एल्युमिनियम के बर्तनों में भूलकर भी न पकाएं ये पांच चीजें, सेहत पर पड़ सकता है भारी एल्युमिनियम के बर्तनों में खट्टी और नमकीन चीजें पकाने से धातु का रिसाव खाने में हो सकता है, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। रसोई घर में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। एल्युमिनियम के बर्तनों का चलन हमारे यहां बहुत पुराना है, लेकिन इनमें हर तरह का खाना पकाना सुरक्षित नहीं माना जाता है। जब खट्टी या अधिक नमक वाली खाद्य सामग्रियां एल्युमिनियम के संपर्क में आती हैं, तो बर्तन से धातु के कुछ अंश भोजन में मिल जाते हैं। इस रासायनिक प्रक्रिया को एल्युमिनियम लीचिंग कहा जाता है। हालांकि इसका नकारात्मक प्रभाव शरीर पर एकदम से दिखाई नहीं देता है, लेकिन यदि लंबे समय तक भोजन के जरिए शरीर में एल्युमिनियम की मात्रा बढ़ती रहे, तो यह किडनी, हड्डियों और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इन जोखिमों से बचने के लिए यह जानना जरूरी है कि किन खाद्य पदार्थों को एल्युमिनियम के बर्तनों में पकाने से बचना चाहिए और उनके लिए स्टेनलेस स्टील या कांच के बर्तनों का उपयोग करना क्यों बेहतर होता है। टमाटर की रेसिपी और सॉस टमाटर में प्राकृतिक रूप से एसिड पाया जाता है। जब टमाटर की सब्जी, करी या सॉस को एल्युमिनियम के बर्तनों में लंबे समय तक पकाया जाता है, तो यह एसिड धातु के साथ प्रतिक्रिया करता है, जिससे भोजन में एल्युमिनियम की मात्रा काफी हद तक बढ़ जाती है। ऐसी किसी भी रेसिपी जिसमें टमाटर का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया गया हो, उसे एल्युमिनियम के बजाय हमेशा स्टील के बर्तनों में ही बनाना चाहिए ताकि हानिकारक धातुओं का रिसाव भोजन में न हो सके। नींबू और खट्टे फल नींबू और अन्य खट्टे फलों में भी उच्च मात्रा में एसिड मौजूद होता है। इन खट्टे फलों के रस या उनसे जुड़ी रेसिपी को एल्युमिनियम के बर्तन में गर्म करने से धातु आसानी से भोजन में घुल सकती है। नींबू आधारित ग्रेवी या खट्टी सॉस तैयार करने के लिए हमेशा स्टील के बर्तनों का चयन करना ही स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से एक समझदारी भरा कदम माना जाता है। इमली की चटनी और करी भारतीय रसोई में इमली का उपयोग स्वाद बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। इमली में मौजूद एसिड एल्युमिनियम के बर्तनों के साथ तेजी से प्रतिक्रिया कर सकता है। यही कारण है कि इमली से बनी खट्टी चटनी या करी को साधारण एल्युमिनियम के बर्तनों में अधिक देर तक पकाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे भोजन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। खमीर उठे खट्टे खाद्य पदार्थ सॉकरक्रॉट जैसी खट्टी और फर्मेंटेड यानी खमीर उठी हुई चीजों को कभी भी एल्युमिनियम के बर्तनों में न तो पकाना चाहिए और न ही उनमें लंबे समय तक स्टोर करके रखना चाहिए। इस तरह के फर्मेंटेड खाद्य पदार्थों में मौजूद तत्व धातु के साथ मिलकर प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे खाने में एल्युमिनियम मिलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अतिरिक्त नमक वाले खाद्य पदार्थ केवल खट्टी चीजें ही नहीं, बल्कि बहुत अधिक नमक वाली सामग्रियां भी एल्युमिनियम के बर्तन से धातु के रिसाव को तेज कर देती हैं। नमकीन मछली या जरूरत से ज्यादा नमक वाली किसी भी प्रकार की