# अंकुरित और हरे आलू बन सकते हैं सेहत के लिए आफत, जानिए बचाव के सटीक तरीके

> नमी और धूप के संपर्क में आने से आलू में जहरीला तत्व पनपने लगता है, जिससे पाचन तंत्र बिगड़ने और शुगर बढ़ने का खतरा रहता है।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/ankurita-aura-hare-alu-bana-sakate-hain-sehata-ke-lie-aphata-janie-bachava-ke-satika-tarike-44714 · **Language:** Hindi
**Tags:** आलू भंडारण, सोलेनिन विषाक्तता, किचन टिप्स, सब्जी भंडारण, मधुमेह आहार, स्वास्थ्य सलाह

किचन में रोज पकने वाली सब्जियों की टोकरी में अगर ठीक से ध्यान न दिया जाए, तो सामान्य आलू भी सेहत बिगाड़ने का कारण बन सकता है। अक्सर घरों में रखे-रखे आलू के छिलके पर हरापन उभर आता है या फिर उसमें से सफेद कल्ले फूटने लगते हैं। बहुत से लोग इसे अनदेखा कर पका लेते हैं, जबकि यह आदत शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। बलिया स्थित श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह ने इस संबंध में जरूरी सावधानियां साझा की हैं।

## धूप और नमी से क्यों खराब होते हैं कंद?
जमीन के नीचे तैयार होने वाली फसलों जैसे लहसुन, प्याज और आलू की देखभाल कटाई के बाद भी बेहद जरूरी होती है। अगर इन कंदों को किसी सीलन भरे स्थान पर जमा किया जाए, तो उनमें बेहद तेजी से अंकुरण शुरू हो जाता है। प्रो. अशोक कुमार सिंह का कहना है कि हवादार और पूरी तरह सूखी जगह ही इन फसलों को सुरक्षित रखने के लिए मुफीद होती है। खुले में पर्याप्त वायु प्रवाह मिलने से इनमें नमी नहीं ठहरती और ये लंबे समय तक उपयोग योग्य बने रहते हैं।

## हरापन और सोलेनिन का छिपा हुआ खतरा
जब आलू पर सीधी धूप या तेज रोशनी पड़ती है, तो उसकी बाहरी सतह पर नीले या हरे रंग के चकत्ते उभरने लगते हैं। प्रो. सिंह के मुताबिक, रोशनी के असर से कंद के भीतर सोलेनिन की मात्रा काफी अधिक बढ़ जाती है। यह एक ऐसा प्राकृतिक विषैला यौगिक है जो पेट की प्रणाली को चोट पहुंचा सकता है। ऐसे प्रभावित आलू का अधिक सेवन पेट दर्द, मरोड़ या पाचन से जुड़े विकारों को न्योता देता है। यदि किसी आलू के छोटे हिस्से में हरा रंग दिखे, तो चाकू से उस पूरे प्रभावित भाग को काटकर पूरी तरह फेंक देना चाहिए।

## अंकुर फूटे आलू से क्यों बचना चाहिए?
अंकुरण की स्थिति पैदा होने पर आलू अपनी अंदरूनी गुणवत्ता तेजी से खोने लगता है। प्रो. सिंह सलाह देते हैं कि अगर कल्ले फूट चुके हों, तो ऐसे आलू को पकाने से पूरी तरह बचना चाहिए। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि कल्ले बनने की प्रक्रिया में कंद का संचित स्टार्च अंकुरों की ओर खिंचने लगता है। इस बदलाव से आलू का पोषक तत्व खत्म हो जाता है और पकाने पर उसका वास्तविक स्वाद भी बिगड़ जाता है। हालांकि, यदि अंकुरण बिल्कुल शुरुआती दौर में हो, तो उस हिस्से को तुरंत तोड़कर अलग किया जा सकता है।

## मधुमेह रोगियों के लिए खानपान की हिदायतें
स्टार्च का भंडार होने के कारण आलू की अनियंत्रित मात्रा किसी भी व्यक्ति के शरीर पर भारी पड़ सकती है। शरीर में प्रवेश करने के बाद यही स्टार्च तेजी से ग्लूकोज में तब्दील होता है, जिससे खून में शुगर का स्तर अचानक चढ़ने लगता है। इसी वजह से डायबिटीज के मरीजों को अपने भोजन में आलू की मात्रा बेहद सीमित रखने की सख्त हिदायत दी जाती है।

