# कर्नाटक में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फर्जी आपत्तियां देने वालों पर दर्ज होगी एफआईआर

> कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने वोटर सूची से दूसरों के नाम कटवाने के मकसद से गलत दस्तावेज और फर्जी आपत्तियां लगाने वालों के खिलाफ कानूनी मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.

**Type:** article · **Category:** कर्नाटक · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/karnataka/karnataka-men-matadata-suchi-se-nama-hatane-ke-lie-pharji-apattiyan-dene-valon-para-darja-hogi-fir-41463 · **Language:** Hindi
**Tags:** कर्नाटक, मतदाता सूची, चुनाव आयोग, डीके शिवकुमार, वोटर लिस्ट, फर्जी फॉर्म

कर्नाटक के चुनावी तंत्र ने मतदाता नामावलियों में अनुचित हस्तक्षेप करने की कोशिशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। राज्य निर्वाचन मशीनरी ने साफ निर्देश दिया है कि जो लोग अनधिकृत तरीके से दूसरों के नाम चुनावी सूची से विलोपित कराने के लिए झूठे आवेदन लगा रहे हैं, उनके विरुद्ध दंडात्मक प्रावधानों के तहत अभियोग दर्ज कराया जाएगा। यह कड़ा निर्देश राज्य के सभी दो सौ चौबीस विधानसभा क्षेत्रों में तैनात निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और समूचे जिला निर्वाचन तंत्र को तत्काल अमल के लिए प्रेषित किया गया है।

## झूठी आपत्तियों पर लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत नकेल
निर्वाचन अधिकारियों की प्राथमिक पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ है कि कई हलकों में थोक के रूप में नाम विलोपन के आवेदन दाखिल किए जा रहे थे। जब ऐसे भारी तादाद में आए प्रपत्रों की बुनियादी जांच की गई, तो उनमें भारी विसंगतियां पाई गईं और वे नियमानुकूल नहीं थे। चुनावी प्राधिकरण ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति सायास मिथ्या घोषणा करता है अथवा असत्य ब्योरा पेश करता है, तो उसके विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम उन्नीस सौ पचास की धारा इकत्तीस के अंतर्गत औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

प्रशासनिक अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि कानूनी कार्रवाई से पूर्व निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियमावली उन्नीस सौ साठ के नियम बीस के प्रावधानों का पालन करते हुए गहन तहकीकात पूरी की जाए। इसके अतिरिक्त निर्वाचन तंत्र ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह दंडात्मक व्यवस्था केवल नाम हटाने संबंधी आवेदन तक सीमित नहीं रहेगी। यदि किसी व्यक्ति ने नए पंजीकरण, विदेशी नागरिकों के नाम दर्ज कराने अथवा प्रविष्टियों में सुधार के लिए निर्धारित प्रपत्रों में भी जानबूझकर भ्रामक सूचनाएं दीं, तो उन पर भी समान गंभीरता से विधिक कार्रवाई होगी।

## राजनीतिक गलियारों में गहराया साजिश का विवाद
मतदाता नामावली के पुनरीक्षण को लेकर छिड़ा यह प्रशासनिक संग्राम वास्तव में राज्य के राजनीतिक पटल पर हुए गंभीर खुलासों के बाद तेज हुआ है। गुरुवार, एक अक्टूबर दो हजार छब्बीस को इस मामले में तीखा हमला बोलते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया था कि राज्य में करीब पचास लाख वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का संगठित षड्यंत्र चल रहा है। उन्होंने आशंका जताई थी कि विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के बहाने चुनिंदा सामाजिक तबकों को मताधिकार सूची से बाहर धकेलने का प्रयास हो रहा है।

दावे के मुताबिक समाज के कमजोर तथा अल्पसंख्यक वर्गों को लक्ष्य बनाकर पहले से मुद्रित अथवा भरे हुए प्रपत्र व्यापक स्तर पर परिचालित किए जा रहे थे। इस संदर्भ में कुछ इलाकों के विशिष्ट आंकड़े भी सामने रखे गए, जिनमें बाबलेश्वर क्षेत्र में सोलह सौ से अधिक, विजयपुरा में चौदह हजार तथा भालकी विधानसभा क्षेत्र में बत्तीस सौ चौवालीस संदेहास्पद आवेदन पकड़े जाने की बात कही गई। इन आंकड़ों के आधार पर चुनावी निगरानी संस्था से तुरंत पुलिस केस दर्ज करने और साजिशकर्ताओं को हिरासत में लेने की मांग उठाई गई थी।

