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  "title": "केरल में मूसलाधार बारिश का कहर, 21 लोगों की मौत और 6 लापता, कई नदियां खतरे के निशान के पास",
  "summary": "केरल में हो रही भारी बारिश और बाढ़ के कारण अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है और 6 लोग लापता हैं। पठानमथिट्टा, कासरगोड और अन्य उत्तरी जिलों में नदियां उफान पर हैं, जबकि हजारों लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।",
  "content": "केरल के विभिन्न हिस्सों में लगातार जारी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिससे राज्य भर में आम जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्राकृतिक आपदाओं और बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़कर 21 तक पहुंच गया है, जबकि कम से कम 6 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राज्य के कई जिलों में नदियों का पानी खतरे के निशान के आसपास बह रहा है, जिसके चलते बस्तियों में पानी भर गया है और कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। भारी नुकसान के कारण हजारों नागरिक बेघर हो गए हैं और मुख्य सड़कों व घरों को व्यापक क्षति पहुंची है। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियानों को और अधिक तेज कर दिया है।\n\nपठानमथिट्टा में बाढ़ की स्थिति और राहत शिविरों का संचालन\nपठानमथिट्टा जिले के रन्नी और अरनमुला क्षेत्र इस समय मानसून की मार से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। क्षेत्र में बहने वाली मुख्य नदियों जैसे पंबा, अचनकोविल और कक्कत्तर में जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है, जिससे आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ जैसा दृश्य बन गया है। प्रशासनिक स्तर पर तटीय व निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया है और उन्हें सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। आपदा से प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा 74 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में वर्तमान में 3,000 से अधिक बाढ़ पीड़ितों को ठहराया गया है, जहां उनके लिए भोजन, पीने का पानी और प्राथमिक आवश्यकताओं का वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया टीमों और बचाव दलों को तैनात रखा गया है, ताकि किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से तुरंत निपटा जा सके।\n\nराजनीतिक दौरे, समीक्षा बैठकें और समन्वय पर उठे सवाल\nआपदा की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन मंगलवार को पठानमथिट्टा जिले के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों रन्नी और अरनमुला का दौरा करने वाले हैं। उनके यात्रा कार्यक्रम के अनुसार दोपहर के समय पहला पड़ाव अरनमुला में होगा। यहां वे जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक करके आपदा प्रबंधन की तैयारियों, बचाव कार्यों की प्रगति और राहत शिविरों में व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। इसके बाद वे अन्य प्रभावित बस्तियों का निरीक्षण करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब आपदा से निपटने के तरीकों को लेकर राजनीतिक स्तर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। शुरुआती चरण में पुलिस प्रशासन और आपदा टीमों के बीच आपसी समन्वय की कमी का आरोप लगाया गया है। इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि क्या समय पर ठोस कदम उठाकर नुकसान के दायरे को कम किया जा सकता था। हालांकि जंगलों और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में रात के समय बारिश में थोड़ी कमी दर्ज की गई है, लेकिन पठानमथिट्टा में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।\n\nउत्तरी केरल में बारिश के आंकड़े और मौसम विभाग का अलर्ट\nभारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार सुबह साढ़े पांच बजे तक बीते 21 घंटों के दौरान राज्य के उत्तरी जिलों में सर्वाधिक वर्षा दर्ज की गई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक कासरगोड जिले के बायार स्थान पर 3 अगस्त तड़के 3 बजे से मध्यरात्रि के बीच राज्य में सबसे ज्यादा 121.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कासरगोड के मुलियार में 81 मिलीमीटर और आरएआरएस पिलिकोड में 59.5 मिलीमीटर वर्षा हुई। कन्नूर हवाई अड्डे पर 74 मिलीमीटर और चेरुवंचेरी में 59.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। कोझिकोड के उरुमी क्षेत्र में 65 मिलीमीटर तथा एर्णाकुलम जिले के नेरियामंगलम में 59 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान विभाग के मानकों के अनुसार 24 घंटे के भीतर 60 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा को 'भारी बारिश' की श्रेणी में रखा जाता है। मौसम विभाग ने मध्य और उत्तरी केरल के जिलों में आगे भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे नई बाढ़ और भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है।\n\nमुवाट्टुपुषा, तोडुपुषा और कलियारा नदियों के जलस्तर की स्थिति\nराज्य की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मंगलवार सुबह जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुवाट्टुपुषा और तोडुपुषा नदियां चेतावनी के निशान से ऊपर बह रही थीं, हालांकि अब उनके जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट देखी जा रही है। सुबह 8 बजे मुवाट्टुपुषा नदी का जलस्तर 11.60 मीटर दर्ज किया गया, जो इसके 10.92 मीटर के चेतावनी स्तर से अधिक है लेकिन 11.93 मीटर के खतरे के निशान से थोड़ा नीचे है। इसी प्रकार तोडुपुषा नदी का जलस्तर सुबह 8 बजे 11.50 मीटर मापा गया, जहां चेतावनी स्तर 10.78 मीटर और खतरे का निशान 11.79 मीटर निर्धारित है। वहीं कलियारा नदी 12.26 मीटर के स्तर पर बह रही थी, जो कि इसके चेतावनी स्तर 13.10 मीटर और खतरे के स्तर 14.10 मीटर से काफी नीचे है। यद्यपि जलस्तर में कमी के संकेत मिल रहे हैं, फिर भी प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले निवासियों को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है क्योंकि मानसून का दौर लगातार जारी है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: केरल में जारी भारी बारिश और बाढ़ के कारण अन्य राज्यों से यात्रा करने वाले यात्रियों को यातायात में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है।\n• केरल में: तटीय और नदी किनारे रहने वाले निवासियों को अलर्ट पर रहने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत राहत शिविरों में जाने की सलाह दी जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. केरल में बारिश की वजह से अब तक कितनी मौतें हुई हैं?\nकेरल में मूसलाधार बारिश और बाढ़ की वजह से अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है और 6 लोग लापता हैं।\n\n2. केरल के कौन से जिले बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?\nपठानमथिट्टा, कासरगोड, कन्नूर और एर्णाकुलम जैसे जिले भारी बारिश और जलभराव से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।\n\n3. राज्य में किस जगह सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई?\nकासरगोड जिले के बायार में राज्य में सर्वाधिक 121.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।\n\n4. मौसम विभाग का आगामी दिनों के लिए क्या अनुमान है?\nआईएमडी ने मध्य और उत्तरी केरल में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे नई बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।",
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  "category": "केरल",
  "publishedAt": "2026-08-04",
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