बरसात के नाश्ते में शामिल करें कद्दू के पीले फूलों से तैयार कुरकुरी पकौड़ियां उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के गांवों में कद्दू के फूलों से क्रिस्पी पकौड़ियां बनाई जाती हैं। चाय और चटनी के साथ परोसा जाने वाला यह देसी नाश्ता बेहद कम समय और सीमित सामग्री में तैयार हो जाता है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के देहाती इलाकों में ऋतु परिवर्तन के साथ लोगों की भोजन की थाली भी बदल जाती है। गांवों में घरों के आंगन और आसपास उगने वाले पेड़-पौधों तथा बेलों के विभिन्न अंगों से अनोखे और पारंपरिक पकवान बनाए जाने की समृद्ध परंपरा रही है। अधिकांश घरों में कद्दू की सब्जी, खट्टा-मीठा कद्दू या फिर पेठे जैसी मिठाइयां तो नियमित रूप से बनती हैं, मगर कद्दू की बेल पर खिलने वाले चटक पीले फूलों से तैयार होने वाले नाश्ते से बहुत से लोग अब भी अनजान हैं। लखीमपुर खीरी के ग्रामीण अंचलों में इन्हीं फूलों से बेहद खस्ता और लजीज पकौड़ियां तैयार की जाती हैं। कद्दू के फूलों का अनोखा स्वाद कद्दू की बेलों पर प्रचुर मात्रा में बड़े आकार के पीले रंग के फूल खिलते हैं। देहात में इन ताजे खिले फूलों को तोड़कर लाया जाता है और डंठल व अवांछित भाग हटाकर साफ पानी से धोया जाता है। अच्छी तरह सुखाने के बाद जब इन कोमल फूलों को मसालों से सजे बेसन के गाढ़े घोल में लपेटकर खौलते तेल में तला जाता है, तो यह एक लाजवाब व्यंजन में तब्दील हो जाते हैं। खासकर बरसात के दिनों में और बदलते मौसम की सुहानी शाम को गरमा-गरम चाय की चुस्कियों के साथ इस देसी नाश्ते का लुत्फ उठाया जाता है। इस पारंपरिक व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पकाने के लिए किसी दुर्लभ या खर्चीली सामग्री की दरकार नहीं होती, बल्कि रसोई में मौजूद आम चीजों से ही यह झटपट बनकर तैयार हो जाता है। घोल बनाने की जरूरी सामग्री और विधि कद्दू के फूलों की कुरकुरी पकौड़ियां बनाने में बेसन सबसे केंद्रीय भूमिका निभाता है। इसे तैयार करने के लिए एक कटोरी बेसन लेकर उसमें स्वादानुसार सादा नमक मिलाया जाता है। इसके उपरांत रंगत और महक के लिए थोड़ी हल्दी, हल्का तीखापन देने के लिए लाल मिर्च पाउडर और पाचन तथा स्वाद को संतुलित रखने के लिए अजवाइन डाली जाती है। जो लोग चटपटा और तीखा खाना अधिक पसंद करते हैं, वे इसमें बारीक कटी हुई हरी मिर्च भी शामिल कर सकते हैं, जिससे पकौड़ियों का स्वाद और ज्यादा निखर आता है। सभी सूखे मसालों को बेसन में मिलाने के बाद इसमें धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा पानी डाला जाता है। इस बात की खास सावधानी रखी जाती है कि बैटर न तो आवश्यकता से अधिक पतला बहे और न ही बहुत कड़ा या गाढ़ा हो। घोल का गाढ़ापन ऐसा होना चाहिए जो फूलों पर एक समान और पतली परत के रूप में आसानी से लिपट सके, ताकि तलने पर बाहरी आवरण पूरी तरह क्रिस्पी बने। कुरकुरापन हासिल करने का सबसे महत्वपूर्ण नुस्खा यह है कि पानी मिलाने के बाद इस घोल को चम्मच या हाथ से कुछ मिनटों तक लगातार एक ही दिशा में अच्छी तरह फेंटा जाए। फेंटने से घोल हल्का, फूला हुआ और गांठ रहित हो जाता है। तलने का सही तरीका जब बेसन का मिश्रण तैयार हो जाए और धुले हुए कद्दू के फूल पूरी तरह सूख जाएं, तब तलने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। प्रत्येक फूल को सावधानीपूर्वक बेसन के घोल में उतारा जाता है ताकि उसके भीतरी और बाहरी दोनों हिस्सों पर बेसन की एक समान और हल्की परत चढ़ जाए। यदि फूल का आकार सामान्य से बड़ा हो, तो उसे कोमलता से थोड़ा मोड़कर घोल में डुबोया जा सकता है। इसके तुरंत बाद फूल को कड़ाही में पहले से अच्छी तरह गर्म किए गए तेल में छोड़ दिया जाता है। कद्दू के फूल को गर्म तेल में डालने के बाद तुरंत छेड़ने के बजाय थोड़ी देर एक तरफ से सिकने दिया जाता है। जब निचली सतह हल्की पक जाए, तब कलछी की सहायता से उसे पलट दिया जाता है। दोनों ओर से पलटते हुए पकौड़ियों को तब तक पकाया जाता है जब तक कि उनका रंग सुनहरा और बाहरी परत कुरकुरी न दिखने लगे। जैसे ही पकौड़ियां सुनहरी हो