दबे और फटे पुराने गद्दे को फेंकने के बजाय ऐसे कराएं रीसाइकिल, 200 से 300 रुपये में लौटेगा नया जैसा आराम जौनपुर के कटघरा में गद्दे कारीगर सद्दाम ने बताया कि पुराने गद्दे को फेंकने की जरूरत नहीं है, मात्र 50 रुपये प्रति किलो में पुरानी रूई की धुनाई, भराई और तगाई करवाकर उसे आधे से भी कम खर्च में बिल्कुल नया बनाया जा सकता है। घरों में लगातार इस्तेमाल के बाद गद्दे अक्सर दब जाते हैं, रूई बैठ जाती है या फिर उनका बाहरी खोल फट जाता है। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग पुराने गद्दे को अनुपयोगी मानकर बाहर फेंक देते हैं और बाजार से महंगा नया गद्दा खरीद लाते हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित कटघरा के गद्दा कारीगर सद्दाम का कहना है कि पुराने गद्दों को हटाने के बजाय उनकी मरम्मत करवाकर उन्हें बिल्कुल पहले जैसा बनाया जा सकता है। सद्दाम के अनुसार, मात्र दो सौ से तीन सौ रुपये के साधारण खर्च में कोई भी पुराना गद्दा पूरी तरह सुधरकर दोबारा इस्तेमाल के लायक हो जाता है। घर पर या मशीन से रूई की रीसाइक्लिंग का आसान तरीका अगर कोई व्यक्ति अपने स्तर पर प्रयास करना चाहता है, तो गद्दे का खोल खोलकर उसकी पूरी रूई बाहर निकाली जा सकती है। घर पर ही रूई के रेशों को हाथों से अलग-अलग सुलझाकर गद्दे में दोबारा भरा जा सकता है, जिससे उसमें फूलापन लौट आता है। वहीं पेशेवर तरीके से मशीन में धुनाई कराने पर यह प्रक्रिया बेहद तेज और असरदार साबित होती है। मशीन में पुरानी रूई को धुनने में महज 15 से 20 मिनट का समय लगता है, जिसके बाद दबी हुई पुरानी रूई एकदम ताजी और नई जैसी हल्की व फूली हुई बन जाती है। ऐसे में नई रूई खरीदने पर बेवजह ज्यादा पैसा खर्च करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। कारीगर का अनुभव और काम की तय दरें कटघरा इलाके में गद्दा बनाने का काम कर रहे कारीगर सद्दाम इस पेशे में पिछले 12-13 साल से सक्रिय हैं। वे बताते हैं कि यदि किसी पुराने गद्दे का खोल फट चुका हो या रूई कठोर होकर बैठ गई हो, तो उसकी पूरी मरम्मत संभव है। उनका काम वजन यानी किलोग्राम के हिसाब से तय होता है। कारीगर 50 रुपये प्रति किलो की तय दर पर काम करते हैं, जिसमें पुरानी रूई की मशीन से धुनाई, खोल के भीतर व्यवस्थित भराई और मजबूत धागों से तगाई की पूरी प्रक्रिया शामिल रहती है। इसके अलावा, यदि ग्राहक के घर में गद्दा खराब पड़ा है, तो कारीगर उसे खुद ग्राहक के घर से अपनी दुकान तक लाते हैं और पूरी तरह तैयार करने के बाद वापस घर तक पहुंचा देते हैं। वजन के विकल्प और नए गद्दे के मुकाबले भारी बचत गद्दों का निर्माण अमूमन 6 किलो वजन से शुरू होता है। कारीगरों ने ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक 30 किलो, 40 किलो और 50 किलो तक के भारी डबल बेड गद्दे भी तैयार किए हैं। मरम्मत की कुल लागत गद्दे के कुल वजन पर निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर, 8 किलो के गद्दे को दुरुस्त कराने में केवल 400 रुपये का कुल खर्च आता है। इसके विपरीत, यदि बाजार से बिल्कुल नया गद्दा खरीदा जाए, तो उसकी शुरुआती कीमत 800, 900 या 1000 रुपये तक बैठती है। यदि उस पर बेहतर गुणवत्ता वाला फैंसी खोल चढ़ा हो, तो उसका दाम और अधिक बढ़ जाता है। यही वजह है कि पुराने गद्दे को फेंकने के बजाय मात्र 50 रुपये प्रति किलो पर रीसाइकिल