# कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर के पास पेड़ तले बैठते हैं पंडित विशंभर दयाल शर्मा, सालाना कमाई 8 से 10 लाख रुपये

> दिल्ली में प्राचीन हनुमान मंदिर के नजदीक एक पेड़ के नीचे साधारण अंदाज में बैठकर कुंडली देखने वाले 75 वर्षीय ज्योतिषी पंडित विशंभर दयाल शर्मा साल भर में 8 से 10 लाख रुपये कमा लेते हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/connaught-place-ke-hanuman-temple-ke-pasa-pera-tale-baithate-hain-pandit-vishambhar-dayal-sharma-salana-kamai-8-se-10-lakha-rupaye-47865 · **Language:** Hindi
**Tags:** पंडित विशंभर दयाल शर्मा, कनॉट प्लेस, हनुमान मंदिर, ज्योतिष, हल्दी गांठ पूजा, कुंडली परामर्श, दिल्ली समाचार

देश की राजधानी दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस के प्राचीन हनुमान मंदिर के बाहर एक पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग ज्योतिषी अपनी साधारण सी व्यवस्था के साथ बैठते हैं। पहली नजर में उन्हें देखकर किसी को भी ऐसा लग सकता है कि दिन भर में वे शायद 100 रुपये भी मुश्किल से जुटा पाते होंगे, मगर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बेहद सादे लिबास और पारंपरिक अंदाज में दिखने वाले यह ज्योतिषी सालाना 8 से 10 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं। इतनी आमदनी आमतौर पर किसी बड़ी कंपनी में ऊंचे पद पर कार्यरत कॉरपोरेट अधिकारी या पेशेवर इंजीनियर को मिलती है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी इसी कमाई के बूते दिल्ली के एक बेहद पॉश रिहायशी इलाके में अपना निजी मकान भी बना रखा है।

## राजस्थान से दिल्ली तक का सफर और पांच दशकों की साधना
इस ज्योतिषी का नाम पंडित विशंभर दयाल शर्मा है, जिनकी वर्तमान आयु 75 वर्ष हो चुकी है। वे मूल रूप से राजस्थान के निवासी हैं और उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा राजस्थान में ही पूरी की, जहां उन्होंने संस्कृत और हिंदी साहित्य की विधिवत पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ज्योतिष विद्या का गहरा अध्ययन किया और इस पारंपरिक ज्ञान में महारत हासिल की। पंडित विशंभर दयाल शर्मा पिछले 50 वर्षों से लगातार दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के निकट अपनी छोटी सी जगह में बैठकर लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आधी सदी के इस लंबे अरसे में उन्होंने अनगिनत लोगों की तकदीर और उनके जीवन के उतार-चढ़ाव को देखा और समझा है।

## हाथ की रेखाएं, जन्म कुंडली और जीवन की उलझनें
पंडित विशंभर दयाल शर्मा का मुख्य कार्य लोगों की जन्म कुंडली का बारीकी से अध्ययन करना और उनके हाथों की लकीरें देखकर भूत, भविष्य और वर्तमान की परिस्थितियों की जानकारी देना है। उनके पास आने वाले लोग जीवन के अलग-अलग मोर्चों पर समस्याओं से घिरे होते हैं। कई बार ऐसे दंपति पहुंचते हैं जिनके बीच अलगाव या तलाक की नौबत आ चुकी होती है, लेकिन वे रिश्ते को बचाना चाहते हैं। ऐसे मामलों में वे विशेष उपाय बताकर टूटने की कगार पर पहुंचे विवाह को बचाने की कोशिश करते हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी आते हैं जो लंबे समय से कानूनी या पारिवारिक उलझनों के कारण तलाक चाहते हैं लेकिन मामला अटक जाता है, तो वे भी समाधान के लिए इनसे संपर्क करते हैं।