जाएं, उन्हें तेल से बाहर निकाल लिया जाता है और उनका अतिरिक्त तेल सोखने के लिए साफ पेपर पर फैला दिया जाता है। परोसने के विकल्प लखीमपुर खीरी निवासी मंजू ने बताया कि मानसून के मौसम में कद्दू के ताजे फूल प्राकृतिक रूप से बहुतायत में उपलब्ध रहते हैं, जिससे इन्हें घर पर बनाना बहुत आसान हो जाता है। तैयार होने के बाद इन कुरकुरी पकौड़ियों को गरमा-गरम चाय, ताजे दही या तीखी हरी चटनी के साथ परोसा जाता है। यदि इसके साथ हरी धनिया पत्ती, हरी मिर्च, नींबू के रस और नमक को पीसकर चटनी बनाई जाए, तो इसका स्वाद दोगुना हो जाता है। इसका आप पर असर यह पारंपरिक देसी नाश्ता घर पर मौजूद बुनियादी रसोई सामग्री से बनाया जा सकता है, जिससे महंगे बाजारू स्नैक्स की जगह एक सस्ता और अनोखा विकल्प मिलता है। • भारत में: जिन लोगों के घर या बगीचे में कद्दू की बेलें लगी हैं, वे अतिरिक्त खिले फूलों का इस्तेमाल कर एक स्वादिष्ट घरेलू नाश्ता बना सकते हैं। इससे ताजी सब्जियों के गैर-पारंपरिक हिस्सों का सदुपयोग होता है और भोजन की बर्बादी रुकती है। • लखीमपुर खीरी में: जिले के ग्रामीण अंचलों में यह मौसमी व्यंजन स्थानीय खान-पान की पहचान है। बरसात में खेतों और आंगनों से ताजे फूल चुनकर महिलाएं घर आए मेहमानों को तुरंत यह नाश्ता परोस सकती हैं। • खान-पान के शौकीनों के लिए: सामान्य आलू या प्याज की पकौड़ियों से हटकर यह एक कुरकुरा और हल्का विकल्प प्रदान करता है। इसे शाम की चाय या छुट्टी के दिनों में आसानी से आजमाया जा सकता है। • रसोई के बजट पर: इसे पकाने के लिए केवल बेसन, सामान्य मसाले और थोड़े तेल की जरूरत होती है। कम लागत में पूरे परिवार के लिए भरपेट नाश्ता तैयार किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ ग्रामीण इलाकों में मौसमी बदलाव और बरसात के दिनों में मिलने वाले ताजे प्राकृतिक संसाधनों से यह व्यंजन तैयार किया जाता है। बेलों पर बड़ी तादाद में फूलों का खिलना और उनका पकने से पहले झड़ जाना इस पकवान की प्रेरणा बना। • मौसम का प्रभाव: बरसात के मौसम में कद्दू की बेलें तेजी से फैलती हैं और उन पर पीले फूल बहुतायत में आते हैं। गांव के लोग इन प्राकृतिक रूप से उपलब्ध फूलों को भोजन में शामिल करने के लिए यह रेसिपी बनाते हैं। • ग्रामीण खान-पान की परंपरा: देहात में खेती और घरेलू बागवानी में उगने वाले पौधों के हर खाद्य हिस्से का उपयोग करने की समृद्ध संस्कृति रही है। कद्दू के फल के साथ-साथ इसके फूलों का इस्तेमाल इसी सोच का हिस्सा है। • सुलभ सामग्री: इस पकौड़ी को तलने के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। घर पर मौजूद बेसन, नमक, अजवाइन और तेल जैसी आम चीजें इसे तुरंत बनाने योग्य बनाती हैं। सवाल-जवाब 1. कद्दू के फूलों की पकौड़ियां किस जिले के ग्रामीण इलाकों में बनाई जाती हैं? यह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के ग्रामीण इलाकों में विशेष रूप से तैयार की जाती हैं। 2. कद्दू के फूल की पकौड़ी का मुख्य घटक क्या है? इसका मुख्य घटक बेसन है, जिसमें विभिन्न मसाले मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। 3. बेसन के घोल में कौन-कौन से मसाले मिलाए जाते हैं? घोल में स्वादानुसार नमक, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, अजवाइन और इच्छानुसार बारीक कटी हरी मिर्च डाली जाती है। 4. पकौड़ियों को कुरकुरा बनाने के लिए घोल को लेकर क्या सावधानी जरूरी है? घोल न तो अधिक गाढ़ा होना चाहिए और न ही बहुत पतला; साथ ही इसे कुछ मिनट अच्छी तरह फेंटना चाहिए। 5. यदि कद्दू का फूल बहुत बड़ा हो, तो उसे कैसे तला जाता है? बड़े आकार के फूल को हल्का मोड़कर बेसन के घोल में डुबोया और फिर गर्म तेल में तला जाता है। 6. कद्दू की पकौड़ियों को किन चीजों के साथ परोसा जा सकता है? इन्हें गरमा-गरम चाय, ताजे दही या फिर धनिया, हरी मिर्च, नींबू और नमक से बनी तीखी चटनी के साथ परोसा जाता है। https://trendkia.com/lifestyle/barasata-ke-nashte-men-shamila-karen-kaddu-ke-pile-phulon-se-taiyara-kurakuri-pakauriyan-34887 TrendKia — Har trend, sabse pehle.