# घर से लगातार काम करने से उक्ताई युवती, दो हफ्ते के वर्क फ्रॉम होम पर बोली यह बड़ी बात

> इंस्टाग्राम पर अपने अनुभव साझा करते हुए मोहिनी चव्हाण ने लगातार दो हफ्ते घर से काम करने के बाद आने वाली मानसिक थकान और एक जैसी दिनचर्या के बारे में बताया।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/corporate-employee-shares-mental-fatigue-after-two-weeks-of-continuous-work-from-home-28441 · **Language:** Hindi
**Tags:** वर्क फ्रॉम होम, हाइब्रिड वर्क, ऑफिस लाइफ, मेंटल हेल्थ, कॉर्पोरेट कल्चर, करियर

महामारी के दौर के बाद से ही घर से काम करने यानी वर्क फ्रॉम होम का कल्चर कॉर्पोरेट जगत का अहम हिस्सा बन चुका है। इस व्यवस्था का नाम आते ही जेहन में अक्सर ट्रैफिक की झंझट से मुक्ति, आराम और घर के सुकून भरे माहौल की तस्वीर उभरती है। हालांकि, क्या हमेशा घर की चारदीवारी के भीतर बैठकर काम करना उतना ही आरामदायक होता है, जितना दूर से देखने में महसूस होता है? इस सवाल को एक बार फिर सोशल मीडिया पर छिपी बहस के जरिए बल मिला है, जब इंस्टाग्राम पर मोहिनी चव्हाण ने अपने लगातार दो हफ्ते के घर से काम करने के अनुभव को खुलकर साझा किया।

मोहिनी जिस संस्था में कार्यरत हैं, वहां अमूमन हाइब्रिड कार्यप्रणाली अपनाई जाती है। इस मॉडल के तहत कर्मचारियों को कुछ निर्धारित दिन कार्यालय जाकर और शेष दिन अपने आवास से कार्य करने की छूट मिलती है। इसके साथ ही, कंपनी की ओर से साल में कुल दो सप्ताह ऐसे दिए जाते हैं जब कर्मचारी पूर्ण रूप से घर से ही अपने दायित्व निभा सकते हैं। मोहिनी ने भी इसी प्रावधान का लाभ उठाया और अपने अनुभव के आधार पर बताया कि इन चौदह दिनों ने उन्हें हाइब्रिड कार्यशैली का असली महत्व समझा दिया, जो अब उन्हें पहले से कहीं अधिक बेहतर लगने लगी है।

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उन्होंने उन सभी लोगों के प्रति अपनी सराहना व्यक्त की जो लंबे समय से स्थायी तौर पर घर से ही अपने सभी कार्य संभाल रहे हैं। मोहिनी के अनुसार, केवल दो सप्ताह तक लगातार घर से काम करने के बाद ही उनका मानसिक स्वास्थ्य थकान का शिकार होने लगा था। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जो पेशेवर अपने कार्यस्थल से दूर अन्य शहरों में रहते हैं, वे अमूमन इस दो हफ्ते की अवधि का उपयोग अपने पैतृक गृह नगर जाने के लिए करते हैं। अपने घर पहुंचने की खुशी तो अपार होती है, परंतु इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि जिम्मेदारियों या काम के दबाव में कोई कमी आती है। चाहे व्यक्ति कार्यालय में हो या अपने घर पर, कार्यभार लगभग एक समान ही बना रहता है।

उनके लिए इस पूरी अवधि में सबसे कष्टदायक पहलू एक ही प्रकार की नीरस दिनचर्या का बन जाना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन चौदह दिनों के दौरान उन्हें ऐसा आभास होने लगा मानो वह अपने कमरे से बाहर कदम ही नहीं रख पाई हैं। सुबह उठना, लैपटॉप खोलकर बैठना, भोजन करना और ठीक अगले दिन फिर से उसी चक्रव्यूह में लौट जाना, यह सिलसिला बिना किसी विराम के चलता रहा। यहां तक कि सप्ताहांत यानी वीकेंड भी इस एकरसता को तोड़ने में नाकामयाब रहा। मोहिनी ने बताया कि पूरे सप्ताहांत के दौरान वह केवल एक ही दिन घर से बाहर जा सकीं, जबकि बाकी का समय लगभग उसी पुरानी शैली में बीत गया। उनके विचार में, जब प्रत्येक दिन बिल्कुल एक जैसे परिवेश और एक ही स्थान पर व्यतीत होता है, तो व्यक्ति का मस्तिष्क अंदर से थकने लगता है।

