छत पर ऐसे उगाएं हरी-भरी लौकी, दो महीने में बंपर पैदावार से भर जाएंगे ग्रो बैग घर की खाली छत पर गार्डनिंग के आसान तरीकों से ताजी लौकी उगाई जा सकती है। सही मिट्टी, ग्रो बैग और थोड़ी सी देखभाल से मात्र 50 से 60 दिन में फल मिलने शुरू हो जाते हैं। घर की खाली छत अब केवल कपड़े सुखाने या अन्य सामान रखने तक सीमित नहीं रह गई है। अगर आपके पास थोड़ी सी जगह है और आप सही बागवानी के तौर-तरीके अपनाते हैं, तो आप अपनी छत पर ही हरी-भरी सब्जियां तैयार कर सकते हैं। विशेष रूप से लौकी एक ऐसी सब्जी है जिसे गमलों या फिर ग्रो बैग्स में बेहद आसानी से उगाया जा सकता है। इसके लिए आपको किसी बड़े खर्च की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती है। आपको बस एक उपयुक्त आकार का ग्रो बैग, उपजाऊ मिट्टी, जैविक खाद और बेल को ऊपर उठाने के लिए एक मजबूत मचान की जरूरत होती है। लौकी उगाने के लिए सही ग्रो बैग और मिट्टी का चुनाव बागवानी विशेषज्ञ चंद्रशेखर मिश्रा के अनुसार, लौकी मुख्य रूप से एक बेल वाली सब्जी है और इसकी जड़ें जमीन या गमले में काफी दूर तक फैलती हैं। इसलिए अपनी छत पर लौकी की खेती शुरू करते समय कम से कम 15 गुणा 15 इंच या फिर 18 गुणा 18 इंच का ग्रो बैग चुनना सबसे सही रहता है। आपके इस्तेमाल किए जाने वाले गमले या ग्रो बैग के निचले हिस्से में पानी की निकासी के लिए पर्याप्त छेद होने बेहद आवश्यक हैं, ताकि अतिरिक्त पानी कभी भी अंदर जमा न हो सके और पौधे की नाज़ुक जड़ें सड़ने से सुरक्षित रहें। लौकी के पौधे को बेहतरीन बढ़वार के लिए भरपूर पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी की आवश्यकता होती है। इस विशेष मिट्टी को तैयार करने के लिए आप लगभग 40 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 40 प्रतिशत अच्छी तरह पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट और शेष 20 प्रतिशत कोकोपीट को आपस में अच्छी तरह मिला सकते हैं। इसके अलावा इस मिश्रण में थोड़ी मात्रा में नीम खली भी मिलाई जा सकती है, जो मिट्टी को प्राकृतिक जैविक पोषण प्रदान करती है और हानिकारक कीटों से पौधे की जड़ों का बचाव करने में भी काफी मददगार साबित होती है। बीज बोने की प्रक्रिया और बेल को मचान पर चढ़ाना लौकी के बीजों को जमीन या गमले में सीधे बोने से पहले अगर आप उन्हें रातभर पानी में भिगोकर रखते हैं, तो इससे बीजों का अंकुरण काफी जल्दी और बेहतर तरीके से होता है। इसके बाद इन भीगे हुए बीजों को तैयार की गई गमले की मिट्टी में दबा दें और वहां हल्की नमी लगातार बनाए रखें। कुछ ही दिनों के भीतर बीज अंकुरित होकर बाहर आने लगेंगे और छोटे-छोटे पौधे दिखाई देने लगेंगे। जब एक ही स्थान से एक से अधिक पौधे निकल आएं, तो कमजोर पौधों को वहां से हटा देना चाहिए और केवल एक सबसे मजबूत एवं स्वस्थ पौधे को ही आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए, ताकि उसे पर्याप्त जगह और पोषण मिल सके। लौकी की बेल को कभी भी जमीन पर इधर-उधर फैलाने के बजाय उसे ऊपर की तरफ चढ़ाना हमेशा ज्यादा फायदेमंद रहता है। इसके लिए आप बांस की डंडियों, मजबूत रस्सियों या फिर एक विशेष क्रीपर नेट की सहायता से बहुत ही मजबूत मचान तैयार कर सकते हैं। जैसे-जैसे यह बेल आकार में बड़ी होने लगे, वैसे-वैसे