बिहार के इस शहर में मिलती है 100 साल पुरानी मशहूर मिठाई, कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान भोजपुर के आरा शहर में मिलने वाला पारंपरिक शंकर लड्डू अपनी किफायती कीमत और अनोखे स्वाद की वजह से सदियों से लोगों की पसंद बना हुआ है। तीन पीढ़ियों से इस कारोबार से जुड़े दीपक कुमार इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। मिठाइयों की रंगीन दुनिया में आए दिन नए और आधुनिक व्यंजन अपनी जगह बना रहे हैं, लेकिन कुछ जायके ऐसे हैं जिन पर वक्त का कोई असर नहीं होता। बिहार के भोजपुर जिले की बात करें तो यहां का पारंपरिक गुड़ वाला शंकर लड्डू पिछले एक सौ सालों से अपनी मिठास से लोगों का दिल जीत रहा है। महंगे मेवे और जटिल सजावट से दूर यह साधारण सी मिठाई अपनी खास पहचान और स्वाद के कारण आज भी ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई है। इस मिठाई की खासियत सिर्फ इसका बेजोड़ स्वाद ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई परिवारों की पीढ़ियों की कड़ी मेहनत और समर्पण की अनूठी कहानी भी जुड़ी हुई है। तीन पीढ़ियों से चल रहा है कारोबार आरा शहर में बड़ी मस्जिद के पास स्थित एक छोटी सी दुकान पर इस खास मिठाई को तैयार किया जाता है। यहां काम करने वाले कारीगर दीपक कुमार बताते हैं कि उनके परिवार में यह काम पिछले तीन दशकों से नहीं बल्कि तीन पीढ़ियों से लगातार किया जा रहा है। उनके बुजुर्गों ने जिस पारंपरिक तरीके और ऑरिजिनल स्वाद को इस लड्डू को देने की शुरुआत की थी, आज भी उसे पूरी ईमानदारी से निभाया जा रहा है। बाजार में भले ही समय के साथ अनगिनत नए विकल्प आ गए हों, लेकिन इस पारंपरिक शंकर लड्डू की डिमांड में कभी कोई कमी देखने को नहीं मिली है। बेहद किफायती दाम पर उपलब्ध इस मिठाई की सबसे बड़ी खूबी इसकी जेब पर भारी न पड़ने वाली कीमत है। दीपक कुमार के अनुसार उनकी दुकान पर यह शंकर लड्डू थोक बाजार में 120 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा जाता है, जबकि खुदरा या रिटेल में इसकी कीमत 160 रुपये प्रति किलो रखी गई है। इतनी कम और किफायती कीमत होने के कारण समाज का हर वर्ग इसे आसानी से खरीद सकता है और इसका आनंद उठा सकता है। सामान्य दिनों के मुकाबले त्योहारों के सीजन में इसकी मांग में काफी ज्यादा उछाल आ जाता है। दीपावली, छठ और अन्य प्रमुख पर्वों के मौके पर लोग अपने खाने के साथ-साथ रिश्तेदारों को तोहफा भेजने के लिए भी इसी लड्डू को चुनते हैं। आधुनिकता के दौर में भी बरकरार है जलवा आज के वक्त में हलवाई की दुकानों पर काजू कतली, रसगुल्ला, गुलाब जामुन और तरह-तरह की फैंसी मिठाइयों का अंबार लगा रहता है। इसके बावजूद सादगी से भरा यह पारंपरिक शंकर लड्डू अपनी मजबूत जड़ें बचाए हुए है। इस मिठाई की लोकप्रियता सीधे तौर पर भोजपुर की प्राचीन खानपान संस्कृति और लोक परंपरा से जुड़ी हुई है। दीपक कुमार जैसे हुनरमंद कारीगर अपनी कला और मेहनत के जरिए इस पुरानी विरासत को संजोए हुए हैं। यह इस बात का जीता-जाता सबूत है कि यदि किसी चीज में शुद्धता और पुराना स्वाद हो, तो वक्त चाहे जितना भी बदल जाए, उसकी लोकप्रियता कभी कम नहीं होती। इसका आप पर असर यह पारंपरिक मिठाई आम खरीदारों के लिए बेहद किफायती है और त्योहारों के दौरान बजट में आसानी से फिट बैठती है। • किफायती दाम: थोक में 120 रुपये प्रति किलो और खुदरा में 160 रुपये प्रति किलो की दर से मिलने के कारण यह आम आदमी की पहुंच में है। • त्योहारों की मांग: दीपावली और छठ जैसे बड़े पर्वों के दौरान स्थानीय बाजारों में इसकी खपत काफी बढ़ जाती है। • पारंपरिक कारोबार: स्थानीय स्तर पर कारीगरों और उनके परिवारों की आजीविका इस पारंपरिक हुनर से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। • स्वास्थ्य और स्वाद: चीनी की जगह गुड़ से बनने के कारण यह आधुनिक और अत्यधिक परिष्कृत मिठाइयों का एक बेहतर विकल्प साबित होता है। ऐसा क्यों हुआ इस पारंपरिक मिठाई की लंबी लोकप्रियता इसके अनूठे स्वाद, प्राकृतिक सामग्री और पारिवारिक विरासत के कारण बनी हुई है। • पारंपरिक विधि: पिछले तीन दशकों से एक ही परिवार द्वारा मूल रेसिपी और पारंपरिक तरीकों से इसे तैयार किया जा रहा है। • गुड़ का प्रयोग: चीनी के बजाय गुड़ का इस्तेमाल होने के कारण इसका स्वाद अन्य आधुनिक मिठाइयों से बिल्कुल अलग और अनूठा रहता है। • स्थानीय संस्कृति: भोजपुर की स्थानीय खानपान संस्कृति और पुरानी परंपराओं ने इस मिठाई को पीढ़ियों से जीवित रखा है। सवाल-जवाब 1. शंकर लड्डू मुख्य रूप से कहाँ की प्रसिद्ध मिठाई है? यह पारंपरिक मिठाई बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में बनाई और बेची जाती है। 2. शंकर लड्डू को मुख्य रूप से किस चीज से तैयार किया जाता है? इस पारंपरिक मिठाई को मुख्य रूप से गुड़ और अन्य सामग्रियों से तैयार किया जाता है। 3. इसकी थोक और खुदरा कीमत क्या है? यह दुकान पर थोक में 120 रुपये प्रति किलो और खुदरा में 160 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। 4. यह कारोबार कितने समय से चल रहा है? कारीगर दीपक कुमार के परिवार में यह काम पिछले तीन पीढ़ियों से लगातार किया जा रहा है। 5. किन त्योहारों पर इसकी मांग सबसे ज्यादा होती है? दीपावली और छठ जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान इस पारंपरिक लड्डू की मांग काफी बढ़ जाती है। https://trendkia.com/lifestyle/bihar-ke-is-shahar-mein-milti-hai-100-saal-puraani-mashhoor-mithaai-58137 TrendKia — Har trend, sabse pehle.