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  "type": "article",
  "title": "भूकंप की तबाही के बीच वेनेजुएला की सरकार और विपक्ष 1 अगस्त से बातचीत की मेज पर बैठेंगे",
  "summary": "वेनेजुएला की अंतरिम सरकार ने 1 अगस्त से विपक्ष के कुछ धड़ों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करने का ऐलान किया है, यह घोषणा 24 जून के दोहरे भूकंप में 4,734 से ज्यादा मौतों और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के छह महीने बाद आई है।",
  "content": "वेनेजुएला की अंतरिम सरकार ने ऐलान किया है कि वह 1 अगस्त से विपक्ष के कुछ धड़ों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करेगी। यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब देश एक भीषण प्राकृतिक आपदा और छह महीने से ज्यादा लंबी सियासी उथल-पुथल से अभी तक पूरी तरह उबर नहीं पाया है। सरकार की तरफ से बातचीत का जिम्मा संभाल रहे खोर्खे रोद्रीगेज पहले ही विपक्ष की पूर्व सांसद दिनोरा फिगेरा के साथ एक शुरुआती बैठक कर चुके हैं, जिससे साफ है कि दोनों पक्ष अनौपचारिक संपर्क से आगे बढ़कर एक ठोस बातचीत की प्रक्रिया की तरफ बढ़ रहे हैं।\n\nयह घोषणा उस घटना के करीब छह महीने बाद आई है जब अमेरिकी सैनिकों ने तत्कालीन वेनेजुएला नेता निकोलस मादुरो को काराकस में एक तड़के हुई कार्रवाई में पकड़ लिया था और उन्हें ड्रग तस्करी के आरोपों का सामना करने के लिए न्यूयॉर्क ले जाया गया था। तभी से पूर्व उपराष्ट्रपति और मादुरो की करीबी मानी जाने वालीं डेल्सी रोद्रीगेज ट्रंप प्रशासन के समर्थन से देश की सत्ता संभाल रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम से विपक्ष में काफी निराशा है, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि मादुरो के हटने के बाद सत्ता में असली बदलाव आएगा, न कि उनके अपने ही सियासी खेमे के किसी और चेहरे के हाथ में सरकार चली जाएगी। उम्मीद और हकीकत के बीच के इसी फासले की वजह से बातचीत की इस घोषणा को अंदर और बाहर, दोनों जगह बड़ी बारीकी से देखा जा रहा है।\n\nदो अलग-अलग बयान, एक ही योजना\nऔपचारिक बातचीत की योजना सामने आने का तरीका भी दिलचस्प रहा। मंगलवार को लगभग एक साथ दो अलग-अलग बयान जारी हुए, एक विपक्षी नेताओं के गठबंधन की तरफ से और दूसरा खुद खोर्खे रोद्रीगेज की तरफ से, जो सरकार के नियंत्रण वाली नेशनल असेंबली के प्रमुख हैं और अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोद्रीगेज के भाई भी हैं। विपक्ष के बयान में आने वाली बातचीत को लोकतंत्र की तरफ एक रोडमैप तैयार करने की कोशिश बताया गया, यानी विपक्ष इसे महज दिखावटी बातचीत नहीं बल्कि ठोस नतीजों तक पहुंचाने वाली प्रक्रिया के तौर पर देख रहा है।\n\nभूकंप की तबाही ने दोनों पक्षों को मेज पर ला बिठाया\nखोर्खे रोद्रीगेज का बयान छोटा था, लेकिन उसमें बातचीत की एक साफ और दर्दनाक वजह बताई गई, 24 जून को उत्तरी वेनेजुएला में आए दोहरे भूकंप से हुई भारी तबाही। इस आपदा में अब तक कम से कम 4,734 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, और मलबे के नीचे से लगातार शव मिलने के चलते मरने वालों की संख्या अभी भी बढ़ रही है। रोद्रीगेज ने अपने बयान में कहा, सिर्फ एकजुटता से ही हम पुनर्निर्माण की तरफ बढ़ सकते हैं और शांति बनाए रख सकते हैं। इस बयान से साफ झलकता है कि सरकार इस बातचीत को किसी सियासी रियायत की तरह नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने की एक व्यावहारिक जरूरत की तरह पेश कर रही है।