करी को पकाने या लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का ही उपयोग किया जाना चाहिए। बर्तन चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान इसका मतलब यह नहीं है कि एल्युमिनियम के बर्तन पूरी तरह से असुरक्षित हैं। सामान्य और रोजमर्रा के उपयोग में इनसे निकलने वाली धातु की मात्रा अक्सर बेहद कम होती है। फिर भी, खट्टी और नमकीन खाद्य पदार्थों को इनमें अधिक देर तक पकाने या स्टोर करने से हमेशा बचना चाहिए। इसके अलावा, यदि आपके बर्तन की अंदरूनी सतह खराब हो चुकी है या उसमें छोटे-छोटे गड्ढे पड़ गए हैं, तो उस बर्तन को तुरंत बदल देना ही उचित रहता है। इसका आप पर असर रसोई में एल्युमिनियम के बर्तनों के गलत इस्तेमाल से आपकी सेहत पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है, जिससे बचना बेहद जरूरी है। • स्वास्थ्य सुरक्षा: खट्टी और नमकीन चीजों को एल्युमिनियम में पकाने से बचने से शरीर में धातु की मात्रा बढ़ने का खतरा टलता है। यह आदत किडनी और हड्डियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करती है। • बर्तन का चयन: टमाटर, नींबू और इमली जैसी चीजों के लिए हमेशा स्टेनलेस स्टील या कांच के बर्तनों का उपयोग करें। यह बदलाव आपके दैनिक भोजन को अधिक सुरक्षित बनाता है। • बर्तन की जांच: जिन एल्युमिनियम बर्तनों की सतह पर गड्ढे या खरोंच आ गई हैं, उन्हें तुरंत बदल देना चाहिए। खराब सतह वाले बर्तन स्वास्थ्य के लिए अधिक हानिकारक साबित हो सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ एल्युमिनियम लीचिंग एक रासायनिक प्रक्रिया है जो तब होती है जब धातु कुछ विशेष खाद्य पदार्थों के संपर्क में आती है। • रासायनिक प्रतिक्रिया: टमाटर, नींबू और इमली जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद प्राकृतिक एसिड एल्युमिनियम के साथ मिलकर प्रतिक्रिया करते हैं। यह प्रक्रिया धातु के कणों को भोजन में घुलने पर मजबूर कर देती है। • नमक की भूमिका: भोजन में अधिक मात्रा में मौजूद सोडियम और नमक धातु के रिसाव की प्रक्रिया को और अधिक तेज कर देते हैं। • खराब सतह वाले बर्तनों में यह जोखिम और भी बढ़ जाता है। सवाल-जवाब 1. एल्युमिनियम लीचिंग क्या होती है? जब खट्टी या नमकीन चीजें एल्युमिनियम के संपर्क में आती हैं, तो बर्तन से धातु के कुछ हिस्से खाने में मिल जाते हैं, जिसे एल्युमिनियम लीचिंग कहा जाता है। 2. किन बर्तनों में खट्टी चीजें पकाना सुरक्षित है? खट्टी और अधिक नमक वाली चीजें पकाने के लिए स्टेनलेस स्टील या कांच के बर्तन सबसे अच्छे विकल्प माने जाते हैं। 3. टमाटर को एल्युमिनियम बर्तन में क्यों नहीं पकाना चाहिए? टमाटर में प्राकृतिक एसिड होता है जो एल्युमिनियम के साथ प्रतिक्रिया करके खाने में धातु की मात्रा बढ़ा देता है। 4. लंबे समय तक एल्युमिनियम खाने से क्या नुकसान हो सकता है? लंबे समय तक शरीर में एल्युमिनियम की मात्रा बढ़ने से किडनी, हड्डियों और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियां हो सकती हैं। 5. क्या सामान्य इस्तेमाल के लिए एल्युमिनियम बर्तन पूरी तरह असुरक्षित हैं? नहीं, एल्युमिनियम के बर्तन पूरी तरह असुरक्षित नहीं हैं और सामान्य इस्तेमाल में इनसे मिलने वाली धातु की मात्रा अक्सर कम होती है। https://trendkia.com/lifestyle/aluminium-ke-bartano-mein-yeh-paanch-cheezein-na-pakayein-48935 TrendKia — Har trend, sabse pehle.