# छोटे गमलों में हरी मटर उगाने का आसान तरीका, दो महीने में तैयार हो जाएंगी ताज़ा फलियां

> सर्दियों के दिनों में बालकनी या छत पर रखे 10 से 12 इंच गहरे गमलों में मटर के पौधे आसानी से लगाए जा सकते हैं, जिनकी फलियां 50 से 60 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/chhote-gamalon-men-hari-matara-ugane-ka-asana-tarika-do-mahine-men-taiyara-ho-jaengi-taza-phaliyan-36215 · **Language:** Hindi
**Tags:** मटर की खेती, गमले में मटर, किचन गार्डनिंग, बालकनी गार्डनिंग, सब्जी उगाने का तरीका, जैविक खाद, होम गार्डनिंग

सर्दियों का मौसम शुरू होते ही रसोई में ताज़ी हरी मटर का इस्तेमाल काफी बढ़ जाता है। बाज़ार से महंगी मटर खरीदने के बजाय इसे घर की बालकनी या छत पर गमलों में भी सरलता से उगाया जा सकता है। इसके लिए किसी बड़े खेत या विस्तृत बगीचे की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यदि सही किस्म के बीजों का चयन किया जाए और पौधों को संतुलित खाद, भुरभुरी मिट्टी, पर्याप्त धूप तथा नियमित पानी मिले, तो लगभग 50 से 60 दिनों के भीतर ताज़ी फलियां तोड़ी जा सकती हैं। हालांकि यह समय अवधि चुनी गई किस्म, स्थानीय मौसम के प्रभाव और पौधों की देखरेख के तौर-तरीकों पर भी निर्भर करती है।

## सही गमले और जल निकासी का चुनाव
कंटेनर गार्डनिंग में मटर उगाने के लिए सबसे पहले उपयुक्त आकार के गमले का चुनाव करना बेहद आवश्यक होता है। मटर की जड़ों और उसकी लताओं के विस्तार को देखते हुए कम से कम 10 से 12 इंच गहरा गमला चुनना चाहिए। गमला इतना चौड़ा और गहरा होना चाहिए कि उसमें पौधों की जड़ें बिना रुकावट फैल सकें। इसके साथ ही गमले की तली में पानी की निकासी के लिए उचित छेद होना अनिवार्य है, ताकि सिंचाई के बाद अतिरिक्त पानी नीचे से आसानी से बाहर निकल सके। गमले में ठहरा हुआ पानी जड़ों को सड़ा सकता है, इसलिए ड्रेनेज व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

## मिट्टी और जैविक खाद का संतुलन
मटर की बेलों के बेहतर विकास के लिए भुरभुरी और हवादार मिट्टी सबसे अधिक फायदेमंद मानी जाती है। सामान्य बगीचे की मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद या गोबर की खाद मिलाई जा सकती है। इसके अलावा जल निकासी को सुगम बनाने और मिट्टी को हल्का रखने के लिए उसमें थोड़ी मात्रा में रेत अथवा कोकोपीट मिलाना उत्तम रहता है। इस तरह के मिश्रण से मिट्टी में नमी तो टिकती है, लेकिन पानी जमा नहीं होता। साथ ही हवा का प्रवाह जड़ों तक सुचारू रूप से बना रहता है, जिससे पौधा स्वस्थ रहता है।

## बीज बोने की सही गहराई और सिंचाई
घर पर अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए बाज़ार से प्रमाणित और उत्तम गुणवत्ता वाले मटर के बीज ही खरीदने चाहिए। बीजों को गमले की तैयार मिट्टी में लगभग 1 से 2 इंच की गहराई में दबाएं। जब एक ही गमले में कई पौधे उगाने हों, तो बीजों के बीच पर्याप्त फासला छोड़ना ज़रूरी है ताकि पौधों को बढ़ने के लिए खुली जगह मिल सके। बुवाई पूरी होने के तुरंत बाद हल्का पानी छिड़कें। मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन इस बात का ख्याल रखें कि गमले में अत्यधिक पानी न भरा जाए।

## धूप की जरूरत और पानी देने का नियम
मटर के पौधों की सक्रिय वृद्धि के लिए सीधी धूप की बहुत बड़ी भूमिका होती है। गमले को बालकनी या छत के ऐसे हिस्से में रखें जहां रोज़ाना कम से कम 5 से 6 घंटे की प्राकृतिक धूप आती हो। धूप की कमी से पौधे कमज़ोर पड़ सकते हैं और उन पर फलियां कम लगती हैं। पानी देने के मामले में मौसम और मिट्टी की स्थिति को समझना ज़रूरी है। बार-बार पानी देने के बजाय नियम यह रखें कि जब गमले की ऊपरी सतह सूखी दिखाई दे, तभी दोबारा पानी दें। लगातार गीली रहने वाली मिट्टी में फंगस पनपने और जड़ों के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

