कर्नाटक में किसान ने जनसुनवाई के दौरान रखी शादी की गुहार, विवाह संकट पर मांगी सरकारी मदद कर्नाटक के मैसूरु में एक किसान ने प्रजा सेवा कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र के अविवाहित पुरुषों के लिए दुल्हन तलाशने में मदद मांगी। सार्वजनिक प्रतिनिधि अक्सर आम नागरिकों की बुनियादी शिकायतें सुनने के लिए संवाद सत्र आयोजित करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में नागरिक प्रायः पेयजल आपूर्ति, खस्ताहाल सड़कों, विद्युत कटौती अथवा सामाजिक सुरक्षा पेंशन में देरी जैसे प्रशासनिक मसले लेकर हाजिर होते हैं। हालांकि, कर्नाटक के भीतर आयोजित एक जनसंपर्क सभा में उस समय अजब स्थिति बन गई, जब एक काश्तकार ने प्रशासनिक दिक्कतों के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में पसरे वैवाहिक संकट का मामला शीर्ष नेतृत्व के सम्मुख रख दिया। प्रजा सेवा कार्यक्रम में काश्तकार ने उठाया वैवाहिक संकट यह घटनाक्रम शनिवार, 3 अक्टूबर को मैसूरु जिले के अंतर्गत आने वाले पिरियापटना क्षेत्र में आयोजित प्रजा सेवा कार्यक्रम के दौरान घटित हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित एक किसान ने मंच पर पहुंचकर सीधे गुहार लगाई कि कृषि कार्य में लगे नवयुवकों के साथ कोई भी कन्या विवाह करने को तैयार नहीं है। किसान ने जोर देकर कहा कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कई पुरुषों के पास खुद की उपजाऊ जमीन और रिहायशी मकान उपलब्ध हैं, लेकिन इसके उपरांत भी उन्हें जीवनसंगिनी नहीं मिल पा रही है। इस खुले संवाद से जुड़ा एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। बढ़ती उम्र और मानसिक दबाव की गंभीर व्यथा काश्तकार ने सभा के दौरान बताया कि देहात में हालात इतने जटिल हो चुके हैं कि 35 से 40 वर्ष की आयु सीमा पार करने के बाद भी बहुतेरे पुरुषों का घर नहीं बस सका है। स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए उसने कहा, "35 से 40 साल की उम्र के कई ऐसे पुरुष हैं, जिनकी शादी नहीं हो पा रही है और वे आत्महत्या करने के बारे में सोच रहे हैं." जब उससे यह पूछा गया कि वह प्रशासन से असल में क्या अपेक्षा रखता है, तो उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को ऐसा माहौल या नीति बनानी चाहिए जिससे महिलाएं कृषक समुदाय में विवाह के लिए आगे आएं। उसने रेखांकित किया कि यह परेशानी किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि लाखों लोगों के जीवन और अस्तित्व से जुड़ी है। वेतनभोगी रोजगार की प्राथमिकता बनी बड़ी रुकावट काश्तकार ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि जो अन्नदाता पूरे समाज के भोजन का प्रबंध करता है, उसी को अपनी संतान सौंपने में लोग संकोच कर रहे हैं। उसने सामाजिक सोच में आए बदलाव का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि कन्या पक्ष के परिवार अब सरकारी सेवा, कॉरपोरेट दफ्तरों अथवा सुनिश्चित मासिक वेतन वाले दूल्हों को ही तरजीह देते हैं। निजी खेती करने वालों की आय अनिश्चित मानी जाती है, जिसके चलते उन्हें रिश्ते मिलने बंद हो गए हैं। इस अप्रत्याशित मांग को सुनकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध रह गए। ध्यातव्य है कि कर्नाटक के ग्रामीण समाज में किसानों के विवाह में आ रही रुकावटों का प्रश्न पहले भी सार्वजनिक विमर्श में उठता रहा है। इसका आप पर असर यह घटनाक्रम ग्रामीण युवाओं और कृषि परिवारों के समक्ष उपस्थित गंभीर सामाजिक बदलावों को उजागर करता है। • भारत में: कृषि क्षेत्र में अनिश्चित आय के चलते देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह योग्य युवाओं के रिश्ते तय होने में बाधाएं बढ़ रही हैं। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि आगामी समय में परिवारों का ध्यान कृषि के बजाय स्थिर वेतनभोगी रोजगार सुरक्षित करने की तरफ और अधिक केंद्रित होगा। • कर्नाटक में: मैसूरु और आसपास के जिलों में जमीन मालिक होने के बावजूद युवाओं को वैवाहिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण युवाओं के इस खुले आग्रह के बाद राज्य स्तर पर कृषि अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो सकती हैं। • कृषक परिवारों पर प्रभाव: खेती किसानी से जुड़े परिवारों को अपने बेटों के विवाह के लिए बिचौलियों और प्रयासों पर अतिरिक्त धन व्यय करना पड़ रहा है। सामाजिक प्राथमिकताओं के कारण खेती से जुड़े युवाओं में मानसिक तनाव और चिंता लगातार बढ़ रही है। • आगामी बदलाव: प्रशासनिक मंचों पर इस तरह की सामाजिक समस्याओं के आने से ग्रामीण जनसांख्यिकी और आजीविका नीतियों पर पुनः विचार की मांग तेज हो सकती है। युवा पीढ़ी अब खेती छोड़कर नियमित आय वाले काम धंधों की तलाश में शहरों का रुख तेज कर सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम सामाजिक प्राथमिकताओं में आए बड़े बदलाव और कृषि आय से जुड़ी अनिश्चितता के कारण घटित हुआ। • सीधा कारण: शनिवार, 3 अक्टूबर को मैसूरु के पिरियापटना में आयोजित प्रजा सेवा जनसुनवाई में एक किसान ने अपनी व्यथा सीधे मंच पर प्रस्तुत की। वह खेती करने वाले युवाओं के लिए दुल्हन न मिल पाने की परेशानी से त्रस्त था। • सामाजिक प्राथमिकताओं में बदलाव: कन्या पक्ष के परिवार अब अनिश्चित कृषि आय वाले लड़कों के स्थान पर सरकारी, कॉरपोरेट अथवा नियमित वेतन वाले दूल्हों को स्पष्ट प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी कारण जमीन और मकान होने के बावजूद किसानों के रिश्ते तय नहीं हो पा रहे हैं। • कर्नाटक में पहले का संदर्भ: कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में युवा काश्तकारों के लिए विवाह प्रस्ताव न मिलने का संकट कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह समस्या राज्य में पहले भी कई अवसरों पर सामने आ चुकी है। सवाल-जवाब 1. किसान ने जनसुनवाई में क्या मांग रखी? किसान ने खेती करने वाले पुरुषों के लिए दुल्हन तलाशने में मदद करने और इस सामाजिक समस्या का समाधान निकालने की मांग की। 2. यह घटना किस दिन और कहां हुई? यह घटना शनिवार, 3 अक्टूबर को कर्नाटक के मैसूरु जिले में स्थित पिरियापटना के प्रजा सेवा कार्यक्रम में हुई। 3. किसान के अनुसार विवाह न होने का मुख्य कारण क्या है? लड़कियों के परिवार अब खेती करने वालों के बजाय सरकारी, कॉरपोरेट या नियमित वेतन वाली नौकरी वाले दूल्हे पसंद करते हैं। 4. किसान ने पुरुषों की उम्र और स्थिति के बारे में क्या बताया? उसने बताया कि 35 से 40 वर्ष की उम्र के कई पुरुष अविवाहित हैं और गंभीर मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। https://trendkia.com/karnataka/karnataka-men-kisana-ne-janasunavai-ke-daurana-rakhi-shadi-ki-guhara-vivaha-snkata-para-mangi-sarakari-madada-43596 TrendKia — Har trend, sabse pehle.