छतरपुर के किसान ने समझाई गुलाब की खेती, 1 बीघा जमीन से हर दिन कमा रहे 1 से 2 हजार रुपये मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के किसान चेतराम कुशवाहा ने बताया कि कैसे एक बीघा में 2500 गुलाब के पौधे लगाकर रोजाना आमदनी हासिल की जा सकती है। शादी और त्योहारी सीजन में यह फूल 300 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। पारंपरिक फसलों के मुकाबले बागवानी फसलों में नियमित नकदी आमदनी का बेहतर जरिया साबित हो रहा है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव अंतर्गत बिलहरी गांव के किसान चेतराम कुशवाहा ने फूलों की खेती को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। वे बीते 10 वर्षों यानी साल 2015 से लगातार गुलाब की बागवानी कर रहे हैं। इससे पहले वे केवल गेंदे की खेती करते थे, लेकिन बेहतर मुनाफे की तलाश में उन्होंने गेंदे के साथ-साथ गुलाब उगाने की योजना बनाई। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने पहले कृषि विज्ञान केंद्र नौगांव से तकनीकी प्रशिक्षण लिया और फिर वैज्ञानिक तौर-तरीकों से खेत में गुलाब के पौधे रोपे। गुलाब की बागवानी में लगातार उत्पादन की खासियत गुलाब को फूलों का राजा माना जाता है और व्यावसायिक दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें सालभर फूल आते रहते हैं। चेतराम के अनुसार, दूसरी मौसमी फसलों की तरह इसमें उत्पादन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता, बल्कि पौधों से रोजाना उत्पादन मिलता रहता है। बाजार में अन्य सामान्य फूलों की तुलना में गुलाब के दाम भी अपेक्षाकृत ऊंचे और स्थिर रहते हैं, जिससे किसानों को हर दिन नियमित कैश फ्लो मिलता रहता है। पौध रोपाई, कलम और खेत की सटीक दूरी का गणित गुलाब की शुरुआत के लिए किसान या तो स्वयं नर्सरी तैयार कर सकते हैं या फिर सीधे तैयार पौधे खरीदकर खेत में ट्रांसप्लांट कर सकते हैं। गुलाब के पौधे तैयार करने के लिए कलम विधि का उपयोग किया जाता है। खेत में रोपाई करते समय पौधों के बीच की दूरी का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। कतार से कतार यानी लाइन से लाइन की दूरी 4 फीट रखनी चाहिए, जबकि एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी डेढ़ फीट होनी चाहिए। इस विधि से खेत में रोपने के ठीक 1 महीने बाद ही पौधों में फ्लावरिंग शुरू हो जाती है, जो पूरे साल निरंतर चलती रहती है। लागत का बजट और 1 बीघा का पूरा खर्च एक बीघा जमीन पर गुलाब की खेती के पूरे बजट का हिसाब समझाते हुए चेतराम बताते हैं कि 1 बीघा खेत में कुल 2500 पौधे लगाए जा सकते हैं। एक पौधे की औसत खरीद लागत करीब 10 रुपये बैठती है। इस तरह 1 बीघा खेत में 2500 पौधे लगाने का शुरुआती खर्च लगभग 25000 रुपये आता है। यह एकमुश्त निवेश के बाद लंबे समय तक निरंतर आमदनी देने वाला मॉडल बन जाता है। दैनिक तुड़ाई और पैदावार का चक्र एक बीघा में लगे 2500 पौधों से रोजाना औसतन 10 से 20 किलोग्राम ताजे फूल प्राप्त होते हैं। किसान सालभर हर रोज इन फूलों की तुड़ाई कर सकते हैं। जब पौधों में नई शाखाएं निकलती हैं, उस दौरान कुछ समय के लिए फूलों की संख्या थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन नई शाखाएं विकसित होते ही उत्पादन फिर से बढ़कर सामान्य स्तर पर आ जाता है। फूलों की तुड़ाई के लिए समय का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है; तुड़ाई या तो सुबह के समय की जानी चाहिए या फिर शाम को, ताकि फूलों की ताजगी बरकरार रहे। बाजार भाव और रोजाना होने वाली कमाई गुलाब के थोक बाजार भाव मांग के अनुसार बदलते रहते हैं। जब शादियों और त्योहारों का सीजन होता है, तब गुलाब का थोक भाव 150 रुपये प्रति किलो से लेकर 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। वहीं सामान्य या डाउन सीजन में भी इसका भाव 50 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच बना रहता है। इस नियमित बिक्री के दम पर 1 बीघा खेत से हर दिन 1 से 2 हजार रुपये की सीधी कमाई होती है, जबकि त्योहारों और लगन के दिनों में यह दैनिक मुनाफा और भी अधिक बढ़ जाता है। इसका आप पर असर गुलाब की वैज्ञानिक बागवानी अपनाकर किसान पारंपरिक नकदी फसलों के मुकाबले दैनिक आधार पर निरंतर नकदी प्रवाह सुनिश्चित कर सकते हैं। • भारत में: विविधीकृत बागवानी से जुड़ने वाले किसान मौसमी अनिश्चितताओं से बचकर दैनिक आमदनी का मजबूत जरिया बना