{
  "type": "article",
  "title": "पेरू की अदालत ने रद्द की 15 साल की सजा, ओलांता हुमाला को भ्रष्टाचार मामले में मिली बड़ी राहत",
  "summary": "पेरू की संवैधानिक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति ओलांता हुमाला के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द करते हुए उनकी 15 साल की जेल की सजा को अमान्य कर दिया है। चुनावी फंडिंग विवाद से जुड़े इस मामले में फैसले के बाद लीमा की बारबाडिलो जेल से उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।",
  "content": "पेरू की शीर्ष संवैधानिक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति ओलांता हुमाला को सुनाई गई 15 साल की जेल की सजा को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ चलाई गई पूरी आपराधिक प्रक्रिया को शून्य और निष्प्रभावी घोषित कर दिया है। 2011 से 2016 तक देश का नेतृत्व करने वाले ओलांता हुमाला को 2025 में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में दोषी ठहराया गया था। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब राजधानी लीमा में स्थित बारबाडिलो जेल से उनकी रिहाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। संवैधानिक पीठ के इस निर्णय से लैटिन अमेरिका के प्रमुख चुनावी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लंबे कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आ गया है।\n\nसंवैधानिक अदालत का फैसला और बचाव पक्ष का रुख\nसंवैधानिक अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ओलांता हुमाला के खिलाफ चली न्यायिक सुनवाई में गंभीर कानूनी खामियां थीं, जिसकी वजह से पूरा मुकदमा ही अमान्य हो जाता है। अदालत का निर्णय सामने आने के बाद हुमाला के वकील हुलियो एस्पिनोज़ा गोयेना ने सोशल मीडिया पर कानूनी रुख साझा किया। गोयेना के अनुसार, अदालत ने अपने फैसले में माना कि चुनावी अभियानों के दौरान प्राप्त किए गए राजनीतिक अंशदान या चंदे को देश के कानून के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।\n\nवकील हुलियो एस्पिनोज़ा गोयेना ने कहा कि वर्तमान में इस मामले की सुनवाई कर रही क्रिमिनल चैंबर को अब बिना किसी देरी के अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा। उन्होंने मांग की कि संबंधित न्यायिक निकाय को पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ सभी मुकदमों को अंतिम रूप से खारिज करने का आदेश जारी करना चाहिए और ओलांता हुमाला की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करनी चाहिए। इस फैसले से पहले हुमाला ने 2025 में मिली सजा के खिलाफ अपील करने का ऐलान किया था और वे लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे थे।\n\nभ्रष्टाचार के आरोप और ओडेब्रेख्त चुनावी फंडिंग का मामला\nओलांता हुमाला को 2025 में हुई सजा का मुख्य आधार दो अलग-अलग राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में गैर-कानूनी तरीके से धन प्राप्त करने के आरोप थे। अभियोजकों का दावा था कि हुमाला और उनकी पत्नी ने 2011 के सफल राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए ब्राजील की निर्माण कंपनी ओडेब्रेख्त से 30 लाख डॉलर (3 मिलियन डॉलर) का अवैध चंदा स्वीकार किया था। इसके अलावा जांच अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया था कि 2006 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के लिए वेनेजुएला के तत्कालीन नेता हुगो चावेज़ से 2 लाख डॉलर (200,000 डॉलर) की अवैध राशि ली गई थी।\n\nपूरी न्यायिक जांच के दौरान हुमाला और उनके कानूनी सलाहकारों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था। पूर्व राष्ट्रपति का कहना था कि चुनाव प्रचार के लिए मिले चंदे उस समय के मौजूदा कानूनों का उल्लंघन नहीं करते थे और वे राजनीतिक द्वेष के शिकार हुए हैं। पेरू में राजनीतिक भ्रष्टाचार से जुड़ी व्यापक जांच में पूर्व राष्ट्रपति कुचिंस्की जैसे अन्य बड़े नेताओं के नाम भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने जांच जारी रहने के दौरान हमेशा यही रुख बनाए रखा कि उन्हें किए गए भुगतान अवैध नहीं थे।\n\nनादिन हेरेडिया की स्थिति और ब्राजील में शरण\nओलांता हुमाला का कानूनी मामला उनकी पत्नी नादिन हेरेडिया से गहराई से जुड़ा हुआ है, जिनके साथ मिलकर उन्होंने नेशनलिस्ट पार्टी की स्थापना की थी। 2025 में निचली अदालत ने नादिन हेरेडिया को भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में दोषी पाया था और उन्हें भी 15 साल की कैद की सजा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष ने दोनों पति-पत्नी पर संयुक्त रूप से आरोप लगाया था कि उन्होंने ओडेब्रेख्त और विदेशी नेताओं से मिले अवैध फंड का प्रबंधन और उपयोग किया।