बिहार के छठ महापर्व में कुरकुरी खजूरी का स्वाद, मुजफ्फरपुर की सुमन देवी ने साझा की आसान रेसिपी छठ पूजा पर ठेकुआ के अलावा खस्ता खजूरी की भी खूब मांग रहती है, जिसे सही तरीके से सहेजने पर 15 दिनों तक खाया जा सकता है। मुजफ्फरपुर की सुमन देवी ने इसे घर पर ही पारंपरिक अंदाज में तैयार करने का तरीका समझाया है। बिहार में छठ पूजा का उल्लास शुरू होते ही रसोई घरों में पारंपरिक पकवानों की खुशबू बिखरने लगती है। इस महापर्व के अवसर पर ठेकुआ के अलावा खजूरी भी लोगों की बेहद पसंदीदा और खास मिठाई मानी जाती है। स्वाद में बेहद खस्ता और कुरकुरी होने के साथ-साथ इसे बनाना काफी सरल है। सुबह की चाय के साथ नाश्ते में परोसने के लिए यह एक बेहतरीन पारंपरिक विकल्प बनती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि अगर इसे उचित तरीके से तैयार करके सही ढंग से सुरक्षित रखा जाए, तो यह कई दिनों तक बिल्कुल ताजी और स्वादिष्ट बनी रहती है। मुजफ्फरपुर की सुमन देवी ने घर पर ही पारंपरिक तरीके से स्वादिष्ट खजूरी तैयार करने की पूरी विधि साझा की है। पारंपरिक खजूरी तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्रियां स्वाद और बनावट में लाजवाब खजूरी बनाने के लिए बहुत अधिक सामग्रियों की आवश्यकता नहीं होती है। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से मैदा और चीनी की जरूरत पड़ती है। खस्तापन लाने के लिए थोड़े बेकिंग सोडा और स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाले खावा सूटा का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा गूंथने के लिए आवश्यकतानुसार सादा पानी चाहिए होता है। सुंदर बनावट और डिजाइन देने के लिए लकड़ी या धातु का पारंपरिक सांचा तथा खजूरी को तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में तेल की व्यवस्था करनी होती है। मैदा मिलाने से लेकर आटा तैयार करने का सही तरीका खजूरी की बनावट सही रहे, इसके लिए सामग्रियों को मिलाने का क्रम बेहद अहम होता है। सबसे पहले मैदे को अच्छी तरह छानकर एक बड़े और खुले बर्तन या परात में निकाल लें। अब इस छाने हुए मैदे में थोड़ा बेकिंग सोडा और खावा सूटा डालें। इसके बाद दोनों हथेलियों से मैदे और इन सामग्रियों को अच्छी तरह आपस में मलें, ताकि पूरा मिश्रण एकसार हो जाए। इसके तुरंत बाद मिश्रण में चीनी मिलाएं और दोबारा हाथों से अच्छी तरह से रगड़ें और मिलाएं। सामग्रियों के आपस में मिल जाने के बाद पानी मिलाने की बारी आती है। पानी को एक बार में कभी न डालें, बल्कि बहुत थोड़ा-थोड़ा करके मिश्रण में छिड़कें। इसका मिश्रण ऐसा होना चाहिए कि जब आप उसे मुट्ठी में बंद करें, तो वह बिखरने के बजाय आपस में बंध जाए और आकार लेने लगे। गीलापन अधिक होने पर खजूरी अपनी खस्ता बनावट खो सकती है, इसलिए पानी की मात्रा का खास ख्याल रखना पड़ता है। सांचे से आकार देने और तलने की विधि जब मिश्रण मुट्ठी में बंधने लायक तैयार हो जाए, तो उसके छोटे-छोटे हिस्से लेकर खजूरी के पारंपरिक सांचे पर रखें और दबाकर मनचाहा सुंदर आकार दें। दूसरी तरफ कड़ाही में पर्याप्त तेल डालकर उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तो गढ़ी गई खजूरी को सावधानीपूर्वक कड़ाही में डालें। इसे धीमी और मध्यम आंच पर तब तक उलट-पुलट कर तलें जब तक कि इसका रंग सुनहरा न हो जाए और यह पूरी तरह खस्ता न दिखने लगे। तलने के बाद इसे कड़ाही से बाहर निकालें और किसी जालीदार बर्तन या प्लेट में रखकर सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद आपकी स्वादिष्ट पारंपरिक खजूरी पूरी तरह परोसने के लिए तैयार हो जाती है। नाश्ते और लंबी यात्राओं के लिए बेहतरीन पकवान सुमन के मुताबिक, यह खजूरी केवल पूजा के प्रसाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सुबह के समय नाश्ते के लिए भी एक बहुत ही उम्दा विकल्प सिद्ध होती