# कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु में दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर को दी मंजूरी, सफर के लिए देना होगा टोल टैक्स

> कर्नाटक सरकार बेंगलुरु के भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए 46.5 किलोमीटर लंबे दो एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार करने जा रही है, जिन पर 10 किमी से अधिक दूरी तय करने वाले वाहनों से टोल वसूला जाएगा।

**Type:** article · **Category:** कर्नाटक · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/karnataka/karnataka-sarakara-ne-bengaluru-men-do-bare-eliveteda-koridora-ko-di-mnjuri-saphara-ke-lie-dena-hoga-tola-taiksa-42068 · **Language:** Hindi
**Tags:** बेंगलुरु ट्रैफिक, एलिवेटेड कॉरिडोर, कर्नाटक सरकार, टोल टैक्स, यशवंतपुर, केआरपुरम, कनकपुरा रोड, सड़क बुनियादी ढांचा

सड़क पर घंटों रेंगते वाहनों की समस्या से जूझ रहे बेंगलुरु के बाशिंदों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। कर्नाटक प्रशासन ने शहर के दो प्रमुख व्यस्त मार्गों पर आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर नेटवर्क बिछाने की योजना को रफ्तार दी है। इस विशाल परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद वाहन चालकों को जाम से मुक्ति तो मिलेगी, मगर इस सुगम सफर की एवज में उन्हें अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ेगी। राज्य के वित्त विभाग की आधिकारिक योजना के तहत इस नए फ्लाईवे ढांचे पर आवागमन पूरी तरह यूजर चार्ज यानी पथकर व्यवस्था पर निर्भर करेगा। हालांकि राहत की बात यह रखी गई है कि जो लोग केवल छोटी दूरी का सफर तय करेंगे, उन्हें इस टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

## बी-स्माइल के जरिए बूट मॉडल पर शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया
शहरी विकास विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के अनुसार इस पूरी अवसंरचना को बेंगलुरु स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) के तत्वावधान में अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस संबंध में दो अलग-अलग टेंडर औपचारिक तौर पर आमंत्रित किए जा चुके हैं। कुल 46.5 किलोमीटर की इस संयुक्त लंबाई वाले प्रोजेक्ट को बिल्ड ऑन ऑपरेट ट्रांसफर (BOOT) व्यवस्था के तहत निजी सहभागिता से विकसित किया जाना तय हुआ है। परियोजना को वित्तीय रूप से व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से कुल निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार सीधे तौर पर उपलब्ध कराएगी, जबकि शेष 60 फीसदी पूंजी विकासकर्ता टोल संग्रहण के जरिए सड़क का संचालन करके वसूल करेंगे।

## दो प्रमुख दिशाओं में बिछेगा ओवरहेड सड़कों का जाल
प्रस्तावित योजना के अंतर्गत शहर को दो अलग-अलग हिस्सों में जोड़ने वाले कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। इनमें से पहला खंड यशवंतपुर इलाके से शुरू होकर केआरपुरम तक जाएगा। लगभग 28 किलोमीटर की लंबाई वाला यह मार्ग शहर के उत्तर और पूर्वी हिस्सों के बीच की आवाजाही को बेहद आसान बना देगा। वहीं दूसरा गलियारा मारेनहल्ली मेन रोड को कनकपुरा मेन रोड से सीधे जोड़ेगा, जिसकी कुल माप 18.5 किलोमीटर तय की गई है। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब कोई वाहन चालक इन एलिवेटेड मार्गों पर 10 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगा, तभी उस पर टोल लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त शहर के भीतर 7 किलोमीटर के एक अन्य छोटे एलिवेटेड कॉरिडोर का भी मसौदा तैयार है, मगर 10 किलोमीटर की न्यूनतम सीमा पूरी न होने की वजह से उस पर टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा।

