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  "type": "article",
  "title": "कर्नाटक में गन्ने के दाम पर तकरार, किसानों ने 5,500 रुपए की मांग को लेकर दी आंदोलन की चेतावनी",
  "summary": "कर्नाटक के गन्ना उत्पादकों ने बेलगावी में मिल मालिकों के 3,500 रुपए प्रति टन के प्रस्ताव को नकारते हुए कुल 5,500 रुपए प्रति टन की मांग रखी है और सरकार को नया अल्टीमेटम दिया है।",
  "content": "कर्नाटक के बेलगावी जिले में गन्ना उत्पादक किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच मूल्य निर्धारण को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है। लाभकारी खरीद मूल्य तय करने के लिए किसानों ने प्रशासन को नई समय-सीमा दे दी है। प्रदर्शनकारी किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि तय अवधि के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे और राज्यव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन छेड़ देंगे। 4 नवंबर को यह नई चेतावनी तब जारी की गई, जब लोक निर्माण विभाग के मंत्री और बेलगावी जिले के प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा बुलाई गई दो दौर की बातचीत पूरी तरह बेनतीजा साबित हुई। 3 नवंबर को आयोजित इन बैठकों में किसान प्रतिनिधियों और चीनी मिल प्रबंधन के बीच किसी भी बिंदु पर सहमति नहीं बन सकी थी।\n\nप्रस्ताव खारिज और दरों पर बड़ा अंतर\nजमीनी हालात की गंभीरता और किसानों के बढ़ते आक्रोश के बीच सतीश जारकीहोली बुधवार को चीनी मिल संचालकों के साथ नए सिरे से बातचीत की मेज पर हैं। किसान संघों ने पहले ही दो टूक कह दिया है कि जब तक उनकी अपेक्षा के अनुरूप दर तय नहीं होगी, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। बैठकों के दौरान मिल प्रबंधन ने किसानों को 3,500 रुपए प्रति टन की दर से भुगतान करने की पेशकश रखी, जिसे उत्पादकों ने फौरन ठुकरा दिया। किसानों का तर्क है कि बढ़ती लागत के मुकाबले यह दर बेहद कम है। आंदोलनकारी किसानों ने चीनी मिलों से 4,500 रुपए प्रति टन के भुगतान की मांग की है, साथ ही राज्य सरकार से 1,000 रुपए प्रति टन की अतिरिक्त सहायता की मांग जोड़ी है। इस प्रकार किसानों की कुल मांग 5,500 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है।\n\nकिसान नेतृत्व का कड़ा रुख\nवार्ता के बेनतीजा रहने पर किसान नेता चूनाप्पा पुजारी ने अपनी नाराजगी जाहिर की। चूनाप्पा पुजारी ने कहा कि बिना किसी ठोस फैसले के लगातार बैठकें बुलाने का कोई औचित्य नहीं है, किसान 3,500 रुपए प्रति टन का प्रस्ताव कतई स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि मुख्यमंत्री डीके. शिवकुमार आगे आएं और राज्य सरकार की ओर से 1,000 रुपए प्रति टन की सब्सिडी जारी करने का आधिकारिक ऐलान करें। उन्होंने सचेत किया कि यदि शासन ने किसानों की इस मांग को अनसुना करना जारी रखा, तो उसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मसले का समाधान न निकलने की स्थिति में कर्नाटक विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार को विधानसभा के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध का सामना करना पड़ेगा।\n\nकई जिलों में तेज हुआ विरोध प्रदर्शन\nगन्ने के मूल्य का यह असंतोष केवल बेलगावी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मैसूरु और मांड्या जैसे दक्षिणी जिलों में भी देखने को मिल रहा है। मैसूरु में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने उपायुक्त कार्यालय परिसर के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की, जिससे वहां अफरातफरी की स्थिति बन गई। वहीं मांड्या जिले में गन्ना उत्पादकों ने स्थानीय कन्नड़ कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना दिया और राज्य तथा केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की। बीते कुछ हफ्तों से पूरे कर्नाटक में आंदोलन की धार तेज हुई है। किसान लंबी पदयात्राएं कर रहे हैं, राज्यभर में विरोध मार्च निकाल रहे हैं और प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध कर रहे हैं। इससे पूर्व आंदोलनकारियों ने बेहतर दर की मांग उठाते हुए पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर 30 घंटे से अधिक समय तक चक्का जाम रखा था।\n\nपुरानी बैठकों के वादों पर अमल नहीं\nगन्ना खरीद दरों को लेकर यह गतिरोध काफी समय से खिंचता चला आ रहा है। 26 अक्टूबर को बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौधा में सरकार, मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत वार्ता हुई थी, लेकिन वह बैठक भी बेनतीजा रही थी। उस दौरान सरकार की ओर से चीनी मिलों से अपील की गई थी कि वे किसानों को प्रति टन 250 रुपए का अतिरिक्त भुगतान करें। हालांकि कई मिलों ने इस व्यवस्था को धरातल पर लागू नहीं किया, जिससे किसानों का असंतोष और ज्यादा भड़क गया और वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए।\n\nइसका आप पर असर\nगन्ना खरीद मूल्य पर जारी गतिरोध से राज्य में चीनी उत्पादन, मिल पेराई सत्र और सार्वजनिक आवागमन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।\n\n• भारत में: कर्नाटक देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल है, जिससे पेराई में देरी होने पर देशव्यापी आपूर्ति और थोक बाजार दरों पर प्रभाव पड़ सकता है। अन्य राज्यों के किसान संगठन भी कर्नाटक के इस मूल्य गतिरोध पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।\n• कर्नाटक में: बेलगावी, मैसूरु और मांड्या जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में किसानों के सड़कों पर उतरने से राष्ट्रीय राजमार्गों और परिवहन मार्गों पर व्यवधान पैदा हो सकता है। यदि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र तक समाधान नहीं निकला, तो सरकारी कामकाज और प्रशासनिक तंत्र के सामने कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।\n• गन्ना उत्पादकों पर: 3,500 रुपए के प्रस्ताव और 5,500 रुपए की मांग के बीच 2,000 रुपए प्रति टन का भारी अंतर है, जिससे किसानों की फसल आय पर सीधा असर पड़ेगा। लागत की भरपाई न होने की स्थिति में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।\n• उपभोक्ताओं पर: मिलों और किसानों के बीच विवाद लंबा खिंचने पर चीनी मिलों का कामकाज बाधित हो सकता है, जिससे आगामी महीनों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। समय रहते समझौता होना उपभोक्ताओं के लिए भी राहत की बात होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nगन्ना किसानों और मिल प्रबंधन के बीच यह टकराव खरीद दरों के भारी अंतर और पूर्व में बनी सहमतियों के क्रियान्वयन न होने के कारण पैदा हुआ है।\n\n• सीधा कारण: चीनी मिलों ने खरीद के लिए 3,500 रुपए प्रति टन की पेशकश की है, जिसे किसानों ने लागत के मुकाबले बहुत कम बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। किसान मिलों से 4,500 रुपए और राज्य सरकार से 1,000 रुपए सब्सिडी समेत कुल 5,500 रुपए प्रति टन की मांग कर रहे हैं।\n• पूर्व समझौतों की विफलता: 26 अक्टूबर को सुवर्ण विधान सौधा में हुई बैठक में सरकार ने मिलों से किसानों को 250 रुपए प्रति टन अतिरिक्त देने को कहा था, लेकिन कई मिलों ने इस व्यवस्था को लागू नहीं किया। इस वादाखिलाफी से किसानों का अविश्वास और असंतोष चरम पर पहुंच गया।\n• वार्ता में गतिरोध: 3 नवंबर को मंत्री सतीश जारकीहोली की अध्यक्षता में हुई दो दौर की वार्ताएं किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकीं, जिसके बाद 4 नवंबर को किसानों ने आंदोलन तेज करने का अल्टीमेटम दिया। ठोस निर्णय के अभाव ने आंदोलनकारियों को जेल भरो प्रदर्शन के लिए विवश कर दिया है।\n• राज्यव्यापी विस्तार: बेलगावी में शुरू हुआ विरोध अब मैसूरु और मांड्या तक फैल चुका है, जहां किसान और स्थानीय संगठन प्रशासनिक दफ्तरों का घेराव कर नीतिगत सुधार की मांग कर रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कर्नाटक के गन्ना किसान कितनी कीमत की मांग कर रहे हैं?\nकिसान चीनी मिलों से 4,500 रुपए प्रति टन और राज्य सरकार से 1,000 रुपए प्रति टन सब्सिडी समेत कुल 5,500 रुपए प्रति टन की मांग कर रहे हैं।\n\n2. चीनी मिल मालिकों ने किसानों को क्या दर प्रस्तावित की थी?\nचीनी मिल प्रबंधन ने किसानों को 3,500 रुपए प्रति टन भुगतान करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे किसानों ने पूरी तरह ठुकरा दिया।\n\n3. किसानों ने अपनी मांगें न माने जाने पर क्या चेतावनी दी है?\nकिसानों ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि मांगें पूरी न होने पर वे बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे और 'जेल भरो' आंदोलन तेज करेंगे।\n\n4. बेलगावी में सुलह के लिए किन मंत्री की अध्यक्षता में बैठकें हुईं?\nलोक निर्माण विभाग और बेलगावी जिले के प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली ने चीनी मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की अध्यक्षता की।\n\n5. 26 अक्टूबर की बैठक में क्या सिफारिश की गई थी?\n26 अक्टूबर को सुवर्ण विधान सौधा में हुई बैठक में सरकार ने मिलों से किसानों को प्रति टन 250 रुपए अतिरिक्त देने का आग्रह किया था, जिसे कई मिलों ने लागू नहीं किया।\n\n6. बेलगावी के अलावा किन अन्य जिलों में विरोध प्रदर्शन देखा गया?\nबेलगावी के अतिरिक्त मैसूरु और मांड्या जिलों में भी किसानों ने उपायुक्त कार्यालयों के बाहर उग्र प्रदर्शन किए हैं।",
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