केरल में अजनबी किसान की जान बचाकर खुद उफनती नदी में बहे 37 वर्षीय राजेश को दिया जाएगा राजकीय सम्मान कन्नूर में तेजस्विनी नदी के उफान के दौरान फंसे एक स्थानीय किसान को अपनी लाइफ जैकेट पहनाकर बचाते हुए 37 साल के राजेश तेज धारा में बह गए थे। तीन दिन की खोज के बाद मिले उनके पार्थिव शरीर को अब राजकीय सम्मान से अंतिम विदाई दी जाएगी। केरल के कन्नूर जिले में इंसानियत की एक ऐसी बेमिसाल मिसाल सामने आई है जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। एक 37 वर्षीय नौजवान राजेश ने नदी के खौफनाक उफान में फंसे एक अजनबी किसान की जान बचाने के लिए अपनी सुरक्षा की परवाह नहीं की। उन्होंने अपनी लाइफ जैकेट उतारकर उस डूबते किसान को पहना दी और खुद तेज धाराओं में बह गए। इस अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार ने उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्णय लिया है। कन्नूर की तेजस्विनी नदी में कैसे हुआ यह हादसा घटना शनिवार की है, जब राजेश अपने साथियों के साथ रिवर राफ्टिंग की ट्रेनिंग पूरी करके वापस लौट रहे थे। कन्नूर जिले के कोझिचाल इलाके के पास तेजस्विनी नदी के किनारे अचानक लोगों की भारी भीड़ जमा थी। राजेश और उनके साथी जब वहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि नदी में आई अचानक बाढ़ के कारण स्थानीय किसान बेनी बेहद खतरनाक स्थिति में फंस गए हैं। किसान बेनी का शरीर गर्दन तक पानी में डूब चुका था और वे अपनी जान बचाने के लिए सिर्फ एक नारियल के पेड़ के सहारे टिके हुए थे। वहां मौजूद लोग बेनी की लाचार स्थिति देख रहे थे, लेकिन उफनती नदी की तेज धाराओं के सामने किसी की आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हो रही थी। एक कुशल एडवेंचरिस्ट और रैपलिंग प्रशिक्षक होने के नाते राजेश ने पल भर की भी देरी किए बिना पानी में छलांग लगा दी। राजेश जानते थे कि उफनती धाराओं से दूसरों को दूर रहने की सलाह देना आसान है, लेकिन उस समय इंसानियत की पुकार के आगे उन्होंने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। लाइफ जैकेट उतारकर किसान को बचाना पड़ा भारी राजेश तैरकर किसी तरह तेज धाराओं का सामना करते हुए किसान बेनी तक पहुंचने में कामयाब हो गए। वहां पहुंचकर जब राजेश को यह एहसास हुआ कि बेनी को तैरना बिल्कुल नहीं आता है, तो उन्होंने एक लम्हे के लिए भी अपनी जान के खतरे के बारे में नहीं सोचा। राजेश ने तुरंत अपनी पहनी हुई लाइफ जैकेट उतारी और उसे किसान बेनी को सुरक्षित रूप से पहना दिया। जैकेट पहनने के बाद किसान बेनी बाढ़ के पानी को पार करके सुरक्षित किनारे तक पहुंच गए और उनकी जान बच गई। हालांकि, खुद बिना लाइफ जैकेट के नदी पार करने की कोशिश कर रहे राजेश नदी के एक भयानक भंवर में फंस गए। पानी के प्रचंड वेग और भंवर के दबाव के कारण वे तैरकर बाहर नहीं आ सके और देखते ही देखते उफनती धारा के साथ बह गए। आपदा राहत अभियानों का समृद्ध अनुभव था राजेश के पास राजेश कोई साधारण तैराक या आम नागरिक नहीं थे, बल्कि वे साहसिक खेलों के क्षेत्र में एक बेहद अनुभवी प्रशिक्षक थे। उन्होंने वर्ष 2024 में वायनाड में आई भीषण भूस्खलन त्रासदी के समय भी कई राहत और बचाव अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई थी और अनेक लोगों की जान बचाई थी। वे विभिन्न एडवेंचर क्लबों से जुड़े हुए थे और नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों, छात्रों और युवाओं को नियमित रूप से ट्रेकिंग, पर्वतारोहण और रैपलिंग की ट्रेनिंग दिया करते थे। इतने बहुमूल्य अनुभव और आपदा प्रबंधन के ज्ञान के बावजूद, एक अजनबी की जिंदगी बचाने का जुनून उन पर इस कदर हावी था कि उन्होंने बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उफनती नदी की चुनौतियों का सामना किया। तीन दिनों की खोज के बाद मिला पार्थिव शरीर हादसे के बाद राजेश के परिजनों, दोस्तों और साथी प्रशिक्षकों को शुरुआती समय में यह पक्की उम्मीद थी कि इतना अनुभवी एडवेंचरिस्ट नदी की धाराओं को मात देकर जरूर सुरक्षित बाहर आ जाएगा। