बिहार के जहानाबाद में खुला छत वाला अनोखा टी कैफ़े, 12 लाख की लागत और 10 रुपये से गुड़ वाली चाय जहानाबाद के 24 वर्षीय युवा अभिजीत ने 12 लाख रुपये के निवेश से रूफ टॉप टी स्टॉल शुरू किया है, जहां 12 फ्लेवर्स में सिर्फ गुड़ से बनी सेहतमंद चाय मिल रही है। बिहार के जहानाबाद जिले में चाय के शौकीनों के लिए एक नया और आधुनिक ठिकाना सामने आया है। राजधानी पटना से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जिले में एक भव्य टी स्टॉल की शुरुआत हुई है, जिसे तैयार करने में पूरे 12 लाख रुपये की लागत आई है। इस अभिनव उपक्रम को बिस्तौल गांव के 24 साल के स्नातक युवा अभिजीत ने जमीन पर उतारा है। जिला मुख्यालय के समीप टोल प्लाजा के पास खुला यह स्टॉल अपनी खास बनावट और खान-पान के चलते स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन चुका है। क्रिकेटर से प्रेरणा लेकर रखा दुकान का नाम अभिजीत भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हार्दिक पांड्या के जबरदस्त प्रशंसक हैं। अपने इसी जुड़ाव और दीवानगी के कारण उन्होंने अपने नए प्रतिष्ठान का नाम ‘हार्दिक पांड्या टी स्टॉल’ रखा है। अभिजीत का स्पष्ट मानना है कि आज की नई पीढ़ी और युवाओं की पसंद पुराने ढाबों से काफी अलग हो चुकी है। वे बेहतर माहौल, स्वच्छता और सेहतमंद विकल्पों की तलाश करते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति सचेत ग्राहकों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए इस आधुनिक टी कैफ़े की नींव रखी है। खुले आसमान के नीचे रूफ टॉप सीटिंग का अनुभव इस पूरे परिसर का मुख्य आकर्षण इसकी पहली मंजिल पर बनी रूफ टॉप सीटिंग व्यवस्था है। चाय की चुस्कियों के साथ ग्राहक खुली हवा में बैठकर सुकून भरे पल बिता सकते हैं। आमतौर पर छोटे शहरों के लोग अच्छे माहौल और बैठने की बेहतर जगह की तलाश में 20 किलोमीटर तक का सफर तय कर लेते हैं। पटना के मरीन ड्राइव पर जिस तरह लोग शाम को सुकून और माहौल की तलाश में इकट्ठा होते हैं, ठीक उसी तरह का अनुभव अब जहानाबाद के निवासियों को अपने ही शहर में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है ताकि उन्हें दूर न जाना पड़े। 12 अनोखे फ्लेवर्स और चीनी की जगह शुद्ध गुड़ अभिजीत ने एक कंपनी से फ्रेंचाइजी लेकर इस व्यवसाय की शुरुआत की है। इस मेन्यू में ग्राहकों के लिए 12 अलग-अलग फ्लेवर्स में चाय तैयार की जाती है। चाय के अलावा जो लोग कुछ अलग पीना चाहते हैं, उनके लिए कॉफी और लेमन टी का भी पूरा प्रबंध किया गया है। इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ किसी भी रेसिपी में सफेद चीनी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता। ग्राहकों की अच्छी सेहत को ध्यान में रखते हुए सभी प्रकार की चाय शुद्ध गुड़ से पकाई जाती हैं। किफायती दाम और हर वर्ग की पहुंच रूफ टॉप और आधुनिक कैफ़े जैसा माहौल होने के बावजूद यहाँ की कीमतें आम आदमी की जेब के पूरी तरह अनुकूल हैं। ‘हार्दिक पांड्या टी स्टॉल’ पर चाय की शुरुआती कीमत मात्र 10 रुपये है, जबकि अधिकतम दाम 30 रुपये तक जाता है। 10 से 30 रुपये की बेहद किफायती दर पर सेहतमंद गुड़ की चाय और प्रीमियम माहौल मिलने से आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ पहुंचने लगे हैं। इसका आप पर असर जहानाबाद और आसपास के निवासियों को अब कम बजट में प्रीमियम कैफ़े जैसा अनुभव अपने ही जिले में मिलेगा। • बिहार में: छोटे शहरों के युवा अब महंगे कैफ़े के विकल्प के रूप में स्थानीय स्तर पर नए प्रयोग देख सकेंगे। इससे अन्य शिक्षित युवाओं को भी स्वरोजगार शुरू करने की नई दिशा मिलेगी। • जहानाबाद में: टोल प्लाजा के पास स्थित होने से स्थानीय निवासियों और पटना की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ ठिकाना मिल गया