छत्ता हटाने के लिए धुआं करना बिगाड़ सकता है शहद का स्वाद और सेहत, जानें सुरक्षित वैज्ञानिक तरीका घरों के आसपास लगे मधुमक्खी के छत्तों को धुएं से हटाने पर कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें शहद को दूषित कर देती हैं। जहानाबाद के अनुभवी मधुमक्खी पालक ने बताया कि सुरक्षा किट पहनकर छत्ता अलग करना ही सबसे सुरक्षित और वैज्ञानिक विकल्प है। घरों की बालकनी, छतों या बगीचों में मधुमक्खियों का छत्ता लग जाना बेहद आम बात है, लेकिन उसे हटाने का पारंपरिक तरीका शहद और सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। बिहार के जहानाबाद जिले के नदियांवा गांव में रहने वाले संतोष कुमार पिछले 8 वर्षों से व्यावसायिक स्तर पर मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं। मात्र 10 बक्सों से अपनी यात्रा शुरू करने वाले संतोष के पास आज लगभग 400 पेटियां हैं, जिनसे होने वाले मुनाफे से उनके पूरे परिवार का भरण पोषण होता है। उनके अनुसार लोग छत्ता भगाने की जल्दबाजी में अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे शुद्ध शहद पूरी तरह विषैला और बेस्वाद हो जाता है। धुएं के इस्तेमाल से शहद में घुलता है जहर आमतौर पर जब भी किसी आवासीय परिसर में मधुमक्खियां डेरा डालती हैं, तो लोग आग जलाकर या पत्तियां सुलगाकर तेज धुआं करने लगते हैं। इस तरीके से मधुमक्खियां तो उड़ जाती हैं, परंतु शहद की गुणवत्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। संतोष कुमार स्पष्ट करते हैं कि लकड़ी, उपले या पत्तियों को जलाने से कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें भारी मात्रा में निकलती हैं। यह गाढ़ा धुआं सीधे तौर पर छत्ते में मौजूद खुले शहद के संपर्क में आता है और उसमें जज्ब हो जाता है। प्रदूषित धुएं के कण शहद के प्राकृतिक स्वाद, महक और पोषक तत्वों को नष्ट कर देते हैं। ऐसे दूषित शहद का सेवन मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक मानकों के तहत बक्सों से निकाला गया शहद बाजार में अधिक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण माना जाता है, क्योंकि उसमें रसायनों या धुएं का कोई अंश नहीं होता। वैज्ञानिक पद्धति से छत्ता अलग करने की सही प्रक्रिया यदि घर या कार्यस्थल के आसपास से छत्ता हटाना बेहद जरूरी हो, तो धुएं का सहारा लेने के बजाय वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए। इसके लिए पूरी तैयारी के साथ काम करना अनिवार्य है। • सुरक्षा किट का इस्तेमाल: छत्ते के नजदीक जाने से पहले विशेष सुरक्षा परिधान पहनना जरूरी है। ऐसा सुरक्षात्मक कैप इस्तेमाल करें जो गर्दन तक पूरी तरह ढका हो, साथ ही हाथों में मोटे ग्लव्स पहनें ताकि चेहरे, गले और हाथों पर डंक लगने की कोई गुंजाइश न रहे। • सावधानीपूर्वक छत्ता काटना: जब शरीर पूरी तरह सुरक्षित हो जाए, तब छत्ते के पास जाएं। किसी तेज व साफ औजार की मदद से छत्ते को उसके आधार से बेहद सहजता और सावधानी के साथ काटकर अलग करें। • मधुमक्खियों का स्वतः हटना: जैसे ही छत्ता अपनी मुख्य जगह से अलग होकर नीचे आता है, मधुमक्खियां बिना किसी उग्रता के खुद ब खुद उड़कर आसपास के वातावरण में बिखर जाती हैं। इस वैज्ञानिक तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि निकाला गया शहद अपनी मूल शुद्धता में बना रहता है। न तो उसके स्वाद में कोई कड़वाहट आती है और न ही उसकी पोषण क्षमता प्रभावित होती है। बिहार में राज्य सरकार भी मधुमक्खी पालकों को आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षण देकर इस उद्योग को लगातार बढ़ावा दे रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित शहद उत्पादन बढ़ सके। इसका आप पर असर घरेलू छत्तों से धुआं करके शहद निकालने की गलत आदत से जहरीली गैसें पेट में जा सकती हैं, जिसे वैज्ञानिक प्रक्रिया से रोका जा सकता है। • स्वास्थ्य पर असर: धुएं वाले छत्ते से निकला शहद खाने से कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीले तत्व शरीर में पहुंच सकते हैं। घरेलू छत्ते को हटाने के बाद उसका शहद सीधे खाने से हमेशा परहेज करें। • शहद की गुणवत्ता: धुएं के संपर्क में आने से प्राकृतिक शहद का मूल स्वाद और सुगंध पूरी तरह नष्ट हो जाती है। यदि घर पर छत्ता निकलवाना हो तो प्रशिक्षित व्यक्ति की मदद से वैज्ञानिक किट का ही उपयोग कराएं। • सुरक्षा उपाय: बिना पूरी सुरक्षा किट के छत्ते के पास जाना खतरनाक डंक का कारण बन सकता है। गर्दन तक ढके कैप और दस्तानों के बिना छत्ता छूने की गलती कभी न करें। • किसानों और पालकों के लिए: मधुमक्खी पालन स्वरोजगार का एक बड़ा और लाभदायक जरिया बनकर उभर रहा है। शुरुआत में 10 बक्सों जैसी छोटी संख्या से भी यह व्यवसाय सफलतापूर्वक शुरू किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ लोग अक्सर मधुमक्खियों के डंक के डर से उन्हें तुरंत भगाने के लिए धुआं कर देते हैं, जिससे अनजाने में शहद खराब हो जाता है। उचित सुरक्षा उपकरणों की जानकारी न होना ही इस पारंपरिक गलती की मुख्य वजह है। • डंक का डर: मधुमक्खियों के झुंड से कटने के खतरे के कारण आम लोग बिना सोचे-समझे पत्तियां या लकड़ी जलाकर धुआं पैदा करते हैं। इस तात्कालिक समाधान से कीड़े तो दूर हो जाते हैं परंतु उत्पाद बर्बाद हो जाता है। • जहरीली गैसों का उत्सर्जन: किसी भी चीज को सुलगाने पर कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड गैसें निकलती हैं। खुले शहद की अवशोषण क्षमता अधिक होने के कारण यह धुआं उसमें पूरी तरह समा जाता है। • वैज्ञानिक जानकारी का अभाव: अधिकांश लोगों को सुरक्षा किट और छत्ता अलग करने की सही तकनीकों की जानकारी नहीं होती। जानकारी के अभाव में लोग सदियों पुराने नुकसानदेह तरीकों पर ही निर्भर रहते हैं। सवाल-जवाब 1. मधुमक्खी का छत्ता भगाने के लिए धुआं करना क्यों गलत है? धुएं से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें शहद में समा जाती हैं, जिससे उसका स्वाद और शुद्धता खराब हो जाती है। 2. संतोष कुमार ने मधुमक्खी पालन की शुरुआत कितने बक्सों से की थी? उन्होंने अपने इस काम की शुरुआत मात्र 10 बक्सों से की थी, जो 8 साल की मेहनत के बाद आज करीब 400 पेटियों तक पहुंच चुका है। 3. छत्ता हटाते समय कौन से सुरक्षा उपकरण पहनना जरूरी है? गर्दन तक ढका हुआ सुरक्षा कैप और हाथों में मजबूत ग्लव्स पहनना अनिवार्य है ताकि चेहरे और हाथों पर डंक न लगे। 4. सुरक्षित तरीके से छत्ता अलग करने पर मधुमक्खियां क्या करती हैं? छत्ते को सावधानी से अलग करते ही मधुमक्खियां बिना किसी नुकसान के खुद उड़कर इधर-उधर फैल जाती हैं। 5. बिहार सरकार इस क्षेत्र में क्या भूमिका निभा रही है? बिहार सरकार मधुमक्खी पालकों की मदद के लिए लगातार आगे आ रही है और इस कार्य को बढ़ावा दे रही है। प्रेरणा और सबक संतोष कुमार की मेहनत यह साबित करती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया परंपरागत काम भी लगन और सही तकनीक से बड़ा व्यवसाय बन सकता है। • छोटी शुरुआत का महत्व: संतोष कुमार ने सिर्फ 10 बक्सों से मधुमक्खी पालन का सफर शुरू किया था। सीमित पूंजी और छोटे पैमाने से भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है। • लगातार बने रहने का फल: पिछले 8 वर्षों के निरंतर परिश्रम से उन्होंने 400 पेटियों का विशाल नेटवर्क तैयार किया। धैर्य और नियमित प्रयास किसी भी काम को मुख्य आजीविका बना देते हैं। • वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना: पारंपरिक गलतियों को छोड़कर सुरक्षा और तकनीक पर ध्यान देने से ही शुद्ध उत्पाद मिलता है। आधुनिक नियमों को समझकर काम करने से ही उत्पाद की वास्तविक पहचान और कीमत बनती है। https://trendkia.com/lifestyle/chhatta-hatane-ke-lie-dhuan-karana-bigara-sakata-hai-shahada-ka-svada-aura-sehata-janen-surakshita-vaijnanika-tarika-34257 TrendKia — Har trend, sabse pehle.