## लताओं को सहारा देना और सही समय पर तुड़ाई
जैसे-जैसे मटर का पौधा बड़ा होता है, उसमें से पतली लताएं निकलना शुरू हो जाती हैं। इन लताओं को जमीन पर गिरने से बचाने के लिए शुरुआत में ही गमले के भीतर लकड़ी की खपच्चियां, कोई जाली या मजबूत डंडा लगा देना चाहिए। लताओं को धीरे-धीरे इस सहारे की ओर मोड़ें, जिससे पौधे को ऊपर की ओर फैलने का अवसर मिले। सहारे पर चढ़ने से फलियां ज़मीन या गीली मिट्टी को नहीं छूतीं और कीटों से सुरक्षित रहकर पूरी तरह विकसित होती हैं। पौधों में फूल आने के कुछ समय बाद फलियां बनने लगती हैं। जब फलियां हरी, गोल और पूरी तरह से भरी हुई नज़र आने लगें, तब उन्हें तोड़ा जा सकता है। सही समय पर फलियों की तुड़ाई करने से पौधे में नई फलियां आने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

## इसका आप पर असर
घर पर मटर उगाने से ताज़ी और बिना रसायनों वाली सब्जियां प्राप्त करने के साथ-साथ बाज़ार के खर्चों में भी बचत होती है।

- **ताज़ी उपज:** घर की बालकनी में पौधे लगाने से सर्दियों के दौरान बिना रासायनिक छिड़काव वाली हरी फलियां मिलती हैं। इससे भोजन का स्वाद और पौष्टिकता दोनों बेहतर होते हैं।
- **सीमित जगह का उपयोग:** केवल 10 से 12 इंच गहरे गमलों का इस्तेमाल करके छोटी बालकनी में भी पौधे उगाए जा सकते हैं। बड़े बगीचे या खेत की गैर-मौजूदगी में भी यह तरीका पूरी तरह कारगर रहता है।
- **घरेलू खर्च में बचत:** मौसम में मटर के ऊंचे दामों के बीच घर पर उगाई गई फसल से बाज़ार पर निर्भरता घटती है। शुरुआती बीज और खाद के छोटे निवेश से लगातार कई हफ्तों तक ताज़ी फलियां मिलती हैं।
- **शुरुआती माली के लिए आसान:** 50 से 60 दिनों की छोटी फसल होने के कारण इसे संभालना बेहद आसान है। बस धूप और उचित जल निकासी का ध्यान रखकर कोई भी इसे सफलता से उगा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
मटर की सफल इनडोर या बालकनी खेती गमले के आकार, धूप, हवादार मिट्टी और लताओं को दिए जाने वाले सहारे के सही तालमेल पर निर्भर करती है।

- **जड़ विकास और ड्रेनेज:** उथले बर्तनों में जड़ें बंध जाती हैं और पानी जमा होने से सड़न पैदा होती है। कम से कम 10 से 12 इंच गहराई और जल निकासी छेद होने से जड़ों को फैलने और सांस लेने का स्थान मिलता है।
- **धूप और प्रकाश संश्लेषण:** फलियां बनने के लिए पौधे को पर्याप्त ऊर्जा की दरकार होती है। रोज़ाना 5 से 6 घंटे की धूप मिलने से पौधे कमज़ोर नहीं पड़ते और उनमें भरपूर फूल व फलियां आती हैं।
- **लताओं का सहारा:** मटर एक बेलदार पौधा है जो ज़मीन पर फैलने पर फंगस और सड़न का शिकार हो सकता है। लकड़ी की खपच्चियों या जाली के सहारे ऊपर चढ़ने से फलियां हवा में सुरक्षित रहती हैं।
- **नियमित तुड़ाई का प्रभाव:** पौधे पर पूरी तैयार फलियों को लंबे समय तक छोड़ने से नई कलियों का विकास रुक जाता है। समय पर तुड़ाई करने से पौधा नई फलियां बनाने के लिए लगातार प्रेरित होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. गमले में मटर की फसल कितने दिनों में तैयार होती है?
बीज बोने के बाद उचित देखरेख मिलने पर लगभग 50 से 60 दिनों में मटर की फलियां तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं।

### 2. मटर उगाने के लिए गमला कितना गहरा होना चाहिए?
मटर के पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए गमला कम से कम 10 से 12 इंच गहरा होना चाहिए और उसमें पानी निकासी के छेद होने चाहिए।

### 3. गमले के लिए मिट्टी का मिश्रण कैसे तैयार करें?
सामान्य बगीचे की मिट्टी में सड़ी हुई जैविक खाद और थोड़ी मात्रा में रेत या कोकोपीट मिलाकर भुरभुरी मिट्टी तैयार की जा सकती है।

### 4. मटर के बीज कितनी गहराई में बोने चाहिए?
बीजों को तैयार मिट्टी में लगभग 1 से 2 इंच की गहराई में बोना चाहिए और पौधों के लिए पर्याप्त दूरी रखनी चाहिए।

### 5. मटर के पौधे को रोज़ाना कितने घंटे धूप की जरूरत होती है?
पौधों के समुचित विकास और अच्छी पैदावार के लिए उन्हें रोज़ाना लगभग 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए।

### 6. मटर की लताओं को सहारा देना क्यों जरूरी है?
सहारा देने से लताएं ऊपर चढ़ती हैं, जिससे पौधे को फैलने की जगह मिलती है और फलियां जमीन को छुए बिना साफ-सुथरी विकसित होती हैं।

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