है। त्योहार के समय इसे बनाकर घर में आसानी से रखा जा सकता है। जो लोग लंबी यात्रा पर निकल रहे हैं, वे भी इसे सफर के नाश्ते के रूप में अपने साथ ले जा सकते हैं। उनका बताना है कि अगर इसे हवा बंद डिब्बे में सही तरीके से रखा जाए, तो यह 8 से 10 दिनों तक और कभी-कभी 15 दिनों तक बिल्कुल सुरक्षित और खस्ता बनी रहती है। छठ की तैयारियों के बीच इस तरह के पारंपरिक पकवान घरों में लोकसंस्कृति और स्वाद का अनोखा संगम लेकर आते हैं। इसका आप पर असर यह पारंपरिक विधि घर पर कम खर्च में लंबे समय तक चलने वाला स्वादिष्ट नाश्ता तैयार करने में मदद करती है। • भारत में: त्योहारों के दौरान बाहर की मिलावटी मिठाइयों के बजाय घर पर ही शुद्ध और बजट अनुकूल पारंपरिक नाश्ता तैयार किया जा सकता है। इसे पहले से बनाकर रखने से त्योहार के व्यस्त दिनों में मेहमानों और परिवार के नाश्ते की चिंता खत्म हो जाती है। • बिहार में: छठ महापर्व की तैयारियों में जुटे परिवारों को ठेकुआ के साथ-साथ एक और पारंपरिक विकल्प बनाने का आसान तरीका मिलता है। स्थानीय स्वाद और सामग्रियों से जुड़ा यह व्यंजन घर की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में सहायक होता है। • सफर करने वालों के लिए: त्योहार के दौरान यात्रा करने वाले लोग इसे सूखा नाश्ता बनाकर अपने साथ ले जा सकते हैं। रास्ते में बिना खराब हुए यह 8 से 15 दिनों तक आराम से खाया जा सकता है। • किचन बजट के लिए: केवल मैदा, चीनी और तेल जैसी बुनियादी रसोई सामग्रियों से यह स्वादिष्ट व्यंजन तैयार हो जाता है। बाजार के महंगे पैक्ड स्नैक्स खरीदने के मुकाबले यह काफी किफायती पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ छठ महापर्व के दौरान पारंपरिक रूप से ऐसे पकवान बनाए जाते हैं जो शुद्ध हों और जिनका संरक्षण कई दिनों तक बिना खराब हुए किया जा सके। • महापर्व की परंपरा: बिहार में छठ के पावन अवसर पर ठेकुआ के साथ खजूरी जैसी मिठाइयां बनाने की सदियों पुरानी परंपरा रही है। लोकपर्व की सादगी और शुद्धता के अनुरूप ये व्यंजन घर-घर में बनाए जाते हैं। • लंबे समय तक खराब न होना: इस व्यंजन में पानी की बेहद कम मात्रा और तेल में डीप फ्राई करने की तकनीक नमी को खत्म कर देती है। यही कारण है कि यह मिठाई बिना किसी रासायनिक प्रिजर्वेटिव के 15 दिनों तक सुरक्षित रहती है। • सुलभ सामग्रियां: मैदा, चीनी और तेल जैसी सामग्रियां हर ग्रामीण व शहरी घर में आसानी से उपलब्ध होती हैं। जटिल विधि न होने के कारण परिवार की महिलाएं इसे आसानी से मिलकर तैयार कर लेती हैं। सवाल-जवाब 1. खजूरी बनाने के लिए किन मुख्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है? इसके लिए मैदा, चीनी, थोड़ा बेकिंग सोडा, खावा सूटा, पानी और तलने के लिए तेल की जरूरत होती है। 2. खजूरी को कितने दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है? सही तरीके से डिब्बे में रखने पर खजूरी 8 से 10 दिन और कभी-कभी 15 दिनों तक ताजी बनी रह सकती है। 3. मिश्रण में पानी मिलाते समय किस बात का ध्यान रखना जरूरी है? पानी एक साथ अधिक नहीं डालना चाहिए, बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके मिलाना चाहिए ताकि मिश्रण मुट्ठी में बंधने लायक बने। 4. खजूरी को किस आकार में और कैसे बनाया जाता है? तैयार मिश्रण को पारंपरिक सांचे पर रखकर मनचाहा आकार दिया जाता है और फिर तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है। 5. क्या खजूरी केवल छठ पूजा के दौरान ही खाई जाती है? नहीं, यह सुबह के नाश्ते के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प है और इसे सफर में भी साथ ले जाया जा सकता है। https://trendkia.com/lifestyle/bihar-ke-chhath-mahaparva-men-kurakuri-khajuri-ka-svada-muzaffarpur-ki-suman-devi-ne-sajha-ki-asana-resipi-46167 TrendKia — Har trend, sabse pehle.