता पर सरकार का जोर राज्य सरकार का मानना है कि मंदिरों में रखे कीमती सामान का पूरा रिकॉर्ड होने से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि चोरी या सोने के गायब होने जैसी आशंकाओं को भी पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा। मंदिरों की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसका सदुपयोग करने के लिए सरकार जल्द ही एक विशेष नीति लेकर आएगी, जिस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसका आप पर असर यह योजना कर्नाटक के धार्मिक स्थलों और श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। • कर्नाटक में: राज्यभर के मंदिरों में रखे सोने और आभूषणों का एक आधिकारिक और पारदर्शी डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे मंदिरों की संपत्तियों का दुरुपयोग रुकेगा और सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी। • श्रद्धालुओं के लिए: सौंदत्ती येल्लम्मा मंदिर और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर दर्शन करने आने वाले लोगों को देवी-देवताओं का बेहतर और भव्य श्रृंगार देखने को मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ मंदिरों की संपत्ति के बेहतर प्रबंधन और सुरक्षा की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। • सुरक्षा चिंताएं: मंदिरों में वर्षों से जमा अमूल्य आभूषणों और सोने के रिकॉर्ड के अभाव में उनके गायब होने का जोखिम बना रहता है। • संसाधनों का सदुपयोग: सरकार चाहती है कि तिजोरी में बंद रहने के बजाय इस सोने का उपयोग धार्मिक आयोजनों और देवताओं के श्रृंगार के लिए हो। • नई नीति का गठन: इसी उद्देश्य के तहत मुजराई विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर एक विशेष योजना रूपरेखा तैयार की जा रही है। सवाल-जवाब 1. कर्नाटक सरकार मंदिरों के सोने को लेकर क्या योजना बना रही है? सरकार मंदिरों में रखे सोने और गहनों का पूरा हिसाब रखने और उनका उपयोग देवी-देवताओं के श्रृंगार के लिए करने की योजना बना रही है। 2. डी. के. शिवकुमार ने किस मंदिर का दौरा किया था? उन्होंने बेलगावी जिले के सौंदत्ती स्थित रेणुका येल्लम्मा मंदिर का दौरा किया था। 3. सौंदत्ती येल्लम्मा मंदिर में लगभग कितना सोना मौजूद है? इस मंदिर में लगभग 42 किलोग्राम सोना रखा हुआ है। 4. इस सोने का उपयोग किस काम के लिए करने का निर्देश दिया गया है? इस सोने का इस्तेमाल देवी-देवताओं के उचित श्रृंगार के लिए करने का निर्देश दिया गया है। 5. इस पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी किस मंत्री को दी गई है? यह निर्देश मुजराई मंत्री के. एस. बसवंतप्पा को दिए गए हैं। https://trendkia.com/karnataka/karnataka-ke-mandiro-mein-rakhe-sone-ka-banega-pura-hisab-52115 TrendKia — Har trend, sabse pehle.