## करीब 5,820 करोड़ रुपये का कुल बजट अनुमान
वित्त विभाग की वित्तीय गणनाओं के मुताबिक दोनों कॉरिडोर के निर्माण पर लगभग 5,820 करोड़ रुपये का कुल खर्च आने का अनुमान लगाया गया है। इस पूरी लागत में से राज्य सरकार की हिस्सेदारी लगभग 2,200 करोड़ रुपये की बैठेगी। खास बात यह है कि यह सरकारी सहायता केवल निर्माण के लिए तय 40 फीसदी अनुदान का हिस्सा है और भूमि अधिग्रहण में होने वाला खर्च इससे पूरी तरह अलग रहेगा।

लागत के अलग-अलग ब्योरे पर नजर डालें तो मारेनहल्ली से कनकपुरा मेन रोड तक बनने वाले 18.5 किलोमीटर के रूट पर कुल 2,283.19 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन है, जिसमें सरकार अपने खजाने से 40 प्रतिशत यानी 913.29 करोड़ रुपये का योगदान देगी। दूसरी ओर यशवंतपुर से केआरपुरम के 28 किलोमीटर लंबे रूट का निर्माण बजट करीब 3,536.89 करोड़ रुपये तय किया गया है। इस हिस्से के लिए प्रांतीय सरकार 40 प्रतिशत की दर से 1,414.76 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी करेगी।

## आखिर 10 किलोमीटर के भीतर टोल वसूली पर क्यों है रोक
अक्सर यह सवाल उठता है कि इन नए फ्लाईवे पर 10 किलोमीटर तक के सफर को मुफ्त क्यों रखा गया है। इसका कानूनी आधार राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में छिपा है। ये नियम शहरी निकाय अथवा नगर पालिका की सीमा के भीतर टोल प्लाजा स्थापित करके पथकर एकत्र करने की अनुमति नहीं देते। इसी संदर्भ में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी साल 2026 में फैसला सुनाया था कि नगर निकाय के 5 किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह का टोल वसूलना गैरकानूनी है। वहीं एनएचएआई की मौजूदा नीति 9.9 किलोमीटर की परिधि में टैक्स वसूली पर प्रतिबंध लगाती है। इसी कानूनी बाध्यता के चलते प्रशासन ने तय किया है कि एलिवेटेड कॉरिडोर पर 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने वाले वाहनों से ही शुल्क लिया जाएगा।

## इसका आप पर असर
बेंगलुरु में बनने वाले इन दो नए एलिवेटेड कॉरिडोर से शहर के दैनिक मुसाफिरों की यात्रा का समय काफी घटेगा, मगर लंबी दूरी तय करने पर उन्हें टोल शुल्क चुकाना होगा।

- **भारत में:** बड़े महानगरीय क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी और दूरी आधारित टोल मॉडल के विस्तार को बल मिलेगा। इस तरह की परियोजनाओं से देश के अन्य भीड़भाड़ वाले शहरों में भी सीमित दूरी की छूट वाले टोल एक्सप्रेसवे तैयार करने की रूपरेखा बनेगी।
- **बेंगलुरु में:** यशवंतपुर, केआरपुरम, मारेनहल्ली और कनकपुरा रोड के बीच सफर करने वाले वाहन चालकों को सिग्नल और जाम से आजादी मिलेगी। जिन ड्राइवरों का सफर 10 किलोमीटर से कम का होगा, वे बिना कोई अतिरिक्त शुल्क दिए इस आधुनिक फ्लाईओवर का लाभ उठा सकेंगे।
- **दैनिक यात्रियों की जेब पर:** 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने वाले निजी और व्यावसायिक वाहनों को हर फेरे के लिए निर्धारित पथकर देना होगा। लंबी दूरी के नियमित यात्रियों को अपने मासिक यात्रा बजट में इस नए टोल खर्च को जोड़ना पड़ेगा।
- **रियल एस्टेट और कारोबार पर:** इन कॉरिडोर के आस-पास पड़ने वाले आवासीय और वाणिज्यिक इलाकों में कनेक्टिविटी सुधरने से जमीन की मांग बढ़ेगी। सुगम आवाजाही की बदौलत शहर के बाहरी औद्योगिक और टेक हब तक पहुंचना आसान हो जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
बेंगलुरु में एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने और 10 किमी के बाद ही टोल लगाने का फैसला शहर के भयानक ट्रैफिक संकट और मौजूदा राष्ट्रीय कानूनी नियमों के तालमेल से उपजा है।