इन तमाम अनुभवों के चलते ही मोहिनी को हाइब्रिड मॉडल अधिक रास आता है। उनका मानना है कि कार्यालय जाने से केवल कार्यस्थल का माहौल ही नहीं बदलता, बल्कि अन्य सहकर्मियों से आमने-सामने मिलने, विचार-विमर्श करने और नए अनुभव प्राप्त करने का अनमोल अवसर भी मिलता है। हाइब्रिड व्यवस्था के अंतर्गत सप्ताह में दो दिन कार्यालय पहुंचकर साथियों के साथ वक्त बिताना, एक साथ बैठकर भोजन करना और आपस में बातचीत करना उन्हें अधिक संतुष्टि देता है। इसके अतिरिक्त, घर से कार्यालय आने-जाने के क्रम में होने वाला थोड़ा-बहुत सफर भी रोजमर्रा की नीरस जिंदगी में एक आवश्यक बदलाव और गतिशीलता बनाए रखता है।

मोहिनी का यह साझा किया गया अनुभव इस गंभीर विषय पर सोचने को विवश करता है कि क्या लंबी अवधि के लिए घर से काम करना वाकई हर किसी के लिए एक उपयुक्त विकल्प है। कुछ कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था पूर्ण स्वतंत्रता और सुविधा का पर्याय हो सकती है, वहीं अन्य लोगों के लिए हमेशा एक जैसे माहौल में कैद रहना मानसिक रूप से अत्यधिक थकाने वाला साबित हो सकता है। फिलहाल, मोहिनी अपनी नियमित हाइब्रिड कार्यशैली में वापस लौटने के लिए पूरी तरह उत्सुक नजर आ रही हैं। उन्होंने एक बार फिर उन लोगों की सहनशक्ति को सलाम किया जो बिना किसी अंतराल के स्थायी रूप से घर से ही अपने दायित्व निभा रहे हैं, और यह हैरानी जताई कि वे इस प्रकार की जीवनशैली को किस तरह आसानी से संभाल लेते हैं।

## इसका आप पर असर
घर से लगातार काम करने के दौरान होने वाली मानसिक थकान और एक जैसी दिनचर्या का असर सीधे तौर पर पेशेवर कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और उत्पादकता पर पड़ता है।

- **भारत में:** देश भर के उन लाखों कर्मचारियों पर इसका असर पड़ता है जो आईटी, कॉर्पोरेट या अन्य क्षेत्रों में हाइब्रिड या रिमोट मॉडल के तहत काम करते हैं। उन्हें अपने दैनिक जीवन में मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए पर्सनल और प्रोफेशनल समय को अलग करने की जरूरत होती है।
- **दैनिक दिनचर्या में:** लगातार एक ही माहौल में रहने से काम और आराम के बीच की सीमाएं धुंधली हो जाती हैं, जिससे थकान और बोरियत बढ़ती है। कर्मचारियों को इससे बचने के लिए बीच-बीच में ब्रेक लेने और सामाजिक मेलजोल बढ़ाने की सलाह दी जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. मोहिनी चव्हाण ने अपने वर्क फ्रॉम होम का अनुभव कहां साझा किया?
मोहिनी चव्हाण ने अपने दो हफ्ते के वर्क फ्रॉम होम का अनुभव इंस्टाग्राम पर साझा किया।

### 2. मोहिनी की कंपनी आमतौर पर किस कार्य मॉडल पर चलती है?
मोहिनी की कंपनी आमतौर पर हाइब्रिड वर्किंग मॉडल पर काम करती है।

### 3. कंपनी कर्मचारियों को साल में कितने हफ्ते पूरी तरह घर से काम करने की छूट देती है?
कंपनी साल में दो हफ्तों तक कर्मचारियों को पूरी तरह घर से काम करने की सुविधा देती है।

### 4. लगातार दो हफ्ते घर से काम करने के बाद मोहिनी को क्या महसूस हुआ?
दो हफ्ते घर से काम करने के बाद मोहिनी का दिमाग पूरी तरह थका हुआ महसूस करने लगा।

### 5. मोहिनी को हाइब्रिड मॉडल क्यों पसंद है?
मोहिनी को हाइब्रिड मॉडल पसंद है क्योंकि ऑफिस जाने से माहौल बदलता है और सहकर्मियों से मिलने-जुलने का मौका मिलता है।

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