# ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में फ्लेवियो बोलसोनारो की बढ़त, लूला दा सिल्वा के सामने दूसरे चरण की कड़ी चुनौती

> ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में सीनेटर फ्लेवियो बोलसोनारो ने पहले दौर में राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा को पीछे छोड़कर सबको चौंका दिया है। अब इस महीने के अंत में होने वाले दूसरे चरण के मुकाबले में वामपंथी खेमे के सामने अपनी सत्ता बचाने की अप्रत्याशित चुनौती खड़ी हो गई है।

**Type:** article · **Category:** लैटिन अमेरिका · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/latin-america/fl-vio-bolsonaro-ki-barhata-lula-da-silva-ke-samane-dusare-charana-ki-kari-chunauti-43554 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्राजील चुनाव, फ्लेवियो बोलसोनारो, लूला दा सिल्वा, लैटिन अमेरिका, ब्राजील राजनीति

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के शुरुआती चरण ने देश के सियासी परिदृश्य को हिलाकर रख दिया है। सीनेटर फ्लेवियो बोलसोनारो ने पहले दौर के मतदान में राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा को पछाड़ते हुए एक बड़ी बढ़त हासिल की है। चुनाव पूर्व के तमाम सर्वेक्षणों में मुकाबला बेहद करीबी और कांटे की टक्कर का बताया जा रहा था, लेकिन मतपेटियों से निकले नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों के सारे अनुमान उलट दिए हैं। हालांकि किसी भी उम्मीदवार को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका है, जिससे इस महीने के अंत में दूसरे दौर का मुकाबला तय हो गया है। इसके बावजूद पहले चरण में दक्षिणपंथी खेमे को मिली यह कामयाबी लैटिन अमेरिका में बदलते सियासी मिजाज का एक मजबूत संकेत मानी जा रही है।

## मतगणना के आंकड़े और अप्रत्याशित उलटफेर
मतदान से पहले सामने आए जनमत सर्वेक्षणों में लूला और बोलसोनारो के बीच सांख्यिकीय तौर पर बराबरी का मुकाबला दिखाया गया था। रविवार को जब नतीजे घोषित हुए, तो चुनावी तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। 45 वर्षीय सीनेटर फ्लेवियो बोलसोनारो ने 56.1 मिलियन यानी 5 करोड़ 61 लाख वोट हासिल किए। इसके विपरीत, वर्कर्स पार्टी के उम्मीदवार और 80 वर्षीय राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा को 53.8 मिलियन यानी 5 करोड़ 38 लाख मतों पर ही संतोष करना पड़ा। अपने जीवन में पहली बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरे फ्लेवियो ने पहले ही प्रयास में वर्तमान राष्ट्रपति को पीछे छोड़ दिया है। ब्राजील के चुनावी इतिहास में अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ है जब पहले दौर में पिछड़ने वाले किसी राष्ट्रपति ने दूसरे दौर में वापसी कर सत्ता बरकरार रखी हो। लूला के सामने अब दोबारा राष्ट्रपति बनने के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती खड़ी हो गई है।

## लूला सरकार से मतदाताओं की नाराजगी और आर्थिक विरोधाभास
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि फ्लेवियो बोलसोनारो की यह बढ़त उनकी अपनी लोकप्रियता से कहीं अधिक लूला के प्रति जनता की अस्वीकृति का परिणाम है। प्रतिष्ठित सर्वेक्षण संस्थान डेटाफोल्हा के मतदान से ठीक पहले आए आंकड़ों के मुताबिक, दोनों ही उम्मीदवारों की अस्वीकृति दर 45% दर्ज की गई थी। लेकिन शासन चला रहे लूला के लिए जमीनी हकीकत ज्यादा विकट साबित हुई। एक अन्य सर्वेक्षण में सामने आया कि 49% नागरिक लूला के कामकाज से नाखुश थे, जबकि उनकी सरकार की अनुमोदन दर मात्र 48% थी। ब्राजील के इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति ने इतने उच्च असंतोष दर के साथ दोबारा चुनाव मैदान में उतरने का जोखिम नहीं उठाया था।

यह स्थिति लूला के लिए एक बड़े आर्थिक विरोधाभास को भी उजागर करती है। देश में आधिकारिक बेरोजगारी दर 5.3% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। इसके साथ ही नागरिकों की औसत आय भी आधिकारिक रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से अब तक के उच्चतम स्तर पर है। इसके बावजूद, देश की आम जनता अपने रोजमर्रा के जीवन स्तर और परिस्थितियों से गहरी असंतुष्टि जता रही है। इस जनाक्रोश को शांत करने और जनसमर्थन जुटाने के लिए लूला ने सरकार के प्रमुख सामाजिक कल्याण कार्यक्रम 'बोल्सा फैमिलिया' की वित्तीय राशि में 15% की बढ़ोतरी भी की थी, लेकिन यह कदम भी पहले दौर में मतदाताओं के मूड को पूरी तरह बदलने में नाकाम रहा।

