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  "title": "बिहार के राकेश पौधों को दे रहे हैं अद्भुत आकार, कोई बना भगवान गणेश तो किसी में सजा त्रिशूल",
  "summary": "बिहार के जहानाबाद जिले के राकेश कुमार पिछले 15 साल से गार्डनिंग कर रहे हैं और जीवित अडेनियम पौधों को तराशकर गणेश, त्रिशूल और चौकोर जैसी अनोखी आकृतियां बना रहे हैं। उनकी छत पर ऐसे करीब 200 पौधे हैं।",
  "content": "मकान का नक्शा तैयार करने वाले आर्किटेक्ट और कागज पर डिजाइन उकेरने वाले कलाकारों से तो अक्सर मुलाकात होती होगी, लेकिन क्या कभी जीवित पौधों पर कलाकारी करने वाले किसी हुनरमंद शख्स को देखा है? बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले राकेश कुमार कुछ ऐसा ही अनोखा काम कर रहे हैं। पिछले 15 साल से बागवानी से जुड़े राकेश ने अपनी मेहनत और लगन से पौधों को कला का जीवंत रूप दे दिया है। उनके घर की छत पर इस समय अडेनियम के करीब 200 पौधे मौजूद हैं। डेजर्ट रोज के नाम से मशहूर इन पौधों को राकेश अपनी कला के जरिए अलग-अलग और मनमोहक आकार देते हैं। उनके छत पर रखे कुछ पौधों में भगवान गणेश की स्पष्ट आकृति नजर आती है, तो कुछ को करीने से चौकोर रूप दिया गया है। इसके अलावा कई अन्य पौधों पर भी अलग-अलग तरह की खूबसूरत और अनोखी आकृतियां उकेरी गई हैं, जो देखने वालों का मन मोह लेती हैं।\n\nनौकरी के बाद पौधों को समर्पित करते हैं वक्त\nजहानाबाद के मुठेर गांव के निवासी राकेश कुमार सिविल कोर्ट, जहानाबाद में अपनी सेवाएं देते हैं। अपनी नौकरी की व्यस्त ड्यूटी पूरी करने के बाद जब वह घर लौटते हैं, तो उनका सारा ध्यान अपने पौधों की ओर चला जाता है। वह रोजाना सुबह और शाम दोनों समय को मिलाकर लगभग 4 घंटे इन पौधों की देखभाल और उनकी नक्काशी में बिताते हैं। पौधों के प्रति उनका यह अगाध प्रेम और समर्पण ही है जो उन्हें इस अनूठी कला में लगातार पारंगत बना रहा है। राकेश अपनी पसंद और पौधों की बनावट के अनुसार उन्हें नया स्वरूप देने का काम करते हैं। इसके लिए वह पौधों की जड़ों और उनके तनों के प्राकृतिक विकास को बारीकी से समझते हैं और फिर उन्हें वांछित आकार में ढालते हैं। इस बारीक काम के लिए निरंतर देखभाल और अटूट धैर्य की बेहद जरूरत होती है, जिसे राकेश ने वर्षों के लंबे अभ्यास से पूरी तरह सीखा है।\n\nऐसे शुरू हुआ पौधों को आकार देने का सफर\nअपने इस अनोखे सफर के बारे में बात करते हुए राकेश बताते हैं कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि फरवरी के महीने के आसपास पौधों की जड़ों की मिट्टी बदली जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने पहली बार पौधों की जड़ों में कई तरह की प्राकृतिक आकृतियां देखी थीं। किसी पौधे की जड़ में उन्हें भगवान की मूर्ति जैसी बनावट दिखाई दी, तो किसी अन्य पौधे में हाथी के पैर जैसा आकार नजर आया। इन अनोखी आकृतियों को देखकर राकेश की दिलचस्पी इनमें और अधिक बढ़ गई और उन्होंने खुद ही इन पर प्रयोग करना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में इस प्रयोग के दौरान उनके कई पौधों को नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कोशिशों को लगातार जारी रखा। पौधों को बेहद करीब से देखते-देखते उन्होंने उन्हें नया स्वरूप देने की कला सीख ली। राकेश का कहना है कि पौधों की जड़ों की मिट्टी बदलना अनिवार्य होता है और इसी बहाने उन्हें जड़ों को गहराई से समझने और उन्हें मनचाहा आकार देने का बेहतरीन अवसर मिलता रहा। धीरे-धीरे उनके अनुभव में इजाफा हुआ और इसी अनुभव ने उन्हें पौधों से कलाकारी करने की कला में माहिर बना दिया।\n\nजीवित पौधों पर उकेरी गईं आस्था और कला की अनूठी आकृतियां\nराकेश बताते हैं कि वह अब तक अपने इस हुनर के दम पर 30 से ज्यादा पौधों को बिल्कुल नया और आकर्षक स्वरूप दे चुके हैं। इस पूरी कलाकारी की सबसे खास बात यह है कि उनके द्वारा तराशे गए लगभग सभी पौधे पूरी तरह से जीवित और स्वस्थ हैं। उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए कुछ पौधों को भगवान गणेश की खूबसूरत आकृति दी है, तो वहीं कुछ पौधों को बिल्कुल चौकोर और कुछ को पवित्र त्रिशूल का आकार प्रदान किया है। इसके अलावा उनके कुछ पौधों की यह खूबी है कि उनमें एक साथ पांच अलग-अलग रंगों और किस्मों के फूल खिलते हैं। वहीं कुछ अन्य पौधों में तीन अलग-अलग प्रकार के फूल देखने को मिलते हैं। यह सारा काम पौधों की नियमित देखभाल और उनकी प्राकृतिक बढ़त को वैज्ञानिक तरीके से समझकर ही संभव हो पाया है।