\n\nहालांकि, सजा के ऐलान के बाद नादिन हेरेडिया पेरू में जेल जाने से बच गईं। उन्होंने लीमा स्थित ब्राजील के दूतावास में शरण ली, जिसके बाद उन्हें राजनयिक सहमति से ब्राजील जाने के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया। ब्राजील में राजनीतिक शरण मिलने के बाद वे वहीं रह रही हैं। अब संवैधानिक अदालत द्वारा मुख्य आपराधिक कार्यवाही को रद्द किए जाने से नादिन हेरेडिया और उनकी राजनीतिक पार्टी से जुड़े मुकदमों के भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं।\n\nसैन्य पृष्ठभूमि, राजनीतिक उभार और राष्ट्रपति पद का सफर\nओलांता हुमाला का सार्वजनिक जीवन में प्रवेश एक सैन्य अधिकारी के रूप में हुआ था। वे सबसे पहले वर्ष 2000 में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति आल्बर्टो फुजीमोरी की सरकार के खिलाफ एक अल्पकालिक सैन्य विद्रोह का नेतृत्व किया था। इस घटना ने उन्हें देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया, जिसके बाद उन्होंने लोकतांत्रिक राजनीति की ओर रुख किया।\n\nवर्ष 2006 में हुमाला ने पहली बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा। उस समय उनका राजनीतिक एजेंडा वेनेजुएला के नेता हुगो चावेज़ की समाजवादी विचारधारा से प्रेरित था। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2011 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और ब्राजील के तत्कालीन राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की व्यावहारिक एवं मध्यममार्गी नीतियों को अपनाया। इस नए राजनीतिक रुख के बल पर वे एक बड़ा गठबंधन बनाने में सफल रहे और 2011 के निर्णायक चुनाव में दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी केइको फुजीमोरी (जो आल्बर्टो फुजीमोरी की सबसे बड़ी बेटी हैं) को हराकर 2011 से 2016 तक पेरू के राष्ट्रपति रहे।\n\n2016 के बाद ओडेब्रेख्त घोटाला और लंबा कानूनी संघर्ष\nराष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के तुरंत बाद 2016 में ओलांता हुमाला की कानूनी मुश्किलें शुरू हो गईं। 2016 में ब्राजील की निर्माण दिग्गज ओडेब्रेख्त ने अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के सामने स्वीकार किया कि उसने सरकारी ठेके हासिल करने के लिए लैटिन अमेरिका के कई देशों में सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक दलों को करोड़ों डॉलर की रिश्वत दी थी। इस खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हड़कंप मच गया था।\n\nपेरू के जांच अधिकारियों ने ओडेब्रेख्त मामले में पूर्व राष्ट्रपतियों और बड़े नेताओं के खिलाफ व्यापक आपराधिक जांच शुरू की। हुमाला और उनकी पत्नी पर ओडेब्रेख्त से मिली राशि और 2006 के वेनेजुएला फंड को लेकर औपचारिक आरोप तय किए गए। जांच के दौरान दोनों को एक साल तक प्री-ट्रायल हिरासत में भी रहना पड़ा था। लगभग एक दशक तक चले लंबे कानूनी संघर्ष और 2025 की सजा के बाद आखिरकार संवैधानिक अदालत ने पूरे मामले को अमान्य ठहराते हुए हुमाला को बड़ी राहत दी है।\n\nइसका आप पर असर\nअंतरराष्ट्रीय स्तर पर: लैटिन अमेरिका में राजनीतिक फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों की न्यायिक व्याख्या के लिए यह फैसला एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।\n\nपेरू में: पूर्व राष्ट्रपति की रिहाई से देश की घरेलू राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ओलांता हुमाला की 15 साल की सजा क्यों रद्द की गई?\nपेरू की संवैधानिक अदालत ने आपराधिक प्रक्रिया को अमान्य घोषित कर दिया और फैसला दिया कि चुनाव के दौरान प्राप्त राजनीतिक चंदा कानूनन मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में नहीं आता।\n\n2. भ्रष्टाचार के आरोपों में किन चुनाव अभियानों का जिक्र था?\nआरोप 2011 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए ब्राजीलियाई कंपनी ओडेब्रेख्त से मिले 30 लाख डॉलर और 2006 के अभियान के लिए वेनेजुएला के नेता हुगो चावेज़ से मिले 2 लाख डॉलर से संबंधित थे।\n\n3. ओलांता हुमाला को किस जेल से रिहा किया जाएगा?\nउन्हें पेरू की राजधानी लीमा में स्थित बारबाडिलो जेल से रिहा किया जाएगा।\n\n4. ओलांता हुमाला की पत्नी नादिन हेरेडिया की कानूनी स्थिति क्या है?\nनादिन हेरेडिया को भी 2025 में 15 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उन्होंने लीमा में ब्राजील के दूतावास में शरण ली और फिर उन्हें ब्राजील जाने के लिए सुरक्षित मार्ग मिला।\n\n5. ओलांता हुमाला ने पेरू के राष्ट्रपति के रूप में कब सेवा दी?\nओलांता हुमाला ने 2011 के चुनाव में केइको फुजीमोरी को हराकर 2011 से 2016 तक पेरू के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।",
  "url": "https://trendkia.com/latin-america/peru-ki-adalata-ne-radda-ki-15-sala-ki-saja-ollanta-humala-ko-bhrashtachara-mamale-men-mili-bari-rahata-12497",
  "category": "लैटिन अमेरिका",
  "publishedAt": "2026-07-31",
  "tags": [
    "ओलांता हुमाला",
    "पेरू राजनीति",
    "ओडेब्रेख्त घोटाला",
    "नादिन हेरेडिया",
    "बारबाडिलो जेल",
    "लीमा",
    "लैटिन अमेरिका"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}