## सुरक्षा, अपराध और युवाओं का रुझान
फ्लेवियो बोलसोनारो ने अपने पूरे प्रचार अभियान के दौरान खुद को एक ऊर्जावान और युवा नेता के रूप में पेश किया, जो नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं और चिंताओं को समझता है। ब्राजील में हर साल 40,000 से अधिक हत्याएं दर्ज की जाती हैं, जिससे अपराध और कानून-व्यवस्था नागरिकों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। फ्लेवियो ने बढ़ती आपराधिक वारदातों को जोर-शोर से उठाया और युवाओं के बीच कानून के सख्त अनुपालन का भरोसा जगाया। युवा आबादी में बढ़ती असुरक्षा की भावना ने भी दक्षिणपंथी खेमे के पक्ष में माहौल तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

## सुप्रीम कोर्ट से टकराव और भ्रष्टाचार के मुद्दे
फ्लेवियो बोलसोनारो की चुनावी रणनीति का दूसरा सबसे प्रमुख आधार ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ उनका आक्रामक रुख रहा। उन्होंने अपने अभियान का एक बड़ा हिस्सा अदालत के फैसलों और कार्यप्रणाली की आलोचना करने में बिताया, ठीक उसी तरह जैसे उनके पिता अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान किया करते थे। फ्लेवियो ने 2023 में ब्रासीलिया स्थित सत्ता के तीनों प्रमुख अंगों की इमारतों पर हजारों समर्थकों द्वारा किए गए हमले और तख्तापलट की कोशिश के मामले में अपने पिता को सुनाई गई सजा को लगातार निशाना बनाया। इस घटना की तुलना 6 जनवरी 2021 को वॉशिंगटन डीसी में कैपिटल हिल पर हुए हमले से की गई थी।

साल 2025 में पूर्व राष्ट्रपति को 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसका दक्षिणपंथी समर्थकों ने तीखा विरोध किया था। इस मामले की निगरानी जस्टिस अलेक्जेंड्रे डी मोरेस कर रहे थे, जिन्हें लूला का करीबी माना जाता है। हालांकि मोरेस की नियुक्ति लूला ने नहीं की थी, लेकिन तख्तापलट मुकदमे की अध्यक्षता करने के कारण वे लूला के सहयोगी के रूप में देखे जाते रहे हैं। फ्लेवियो ने इसके अलावा बैंको मास्टर भ्रष्टाचार घोटाले को भी सियासी हथियार बनाया। इस घोटाले में ब्राजीलियाई बैंकर डेनियल वोर्कारो को मार्च के महीने में गिरफ्तार किया गया था। वोर्कारो पर देश की सबसे बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप लगा, जिसमें राजनीतिक जगत के कई प्रमुख चेहरे घिर गए। पुलिस द्वारा यह संकेत दिए जाने के बाद कि वोर्कारो ने अपनी गिरफ्तारी टालने के लिए जस्टिस मोरेस से संपर्क साधा था, यह विवाद लूला सरकार पर भी परोक्ष रूप से भारी पड़ा, हालांकि मोरेस ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से साफ इनकार किया है।

## संसद में बोलसोनारो परिवार का दबदबा और राजनीतिक भविष्य
पहले चरण के नतीजों का असर सिर्फ राष्ट्रपति की दौड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की संसद में भी दक्षिणपंथ ने अपनी जड़ें बेहद मजबूत कर ली हैं। सीनेट में बोलसोनारो परिवार के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी ने जबरदस्त छलांग लगाई है और उसकी सीटें 15 से बढ़कर सीधे 28 तक पहुंच गई हैं। बोलसोनारो परिवार का राजनीतिक दबदबा इस बात से साबित होता है कि पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी मिशेल और उनके एक अन्य बेटे कार्लोस दोनों ही सीनेट के लिए निर्वाचित हो गए हैं।

ब्राजील के प्रतिष्ठित समाचार पत्र फोल्हा डी एस पाउलो में राजनीतिक विश्लेषक डोरा क्रेमर ने लिखा है कि अब दूसरे चरण में लूला और फ्लेवियो दोनों को ही अपना पूरा ध्यान स्वतंत्र और अनिर्णीत मतदाताओं पर केंद्रित करना होगा। ब्राजील में यह आम कहावत मशहूर है कि यहां की राजनीति इतनी अस्थिर और अप्रत्याशित है कि बीता हुआ कल भी तय नहीं लगता। चुनावी परिदृश्य को देखते हुए लूला की वापसी की संभावनाएं बेहद कठिन नजर आ रही हैं। यदि वे दूसरे दौर में किसी अभूतपूर्व चमत्कार के जरिए बाजी पलट भी देते हैं, तब भी यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि बोलसोनारो समर्थक दक्षिणपंथी ताकतें अब ब्राजील की राजनीति में एक अपरिहार्य शक्ति बन चुकी हैं जिन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन है।

