# मक्का और मदीना में फंसे कर्नाटक के सैकड़ों उमराह तीर्थयात्री, एयरलाइंस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

> सऊदी अरब में उड़ानों के रद्द होने से कर्नाटक के 600 से 800 उमराह यात्री फंस गए हैं, जिनके सामने रहने और खाने का संकट खड़ा होने के बाद राज्य सरकार ने केंद्र से दखल की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** कर्नाटक · **Published:** 2026-10-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/karnataka/makka-aura-madina-men-phnse-karnataka-ke-saikaron-umrah-tirthayatri-airlines-ke-khilapha-supreme-court-jane-ki-taiyari-51623 · **Language:** Hindi
**Tags:** उमराह तीर्थयात्री, कर्नाटक सरकार, सऊदी अरब, यूटी खादर, डीके शिवकुमार, एयरलाइंस मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट, विमानन संकट

सऊदी अरब के पवित्र शहरों मक्का और मदीना में कर्नाटक के सैकड़ों उमराह यात्री विमान सेवाएं बाधित होने की वजह से फंसे हुए हैं। वहां फंसे भारतीय नागरिकों की कुल तादाद 600 से लेकर 800 के बीच बताई जा रही है। तय समय पर भारत लौटने की उड़ानें अचानक रद्द होने और आगे की तारीखें तय न होने के कारण इन यात्रियों के सामने रुकने और भोजन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार से तत्काल मदद पहुंचाने और यात्रियों की वतन वापसी सुरक्षित करने की अपील की है।

## होटल खाली करने का दबाव और पैसों की भारी तंगी
सऊदी अरब में दिन बीतने के साथ यात्रियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मक्का और मदीना में फंसे कई यात्रियों के पास यात्रा के लिए रखा गया पैसा पूरी तरह खत्म हो चुका है। नकदी खत्म होने से उनके सामने हर रोज के खाने पीने और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की विकट समस्या पैदा हो गई है। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को उठानी पड़ रही है, जो इस अनिश्चितता के बीच काफी तनाव में हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि कर्नाटक स्टेट हज कमेटी के चेयरमैन और उनकी टीम से जो विवरण मिला है, वह बेहद चिंताजनक है। कई होटलों की ओर से अब यात्रियों पर कमरे खाली करने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है, क्योंकि उनकी पूर्व निर्धारित बुकिंग की अवधि समाप्त हो चुकी है। भारतीय प्रवासियों और कर्नाटक के स्वयंसेवी संगठनों की तरफ से वहां फंसे लोगों को कुछ अस्थायी सहायता मुहैया कराई जा रही है, लेकिन तीर्थयात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए यह मदद नाकाफी साबित हो रही है।

## भारतीय उड़ानों का संचालन ठप, तारीखों पर तारीखें
कर्नाटक के अल्पसंख्यक कल्याण, हज और वक्फ मंत्री यूटी खादर ने बताया कि कर्नाटक से गए यह सभी 600 से 800 उमराह यात्री इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी भारतीय विमानन कंपनियों के जरिए सऊदी अरब पहुंचे थे। सभी यात्रियों ने इन्हीं विमानन कंपनियों से अपनी वापसी की टिकटें भी पहले से बुक करा रखी थीं। हालांकि, जब लौटने का समय आया तो उड़ानों को अचानक रोक दिया गया।

यूटी खादर के मुताबिक, सऊदी अरब से दुनिया के अन्य देशों की उड़ानें सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं, लेकिन भारतीय विमानन कंपनियों ने इस रूट पर अपनी उड़ानों को अब तक बहाल नहीं किया है। एयरलाइंस ने शुरुआत में भरोसा दिलाया था कि 24 अक्टूबर से उड़ानों का संचालन दोबारा शुरू कर दिया जाएगा, मगर बाद में बिना किसी ठोस समाधान के इस तारीख को आगे बढ़ाकर 27 अक्टूबर कर दिया गया। एयरलाइंस की इस टालमटोल से यात्रियों की अनिश्चितता और मानसिक तनाव चरम पर पहुंच गया है, क्योंकि कंपनियां अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पा रही हैं कि उड़ानें कब और किस तरह से शुरू की जाएंगी।

## केंद्र सरकार से दखल की मांग और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
संकट को देखते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक विस्तृत पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने मक्का और मदीना में फंसे सभी यात्रियों की मौजूदा विकट परिस्थितियों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से आपातकालीन स्तर पर कदम उठाने का अनुरोध किया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को भी पत्र लिखकर उड़ानों की बहाली के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

