बाजार में सेब चुनते समय न खाएं धोखा, रसीले और ताजे फल की ऐसे करें पहचान दुकान पर सिर्फ लाल और चमकदार रंग देखकर सेब खरीदना घाटे का सौदा हो सकता है। वजन, खुशबू, सख्त बनावट और छिलके की सही जांच से मीठे व ताजे सेब की आसानी से पहचान की जा सकती है। फलों की दुकान पर खरीदारी करते समय ज्यादातर ग्राहक सिर्फ चमक और सुर्ख लाल रंग देखकर ही सेब उठा लेते हैं। कई बार बाहर से बेहद खूबसूरत दिखने वाला फल अंदर से बिल्कुल बेस्वाद, फीका या सूखा निकलता है। फल का स्वाद और ताजगी केवल उसके बाहरी रंगरूप पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी किस्म, पेड़ से तोड़े जाने के बाद की स्थिति और उसे सुरक्षित रखने के तरीके पर निर्भर होती है। ऐसे में बाजार में अपनी मेहनत की कमाई खर्च करने से पहले 5 बुनियादी बातों को समझकर आसानी से सबसे रसीला और स्वादिष्ट फल चुना जा सकता है। हाथ में उठाकर वजन और रसीलेपन की करें जांच जब आप दुकान पर एक ही आकार के दो फलों को हाथ में लेते हैं, तो उनमें से जो फल अधिक भारी महसूस होता है, उसमें प्राकृतिक रस और पानी की मात्रा कहीं अधिक होती है। ऐसे फल काटने पर भीतर से सूखे नहीं निकलते और उनका गूदा बेहद रसीला होता है। हालांकि, सिर्फ भारी होना ही अच्छे स्वाद की पूरी गारंटी नहीं है, इसलिए वजन के साथ फल के अन्य शारीरिक लक्षणों का मिलान करना भी बेहद आवश्यक होता है। प्राकृतिक खुशबू से समझें फल का पकना फल की गुणवत्ता परखने का दूसरा सीधा तरीका उसकी गंध लेना है। फल को अपनी नाक के करीब ले जाकर धीरे से सूंघें। पेड़ पर प्राकृतिक रूप से सही ढंग से पके हुए ताजे सेब से एक हल्की, भीनी और मनभावन महक आती है। यदि फल से किसी भी प्रकार की सुगंध नहीं आ रही है, तो इसका सीधा अर्थ है कि उसे कच्चा ही तोड़ लिया गया था और वह ठीक से पका नहीं है। दूसरी ओर, यदि फल से तीखी, खट्टी या सड़ी हुई बदबू आए, तो ऐसे फल को तुरंत छोड़ दें क्योंकि वह अंदर से खराब हो चुका होता है। चमकदार रंग के बजाय छिलके की बनावट पर दें ध्यान बाजार में हर किस्म के फल का रंग और रूप अलग होता है, इसलिए केवल गहरे लाल रंग को मिठास का पैमाना मानना गलत है। खरीदारी के दौरान एक समान और साफ छिलके वाले फल को प्राथमिकता देनी चाहिए। जिस फल की त्वचा पर गहरे काले दाग, कटने के निशान, खरोंच या अधिक चोट के धब्बे दिखाई दें, उन्हें खरीदने से बचना चाहिए। ऐसी बाहरी चोटों के रास्ते फल के अंदर कीटाणु पहुंच सकते हैं और गूदा समय से पहले गल जाता है। हल्के दबाव से जानें फल की ताजगी और मजबूती फल की ताजगी जांचने के लिए उसे अपनी हथेलियों और अंगुलियों के बीच रखकर बेहद हल्के हाथ से दबाएं। पेड़ का ताजा फल हमेशा सख्त, गठीला और मजबूत महसूस होता है। यदि फल छूने में पिलपिला लगे या अंगुली से हल्का सा दबाते ही धंस जाए, तो वह जरूरत से ज्यादा पक चुका है अथवा अंदर से सड़ने की कगार पर है। इस बात का खास ख्याल रखें कि जांचते समय फल पर बहुत जोर से दबाव न डालें, अन्यथा अच्छा फल भी दबकर