इसे बहुत ही सावधानी के साथ धीरे-धीरे मचान के ऊपर की तरफ चढ़ाते जाना चाहिए। ऐसा करने से पौधे को फैलने के लिए खुला आसमान और उचित स्थान दोनों मिलते हैं, और लौकी जमीन पर पड़े रहने के बजाय हवा में लटककर बिल्कुल साफ-सुथरी और सुंदर तैयार होती है। बेल की छंटाई और हैंड पॉलिनेशन के जरूरी उपाय विशेषज्ञों के मुताबिक, बेल की समय पर सही छंटाई करने से पौधे की कुल ग्रोथ को बेहद प्रभावी तरीके से नियंत्रित और मैनेज किया जा सकता है। जब मुख्य बेल एक निश्चित अच्छी लंबाई तक बढ़ जाए, तो उसकी अत्यधिक बढ़वार को रोकने और नियंत्रित करने के लिए उसके ऊपरी टिप हिस्से की छंटाई की जा सकती है। इस छोटी सी तकनीक से पौधे पर अनगिनत साइड शाखाएं निकलने लगती हैं, जो आगे चलकर ज्यादा फल देती हैं। हालांकि, यह छंटाई हमेशा पौधे की विशेष किस्म और उसकी मौजूदा बढ़वार को ध्यान में रखकर ही की जानी चाहिए, क्योंकि जरूरत से ज्यादा कटाई-छंटाई करने से पौधे को भारी नुकसान भी पहुंच सकता है. कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि छत पर रखे गमलों में लौकी के पौधे पर ढेरों फूल तो खिलते हैं, लेकिन वे किसी कारण से फल में नहीं बदल पाते हैं। इस समस्या का एक मुख्य कारण प्राकृतिक परागण की कमी होना हो सकता है। यदि आपके आसपास मधुमक्खियां या अन्य परागण करने वाले कीट कम संख्या में आते हैं, तो आप सुबह के समय खुद ही एक नर फूल से परागकण लेकर उसे मादा फूल के ऊपर बहुत ही हल्के हाथों से स्पर्श करा सकते हैं। इस आसान प्रक्रिया को हैंड पॉलिनेशन कहा जाता है, जिसके जरिए लौकी के फल बनने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उचित सिंचाई, जैविक खाद और कीटों से सुरक्षा छत पर खुले आसमान के नीचे रखे गए गमले नीचे जमीन की मिट्टी के मुकाबले बहुत तेजी से सूख जाते हैं, इसलिए पौधे के अंदर हमेशा उचित नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप गमले में हमेशा पानी भरकर रखें। जब भी आपको लगे कि मिट्टी ऊपर से सूख रही है, तभी उसमें पानी डालें और इस बात का हमेशा विशेष ध्यान रखें कि हर बार अतिरिक्त पानी नीचे बने छेदों से बाहर निकल जाए। गमले में जलभराव होने पर जड़ें सड़ सकती हैं और पूरा पौधा खराब हो सकता है। लौकी के इस हरे-भरे पौधे को समय-समय पर वर्मी कंपोस्ट या फिर अच्छी तरह विघटित सड़ी हुई गोबर की खाद दी जानी चाहिए। इसके अलावा आप घर पर ही तैयार की गई जैविक लिक्विड खाद का भी नियमित रूप से उपयोग कर सकते हैं। पौधे की वास्तविक जरूरत को देखकर ही उसमें खाद डालें और कभी भी अत्यधिक मात्रा में खाद का प्रयोग न करें। पौधे की तेज और स्वस्थ बढ़वार के लिए भरपूर धूप मिलना भी उतना ही जरूरी है, इसलिए अपने ग्रो बैग को हमेशा ऐसी खुली जगह पर रखें जहां उसे दिनभर में पर्याप्त रोशनी मिल सके। यदि किसी वजह से लौकी की इस बेल पर आपको कोई हानिकारक कीट या फंगस का प्रकोप दिखाई दे, तो तुरंत किसी भी रासायनिक दवा या कीटनाशक का उपयोग करने के बजाय सबसे पहले प्राकृतिक और जैविक विकल्पों पर विचार करना चाहिए। इसके लिए नीम आधारित स्प्रे का इस्तेमाल बहुत ही कारगर साबित होता है। हालांकि, किसी भी घरेलू या जैविक घोल को पौधे पर छिड़कने से पहले उसकी सही मात्रा और पौधे पर पड़ने वाले उसके संभावित असर