# बहराइच के किसान ने दिखाई समझदारी, पावर वीडर से खेती की लागत घटाकर बढ़ाया मुनाफा

> उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में मिर्जापुर गांव के किसान त्रिलोकी पावर वीडर के जरिए कृषि कार्य आसान बना रहे हैं, जिससे डीजल की बचत के साथ जुताई और निराई का खर्च काफी घट गया है।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/bahraich-ke-kisana-ne-dikhai-samajhadari-power-weeder-se-kheti-ki-lagata-ghatakara-barhaya-munapha-34367 · **Language:** Hindi
**Tags:** पावर वीडर, बहराइच, कृषि यंत्र, सब्जी की खेती, गन्ने की खेती, किसान तकनीक

कृषि क्षेत्र में नई तकनीक और आधुनिक यंत्रों का बढ़ता उपयोग किसानों के काम को न केवल आसान बना रहा है बल्कि उनकी लागत में भी भारी कमी ला रहा है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित मिर्जापुर गांव के युवा काश्तकार त्रिलोकी ने इस दिशा में एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। वे बीते कई वर्षों से अपने खेतों में छोटे कृषि यंत्र पावर वीडर का नियमित उपयोग कर रहे हैं। इस मशीन ने उनके समय की बचत तो की ही है, साथ ही पारंपरिक तरीकों के मुकाबले खेती पर होने वाले भारी खर्च पर भी लगाम लगाई है।

## साल 2017 से लगातार दे रहा बेहतरीन परिणाम
मिर्जापुर निवासी त्रिलोकी ने यह पावर वीडर वर्ष 2017 में खरीदा था। खरीद के बाद से अब तक यह यंत्र बिना किसी बड़ी तकनीकी खराबी या रुकावट के लगातार सुचारू रूप से काम कर रहा है। ईंधन दक्षता के मामले में यह मशीन बेहद किफायती साबित हुई है। त्रिलोकी के अनुसार, यह उपकरण लगभग 1 घंटे के संचालन में केवल 1 लीटर डीजल की खपत करता है। इस हिसाब से देखा जाए तो सिर्फ आधा लीटर डीजल खर्च करके करीब 30 मिनट के भीतर एक बीघे जमीन की जुताई बहुत आसानी से पूरी हो जाती है।

## गन्ना और सब्जी उत्पादकों के लिए वरदान
यह पावर वीडर विशेष रूप से उन किसानों के लिए बेहद उपयोगी है जो गन्ने और हरी सब्जियों की फसलें उगाते हैं। खेतों में जहां बड़े ट्रैक्टरों का पहुंचना मुश्किल होता है अथवा दो कतारों के बीच लगभग 3 फीट की सीमित जगह बचती है, वहां इस कॉम्पैक्ट मशीन को चलाना काफी सुविधाजनक रहता है। यह फसलों के बीच उगे अनचाहे खरपतवार को जड़ से साफ करने और पौधों के आसपास की मिट्टी को भुरभुरी व हवादार बनाने में बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। इससे फसलों की जड़ों का विकास तेजी से होता है।

## मजदूरों की किल्लत और बजट के अनुसार विकल्प
वर्तमान दौर में ग्रामीण इलाकों में कृषि मजदूरों की भारी कमी देखने को मिलती है, जिससे निराई-गुड़ाई का खर्च बढ़ जाता है। त्रिलोकी का कहना है कि जो किसान श्रमिकों की अनुपलब्धता या खेती की बढ़ती मजदूरी से जूझ रहे हैं, विशेषकर सीमित जोत वाले छोटे किसान, उनके लिए पावर वीडर एक सटीक और सस्ता समाधान है। वर्तमान बाजार में अलग-अलग क्षमता वाले पावर टिलर और वीडर मौजूद हैं। इनकी शुरुआती कीमत करीब 25,000 रुपये से प्रारंभ होकर मॉडल और इंजन क्षमता के आधार पर 2 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये तक जाती है, जिसे किसान अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के हिसाब से चुन सकते हैं।

## इसका आप पर असर
छोटे कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से छोटे और मध्यम किसानों की खेती की लागत और समय में भारी कमी आ सकती है।