खराब हो सकता है। डंठल के पास की त्वचा और किस्म की समझ फल के ऊपरी हिस्से में डंठल के आसपास की जगह को गौर से देखना चाहिए। यदि डंठल के पास का हिस्सा सिकुड़ा हुआ, सूखा या झुर्रियों से भरा नजर आए, तो समझ लें कि फल बहुत पुराना है और उसकी नमी खत्म हो चुकी है। छिलके की चमक के साथ-साथ यह भी जानना जरूरी है कि दुकान पर कौन सी किस्म बिक रही है। सेब की अलग-अलग किस्मों का प्राकृतिक स्वाद, मिठास और बनावट एक-दूसरे से भिन्न होती है, इसलिए अपनी पसंद के अनुसार सही किस्म की जानकारी रखकर खरीदारी करना सबसे बढ़िया रहता है। इसका आप पर असर दुकान पर सही फल चुनने की यह तकनीक आपके पैसे और सेहत दोनों को सुरक्षित रखने में मदद करती है। • घरेलू बजट: खराब और सूखे फलों पर फिजूल खर्च रुकता है। उपभोक्ता को अपनी पूरी कीमत के बदले बेहतर और स्वादिष्ट उत्पाद प्राप्त होता है। • स्वाद और पोषण: सही ढंग से पका फल परिवार को जरूरी पोषण प्रदान करता है। बासी और सड़े फलों से होने वाली पेट की परेशानियों से बचाव रहता है। • फलों का भंडारण: सख्त और ताजे फल घर में अधिक दिनों तक टिकते हैं। इससे बार-बार बाजार जाने की झंझट और फलों की बर्बादी खत्म होती है। • खरीदारी में सतर्कता: सिर्फ बाहरी दिखावे या चमक के झांसे में आने से बचा जा सकता है। खरीदार विभिन्न किस्मों के अनुसार सही स्वाद का चुनाव कर पाता है। ऐसा क्यों हुआ दुकानों पर अक्सर बेस्वाद या सूखे फल मिलने के पीछे फल तोड़ने का समय और भंडारण की प्रक्रिया मुख्य कारण होती है। • कच्चे में तुड़ाई: लंबी दूरी के परिवहन के दौरान सड़न से बचाने के लिए फलों को समय से पहले पेड़ से तोड़ लिया जाता है। इस कारण उनमें प्राकृतिक मिठास और खुशबू विकसित नहीं हो पाती। • कोल्ड स्टोरेज का असर: लंबे समय तक गोदामों में रखे रहने से फलों की नमी धीरे-धीरे वाष्पीकृत हो जाती है। नमी कम होने से डंठल के पास झुर्रियां पड़ जाती हैं और फल अंदर से सूखा हो जाता है। • दिखावे की चमक: बाजार में ग्राहक को आकर्षित करने के लिए केवल बाहरी रंगरूप पर जोर दिया जाता है। इस वजह से अत्यधिक लाल दिखने वाला फल भी भीतर से फीका निकल सकता है। सवाल-जवाब 1. क्या ज्यादा लाल दिखने वाला सेब हमेशा मीठा होता है? नहीं, गहरा लाल रंग केवल फल की किस्म पर निर्भर करता है और यह मिठास की गारंटी नहीं है। 2. रसीले सेब की सबसे आसान पहचान क्या है? समान आकार के दो फलों में जो हाथ में अधिक भारी लगे, उसमें रस की मात्रा ज्यादा होती है। 3. नरम सेब खरीदने से क्यों बचना चाहिए? दबाने पर दबने वाला सेब या तो जरूरत से ज्यादा पक चुका होता है या अंदर से गलना शुरू हो जाता है। 4. डंठल के पास झुर्रियां होना क्या दर्शाता है? डंठल के आसपास की सिकुड़ी त्वचा यह बताती है कि फल पुराना हो चुका है और उसकी नमी खत्म हो गई है। https://trendkia.com/lifestyle/bajara-men-apple-chunate-samaya-na-khaen-dhokha-rasile-aura-taje-phala-ki-aise-karen-pahachana-37351 TrendKia — Har trend, sabse pehle.