है। शाम के समय सुकून से बैठने के लिए लोगों को 20 किलोमीटर दूर पटना या अन्य शहरों की तरफ नहीं जाना पड़ेगा। • जेब पर असर: 10 से 30 रुपये की सामान्य कीमत में रूफ टॉप सीटिंग का आनंद लिया जा सकता है। छात्र और कामकाजी युवा बिना किसी बड़े खर्च के दोस्तों के साथ समय बिता सकेंगे। • सेहत के लिए: सफेद चीनी के हानिकारक प्रभावों से बचने वाले लोगों को 12 प्रकार की गुड़ वाली चाय का सीधा विकल्प मिला है। मधुमेह और वजन को लेकर सतर्क रहने वाले ग्राहक भी सुरक्षित तरीके से चाय का स्वाद ले सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ छोटे शहरों में युवाओं की बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते इस तरह के आधुनिक टी कैफ़े की मांग पैदा हुई है। • माहौल की कमी: जहानाबाद के लोगों को खुली छत और अच्छे वातावरण में बैठने के लिए अक्सर 20 किलोमीटर दूर या पटना के मरीन ड्राइव जाना पड़ता था। इसी खालीपन को भरने के लिए स्थानीय स्तर पर रूफ टॉप व्यवस्था बनाई गई। • चीनी मुक्त जीवनशैली की मांग: आज के समय में युवा और परिवार सफेद चीनी के नुकसानों से बचने के लिए प्राकृतिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इसी मांग को देखते हुए सभी 12 चाय केवल शुद्ध गुड़ से तैयार करने का फैसला लिया गया। • युवा स्वरोजगार की पहल: कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद 24 वर्षीय अभिजीत ने नौकरी खोजने के बजाय फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाकर अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया। सवाल-जवाब 1. यह टी स्टॉल बिहार के किस जिले में स्थित है? यह टी स्टॉल बिहार के जहानाबाद जिले में जिला मुख्यालय के टोल प्लाजा के पास खुला है। 2. इस टी स्टॉल को तैयार करने में कितनी लागत आई है? इस पूरे टी स्टॉल को तैयार करने में 12 लाख रुपये का कुल खर्च आया है। 3. दुकान के संचालक कौन हैं और उनकी उम्र क्या है? इसके संचालक बिस्तौल गांव के रहने वाले 24 वर्षीय बीए पास युवा अभिजीत हैं। 4. दुकान का नाम 'हार्दिक पांड्या टी स्टॉल' क्यों रखा गया? संचालक अभिजीत भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांड्या के बहुत बड़े प्रशंसक हैं, इसलिए उन्होंने दुकान का नाम उन्हीं पर रखा है। 5. यहाँ चाय की कीमतें क्या हैं? यहाँ चाय की कीमत 10 रुपये से शुरू होकर 30 रुपये तक रखी गई है। 6. यहाँ कितने फ्लेवर्स में चाय मिलती है और क्या इसमें चीनी होती है? यहाँ 12 अलग-अलग फ्लेवर्स में चाय मिलती है और इसमें चीनी की जगह केवल शुद्ध गुड़ का इस्तेमाल होता है। 7. चाय के अलावा यहाँ पीने के लिए क्या विकल्प हैं? चाय के अतिरिक्त ग्राहकों के लिए यहाँ कॉफी और लेमन टी की भी व्यवस्था है। 8. यह टी स्टॉल पटना से कितनी दूरी पर स्थित है? यह टी स्टॉल बिहार की राजधानी पटना से महज 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्रेरणा और सबक यह पहल दिखाती है कि कैसे एक युवा स्नातक अपनी सोच और सही योजना से अपने ही गृह जिले में नए विचार को सफल बना सकता है। • स्थानीय समस्याओं में अवसर देखना: बाहर जाने की मजबूरी को देखकर अपने ही शहर में बेहतर विकल्प खड़ा करना सफल व्यवसाय की पहली सीढ़ी है। • कम बजट में बेहतर गुणवत्ता: 12 लाख रुपये की लागत लगाने के बाद भी कीमतों को 10 से 30 रुपये पर रखना ग्राहकों का विश्वास जीतने का सशक्त तरीका है। • स्वास्थ्य और परंपरा का मेल: आधुनिक कैफ़े की तर्ज पर दुकान सजाने के साथ पारंपरिक गुड़ को मुख्य आधार बनाना दिखाता है कि पुरानी सेहतमंद आदतें हमेशा प्रासंगिक रहती हैं। https://trendkia.com/lifestyle/bihar-ke-jehanabad-men-khula-chhata-vala-anokha-ti-kaife-12-lakha-ki-lagata-aura-10-rupaye-se-gura-vali-chaya-46179 TrendKia — Har trend, sabse pehle.