## सब्जियों के मूल गुणों को बनाए रखने का नियम
बाजार में जब ताजी हरी सब्जियां प्रचुर मात्रा में मौजूद हों, तो आलू पर निर्भरता घटाना ही समझदारी है। करेला, भिंडी और परवल जैसी मौसमी सब्जियों को पकाते समय आलू मिलाने से बचना चाहिए। प्रो. सिंह स्पष्ट करते हैं कि प्रत्येक सब्जी की अपनी विशिष्ट रासायनिक संरचना होती है। हर व्यंजन में जबरन आलू शामिल करने के बजाय सब्जियों को उनके कुदरती रूप और तासीर के अनुरूप पकाना ही स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम होता है।

## इसका आप पर असर
आलू के सही रखरखाव और सीमित उपयोग से परिवार को पेट की बीमारियों और अनियंत्रित ब्लड शुगर से बचाया जा सकता है।

- **रसोई में भंडारण:** आलू, प्याज और लहसुन को कभी भी सीलन वाली जगह या धूप में न रखें। इन्हें हमेशा जालीदार टोकरी में किसी खुली और हवादार जगह पर रखें ताकि अंकुरण और हरापन न फैले।
- **खाना बनाते समय जांच:** सब्जी काटने से पहले आलू की त्वचा को ध्यान से देखना जरूरी है। यदि कोई हिस्सा हरा या नीला दिखे तो उसे पूरी तरह काटकर अलग कर दें और गहरे अंकुर वाले आलू को सीधे फेंक दें।
- **डायबिटीज पर असर:** खून में शुगर की समस्या से जूझ रहे लोगों को आलू की मात्रा घटानी होगी। इसका अत्यधिक स्टार्च शरीर में ग्लूकोज बढ़ाकर परेशानी पैदा कर सकता है।
- **सब्जी पकाने की आदत:** भिंडी, करेला और परवल जैसी पौष्टिक सब्जियों में आलू मिलाने से बचें। इन्हें बिना आलू के पकाने से सब्जियों के कुदरती पोषक तत्व और तासीर सुरक्षित रहते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
आलू में हरापन और अंकुरण भंडारण की गलत परिस्थितियों के कारण होता है, जो रासायनिक बदलाव लाकर इसे नुकसानदेह बना देते हैं।

- **नमी का प्रभाव:** कटाई के बाद कंदों को सीलन भरे वातावरण में रखने पर उनमें जैविक क्रियाएं तेज हो जाती हैं। यही अतिरिक्त नमी आलू को अंकुरित होने के लिए प्रेरित करती है।
- **रोशनी और सोलेनिन:** सूर्य की किरणों या तेज कृत्रिम रोशनी के संपर्क में आने से आलू के छिलके का रंग बदलता है। इस प्रकाश अभिक्रिया के कारण कंद में विषैले सोलेनिन रसायन का निर्माण होता है।
- **स्टार्च का स्थानांतरण:** कल्ले फूटते समय आलू अपने मुख्य पोषक तत्व स्टार्च को नए विकास में खपाने लगता है। इससे आलू भीतर से खाली, बेस्वाद और पौष्टिकता से विहीन हो जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हरे धब्बे वाले आलू को खाना नुकसानदेह क्यों माना जाता है?
धूप के संपर्क में आने से ऐसे आलू में सोलेनिन नामक विषैला तत्व बढ़ जाता है, जिससे पेट में गंभीर गड़बड़ी हो सकती है।

### 2. अगर आलू में थोड़ा सा हरापन हो तो क्या करना चाहिए?
आलू के उस पूरे हरे हिस्से को काटकर अच्छी तरह अलग कर देना चाहिए और शेष साफ हिस्से का ही प्रयोग करना चाहिए।

### 3. अंकुरित आलू को खाने से बचने की सलाह क्यों दी जाती है?
अंकुर निकलने पर आलू का स्टार्च कल्लों में चला जाता है, जिससे उसका पोषक मूल्य कम हो जाता है और स्वाद खराब हो जाता है।

### 4. आलू, प्याज और लहसुन को घर में कैसे स्टोर करना चाहिए?
इन्हें किसी ऐसी सूखी जगह पर रखना चाहिए जहां हवा का अच्छा बहाव हो और नमी बिल्कुल न हो।

### 5. डायबिटीज के मरीजों को आलू कम खाने को क्यों कहा जाता है?
आलू में मौजूद भारी स्टार्च शरीर में ग्लूकोज में बदल जाता है, जिससे खून में शुगर का स्तर बढ़ सकता है।

### 6. किन सब्जियों में आलू मिलाने से बचना चाहिए?
भिंडी, करेला और परवल जैसी हरी सब्जियों में आलू कम से कम डालना चाहिए ताकि उनके अपने रासायनिक गुण बने रहें।

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