मंत्री यूटी खादर ने स्पष्ट किया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेजे गए पत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अगले दो दिनों के भीतर फंसे हुए यात्रियों को भारत वापस लाने के लिए उड़ानों का संचालन शुरू नहीं किया गया, तो कर्नाटक स्टेट हज कमेटी एयरलाइंस के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। हज कमेटी अदालत में न केवल यात्रियों की तत्काल सुरक्षित वापसी की गुहार लगाएगी, बल्कि उड़ानों के रद्द होने के कारण यात्रियों को हुए भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे की भी मांग करेगी।

## इसका आप पर असर
सऊदी अरब में उड़ानों के अचानक स्थगित होने से तीर्थयात्रियों के परिवारों और आगामी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर सीधा असर पड़ा है।

- **भारत में:** देश भर से खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों को भारतीय एयरलाइंस की उड़ानों के अचानक रद्द होने से होने वाले व्यवधानों के प्रति सतर्क रहना होगा। अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर निकलने वाले नागरिकों को आपातकालीन स्थिति के लिए अतिरिक्त नकदी और वैकल्पिक यात्रा बीमा का प्रबंध रखना चाहिए।
- **कर्नाटक में:** राज्य के लगभग 600 से 800 परिवारों के परिजन फिलहाल विदेश में अनिश्चितता और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। परिजनों को राज्य हज कमेटी के संपर्क में रहकर आधिकारिक उड़ानों और राहत कार्यों की अद्यतन जानकारी लेते रहना चाहिए।
- **आर्थिक बोझ:** विदेश में अनपेक्षित ठहराव के चलते यात्रियों को अतिरिक्त होटल किराए और भोजन का खर्च अपनी जेब से वहन करना पड़ रहा है। प्रभावित यात्री अपने सभी अतिरिक्त खर्चों के बिल सुरक्षित रखें ताकि भविष्य में एयरलाइंस से हर्जाने का दावा किया जा सके।
- **कानूनी अधिकार:** यदि एयरलाइंस समय पर सेवा देने में विफल रहती हैं, तो उपभोक्ता अपने नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी मंचों का रुख कर सकते हैं। हज कमेटी की याचिका के जरिए यात्रियों को यात्रा बाधित होने पर मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह संकट मुख्य रूप से भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा सऊदी अरब सेक्टर पर उड़ानों का संचालन अचानक स्थगित करने और निर्धारित तिथियों को आगे बढ़ाने के कारण उत्पन्न हुआ है।

- **उड़ानों का निलंबन:** इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी भारतीय एयरलाइंस ने निर्धारित रूट पर अपनी नियमित सेवाएं अचानक रोक दीं। जबकि अन्य अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों की उड़ानें सामान्य रूप से चल रही थीं, भारतीय कंपनियों द्वारा संचालन ठप रहने से यह संकट गहरा गया।
- **तारीखों का आगे बढ़ना:** विमानन कंपनियों ने पहले 24 अक्टूबर से उड़ानों को बहाल करने का वादा किया था, लेकिन बाद में तारीख बढ़ाकर 27 अक्टूबर कर दी गई। उड़ानों की बहाली को लेकर स्थिति साफ न होने से यात्रियों का रुकना लंबा खिंच गया।
- **सीमित बजट और संसाधन:** अधिकांश तीर्थयात्री अपनी यात्रा की तय अवधि के अनुसार ही सीमित विदेशी मुद्रा लेकर गए थे। वापसी में देरी होने की वजह से उनका पैसा समाप्त हो गया और होटलों ने कमरे खाली करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
- **प्रशासनिक समन्वय में देरी:** राज्य सरकार द्वारा नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे गए पत्र पर समय रहते स्पष्ट जवाब न मिलने से वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था तत्काल नहीं हो सकी। इसी विफलता के चलते राज्य हज कमेटी को अदालत जाने का निर्णय लेना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. सऊदी अरब में कर्नाटक के कितने उमराह यात्री फंसे हुए हैं?
मक्का और मदीना में कर्नाटक के लगभग 600 से 800 उमराह यात्री उड़ानों के रद्द होने की वजह से फंसे हुए हैं।

### 2. यात्रियों ने किन विमानन कंपनियों से वापसी के टिकट बुक कराए थे?
तीर्थयात्रियों ने इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस से अपनी वापसी की यात्रा के टिकट बुक किए थे।

### 3. विमानन कंपनियों ने उड़ानें बहाल करने की क्या तारीखें दी थीं?
कंपनियों ने पहले 24 अक्टूबर से उड़ानें दोबारा शुरू करने की बात कही थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 27 अक्टूबर कर दिया गया।

### 4. कर्नाटक सरकार ने केंद्र से क्या गुहार लगाई है?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखकर फंसे यात्रियों की सुरक्षित वापसी कराने की मांग की है।

### 5. राज्य हज कमेटी ने एयरलाइंस को क्या चेतावनी दी है?
हज कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों में उड़ानों का संचालन शुरू नहीं हुआ, तो वे यात्रियों की वापसी और मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

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