# 85 की उम्र में भी रंगों से सजी है झांसी की सुमन द्विवेदी की दुनिया, कैनवास पर उकेर रहीं जीवन के रंग

> झांसी की 85 वर्षीय सुमन द्विवेदी उम्र के इस पड़ाव पर भी पूरे समर्पण के साथ चित्रकारी कर रही हैं। ब्रश और रंगों के जरिए अपनी रचनात्मकता को जीवित रखकर वे साबित कर रही हैं कि कला के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/85-ki-umra-men-bhi-rngon-se-saji-hai-jhansi-ki-suman-dwivedi-ki-duniya-kainavasa-para-ukera-rahin-jivana-ke-rnga-53696 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुमन द्विवेदी, झांसी, चित्रकारी, पेंटिंग, रचनात्मकता, कला

हाथों में कूंची थामे और रंगों के तालमेल से कैनवास पर जीवन की अनुभूतियां उकेरती झांसी की सुमन द्विवेदी कला प्रेमियों के लिए एक अनोखी मिसाल बन चुकी हैं। 85 वर्ष की उम्र पार कर लेने के बावजूद चित्रकारी के प्रति उनका गहरा अनुराग रत्ती भर भी कम नहीं हुआ है। उम्र के इस पड़ाव पर जहां अधिकांश लोग दैनिक गतिविधियों से भी दूरी बना लेते हैं, वहीं सुमन द्विवेदी हर दिन रंगों के संसार में खोकर अपनी कल्पनाओं को नए आकार और रूप देती हैं। उनके लिए ब्रश उठाना और कोरे पन्नों या कैनवास को जीवंत बनाना केवल एक आदत नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और रचनात्मक पहचान का एक अटूट हिस्सा बन चुका है।

## धैर्य, बारीकियां और रंगों का अनूठा सामंजस्य
चित्रकारी एक ऐसी विधा है जिसमें हर रंग का अपना अलग महत्व, अर्थ और मानवीय संवेदना होती है। कोई भी कलाकार अपनी गहन सोच और अंतर्मन की भावनाओं को जब किसी धरातल पर उतारता है, तो वह रचना एक नया रूप धारण कर लेती है। इस पूरी प्रक्रिया में बेहद धैर्य, एकाग्रता और सूक्ष्म बारीकियों पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता होती है। सुमन द्विवेदी द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों में भी रंगों का यही अद्भुत संयोजन और गहरी कलात्मक सूझबूझ साफ तौर पर झलकती है। उनकी बनाई गई पेंटिंग्स इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि वे हर रेखा और रंग के चयन में कितनी सतर्कता और संजीदगी बरतती हैं।

## अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनती चित्रकारी
पेंटिंग केवल एक आकर्षक तस्वीर बना देने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह अपने विचारों, दृष्टिकोण और भावों को अभिव्यक्त करने का एक बेहद सशक्त जरिया भी है। एक संवेदनशील कलाकार अपनी असीम कल्पना के सहारे विभिन्न आकृतियों और रंगों को एक सूत्र में पिरोता है, जिससे एक सर्वथा नई रचना का जन्म होता है। सुमन द्विवेदी इसी कलात्मक माध्यम से अपनी स्वतंत्र रचनात्मक पहचान को मजबूती से संजोए हुए हैं। इस उम्र में भी उनका लगातार चित्रकारी में रमे रहना यह स्पष्ट संदेश देता है कि किसी भी रचनात्मक कार्य या अपने पसंदीदा शौक से जुड़े रहने के लिए उम्र का कोई तय पैमाना या बंदिश कभी आड़े नहीं आ सकती।

## जीवन के हर दौर में बरकरार रहा कला का सफर
किसी भी इंसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात उस कला के प्रति उसका आंतरिक लगाव, समर्पण और उसे अनवरत जारी रखने की दृढ़ इच्छाशक्ति होती है। वक्त तेजी से बदलता रहता है और जीवन की जिम्मेदारियां बढ़ती जाती हैं, लेकिन यदि मन में अपने शौक के प्रति सच्चा समर्पण बना रहे तो व्यक्ति उम्र भर अपनी पसंद की दुनिया में पूरी सक्रियता से रचा-बसा रह सकता है। सुमन द्विवेदी के इस लंबे कलात्मक सफर को समझने के लिए यह देखना बेहद महत्वपूर्ण है कि उनके भीतर पेंटिंग का विचार सबसे पहले कैसे उपजा, उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ब्रश कब थामा और इस कला को सीखने का सिलसिला किस तरह आगे बढ़ा।

## अनुभवों से निखरता रचनात्मक संसार
बीते कई दशकों में उनकी चित्रकारी के तौर-तरीकों, शैलियों और माध्यमों में क्या बदलाव आए तथा वर्तमान समय में उन्हें किस प्रकार के चित्र बनाना सर्वाधिक सुहाता है, यह उनके कलात्मक विकास को दर्शाता है। साथ ही उनकी बनाई तमाम कलाकृतियों में से कौन सी रचना उनके दिल के सबसे करीब है और 85 साल की उम्र में भी उन्हें घंटों रंगों के बीच समय बिताने की ऊर्जा कहां से मिलती है, ये सारे पहलू उनकी कला यात्रा के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत अनुभवों को भी सामने लाते हैं। सुमन द्विवेदी की यह कहानी यह साबित करती है कि वास्तविक रचनात्मकता कभी उम्र की मोहताज नहीं होती। जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर व्यक्ति अपनी पसंद के कार्य को जारी रख सकता है और रंगों के जरिए अपनी एक खूबसूरत दुनिया गढ़ सकता है।