\n\nविपक्ष का बयान इससे कहीं ज्यादा विस्तृत था। उसमें खासतौर पर भूकंप के बाद अमेरिका की तरफ से मिली मदद का जिक्र किया गया और कहा गया कि यह मदद इस बात का सबूत है कि वेनेजुएला अकेला नहीं है, भले ही वहां की मौजूदा सरकार दुनिया के बड़े हिस्से से कूटनीतिक तौर पर लगभग अलग-थलग बनी हुई है।\n\nबातचीत की मेज पर आखिर कौन बैठा है\nविपक्ष का प्रतिनिधिमंडल उन पूर्व सांसदों से बना है जो 2015 में नेशनल असेंबली के लिए चुने गए थे, यानी वह आखिरी मौका जब विपक्षी दलों को इस विधायी संस्था में बहुमत मिला था। इसके बाद हुए हर नेशनल असेंबली चुनाव का या तो विपक्ष ने बहिष्कार किया, या फिर पर्यवेक्षकों ने उन्हें आजाद और निष्पक्ष मानने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि इसी दौरान मादुरो और उनकी पार्टी पीएसयूवी ने सरकार की हर शाखा पर अपनी पकड़ लगातार मजबूत करती गई। यही वजह है कि करीब एक दशक पहले चुनी गई विधानसभा से निकला यह प्रतिनिधिमंडल आज भी एक भरोसेमंद वार्ताकार के तौर पर सियासी अहमियत रखता है।\n\nविपक्ष की तरफ से इस टीम की अगुआई दिनोरा फिगेरा कर रही हैं, जो करीब आठ साल के निर्वासन के बाद जून में ही वेनेजुएला लौटी हैं। काराकस में उतरते ही उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह अपने देश अमेरिकी विदेश मंत्रालय के न्योते पर लौटी हैं और उनका मकसद नेशनल इलेक्टोरल काउंसिल, यानी सीएनई के नए सिरे से गठन के लिए दबाव बनाना है। यह संस्था बरसों से मादुरो सरकार के कट्टर वफादारों के कब्जे में रही है। यह सीएनई ही था जिसने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मादुरो को विजेता घोषित किया था, जबकि चुनाव पर्यवेक्षकों की जुटाई गई और स्वतंत्र रूप से जांची गई वोटों की गिनती में विपक्षी उम्मीदवार एडमुंडो गोंजालेज की भारी जीत दिखाई दे रही थी। यही वजह है कि इस परिषद का पुनर्गठन विपक्ष की भविष्य में एक भरोसेमंद चुनाव की मांग के केंद्र में है।\n\nविपक्ष की प्राथमिकता क्या है\nमंगलवार को जारी अपने बयान में विपक्षी गठबंधन ने कहा कि बातचीत में सबसे पहली प्राथमिकता लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना और आगे की राजनीतिक भागीदारी के लिए गारंटी हासिल करना होगी। यह मांग बरसों के कड़वे अनुभव से निकली है। विपक्षी नेताओं और मादुरो सरकार की खुलकर आलोचना करने वालों को लंबे समय से उत्पीड़न झेलना पड़ा है, कई लोगों को जेल भेजा गया और कई और लोग देश छोड़कर निर्वासन में चले गए।\n\nमादुरो के सत्ता से हटने के बाद कई राजनीतिक कैदियों को रिहा किया गया है, लेकिन मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। कैदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह फोरो पेनल के मुताबिक अभी भी 372 लोग राजनीतिक बंदी के तौर पर जेलों में बंद हैं, और यह आंकड़ा राजनीतिक भागीदारी की गारंटी को लेकर होने वाली किसी भी चर्चा पर भारी पड़ता रहेगा।\n\nमाचादो अब भी बाहर ही\nविपक्ष की सबसे जानी-मानी नेता मारिया कोरिना माचादो अब तक वेनेजुएला नहीं लौट पाई हैं। वह नवंबर में चुपचाप देश से निकल गई थीं ताकि लोकतंत्र को बढ़ावा देने के उनके काम के लिए मिला नोबेल शांति पुरस्कार लेने जा सकें। यह पुरस्कार उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित किया था, फिर भी ट्रंप प्रशासन अब वेनेजुएला में लोकतांत्रिक बदलाव की बातचीत के लिए माचादो की बजाय दिनोरा फिगेरा को ज्यादा तरजीह देता दिख रहा है, और विपक्ष के भीतर यह बदलाव किसी से छिपा नहीं रहा है।