- **भारत में:** देश भर के किसान पारंपरिक हल-बैल या बड़े ट्रैक्टरों के महंगे किराए पर निर्भर रहने के बजाय 25,000 रुपये के शुरुआती बजट में पावर वीडर अपना सकते हैं। इससे फसलों की निराई-गुड़ाई में लगने वाले मजदूरों की किल्लत और मजदूरी खर्च से तुरंत राहत मिलती है।
- **बहराइच में:** स्थानीय गन्ना और सब्जी उत्पादक 3 फीट की संकरी कतारों के बीच आसानी से जुताई और खरपतवार नियंत्रण कर सकते हैं। इससे महज आधे लीटर डीजल में 30 मिनट के भीतर एक बीघा खेत की जुताई पूरी की जा सकती है।
- **लागत बचत:** प्रति घंटे केवल 1 लीटर डीजल की खपत होने से ईंधन का खर्च बेहद सीमित रहता है। किसान बाजार में 25,000 रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये तक के बजट में अपनी जरूरत के हिसाब से उपयुक्त मॉडल चुन सकते हैं।
- **उत्पादन में सुधार:** कतारों के बीच मिट्टी भुरभुरी होने से फसलों की जड़ों को समुचित हवा और पोषण मिलता है। नियमित खरपतवार हटाने से उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में बढ़ोतरी होती है।

## ऐसा क्यों हुआ
बहराइच के किसान ने कृषि कार्यों में आधुनिक पावर वीडर को अपनाया क्योंकि पारंपरिक जुताई और हाथ से निराई करने में भारी लागत और समय लग रहा था। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की अनुपलब्धता एक गंभीर समस्या बन चुकी है।

- **मजदूरों की किल्लत और बढ़ता खर्च:** ग्रामीण इलाकों में समय पर कृषि श्रमिकों का न मिलना और मजदूरी की बढ़ती दरों ने किसानों के मुनाफे को सीमित कर दिया था। इस समस्या से पार पाने के लिए किसान ने मशीनीकरण का रास्ता चुना।
- **सब्जी और गन्ने में संकरी जगह:** गन्ने और सब्जियों की दो कतारों के बीच आमतौर पर करीब 3 फीट का फासला होता है जहां सामान्य बड़े ट्रैक्टर नहीं चल सकते। फसलों को बिना नुकसान पहुंचाए जुताई करने के लिए कॉम्पैक्ट पावर वीडर की जरूरत महसूस हुई।
- **ईंधन दक्षता और लंबी उम्र:** साल 2017 में खरीदा गया यह उपकरण केवल 1 लीटर प्रति घंटे के डीजल खर्च पर काम करता है। लंबे समय तक बिना खराबी निरंतर सेवा देने के कारण यह एक टिकाऊ विकल्प साबित हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. त्रिलोकी ने यह पावर वीडर कब खरीदा था?
बहराइच के मिर्जापुर गांव के किसान त्रिलोकी ने यह पावर वीडर वर्ष 2017 में खरीदा था।

### 2. पावर वीडर एक घंटे में कितना डीजल खपत करता है?
यह पावर वीडर लगभग 1 घंटे काम करने पर मात्र 1 लीटर डीजल की खपत करता है।

### 3. एक बीघा खेत की जुताई करने में कितना समय और डीजल लगता है?
इस मशीन से आधा लीटर डीजल में करीब 30 मिनट के भीतर एक बीघे खेत की जुताई आसानी से की जा सकती है।

### 4. यह मशीन किन फसलों के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त है?
यह उपकरण मुख्य रूप से गन्ने और साग-सब्जियों की फसलों के लिए बहुत उपयोगी है, जहां कतारों के बीच 3 फीट तक की जगह होती है।

### 5. बाजार में पावर वीडर की शुरुआती कीमत क्या है?
बाजार में पावर वीडर की शुरुआती कीमत लगभग 25,000 रुपये से शुरू होकर क्षमता के आधार पर 2 लाख से 2.5 लाख रुपये तक जाती है।

## प्रेरणा और सबक
सीमित संसाधनों और पारंपरिक चुनौतियों के बावजूद नई तकनीक को अपनाकर खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है।

- **तकनीक से हिचकिचाएं नहीं:** नए कृषि यंत्रों को समय पर अपनाना जोखिम नहीं बल्कि लंबे समय की बचत और सहूलियत का जरिया है।
- **लागत नियंत्रण पर ध्यान दें:** मुनाफा बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना जरूरी नहीं है, बल्कि ईंधन और मजदूरी जैसे दैनिक खर्चों को घटाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
- **अपनी जरूरत के अनुसार साधन चुनें:** खेत के आकार और फसल के प्रकार के अनुसार सही उपकरण चुनकर किसान बिना बड़ा कर्ज लिए भी आधुनिक बन सकते हैं।

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