- **चरम पर पहुंचा शहरी ट्रैफिक जाम:** विश्व स्तर पर सबसे धीमे ट्रैफिक वाले शहरों में शामिल बेंगलुरु में मुख्य मार्गों की चौड़ाई बढ़ाना घनी बसावट के कारण संभव नहीं था। ऐसे में वाहनों की तेज आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सड़क के ऊपर एलिवेटेड संरचना तैयार करना ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान बचा।
- **राजकोषीय बोझ और बूट मॉडल की जरूरत:** 5,820 करोड़ रुपये के विशाल खर्च को अकेले राज्य के खजाने से वहन करना बेहद मुश्किल था। इसलिए सरकार ने 40 फीसदी अनुदान खुद देकर बाकी 60 प्रतिशत लागत निर्माणकर्ता कंपनी को टोल वसूली के जरिए निकालने की छूट दी।
- **कानूनी नियमों की अनिवार्यता:** राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008 और कर्नाटक हाईकोर्ट का 2026 का निर्णय नगर पालिका सीमाओं में टोल नाके लगाने पर रोक लगाता है। एनएचएआई के 9.9 किमी तक शुल्क निषेध नियम के चलते ही अधिकारियों ने केवल 10 किमी से अधिक दूरी पर पथकर लेने की शर्त रखी।

## सवाल-जवाब

### 1. बेंगलुरु में बनने वाले दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी होगी?
दोनों कॉरिडोर की कुल मिलाकर लंबाई 46.5 किलोमीटर होगी, जिसमें 28 किमी का पहला और 18.5 किमी का दूसरा कॉरिडोर शामिल है।

### 2. एलिवेटेड कॉरिडोर पर किन रूटों को आपस में जोड़ा जाएगा?
पहला कॉरिडोर यशवंतपुर से केआरपुरम के बीच और दूसरा कॉरिडोर मारेनहल्ली मेन रोड से कनकपुरा मेन रोड के बीच बनेगा।

### 3. क्या एलिवेटेड कॉरिडोर पर हर यात्री को टोल टैक्स देना होगा?
नहीं, टोल शुल्क केवल उन वाहन चालकों को देना होगा जो इन कॉरिडोर पर 10 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेंगे।

### 4. 10 किलोमीटर से कम दूरी के सफर पर टोल क्यों नहीं लगाया जा रहा है?
राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008 और अदालती फैसलों के तहत नगर पालिका सीमा व तय दायरे में टोल वसूलने पर कानूनी रोक है।

### 5. इस पूरे प्रोजेक्ट पर कुल कितना खर्च आने का अनुमान है?
परियोजना के निर्माण पर लगभग 5,820 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसमें से करीब 2,200 करोड़ रुपये राज्य सरकार देगी।

### 6. यशवंतपुर से केआरपुरम वाले खंड की लागत कितनी होगी?
यशवंतपुर-केआरपुरम के 28 किमी खंड की अनुमानित लागत 3,536.89 करोड़ रुपये है, जिसमें 40% यानी 1,414.76 करोड़ रुपये सरकार देगी।

### 7. मारेनहल्ली से कनकपुरा वाले खंड के निर्माण पर कितना खर्च आएगा?
मारेनहल्ली-कनकपुरा के 18.5 किमी खंड पर 2,283.19 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें 913.29 करोड़ रुपये का सरकारी अंशदान होगा।

### 8. इस परियोजना का निर्माण किस मॉडल पर किया जा रहा है?
यह प्रोजेक्ट बिल्ड ऑन ऑपरेट ट्रांसफर (BOOT) मॉडल पर बनाया जा रहा है, जिसे B-SMILE संस्था संभाल रही है।

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