\n\nमाचादो ने दोहरे भूकंप के तुरंत बाद वेनेजुएला लौटने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह देश में दाखिल नहीं हो पाईं। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात से इनकार किया है कि उनके प्रशासन ने माचादो को देश में घुसने से रोकने में कोई भूमिका निभाई, हालांकि अमेरिकी मीडिया ने इससे पहले गुमनाम अधिकारियों के हवाले से बताया था कि उनकी वापसी की कोशिश को भूकंप के बाद चल रहे राहत और पुनर्निर्माण कार्य के लिए संभावित रूप से बाधा डालने वाला बताया गया था।\n\nमाचादो ने अभी तक इन औपचारिक बातचीत की घोषणा पर खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि उन्होंने अपनी अगुआई वाले विपक्षी दलों के गठबंधन को बुधवार को बाद में इस घटनाक्रम पर चर्चा के लिए बैठक बुलाने के लिए कहा है, जिससे यह भी जाहिर होता है कि विपक्ष के भीतर इस बात को लेकर मंथन चल रहा है कि फिलहाल एक प्रतिद्वंद्वी की अगुआई में चल रही इस प्रक्रिया पर कैसे प्रतिक्रिया दी जाए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. वेनेजुएला में सरकार और विपक्ष के बीच औपचारिक बातचीत कब से शुरू होगी?\nयह बातचीत 1 अगस्त से शुरू होगी।\n\n2. सरकार की तरफ से बातचीत कौन कर रहा है?\nखोर्खे रोद्रीगेज सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वह नेशनल असेंबली के प्रमुख भी हैं, वह अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोद्रीगेज के भाई हैं।\n\n3. विपक्ष की तरफ से बातचीत की अगुआई कौन कर रहा है?\nपूर्व सांसद दिनोरा फिगेरा विपक्ष की अगुआई कर रही हैं, जो करीब आठ साल के निर्वासन के बाद जून में वेनेजुएला लौटी थीं।\n\n4. बातचीत की वजह क्या बताई गई है?\n24 जून को उत्तरी वेनेजुएला में आए दोहरे भूकंप में हुई तबाही को इसकी वजह बताया गया है, जिसमें अब तक कम से कम 4,734 लोगों की मौत हो चुकी है।\n\n5. निकोलस मादुरो का क्या हुआ था?\nअमेरिकी सैनिकों ने काराकस में तड़के हुई कार्रवाई में उन्हें पकड़ा और ड्रग तस्करी के आरोपों में मुकदमे के लिए न्यूयॉर्क ले गए।\n\n6. मारिया कोरिना माचादो वेनेजुएला क्यों नहीं लौट पाई हैं?\nवह नवंबर में चुपचाप देश से निकली थीं और भूकंप के बाद लौटने की कोशिश की, लेकिन देश में दाखिल नहीं हो पाईं; इसकी सटीक वजह स्पष्ट नहीं है, हालांकि अमेरिकी मीडिया ने उनकी वापसी को राहत कार्य के लिए बाधा बताए जाने की बात कही थी।\n\n7. अभी कितने राजनीतिक कैदी जेल में बंद हैं?\nफोरो पेनल के मुताबिक अभी भी 372 लोग राजनीतिक बंदी के तौर पर जेलों में बंद हैं।\n\n8. विपक्ष बातचीत में सबसे ज्यादा किस बात पर जोर देगा?\nविपक्ष ने कहा है कि उसकी प्राथमिकता लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना और नेशनल इलेक्टोरल काउंसिल (सीएनई) का नए सिरे से गठन कराना है।",
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  "category": "लैटिन अमेरिका",
  "publishedAt": "2026-07-15",
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    "निकोलस मादुरो",
    "डेल्सी रोद्रीगेज",
    "दिनोरा फिगेरा",
    "मारिया कोरिना माचादो",
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    "वेनेजुएला विपक्ष वार्ता"
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