# बहराइच के त्रिलोकी ने घर की दीवार के सहारे उगाया ड्रैगन फ्रूट, आंगन में तैयार किया हरा-भरा किचन गार्डन

> उत्तर प्रदेश के बहराइच में किसान त्रिलोकी ने बिना खेत केवल गमलों, प्लास्टिक बैग्स और आंगन की दीवार के सहारे ड्रैगन फ्रूट और रंग-बिरंगी सब्जियां उगाकर मिसाल कायम की है।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/bahraich-ke-triloki-ne-ghara-ki-divara-ke-sahare-ugaya-dragon-fruit-angana-men-taiyara-kiya-hara-bhara-kitchen-garden-34541 · **Language:** Hindi
**Tags:** किचन गार्डनिंग, ड्रैगन फ्रूट, बहराइच, त्रिलोकी, टेरेस गार्डन, सब्जी उत्पादन, होम गार्डनिंग

शहरी और ग्रामीण इलाकों में सीमित जगह के भीतर फल और हरी सब्जियां उगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अपनी छतों और आंगनों को हरा-भरा बनाकर लोग न केवल शौक पूरा कर रहे हैं, बल्कि घर की रसोई के लिए ताजी उपज भी हासिल कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के किसान त्रिलोकी ने भी अपने मकान के छोटे से आंगन को एक व्यवस्थित घरेलू नर्सरी का रूप दे दिया है। उन्होंने अपने आंगन में गमलों और प्लास्टिक के थैलों के सहारे शिमला मिर्च, लाल भिंडी, हरी मिर्च और बंदगोभी जैसी कई सब्जियां तैयार की हैं। इसके अलावा उनके परिसर का सबसे बड़ा आकर्षण घर की पक्की दीवार के सहारे फलता-फूलता ड्रैगन फ्रूट का विदेशी पौधा है।

## सीमित संसाधनों और गमलों में तैयार की घरेलू बगिया
त्रिलोकी ने बहुत बड़े बजट या खुली खेती वाली जमीन के बिना ही यह पूरा किचन गार्डन स्थापित किया है। उन्होंने पौधों की रोपाई के लिए प्लास्टिक के थैलों, साधारण गमलों और सीमित मात्रा में उपजाऊ मिट्टी का इस्तेमाल किया। इन बुनियादी संसाधनों के जरिए तैयार पौधों से अब उनके परिवार की रोजमर्रा की हरी सब्जियों की जरूरत आसानी से पूरी हो जाती है। घर में ही उगाई गई इन ताजी सब्जियों के कारण उन्हें छोटी-मोटी जरूरतों के लिए बार-बार स्थानीय बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

## रंग-बिरंगी शिमला मिर्च और अमरूद से महका आंगन
आंगन में रखे गमलों में विविधता साफ दिखाई देती है। यहां लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च के अलग-अलग गमले कतार में सजाए गए हैं। इनके साथ ही तीखी हरी मिर्च, पत्तेदार बंदगोभी, लाल भिंडी और फलदार अमरूद के पौधे भी पूरी तरह स्वस्थ होकर विकसित हो रहे हैं। त्रिलोकी के अनुसार, इन पौधों की नियमित देखभाल से घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में सब्जियां मिल जाती हैं, जिससे घर के बजट और सेहत दोनों को सहारा मिलता है।

## दीवार के सहारे ढाई साल में तैयार हुआ ड्रैगन फ्रूट
इस पूरे किचन गार्डन में सबसे अनोखा प्रयोग ड्रैगन फ्रूट का है। व्यावसायिक स्तर पर जब ड्रैगन फ्रूट की खेती की जाती है, तब पौधों को सीधा खड़ा रखने के लिए खेतों में सीमेंट के खंभे और लोहे या कंक्रीट की रिंग जैसे भारी सहारे लगाए जाते हैं। त्रिलोकी ने इस महंगे ढांचे के बजाय अपने घर की साधारण दीवार के किनारे पौधा रोप दिया। यह कैक्टस प्रजाति का पौधा धीरे-धीरे दीवार की सतह को सहारा बनाकर ऊपर चढ़ता गया। लगभग ढाई साल के लंबे इंतजार और उचित देखभाल के बाद अब इस बेलनुमा पौधे पर फल आने लगे हैं, जिसे देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंच रहे हैं।

## उद्यान विभाग की यात्रा से मिला था नया विचार
त्रिलोकी के अनुसार इस अनूठे प्रयोग की प्रेरणा उन्हें सरकारी उद्यान विभाग के दौरे के दौरान मिली थी। वहां उन्होंने ड्रैगन फ्रूट के पौधों को देखा और समझा। इसके बाद वह वहां से एक पौधा लेकर अपने घर आए और उसे आंगन में दीवार के पास लगा दिया। समय के साथ तना मजबूत होता गया और बिना किसी विशेष खंभे के दीवार की मदद से फलता-फूलता रहा। उनका यह अनुभव स्पष्ट करता है कि जिनके पास बड़ी कृषि भूमि नहीं है, वे भी छत, बालकनी या आंगन में सही देखभाल, नियमित पानी और गमलों की मदद से अपनी जरूरत के फल और सब्जियां आसानी से उगा सकते हैं।