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिजनों की उम्मीदें कम होती चली गईं। बचाव टीमों ने नदी के प्रवाह क्षेत्र में व्यापक खोज अभियान चलाया। आखिरकार, तीन दिनों की गहन तलाश के बाद मंगलवार की शाम को राजेश का पार्थिव शरीर दुर्घटनास्थल से काफी नीचे नदी के निचले हिस्से से बरामद किया गया। इसके बाद बुधवार को जब उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गृहनगर तिरुवनंतपुरम जिले के कल्लियूर पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और पूरे क्षेत्र में गहरा शोक छा गया। राजकीय सम्मान के साथ विदाई और सरकारी सहायता का ऐलान अपनी जान की बाजी लगाकर इंसानियत की सर्वोच्च मिसाल पेश करने वाले राजेश के सम्मान में केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीसन ने घोषणा की कि उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राजेश के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि राज्य सरकार उनके अधूरे बने घर के निर्माण कार्य को पूरा करवाएगी। वहीं, विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने राजेश के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने मानवता और आत्मत्याग का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जो हमेशा अमर रहेगा। उन्होंने कहा कि दूसरों के जीवन को बचाने के लिए अपनी लाइफ जैकेट दे देने का उनका यह साहस भरा कदम हमेशा याद किया जाएगा। राजेश अपने पीछे अपनी पत्नी शफिया और स्कूल में पढ़ने वाले दो छोटे बेटों अर्शान तथा अभिषेक को छोड़ गए हैं। इसका आप पर असर भारत में: यह घटना संकट के समय दूसरों की मदद करने के जज्बे और आपदा राहत प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करती है। केरल में: कन्नूर और तिरुवनंतपुरम क्षेत्रों में उफनती नदियों के आसपास मानसून सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने का संदेश देती है। सवाल-जवाब 1. कन्नूर में नदी में फंसे किसान को किसने बचाया? 37 साल के एडवेंचर ट्रेनर राजेश ने अपनी लाइफ जैकेट किसान को देकर उसकी जान बचाई। 2. राजेश किस नदी की तेज धारा में बह गए थे? वे कन्नूर जिले में कोझिचाल के पास उफनती तेजस्विनी नदी में बहे थे। 3. राजेश का पार्थिव शरीर कितने दिनों के बाद बरामद हुआ? तीन दिनों के व्यापक खोज अभियान के बाद मंगलवार शाम को उनका शरीर नदी के निचले हिस्से से मिला। 4. राज्य सरकार ने राजेश के परिवार के लिए क्या सहायता घोषित की है? सरकार ने राजेश का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने और उनके अधूरे घर का निर्माण पूरा करवाने का ऐलान किया है। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सीख: • मानवता सर्वोपरि: संकट की घड़ी में दूसरों का जीवन बचाना सबसे बड़ा मानवीय धर्म है। • आपदा प्रबंधन कौशल: साहसिक खेलों और बचाव कार्यों का प्रशिक्षण लेना समाज के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होता है। • निस्वार्थ त्याग: बिना किसी स्वार्थ के दी गई कुर्बानी समाज में सदैव अमर रहती है। https://trendkia.com/kerala/kerala-men-ajanabi-kisana-ki-jana-bachakara-khuda-uphanati-nadi-men-bahe-37-varshiya-rajesh-ko-diya-jaega-rajakiya-sammana-14223 TrendKia — Har trend, sabse pehle.