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  "type": "article",
  "title": "कर्नाटक में वेटरनरी अफसर भर्ती में भारी धांधली, करोड़ों की रिश्वत और विला में पेपर लीक की खुली पोल",
  "summary": "कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ है, जिसमें अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से उम्मीदवारों को अवैध तरीके से पेपर मुहैया कराए गए थे।",
  "content": "कर्नाटक लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में वित्तीय लेनदेन और संगठित साजिश की परतें लगातार खुल रही हैं। जांच दल को उम्मीदवारों द्वारा सीधे नकद दिए गए 60 लाख रुपये और बैंक खातों के जरिए स्थानांतरित किए गए लगभग 92 लाख रुपये का सुराग मिला है। इस मामले में परीक्षा नियंत्रक रहे आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 29 अगस्त को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद 31 अगस्त को इस पूरे नेटवर्क में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले बसवराज कन्नाले को पकड़ा गया।\n\nविला में बिठाकर कराई गई थी लीक प्रश्नों की तैयारी\nजांच के दायरे में आए 40 उम्मीदवारों से सघन पूछताछ की गई, जिसमें से 29 अभ्यर्थियों को औपचारिक रूप से आरोपी बनाया गया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, हर प्रश्नपत्र के लिए उम्मीदवारों को 60 से 80 संभावित सवाल पहले ही थमा दिए गए थे। इतना ही नहीं, परीक्षा से पहले इन अभ्यर्थियों को देवनहल्ली के निकट स्थित तीन निजी विला में ठहराया गया था, जहां उन्हें लीक हुए सवालों के आधार पर विशेष कोचिंग दी गई थी।\n\nरिश्वत की रकम से आभूषण खरीद और खातों पर पाबंदी\nइस फर्जीवाड़े में एकत्र की गई रिश्वत की रकम को ठिकाने लगाने के लिए कई वित्तीय रास्ते अपनाए गए। लेन-देन का एक बड़ा हिस्सा तिलकवाड़ी स्थित ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते के जरिए संचालित किया गया था। इस अवैध धन में से 22 लाख रुपये खर्च करके ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के एक करीबी मित्र के लिए हीरे का हार खरीदा गया था। अधिकारियों ने विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब 1.40 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कर दी है, जबकि तलाशी के दौरान 5.76 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।\n\nलुक-आउट सर्कुलर और कानूनी शिकंजा\nमामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक लोक सेवा आयोग के पूर्व प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार, पूर्व सदस्य शांता होसामनी तथा संबंधित बैंक के प्रमुख पदाधिकारियों के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं ताकि वे देश छोड़कर न जा सकें। इस बीच, अदालत ने साहूकार, कन्नाले और कई संदिग्ध उम्मीदवारों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। वहीं गिरफ्तार अधिकारी गंगवार की जमानत अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई तय की गई है।\n\nपरीक्षा से लेकर जांच तक का पूरा घटनाक्रम\nयह पूरा विवाद 400 पदों के लिए 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई पशु चिकित्सा अधिकारी परीक्षा से जुड़ा हुआ है। जब 17 जुलाई को इस भर्ती की अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई, तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने लगे। आरोप लगे कि सीटों का सौदा बिचौलियों के माध्यम से 80 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक में किया जा रहा था। नतीजतन, पूरे राज्य में अभ्यर्थियों और जनसंगठनों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए आयोग ने चयन सूची पर रोक लगा दी और राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच सीआईडी को सौंप दी, जिसने कई एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ शुरू की।\n\nइसका आप पर असर\nइस जांच और चयन प्रक्रिया के रुकने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और व्यवस्था की पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• कर्नाटक में: पशु चिकित्सा अधिकारी के 400 पदों पर अटकी भर्ती प्रक्रिया के कारण चयनित और प्रतीक्षारत उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है। जब तक सीआईडी अपनी कानूनी प्रक्रिया और जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक इन पदों पर नई नियुक्तियां पूरी तरह ठप रहेंगी।\n• परीक्षार्थियों के लिए: सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले ईमानदार उम्मीदवारों के लिए चयन मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों को अब आयोग के नए नियमों और पुनर्परीक्षा की संभावित आधिकारिक घोषणाओं पर कड़ी नजर रखनी होगी।\n• जवाबदेही पर असर: आयोग के उच्चाधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई से भविष्य की परीक्षाओं में निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल पहले से कहीं अधिक कड़े होने तय हैं। आने वाली भर्ती प्रक्रियाओं में डिजिटल सुरक्षा और प्रश्नपत्र वितरण के कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं।\n• वित्तीय जांच का दायरा: गैर-कानूनी लेनदेन में शामिल बैंक खातों के फ्रीज होने से संदिग्धों की संपत्तियों की जब्ती और तेज होगी। परीक्षा में अवैध रूप से धन देने वाले अभ्यर्थियों को भी कानूनी मुकदमों और आयोग की स्थायी अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घोटाला सरकारी पदों की भारी मांग और आयोग के भीतर मौजूद उच्चाधिकारियों तथा बिचौलियों की मिलीभगत के कारण सामने आया। चयन सूची आते ही बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के प्रमाण मिलने लगे जिससे पूरा तंत्र उजागर हुआ।\n\n• प्रश्नपत्र तक सीधी पहुंच: परीक्षा नियंत्रक जैसे शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति की कथित संलिप्तता ने गोपनीय प्रश्नों को परीक्षा से पहले हासिल करना संभव बनाया। इस आंतरिक पहुंच के कारण हर पेपर के 60 से 80 सवाल बिचौलियों तक पहुंचाए गए।\n• संगठित दलाली तंत्र: बिचौलियों ने मोटी रकम के बदले अभ्यर्थियों से संपर्क साधकर सीटों का सौदा तय किया। इन उम्मीदवारों को अलग-थलग विला में रखकर सवालों के जवाब रटाने का सुनियोजित ढांचा तैयार किया गया था।\n• जनविरोध और विसंगतियां: 17 जुलाई को जारी चयन सूची में असामान्य परिणामों के कारण छात्रों ने व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए। राज्यभर में फैले इस असंतोष के दबाव में आकर आयोग को सूची रद्द कर मामले की जांच विशेष एजेंसी को सौंपनी पड़ी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कर्नाटक पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा कब आयोजित की गई थी?\nयह परीक्षा 400 पदों को भरने के लिए 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई थी।\n\n2. इस मामले में गिरफ्तार किए गए आईएएस अधिकारी का क्या नाम है?\nपूर्व परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को इस मामले में 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।\n\n3. उम्मीदवारों को लीक प्रश्नों की तैयारी कहां कराई गई थी?\nअभ्यर्थियों को देवनहल्ली के पास स्थित तीन निजी विला में ठहराकर 60 से 80 प्रश्नों की विशेष कोचिंग दी गई थी।\n\n4. जांचकर्ताओं ने अब तक कितनी संपत्ति और नकदी पर कार्रवाई की है?\nअधिकारियों ने बैंक खातों में जमा 1.40 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं, 5.76 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं और 22 लाख रुपये के हीरे के हार की खरीद का पता लगाया है।\n\n5. किन अधिकारियों के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं?\nआयोग के पूर्व प्रमुख शिवशंकरप्पा साहूकार, पूर्व सदस्य शांता होसामनी और सहकारी बैंक के पदाधिकारियों के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किए गए हैं।",
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  "category": "कर्नाटक",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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