कराना एक किफायती और समझदारी भरा फैसला साबित होता है। इसका आप पर असर पुराने गद्दे को कबाड़ में फेंकने के बजाय दोबारा धुनवाने और सिलवाने से घर के बजट में सीधी बचत होती है। • सीधी बचत: नया गद्दा खरीदने पर जहां 800 से 1000 रुपये या उससे अधिक खर्च होते हैं, वहीं पुराने गद्दे को रीसाइकिल कराने में मात्र 200 से 400 रुपये लगते हैं। इससे प्रति गद्दा कम से कम 500 से 600 रुपये की सीधी बचत होती है। • समय की बचत: मशीन द्वारा रूई की धुनाई में केवल 15 से 20 मिनट का समय लगता है। इसका मतलब है कि बिना लंबा इंतजार किए उसी दिन गद्दा दोबारा तैयार होकर बिछाने योग्य बन जाता है। • डोरस्टेप सुविधा: कारीगर पुराने गद्दे को घर से ले जाने और तैयार करके वापस पहुंचाने की सुविधा भी देते हैं। उपभोक्ताओं को भारी गद्दे ढोने की मशक्कत नहीं करनी पड़ती। • कस्टमाइज्ड वजन: उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार 6 किलो के सिंगल गद्दे से लेकर 50 किलो तक के भारी गद्दे तैयार करवा सकते हैं। इससे जरूरत के मुताबिक गद्दे की मोटाई और वजन तय करने की पूरी आजादी मिलती है। ऐसा क्यों हुआ नियमित रूप से लेटने और बैठने के कारण गद्दों की आंतरिक संरचना समय के साथ खराब हो जाती है, जिससे वे उपयोग के लायक नहीं रह जाते। • रूई का संपीड़न: लगातार शरीर का दबाव पड़ने से अंदर भरी रूई आपस में चिपककर सख्त हो जाती है और उसमें मौजूद हवा निकल जाती है। इसके चलते गद्दे का लचीलापन और फूलापन खत्म होकर वह सख्त हो जाता है। • कपड़े की घिसावट: लंबे इस्तेमाल और खिंचाव के कारण गद्दे का बाहरी खोल कमजोर होकर कई जगह से फट जाता है। खोल फटने से अंदर की रूई बाहर निकलने लगती है और धूल-मिट्टी के संपर्क में आती है। • धुनाई से समाधान: कार्डिंग मशीन के घूमने वाले ब्लेड रूई के सख्त रेशों को सुलझाकर हवा भर देते हैं, जिससे पुरानी रूई पुनः नई जैसी हल्की हो जाती है। इसके बाद नए या मरम्मत किए गए खोल में भरकर तगाई करने से गद्दा अपनी मूल स्थिति में लौट आता है। सवाल-जवाब 1. पुराने गद्दे को दोबारा नया जैसा कराने में कितना खर्च आता है? पुराने गद्दे की मरम्मत का खर्च लगभग 200 से 300 रुपये आता है, जबकि 8 किलो के गद्दे का कुल खर्च 400 रुपये तक बैठता है। 2. कारीगर गद्दे की मरम्मत के लिए प्रति किलो क्या दर लेते हैं? कारीगर 50 रुपये प्रति किलो की दर पर काम करते हैं, जिसमें धुनाई, भराई और तगाई तीनों शामिल हैं। 3. मशीन में पुरानी रूई की धुनाई में कितना समय लगता है? मशीन से एक गद्दे की पुरानी रूई की धुनाई करने में महज 15 से 20 मिनट का समय लगता है। 4. बाजार में नया गद्दा खरीदने पर कितने पैसे खर्च होते हैं? बाजार में नया गद्दा अमूमन 800, 900 या 1000 रुपये में मिलता है, और बढ़िया खोल होने पर दाम और बढ़ जाते हैं। 5. क्या घर पर भी गद्दे की रूई को ठीक किया जा सकता है? हां, गद्दे का खोल खोलकर पूरी रूई बाहर निकाली जा सकती है और हाथों से अलग-अलग सुलझाकर उसे दोबारा भरा जा सकता है। 6. कारीगर कितने वजन तक के गद्दे तैयार करते हैं? कारीगर 6 किलो से लेकर 30 किलो, 40 किलो और 50 किलो तक के डबल बेड गद्दे तैयार करते हैं। https://trendkia.com/lifestyle/dabe-aura-phate-purane-gadde-ko-phenkane-ke-bajaya-aise-karaen-risaikila-200-se-300-rupaye-men-lautega-naya-jaisa-arama-54953 TrendKia — Har trend, sabse pehle.