## इसका आप पर असर
घर की सीमित जगह में फल और सब्जियां उगाने का यह प्रयोग आम परिवारों के लिए रसोई खर्च घटाने और ताजा खानपान अपनाने का सीधा रास्ता दिखाता है।

- **किचन बजट में राहत:** गमलों और थैलों में सब्जियां उगाकर आप महीने के सब्जी खर्च में खासी बचत कर सकते हैं। मिर्च, शिमला मिर्च और बंदगोभी जैसी रोजमर्रा की जरूरतें घर के आंगन से ही पूरी हो जाती हैं।
- **बिना खेत विदेशी फल की उपज:** ड्रैगन फ्रूट जैसे महंगे फल को उगाने के लिए महंगे खंभों या बड़े खेत की जरूरत नहीं होती। घर की साधारण दीवार को सहारा बनाकर ढाई साल में अपने परिवार के लिए ताजा फल प्राप्त किया जा सकता है।
- **सीमित जगह का सही उपयोग:** बालकनी या छोटे आंगन वाले लोग प्लास्टिक के थैलों और गमलों में मिट्टी भरकर आसानी से बागवानी शुरू कर सकते हैं। इसके लिए भारी जमीन के बजाय वर्टिकल स्पेस यानी दीवारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- **बाजार पर निर्भरता में कमी:** रोज-रोज छोटी जरूरतों के लिए मंडी के चक्कर लगाने से राहत मिलती है। घर में उगाई गई उपज ताजी, पोषक तत्वों से भरपूर और कीटनाशकों की आशंका से मुक्त रहती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह सफल किचन गार्डन किसान की पहल, बागवानी विभाग से मिली जानकारी और दीवारों के स्वाभाविक सहारे के कुशल उपयोग की वजह से संभव हुआ।

- **उद्यान विभाग का दौरा और प्रेरणा:** त्रिलोकी ने सरकारी उद्यान विभाग में ड्रैगन फ्रूट का पौधा देखकर इसे घर पर आजमाने का फैसला किया। वहां से एक पौधा लाकर उन्होंने अपने आंगन में प्रयोग की शुरुआत की।
- **पारंपरिक खंभों की जगह दीवार का सहारा:** खेतों में लगाए जाने वाले महंगे कंक्रीट खंभों और रिंग्स के बजाय घर की पक्की दीवार को सहारे के तौर पर चुना गया। बेलनुमा कैक्टस पौधे ने दीवार की खुरदरी सतह को पकड़कर प्राकृतिक रूप से ऊपर बढ़ना शुरू कर दिया।
- **धैर्य और निरंतर देखभाल:** ड्रैगन फ्रूट के पौधे को रोपने के बाद फल आने में लगभग ढाई साल का समय लगा। इस दौरान जरूरी पानी, जैविक पोषण और गमलों के उचित रखरखाव ने इसे फल देने की स्थिति तक पहुंचाया।

## सवाल-जवाब

### 1. त्रिलोकी ने किचन गार्डन कहां और किस जिले में तैयार किया है?
त्रिलोकी ने यह किचन गार्डन उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में अपने घर के आंगन में तैयार किया है।

### 2. त्रिलोकी के किचन गार्डन में कौन-कौन सी सब्जियां और फल लगे हैं?
उनके आंगन में लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च, हरी मिर्च, बंदगोभी, लाल भिंडी, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट उगे हुए हैं।

### 3. पौधे लगाने के लिए उन्होंने किन चीजों का उपयोग किया?
उन्होंने पौधों को उगाने के लिए साधारण गमलों, प्लास्टिक के थैलों और सीमित मात्रा में मिट्टी का इस्तेमाल किया।

### 4. दीवार के सहारे लगे ड्रैगन फ्रूट में फल आने में कितना समय लगा?
दीवार के सहारे ऊपर चढ़े इस ड्रैगन फ्रूट के पौधे में करीब ढाई साल बाद फल आने शुरू हुए।

### 5. त्रिलोकी को ड्रैगन फ्रूट घर पर लगाने की प्रेरणा कहां से मिली?
उन्हें यह विचार तब आया जब उन्होंने उद्यान विभाग के कार्यालय में ड्रैगन फ्रूट का पौधा देखा था।

## प्रेरणा और सबक
त्रिलोकी की यह पहल साबित करती है कि संसाधनों या जमीन की कमी कभी भी नए प्रयोगों और आत्मनिर्भरता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।

- **सीमित जगह को अवसर बनाएं:** बड़ी कृषि भूमि न होने पर भी बालकनी, दीवार या आंगन का रचनात्मक उपयोग करके बगिया तैयार की जा सकती है।
- **महंगे ढांचे का सस्ता विकल्प खोजें:** ड्रैगन फ्रूट के लिए महंगे सीमेंट के खंभों के बजाय साधारण घरेलू दीवार का उपयोग करके समझदारी से खर्च बचाया जा सकता है।
- **नई फसलों को अपनाने से न झिझकें:** पारंपरिक सब्जियों के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट जैसे गैर-पारंपरिक और पौष्टिक फलों का घरेलू परीक्षण नई संभावनाएं खोलता है।
- **धैर्य और लगन से परिणाम हासिल करें:** पौधे से फल आने में लगे ढाई साल का सफर दिखाता है कि बागवानी में नियमित प्रयास और सब्र ही वास्तविक सफलता दिलाते हैं।

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