## विवाह संस्कार से लेकर यूपीएससी और करियर से जुड़ी समस्याएं
पंडित विशंभर दयाल शर्मा केवल भविष्य बताने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह संस्कार भी संपन्न कराते हैं, जहां से उन्हें यजमानों से अच्छी दक्षिणा प्राप्त होती है। शादीशुदा जीवन में रोजमर्रा के झगड़ों और कलह से परेशान लोग भी उनके पास शांति और समाधान की तलाश में पहुंचते हैं। इसके अलावा युवा पीढ़ी भी बड़ी संख्या में इनके पास परामर्श लेने आती है। देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा परीक्षा यानी यूपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी, जिनका चयन नहीं हो पा रहा होता, वे भी सफलता के ज्योतिषीय उपाय पूछने आते हैं। साथ ही नौकरीपेशा लोग, जो अपने करियर या काम के माहौल से नाखुश हैं और पदोन्नति की संभावना तलाश रहे हैं, वे अपनी तरक्की के रास्ते खोलने के उपाय जानने के लिए इनके पास बैठते हैं।

## हल्दी गांठ की विशेष पूजा क्यों है सबसे ज्यादा मशहूर
पंडित विशंभर दयाल शर्मा के पास समस्याओं के निवारण के लिए एक विशेष अनुष्ठान है, जिसे हल्दी गांठ की पूजा कहा जाता है। यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं और भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। पंडित शर्मा के अनुसार यह पूजा उन युवक-युवतियों के लिए विशेष रूप से करवाई जाती है जिनके विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हों या रिश्ते तय न हो पा रहे हों। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को अपने गुप्त या प्रत्यक्ष शत्रुओं से लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा हो, तो शत्रु बाधा से मुक्ति पाने के लिए भी यह अनुष्ठान किया जाता है। यदि पति-पत्नी के रिश्ते में तलाक की नौबत आ गई हो और दोनों आपसी रजामंदी से दोबारा प्रेमपूर्वक साथ रहना चाहते हों, तो उनके बीच आपसी प्रेम संबंधों को मजबूत करने के लिए भी हल्दी गांठ की यह पूजा करवाई जाती है।

## महज 200 रुपये की फीस और 10 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी
आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पंडित विशंभर दयाल शर्मा का शुल्क मॉडल बेहद सामान्य है। वे किसी भी व्यक्ति से परामर्श देने और कुंडली देखने के लिए सिर्फ 200 रुपये की अपॉइंटमेंट फीस लेते हैं। कोई भी सामान्य नागरिक केवल 200 रुपये देकर उनसे मिलकर अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकता है। हालांकि, पूरे साल भर नियमित परामर्श, कुंडली विश्लेषण और विवाह संस्कार आदि कराने से मिलने वाली दक्षिणा को मिलाकर उनकी कुल वार्षिक कमाई 8 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। आज के दौर में जहां कई उच्च शिक्षित अफसर या निजी कंपनियों के इंजीनियर भी इस स्तर का पैकेज पाने के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं एक साधारण पेड़ के नीचे बैठकर पंडित शर्मा अपनी पारंपरिक विद्या के दम पर यह मुकाम हासिल किए हुए हैं।

## इसका आप पर असर
यह समाचार दर्शाता है कि पारंपरिक विद्या और सुलभ परामर्श शुल्क के जरिए भी एक व्यक्ति संगठित क्षेत्र के वेतन के बराबर स्वतंत्र आजीविका जुटा सकता है।

- **भारत में:** यह कहानी स्पष्ट करती है कि कम पूंजी और कौशल आधारित पारंपरिक व्यवसायों में लगातार अभ्यास से मजबूत कमाई संभव है। किसी भी सेवा में अत्यधिक शुल्क रखने के बजाय किफायती दर पर अधिक लोगों तक पहुंच बनाना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
- **दिल्ली में:** कनॉट प्लेस के प्राचीन हनुमान मंदिर के निकट आम नागरिक मात्र 200 रुपये देकर कुंडली और व्यक्तिगत समस्याओं पर सलाह ले सकते हैं। शहर के महंगे निजी सलाहकारों की तुलना में यह एक बेहद सुलभ और किफायती स्थानीय विकल्प साबित होता है।
- **करियर साधकों के लिए:** यह मामला दिखाता है कि डिग्री के अलावा विशेष ज्ञान और निरंतरता भी दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकती है। युवा पेशेवर औपचारिक कॉरपोरेट नौकरियों के अलावा वैकल्पिक और पारंपरिक विधाओं के आर्थिक मॉडल को समझ सकते हैं।
- **वैवाहिक सलाह के लिए:** पारिवारिक और व्यक्तिगत संकटों के समय लोग कानूनी प्रक्रियाओं के साथ-साथ पारंपरिक परामर्श का भी रुख करते हैं। ऐसे समाधान खोजने वाले लोग किसी भी कदम को उठाने से पहले संतुलित दृष्टिकोण अपना सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति पंडित विशंभर दयाल शर्मा के पांच दशकों के अनुभव, मंदिर के निकट की प्रमुख भौगोलिक स्थिति और बेहद किफायती परामर्श शुल्क के संयोजन के कारण बनी है।