सकते हैं। रोजाना 10 से 20 किलो फूल बेचकर नकदी संकट से बचा जा सकता है। • मध्य प्रदेश में: बुंदेलखंड और छतरपुर अंचल के किसान कृषि विज्ञान केंद्रों से तकनीकी प्रशिक्षण लेकर एक बीघा में 25000 रुपये के शुरुआती निवेश से फूलों का काम शुरू कर सकते हैं। इससे स्थानीय मंडियों में सीधे आपूर्ति कर बिचौलियों पर निर्भरता घटाई जा सकती है। • लागत और आमदनी: एक बीघा में 2500 पौधे लगाने पर रोजाना 1000 से 2000 रुपये तक की नियमित आय हासिल की जा सकती है। शादी के मौसम में 300 रुपये प्रति किलो तक का थोक भाव मिलने से यह मुनाफा और बढ़ जाता है। • बाजार का विकल्प: गेंदा उगाने वाले किसान अपने खेत के एक हिस्से में कलम विधि से गुलाब रोपने का विकल्प चुन सकते हैं। रोपाई के ठीक एक महीने बाद से ही नियमित तोड़ाई शुरू हो जाती है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक खेती में एकमुश्त फसल चक्र के मुकाबले किसानों को हर दिन नकदी की जरूरत होती है, जिसे पूरा करने के लिए छतरपुर के किसान ने गेंदे के साथ गुलाब की व्यावसायिक खेती का रुख किया। • नियमित आमदनी की आवश्यकता: गेंदा जैसी मौसमी फसलों के साथ चेतराम कुशवाहा ऐसा विकल्प तलाश रहे थे जिसमें पूरे साल दैनिक स्तर पर उत्पादन और बिक्री संभव हो सके। गुलाब में सालभर होने वाली फ्लावरिंग ने उन्हें यह सतत उत्पादन चक्र दिया। • कृषि विज्ञान केंद्र का प्रशिक्षण: खुले खेत में सीधे रोपाई के बजाय वैज्ञानिक तकनीकों की समझ जरूरी थी। नौगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से मिले प्रशिक्षण ने उन्हें कलम तैयार करने और सटीक दूरी बनाए रखने में मदद की। • मजबूत बाजार मांग: शादियों और त्योहारों के दौरान गुलाब की थोक मांग बढ़ जाती है, जिससे भाव 150 से 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाते हैं। डाउन सीजन में भी न्यूनतम 50 से 80 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने से घाटे का जोखिम नगण्य रहता है। सवाल-जवाब 1. छतरपुर के किसान चेतराम कुशवाहा कब से गुलाब की खेती कर रहे हैं? चेतराम कुशवाहा पिछले 10 सालों से यानी साल 2015 से लगातार गुलाब की खेती कर रहे हैं। 2. गुलाब की खेती शुरू करने से पहले उन्होंने कहां से प्रशिक्षण लिया था? उन्होंने नौगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से गुलाब की खेती का तकनीकी प्रशिक्षण लिया था। 3. 1 बीघा खेत में गुलाब के कितने पौधे लगाए जा सकते हैं और कितना खर्च आता है? 1 बीघा खेत में लगभग 2500 पौधे लगाए जा सकते हैं, जिसमें 10 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से करीब 25000 रुपये का खर्च आता है। 4. खेत में रोपाई करते समय पौधों के बीच कितनी दूरी रखनी चाहिए? लाइन से लाइन की दूरी 4 फीट और पौधे से पौधे की दूरी डेढ़ फीट रखनी चाहिए। 5. रोपाई के कितने समय बाद फूल आना शुरू होते हैं और रोजाना कितनी पैदावार मिलती है? रोपाई के 1 महीने बाद फ्लावरिंग शुरू हो जाती है और 1 बीघा से रोजाना 10 से 20 किलोग्राम फूल मिलते हैं। 6. बाजार में गुलाब का थोक भाव कितना मिलता है और रोजाना कितनी कमाई होती है? शादी-त्योहारों में थोक भाव 150 से 300 रुपये और सामान्य दिनों में 50 से 80 रुपये प्रति किलो रहता है, जिससे रोजाना 1 से 2 हजार रुपये की कमाई होती है। प्रेरणा और सबक छतरपुर के किसान चेतराम कुशवाहा का यह सफर साबित करता है कि सही तकनीकी प्रशिक्षण और विविधीकरण से छोटे रकबे में भी स्थायी दैनिक आय बनाई जा सकती है। • वैज्ञानिक प्रशिक्षण की अहमियत: किसी भी नई फसल को शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी प्रशिक्षण लेना विफलता के जोखिम को घटाता है। चेतराम ने नौगांव केंद्र से तौर-तरीके सीखकर ही गुलाब की रोपाई की। • फसल विविधीकरण से आमदनी बढ़ाएं: केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय गेंदे के साथ गुलाब को जोड़ना दैनिक नकदी प्रवाह को सुनिश्चित करता है। एक ही खेत से रोजाना आय का मॉडल खड़ा किया जा सकता है। • सटीक कृषि गणित और धैर्य: पौधे से पौधे की दूरी डेढ़ फीट और लाइन से लाइन की दूरी 4 फीट का अनुशासन रखकर बेहतर पैदावार हासिल की जा सकती है। रोपाई के एक महीने बाद से ही फसल फल देने लगती है। https://trendkia.com/lifestyle/chhatarpur-ke-kisana-ne-samajhai-gulaba-ki-kheti-1-bigha-jamina-se-hara-dina-kama-rahe-1-se-2-hajara-rupaye-43350 TrendKia — Har trend, sabse pehle.