\n\nपौधों की देखभाल को लेकर देते हैं खास सीख\nबागवानी के इस नायाब सफर के साथ-साथ राकेश पौधों से प्रेम करने वाले और गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोगों को एक बेहद खास सलाह भी देते हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि घर में चाहे किसी भी किस्म का पौधा लगाया जाए, लेकिन उसकी सही और स्वस्थ परवरिश के लिए उससे दिल का लगाव होना बेहद जरूरी है। यदि पौधों की देखभाल सच्ची निष्ठा और दिल से की जाए, तो वे हमेशा सुरक्षित रहते हैं और उनकी सेहत पर भी कोई आंच नहीं आती। इसके साथ ही घर के आसपास का वातावरण हरा-भरा और खुशगवार बना रहता है। उनका यह पक्का विश्वास है कि पौधों के साथ हमेशा धैर्य और प्रेम का बर्ताव करने पर ही गार्डनिंग का असली और सच्चा आनंद प्राप्त होता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह अनूठी खबर पौधों के शौकीनों और पर्यावरण प्रेमियों को घर पर बागवानी करने और पौधों के साथ नया प्रयोग करने के लिए प्रेरित करती है।\n\n• बिहार में: जहानाबाद और आसपास के क्षेत्रों के लोग इस अनूठी कला से प्रेरणा लेकर अपने घर की छतों पर अडेनियम और अन्य पौधों को संवारने का नया शौक शुरू कर सकते हैं।\n• भारत में: देश भर के गार्डनिंग प्रेमी पौधों की जड़ों और उनकी देखभाल के नए तरीकों को अपनाकर अपने घर के बगीचे को अधिक रचनात्मक और सुंदर बना सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपौधों को अलग-अलग आकार देने की यह कला वर्षों के निरंतर अभ्यास, पौधों की प्राकृतिक बनावट की समझ और उनके प्रति गहरे लगाव के कारण विकसित हुई है।\n\n• प्राकृतिक आकृतियां: फरवरी के दौरान पौधों की मिट्टी बदलते समय जड़ों में बने स्वाभाविक उभारों ने राकेश की जिज्ञासा को बढ़ाया।\n• धैर्य और समय: सिविल कोर्ट की नौकरी के बाद रोजाना चार घंटे का समर्पण और पौधों की नियमित देखभाल ने इस कला को संभव बनाया।\n• जीवित कला: पौधों के विकास चक्र को समझकर और उनकी जड़ों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें तराशने के कारण पौधे जीवित रहते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राकेश कुमार कहां के रहने वाले हैं?\nराकेश कुमार बिहार के जहानाबाद जिले के मुठेर गांव के रहने वाले हैं।\n\n2. राकेश कुमार क्या काम करते हैं?\nराकेश कुमार जहानाबाद के सिविल कोर्ट में काम करते हैं।\n\n3. वे किस पौधे पर कलाकारी करते हैं?\nवे अडेनियम पौधे पर कलाकारी करते हैं, जिसे डेजर्ट रोज भी कहा जाता है।\n\n4. उनके घर की छत पर कितने पौधे हैं?\nराकेश के घर की छत पर अडेनियम के करीब 200 पौधे हैं।\n\n5. वे पौधों को क्या-क्या आकार देते हैं?\nवे पौधों को भगवान गणेश की आकृति, चौकोर आकार और त्रिशूल का रूप देते हैं।\n\n6. वे पौधों की कलाकारी के लिए रोजाना कितना समय देते हैं?\nवे ड्यूटी के बाद सुबह और शाम मिलाकर रोजाना करीब 4 घंटे पौधों को समय देते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nराकेश कुमार का यह सफर उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो अपने शौक को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं।\n\n• शौक के लिए समय निकालना: व्यस्त नौकरी के बाद भी दिन में चार घंटे अपने जुनून के लिए निकालना यह सिखाता है कि इच्छाशक्ति होने पर समय की कमी आड़े नहीं आती।\n• धैर्य का महत्व: शुरुआती असफलताओं से निराश हुए बिना लगातार प्रयोग जारी रखने से ही बड़ी कलाकारी सीखी जा सकती है।\n• प्रकृति से जुड़ाव: पौधों की देखभाल केवल औपचारिकता नहीं बल्कि उनके प्रति दिल से लगाव होना चाहिए।",
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  "category": "जीवनशैली",
  "publishedAt": "2026-09-27",
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