बालकनी में कबूतरों के डेरे और गंदगी से हैं परेशान, इन सुरक्षित उपायों से रखें दूर शहरी घरों की बालकनियों में कबूतरों का बार-बार आना और घोंसला बनाना बड़ी परेशानी बनता है। कुछ व्यावहारिक और मानवीय उपायों की मदद से पक्षियों को चोट पहुंचाए बिना अपनी बालकनी को साफ रखा जा सकता है। शहरी इलाकों के बहुमंजिला अपार्टमेंट में बालकनी और खिड़कियों के किनारे कबूतरों का जमावड़ा दिखना एक आम बात हो चुकी है। सुबह होते ही उनकी लगातार आवाजें, फर्श पर बिखरे पंख, उनसे उड़ने वाली बारीक धूल और जगह-जगह बीट की गंदगी कई लोगों के लिए रोजमर्रा का सिरदर्द बन जाती है। जब कबूतर किसी एक जगह को अपनी नियमित पनाहगाह समझ लेते हैं, तो वे बार-बार वहीं लौटते हैं और धीरे-धीरे स्थायी घोंसला तैयार करने लगते हैं। इस परेशानी से राहत पाने के लिए पक्षियों को किसी भी प्रकार की शारीरिक चोट या नुकसान पहुंचाने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती है। सही रणनीति और कुछ व्यवस्थित उपायों के जरिए बालकनी को ऐसा रूप दिया जा सकता है कि परिंदों के लिए वहां रुकना आकर्षक न रहे। भोजन और दानों की आसान उपलब्धता पर लगाएं रोक कबूतरों के किसी खास बालकनी या छत पर बार-बार डेरा जमाने की सबसे प्रमुख वजह वहां आसानी से दाना या खाने की वस्तुएं मिलना होती है। अक्सर लोग बालकनी में पक्षियों के चुगने के लिए खुला दाना डालते हैं या फिर नाश्ते-खाने के टुकड़े अनजाने में फर्श पर गिर जाते हैं। ऐसा होने पर कबूतर उस पूरे हिस्से को अपने लिए भोजन का एक सुरक्षित ठिकाना मानने लगते हैं। इस सिलसिले को थामने के लिए बालकनी के खुले फर्श पर किसी भी तरह की खाद्य सामग्री खुली न रहने दें। फर्श या रेलिंग पर गिरे अनाज के दानों और बचे हुए भोजन के टुकड़ों को तुरंत झाड़कर हटा दें, ताकि पक्षियों को भोजन की तलाश में वहां आने की कोई ठोस वजह न मिले। मजबूत बर्ड नेट लगाकर आवाजाही के रास्ते बंद करें यदि कबूतर लगातार बालकनी के भीतर दाखिल हो रहे हैं और बैठने की नई जगहें तलाश रहे हैं, तो बर्ड नेट अथवा टिकाऊ जाली का इस्तेमाल एक बेहद कारगर समाधान साबित होता है। बालकनी के खुले हिस्से पर व्यवस्थित ढंग से जाली लगा देने से परिंदों के अंदर आने का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। इसके चलते वे न तो अंदर आकर बैठ पाते हैं और न ही किसी छज्जे पर घोंसला खड़ा कर पाते हैं। जाली चुनते और स्थापित करते समय इस सावधानी का विशेष ध्यान रखें कि उसकी बनावट ऐसी हो जिसमें कोई भी पक्षी फंसकर घायल न होने पाए। बैठने और सुस्ताने के संभावित ठिकानों को करें सीमित बालकनी की बाहरी रेलिंग, एयर कंडीशनर की बाहरी यूनिट की ऊपरी सतह या दीवारों के ऊंचे कोने कबूतरों के सुस्ताने के सबसे पसंदीदा ठिकाने होते हैं। अगर वे इन स्थानों पर नियमित रूप से बैठ रहे हैं, तो वहां ऐसा भौतिक बदलाव करें जिससे उन्हें टिकने की समतल जगह न मिल पाए। इसके लिए बाजार में मिलने वाले विशेष बर्ड स्पाइक्स अथवा हानिरहित डिटरेंट का उपयोग किया जा सकता है। इन उपकरणों को लगाते समय यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि इनका मकसद केवल परिंदों के बैठने में असुविधा पैदा करना हो, न कि उनके शरीर को जख्मी करना। घोंसलों की समय रहते निगरानी और स्वच्छता का नियम जब भी किसी कोने में कबूतरों द्वारा तिनके जोड़कर घोंसला बनाने की शुरुआती कोशिश दिखे, तो उस जगह की तुरंत सफाई करें और दोबारा वहां ढांचा खड़ा होने से रोकने की पुख्ता व्यवस्था करें। हालांकि, यदि घोंसले में पहले से अंडे रखे हों या नन्हें बच्चे मौजूद हों, तो उसे जबरन हटाने या फेंकने की जल्दबाजी बिल्कुल न दिखाएं। ऐसी स्थिति में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए स्थानीय वन्यजीव या पक्षी बचाव दल से संपर्क कर उचित सलाह लेना ही सबसे सही कदम होता है। सफाई करते समय रखें स्वास्थ्य संबंधी सावधानी कबूतरों की बीट और गिरे हुए पंखों का लगातार जमाव न सिर्फ बालकनी की सुंदरता बिगाड़ता है, बल्कि यह स्वच्छता और सांस संबंधी दिक्कतों का सबब भी बन सकता है। बालकनी की नियमित सफाई करते समय सूखी बीट पर सीधे झाड़ू लगाने से बचें, क्योंकि इससे बारीक धूल हवा में तैरने लगती है। सतह को हल्का नम करके सावधानीपूर्वक