- **भौगोलिक स्थिति का लाभ:** प्राचीन हनुमान मंदिर कनॉट प्लेस का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के बाहर पेड़ के नीचे बैठने से उन्हें बिना किसी भारी प्रचार के लगातार स्वाभाविक ग्राहक मिलते रहते हैं।
- **किफायती शुल्क और पहुंच:** मात्र 200 रुपये की परामर्श फीस के चलते हर वर्ग का व्यक्ति बिना आर्थिक बोझ महसूस किए उनसे मिलने पहुंच जाता है। कम फीस के कारण ग्राहकों की संख्या निरंतर अधिक बनी रहती है, जिससे कुल आय बढ़ जाती है।
- **विशेष अनुष्ठान और पारंपरिक प्रतिष्ठा:** हल्दी गांठ की पूजा जैसी प्रसिद्ध निवारक विधियों और विवाह संस्कार संपन्न कराने से उन्हें अतिरिक्त दक्षिणा और प्रतिष्ठा मिलती है। पिछले 50 वर्षों से एक ही स्थान पर बैठने से ग्राहकों का अटूट भरोसा बन चुका है।

## सवाल-जवाब

### 1. पंडित विशंभर दयाल शर्मा कहां बैठते हैं?
वे दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के निकट एक पेड़ के नीचे अपनी दुकान में बैठते हैं।

### 2. पंडित विशंभर दयाल शर्मा की उम्र कितनी है और वे मूल रूप से कहां के हैं?
उनकी उम्र 75 वर्ष है और वे मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं।

### 3. पंडित शर्मा ज्योतिष की परामर्श फीस कितनी लेते हैं?
वे प्रत्येक परामर्श या अपॉइंटमेंट के लिए 200 रुपये की फीस लेते हैं।

### 4. पंडित विशंभर दयाल शर्मा की सालाना कमाई कितनी है?
परामर्श और विवाह संस्कार आदि मिलाकर उनकी सालाना आमदनी 8 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक हो जाती है।

### 5. हल्दी गांठ की पूजा किन समस्याओं के लिए करवाई जाती है?
यह पूजा विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने, शत्रुओं की बाधा समाप्त करने और तलाक की कगार पर पहुंचे दंपतियों के प्रेम संबंधों को सुधारने के लिए की जाती है।

### 6. पंडित शर्मा कितने समय से दिल्ली में यह काम कर रहे हैं?
वे पिछले 50 वर्षों से लगातार दिल्ली के प्राचीन हनुमान मंदिर के पास बैठकर ज्योतिष का काम कर रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
पंडित विशंभर दयाल शर्मा का जीवन यह सीख देता है कि सादगी, अपने काम में महारत और निरंतरता किसी भी व्यक्ति को समाज में आर्थिक स्वतंत्रता और सम्मान दिला सकती है।

- **काम के प्रति निष्ठा:** पिछले 50 वर्षों से एक ही स्थान पर नियमित रूप से बैठकर काम करना यह साबित करता है कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता। निरंतर प्रयास और धैर्य ही किसी भी व्यवसाय या पेशे में दीर्घकालिक विश्वसनीयता का निर्माण करते हैं।
- **सादगी और दिखावे से दूरी:** सालाना 8 से 10 लाख रुपये कमाने और दिल्ली में अपना मकान होने के बावजूद वे अत्यंत साधारण तरीके से रहते हैं। दिखावे पर व्यर्थ खर्च करने के बजाय अपनी वास्तविक क्षमता और बुनियादी काम पर ध्यान देना ही सच्ची प्रगति है।
- **सुलभता बनाए रखना:** अपनी सेवाएं इतनी किफायती रखना कि समाज का कोई भी व्यक्ति उनसे वंचित न रहे, लोकप्रियता का मूल मंत्र है। कम शुल्क रखकर अधिक से अधिक लोगों की सहायता करने से सम्मान और आजीविका दोनों स्वतः हासिल होते हैं।

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