## आम मतदाताओं के नागरिक अधिकारों की सुरक्षा
प्रशासन द्वारा मुकदमा दर्ज कराने के इस स्पष्ट फरमान से आम नागरिकों के मताधिकार को एक मजबूत सुरक्षा कवच मिलेगा। पूर्व में अक्सर यह आशंका बनी रहती थी कि संगठित तरीके से आपत्तियां दर्ज कराकर पात्र नागरिकों के नाम चुनावी सूची से चुपचाप हटवा दिए जाते थे। अब जबकि प्रत्येक संदिग्ध आवेदन की प्रामाणिकता की पड़ताल अनिवार्य कर दी गई है और गलत ब्योरा देने पर जेल तथा कानूनी मुकदमे का शिकंजा तय है, तब शरारती तत्वों द्वारा थोक में विलोपन आवेदन जमा करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगेगी। प्रत्येक वास्तविक मतदाता का संवैधानिक अधिकार अब प्रशासनिक जांच और कानूनी पहरेदारी से सुरक्षित रहेगा।

## इसका आप पर असर
इस आदेश का सीधा असर हर उस नागरिक पर पड़ेगा जो मतदाता सूची में अपना नाम सुरक्षित रखना चाहता है।

- **कर्नाटक में:** राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में अब किसी का भी नाम बिना गहन पड़ताल के वोटर लिस्ट से हटाया नहीं जा सकेगा। आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र के ईआरओ कार्यालय अथवा ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपनी मतदाता प्रविष्टि की पुष्टि कर लें।
- **भारत में:** चुनावी प्रक्रियाओं में दुर्भावनापूर्ण थोक आपत्तियों पर रोक लगने से पूरे देश में मतदाता सूची की निष्पक्षता का मानक मजबूत होगा। अन्य राज्यों में भी चुनावी सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान फर्जी नाम विलोपन पर लगाम लगाने के लिए ऐसी सख्त प्रशासनिक मिसालें अपनाई जा सकेंगी।
- **आवेदकों के लिए चेतावनी:** जो लोग दूसरों के नाम हटवाने या गलत जानकारी देने के लिए फॉर्म जमा करते हैं, उन्हें अब जेल और कानूनी मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। किसी भी नागरिक का नाम कटवाने के लिए आपत्ति दर्ज करते समय पुख्ता सबूत और सत्य घोषणा पत्र होना अनिवार्य होगा।
- **पारदर्शिता में सुधार:** अधिकारियों को हर आपत्ति पर नियम 20 के तहत विस्तृत जांच करनी होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर मनमानी बंद होगी। वास्तविक मतदाताओं को बिना कारण बताए सूची से बाहर करने के जोखिम में भारी कमी आएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
कर्नाटक में मतदाता नामावलियों को लेकर यह सख्त कानूनी रुख इसलिए अपनाना पड़ा क्योंकि कई क्षेत्रों में अवैध रूप से थोक में नाम विलोपन के आवेदन जमा किए जाने की घटनाएं सामने आई थीं।

- **थोक आपत्तियों का खुलासा:** चुनाव अधिकारियों की प्राथमिक छानबीन में यह पकड़ में आया कि कई विधानसभाओं में बिना वैध आधार के बड़ी संख्या में प्रपत्र जमा किए गए थे। इन आवेदनों में दर्ज जानकारियां पूरी तरह त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद पाई गईं।
- **राजनीतिक विवाद और गंभीर आरोप:** राज्य नेतृत्व द्वारा लगभग पचास लाख मतदाताओं को साजिश के तहत सूची से बाहर किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया गया। प्रेस वार्ता के माध्यम से हजारों संदेहास्पद फॉर्मों के पुख्ता आंकड़े सार्वजनिक किए गए।
- **चुनावी शुचिता की रक्षा:** चुनाव निगरानी संस्था पर यह संवैधानिक दायित्व है कि किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार दुर्भावनापूर्ण तरीके से न छीना जाए। इसलिए नियम विरुद्ध काम करने वाले तत्वों पर सीधे आपराधिक केस दर्ज कराने का सख्त निर्णय लिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या बड़ा आदेश दिया है?
उन्होंने फर्जी या गलत आपत्तियां देकर मतदाता सूची से दूसरों के नाम कटवाने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है.

### 2. झूठे आवेदन देने वालों पर किस कानून के तहत कार्रवाई होगी?
ऐसे आवेदकों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

### 3. डीके शिवकुमार ने इस मामले में क्या आरोप लगाए थे?
उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य में करीब 50 लाख वैध मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है.

### 4. क्या यह सख्त नियम सिर्फ नाम कटवाने वाले फॉर्म पर ही लागू होगा?
नहीं, यह कार्रवाई नाम जोड़ने, प्रवासी वोटर या विवरण संशोधन से जुड़े किसी भी फॉर्म में गलत जानकारी देने वालों पर भी लागू होगी.

### 5. किन क्षेत्रों में भारी संख्या में संदेहास्पद फॉर्म पकड़े जाने का दावा किया गया?
दावे के अनुसार बाबलेश्वर में 1600 से अधिक, विजयपुरा में 14000 और भालकी में 3244 संदिग्ध आवेदन पकड़े गए.

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