## इसका आप पर असर
ब्राजील के इस चुनाव परिणाम से देश की आर्थिक नीतियों, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और वैश्विक व्यापार संबंधों पर दूरगामी असर पड़ने की संभावना है।

- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** ब्राजील में संभावित राजनीतिक बदलाव से बाजार की नीतियों और निवेश प्राथमिकताओं में बड़ा फेरबदल हो सकता है। निवेशकों को चुनाव के दूसरे चरण के नतीजों और आर्थिक घोषणाओं पर पैनी नजर रखनी होगी।
- **ब्राजील के आम नागरिकों पर:** देश में कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक सुरक्षा नीतियों की भविष्य की दिशा इस अंतिम मुकाबले से तय होगी। नए नेतृत्व के तहत अपराध नियंत्रण और 'बोल्सा फैमिलिया' जैसी योजनाओं के स्वरूप में बदलाव देखने को मिल सकता है।
- **लैटिन अमेरिकी क्षेत्र पर:** इस नतीजे से पूरे महाद्वीप में दक्षिणपंथी राजनीतिक विचारधारा को नई ऊर्जा और गति मिल सकती है। क्षेत्रीय व्यापार समझौतों और कूटनीतिक गठबंधनों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
- **युवा मतदाताओं के संदर्भ में:** रोजगार के ऐतिहासिक आंकड़ों के बावजूद जीवन स्तर और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नीतियां बदल सकती हैं। युवा आबादी के लिए कानून-व्यवस्था और आर्थिक अवसरों के नए मानक तय किए जा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
ब्राजील के चुनाव के पहले चरण में फ्लेवियो बोलसोनारो की बढ़त के पीछे जनता में गहराता असंतोष, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और न्यायपालिका से जुड़े विवाद प्रमुख कारण रहे हैं।

- **लूला सरकार के प्रति जनाक्रोश:** अनुकूल व्यापक आर्थिक आंकड़ों के बावजूद 49% मतदाताओं ने मौजूदा सरकार के कामकाज पर नाराजगी जताई। जीवन यापन की परिस्थितियों और कल्याणकारी लाभों के बावजूद जनता में असंतोष की भावना प्रबल रही।
- **अपराध और सुरक्षा के मुद्दे:** देश में प्रतिवर्ष 40,000 से अधिक हत्याओं के दर्ज मामलों ने आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी थी। युवा उम्मीदवार के रूप में फ्लेवियो बोलसोनारो ने इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाकर युवाओं का विश्वास जीता।
- **न्यायपालिका और भ्रष्टाचार विवाद:** सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति को 27 साल की सजा सुनाए जाने और जस्टिस मोरेस से जुड़े बैंकिंग घोटालों ने सत्ता विरोधी माहौल को हवा दी। इन कानूनी विवादों को दक्षिणपंथी खेमे ने राजनीतिक पक्षपात के रूप में प्रस्तुत कर चुनावी लाभ में बदला।

## सवाल-जवाब

### 1. ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में किसे कितने वोट मिले?
सीनेटर फ्लेवियो बोलसोनारो को 56.1 मिलियन वोट मिले, जबकि राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा को 53.8 मिलियन वोट हासिल हुए।

### 2. क्या चुनाव का अंतिम फैसला हो चुका है?
नहीं, किसी भी उम्मीदवार को पूर्ण बहुमत न मिलने के कारण इस महीने के अंत में दूसरे दौर का मतदान कराया जाएगा।

### 3. ब्राजील में वर्तमान बेरोजगारी दर कितनी है?
ब्राजील में आधिकारिक बेरोजगारी दर 5.3% दर्ज की गई है, जो इतिहास के सबसे निचले स्तरों में से एक है।

### 4. फ्लेवियो बोलसोनारो की पार्टी को सीनेट में कितनी सीटें मिली हैं?
उनकी लिबरल पार्टी ने सीनेट में अपनी सीटों की संख्या 15 से बढ़ाकर 28 कर ली है।

### 5. ब्राजील में हर साल लगभग कितनी हत्याएं दर्ज होती हैं?
ब्राजील में सालाना 40,000 से अधिक हत्याएं दर्ज की जाती हैं, जो चुनाव में एक प्रमुख मुद्दा रहा।

### 6. पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को कितने साल की सजा सुनाई गई थी?
साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 2023 की घटनाओं के मामले में पूर्व राष्ट्रपति को 27 साल जेल की सजा सुनाई थी।

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