साफ करें। सफाई की इस प्रक्रिया के दौरान हाथों में दस्ताने जरूर पहनें और काम पूरा होने के बाद साबुन से हाथों को अच्छी तरह धोना कभी न भूलें। खतरनाक रसायनों और गलत तरीकों से पूरी तरह बचें परिंदों को भगाने की होड़ में कभी भी तेज रासायनिक दवाओं, जहरीले पदार्थों या ऐसे क्रूर हथकंडों का सहारा न लें जिनसे बेजुबान जीवों की जान को खतरा हो। इसके अलावा बहुत तेज आवाजें निकालने या डरावने उपाय करने से भी कोई स्थायी हल नहीं निकलता, क्योंकि पक्षी जल्द ही इनके अभ्यस्त हो जाते हैं। कबूतरों को दूर रखने की सबसे टिकाऊ और सुरक्षित तरकीब यही है कि उन्हें आपके परिसर में पानी, भोजन और घोंसला जमाने की सुरक्षित जगह ही न मिले। इसका आप पर असर घर की बालकनी में कबूतरों के अनियंत्रित जमावड़े को रोकने से पूरे परिवार के स्वास्थ्य और घरेलू स्वच्छता पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। • बालकनी की स्वच्छता: बालकनी में नियमित सफाई और जाली लगाने से पक्षियों की बीट और उड़ते पंखों से तुरंत निजात मिलती है। इससे घर के बाहरी हिस्से को हर समय साफ-सुथरा बनाए रखने में रोज-रोज की मशक्कत नहीं करनी पड़ती। • बीमारियों से सुरक्षा: सूखी बीट की धूल हवा में न फैलने देने और सफाई में सावधानी बरतने से सांस से जुड़े संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है। यह उपाय खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़ों को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होता है। • आर्थिक बचत: बर्ड स्पाइक्स और नेट जैसी एकमुश्त व्यवस्था करने से एयर कंडीशनर और दीवारों की टूट-फूट रुक जाती है। इससे बार-बार होने वाली महंगी गहरी सफाई और उपकरणों की रिपेयरिंग का भारी खर्च बच जाता है। • पशु-पक्षी संरक्षण: विषैले रसायनों के स्थान पर मानवीय अवरोधक अपनाने से परिंदों को बिना किसी चोट के दूर रखा जा सकता है। इससे घरेलू सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक सह-अस्तित्व की मानवीय मर्यादा भी बनी रहती है। ऐसा क्यों हुआ शहरी बहुमंजिला इमारतों में मौजूद ऊंची बालकनियां और खुले छज्जे कबूतरों को प्राकृतिक चट्टानों जैसा सुरक्षित आवास और सुस्ताने की जगह मुहैया कराते हैं। जब इन स्थानों पर इंसानी लापरवाही से दाना या पानी भी मिलने लगता है, तो परिंदे वहां स्थायी डेरा डाल लेते हैं। • भोजन की आसान उपलब्धता: बालकनियों में पक्षियों के लिए डाले गए दाने या फर्श पर गिरे खाद्य अवशेष कबूतरों को सबसे पहले आकर्षित करते हैं। नियमित भोजन मिलने पर वे उस स्थान को अपने जीवनयापन के लिए पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं। • शिकारियों से सुरक्षित छिपने की जगह: एयर कंडीशनर के पीछे की खाली जगह और रेलिंग के कोने उन्हें तेज हवा, बारिश और शिकारी जानवरों से प्राकृतिक सुरक्षा देते हैं। यही अनुकूल परिस्थितियां उन्हें बेखौफ होकर घोंसला जमाने और अंडे सेने के लिए प्रेरित करती हैं। • शहरी वास्तुकला की बनावट: आधुनिक फ्लैटों में खुले वेंटिलेटर, सनशेड और फ्लैट रेलिंग पक्षियों के बैठने के लिए बिल्कुल मुफीद संरचनाएं साबित होती हैं। जब तक इन सतहों को शारीरिक रूप से अनुपयुक्त न बनाया जाए, परिंदों का आना बदस्तूर जारी रहता है। सवाल-जवाब 1. बालकनी में कबूतरों को आने से रोकने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है? मजबूत बर्ड नेट लगाना और खुले फर्श से दाना-पानी हटाना सबसे मानवीय और असरदार तरीका है। 2. क्या कबूतरों को भगाने के लिए बर्ड स्पाइक्स लगाना सही है? हां, बाजार में मिलने वाले हानिरहित बर्ड स्पाइक्स परिंदों को चोट पहुंचाए बिना उनके बैठने की जगह सीमित कर देते हैं। 3. अगर कबूतर के घोंसले में अंडे या बच्चे हों तो क्या करना चाहिए? घोंसले को खुद जबरन हटाने के बजाय स्थानीय वन्यजीव या पक्षी बचाव संस्था की मदद लेनी चाहिए। 4. कबूतरों की बीट साफ करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? बीट को सूखा झाड़ने के बजाय नम करके साफ करें और हाथों में दस्ताने जरूर पहनें। https://trendkia.com/lifestyle/balakani-men-kabutaron-ke-dere-aura-gndagi-se-hain-pareshana-ina-surakshita-upayon-se-rakhen-dura-34928 TrendKia — Har trend, sabse pehle.