को लेकर किसी कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। मात्र 50 से 60 दिन में मिलने लगेगी ताजी लौकी यदि आप पौधे की सही किस्म, अनुकूल मौसम, उपजाऊ मिट्टी, भरपूर धूप और उसकी सही देखभाल का पूरा ध्यान रखते हैं, तो लौकी के पौधे में लगभग 50 से 60 दिन के भीतर ही फल आने शुरू हो जाते हैं। इसके बाद आप अपनी ही घर की छत से बिल्कुल ताजी लौकी तोड़कर अपनी रसोई में स्वादिष्ट सब्जी बना सकते हैं। संक्षेप में कहें तो जिस छत के हिस्से को हम आमतौर पर बिल्कुल बेकार और खाली छोड़ देते हैं, वहीं पर सिर्फ एक बड़े ग्रो बैग और थोड़ी सी मेहनत के जरिए हरी-भरी लौकी की शानदार बेल तैयार की जा सकती है। इससे आपके घर को रोजाना बिल्कुल ताजी और रसायनमुक्त सब्जी तो मिलेगी ही, साथ ही बाजार से महंगी सब्जियां बार-बार खरीदने में होने वाला आपका खर्च भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इसका आप पर असर घर की छत पर लौकी उगाने से रसोई के मासिक खर्च में सीधी बचत होती है और बाजार से मिलने वाली रासायनिक सब्जियों से राहत मिलती है। • भारत में: शहरी इलाकों में बढ़ती महंगाई के बीच घर पर सब्जियां उगाने से हर महीने किराडे के खर्च में कमी आती है और ताजी हरी सब्जियां मिलती हैं। • घरेलू सेहत पर असर: घर पर जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों से उगाई गई सब्जियां खाने से परिवार को हानिकारक रसायनों और कीटनाशकों से सुरक्षित रखा जा सकता है। सवाल-जवाब 1. छत पर लौकी उगाने के लिए ग्रो बैग का आकार क्या होना चाहिए? लौकी उगाने के लिए कम से कम 15 गुणा 15 इंच या 18 गुणा 18 इंच का ग्रो बैग सबसे उपयुक्त रहता है। 2. लौकी के बीज बोने से पहले क्या करना चाहिए? बीजों को मिट्टी में बोने से पहले उन्हें रातभर पानी में भिगोकर रखना चाहिए ताकि अंकुरण जल्दी हो सके। 3. लौकी के पौधे में कितने दिन में फल आने लगते हैं? सही किस्म, मौसम और देखभाल मिलने पर लगभग 50 से 60 दिन के आसपास फल आने शुरू हो जाते हैं। 4. अगर फूल आने पर भी लौकी न बने तो क्या करना चाहिए? ऐसे में सुबह के समय नर फूल से पराग लेकर मादा फूल पर हल्के हाथ से हैंड पॉलिनेशन करना चाहिए। 5. मिट्टी तैयार करने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए? मिट्टी तैयार करने के लिए 40 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 40 प्रतिशत गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट और 20 प्रतिशत कोकोपीट मिलाना चाहिए। प्रेरणा और सबक सीमित जगह और संसाधनों का सही उपयोग करके आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा इस गार्डनिंग विधि से मिलती है। • संसाधनों का सदुपयोग: खाली पड़ी छत जैसी जगह को सही दिशा में इस्तेमाल करके उपयोगी पैदावार में बदला जा सकता है। • धैर्य और नियमित देखभाल: पौधे की नियमित देखभाल, समय पर छंटाई और सही सिंचाई से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। • प्राकृतिक तरीकों का चुनाव: रासायनिक दवाओं के बजाय जैविक विकल्पों को अपनाकर सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। https://trendkia.com/lifestyle/chhat-par-aise-ugaye-hari-bhari-lauki-do-mahine-me-bumper-paidavar-25943 TrendKia — Har trend, sabse pehle.