## इसका आप पर असर
यह कहानी बुजुर्गों और कला प्रेमियों को यह सिखाती है कि मानसिक सक्रियता और रचनात्मकता किसी भी उम्र में जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाए रख सकती है।

- **भारत में:** देश भर के वरिष्ठ नागरिकों और कला में रुचि रखने वाले लोगों को यह संदेश मिलता है कि सेवानिवृत्ति या बढ़ती उम्र के बाद भी अपने पसंदीदा शौक को छोड़ा नहीं जाना चाहिए। दैनिक जीवन में किसी रचनात्मक शौक से जुड़े रहने से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और एकाकीपन दूर होता है।
- **झांसी में:** बुंदेलखंड और झांसी क्षेत्र की स्थानीय प्रतिभाओं व महिलाओं के लिए सुमन द्विवेदी का यह समर्पण एक प्रत्यक्ष प्रेरणास्रोत है। यह स्थानीय समाज को यह याद दिलाता है कि वरिष्ठ पीढ़ी के अनुभवों और उनकी कलात्मक प्रतिभा को उचित सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए।
- **शौकिया कलाकारों के लिए:** किसी भी विधा में चित्रकारी सीखने या शुरू करने की चाह रखने वालों के लिए उम्र कभी कोई रुकावट नहीं बन सकती। निरंतर अभ्यास और धैर्य रखकर किसी भी समय कैनवास पर अपनी कल्पनाओं को जीवंत रूप दिया जा सकता है।
- **परिवारों और देखभाल करने वालों के लिए:** बुजुर्ग पारिवारिक सदस्यों को उनके पुराने शौक और रुचियों को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराना चाहिए। जब वरिष्ठ नागरिक अपनी पसंदीदा गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, तो उनका आत्मविश्वास और शारीरिक-मानसिक ऊर्जा दोनों बने रहते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
सुमन द्विवेदी की यह कला साधना उनके आंतरिक समर्पण, धैर्य और रंगों के प्रति अटूट प्रेम का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने उम्र के किसी भी पड़ाव पर अपनी रचनात्मक जिज्ञासा को धीमा नहीं पड़ने दिया।

- **कला के प्रति निरंतर समर्पण:** चित्रकारी को केवल समय बिताने का साधन न मानकर आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने की सोच ने उन्हें इस कला से लगातार जोड़े रखा। इसी स्वाभाविक रुचि और अभ्यास के कारण 85 की उम्र में भी उनका कला प्रेम सक्रिय बना हुआ है।
- **धैर्य और एकाग्रता का अभ्यास:** कैनवास पर रंगों का संयोजन और रेखाओं की बारीकियां संभालने के लिए जिस मानसिक ठहराव की जरूरत होती है, वह उन्होंने दशकों के अभ्यास से विकसित किया। यही अनुशासन उन्हें आज भी नए प्रयोग करने की ऊर्जा प्रदान करता है।
- **उम्र की सीमाओं से परे सोच:** उन्होंने उम्र को कभी भी अपनी रचनात्मक सीमाओं का पैमाना नहीं बनने दिया। मन के भीतर सीखने और अपनी पसंद की दुनिया में रमे रहने की चाह ने उनके कलात्मक सफर को निर्बाध गति दी।

## सवाल-जवाब

### 1. सुमन द्विवेदी कौन हैं और वे कहां की निवासी हैं?
सुमन द्विवेदी 85 वर्षीय कला प्रेमी हैं, जो उत्तर प्रदेश के झांसी की निवासी हैं और इस उम्र में भी सक्रिय रूप से चित्रकारी करती हैं।

### 2. सुमन द्विवेदी की उम्र क्या है?
सुमन द्विवेदी की उम्र 85 वर्ष है।

### 3. वे अपनी रचनात्मकता को किस माध्यम से व्यक्त करती हैं?
वे ब्रश और रंगों के जरिए कैनवास और कागज पर चित्रकारी करके अपनी रचनात्मकता और भावनाओं को व्यक्त करती हैं।

### 4. सुमन द्विवेदी की कलाकृतियों की मुख्य विशेषता क्या है?
उनकी पेंटिंग्स में रंगों का अनूठा सामंजस्य, बारीकियों पर बारीक ध्यान और गहरी कलात्मकता देखने को मिलती है।

### 5. उनकी यह कहानी समाज को क्या प्रेरणा देती है?
उनकी यात्रा यह स्पष्ट संदेश देती है कि रचनात्मकता और अपने शौक को जीने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता।

## प्रेरणा और सबक
सुमन द्विवेदी का जीवन सिखाता है कि लगन और रचनात्मकता के जरिए किसी भी उम्र में जीवन को अर्थपूर्ण बनाया जा सकता है।

- **शौक के लिए उम्र कभी बाधा नहीं:** अपने पसंदीदा काम या रचनात्मक विधा से जुड़े रहने के लिए उम्र का कोई तय पैमाना नहीं होता, केवल मन का सच्चा समर्पण जरूरी है।
- **धैर्य से आती है कला में गहराई:** किसी भी हुनर को निखारने के लिए शांत चित्त, लगातार अभ्यास और बारीकियों पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है।
- **आत्म-अभिव्यक्ति को बनाए रखें जीवित:** जीवन की विभिन्न जिम्मेदारियों के बीच भी अपनी आंतरिक भावनाओं और विचारों को किसी न किसी कलात्मक माध्यम से व्यक्त करते रहना चाहिए।
- **सकारात्मक व्यस्तता देती है नई ऊर्जा:** रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रहने से इंसान का मन सदैव जीवंत और ऊर्जावान बना रहता है, चाहे जीवन का कोई भी पड़ाव हो।

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